या आपने कभी सोचा है कि भरी दोपहरी में अचानक ऐसा भयानक अंधेरा छा जाए कि अपनी ही उंगलियां देखना नामुमकिन हो जाए? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि हमारे सनातन इतिहास की वो रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना है जब महिषासुर के वध से ठीक पहले पूरे ब्रह्मांड की सांसें थम गई थीं।
ब्रह्मा जी के वरदान के अहंकार में जब महिषासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाया, तब समस्त देवताओं के तेज से साक्षात मां आदिशक्ति दुर्गा प्रकट हुईं। जब मां के दस हाथों ने भगवान शिव का त्रिशूल, विष्णु जी का सुदर्शन चक्र और देवराज इंद्र का वज्र एक साथ धारण किया, तो निकली उस प्रचंड ऊर्जा के सामने खुद सूर्य का तेज फीका पड़ गया!
ऋग्वेद और दुर्गा सप्तशती में वर्णित महिषासुर मर्दिनी के इस अलौकिक और रहस्यमयी प्रसंग को अंत तक देखें।
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अगर आपको मां भगवती की असीम शक्ति पर अटूट विश्वास है, तो कमेंट बॉक्स में 'जय मां दुर्गा' जरूर लिखें! 🚩
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