00:00द्रापदी के पांच पती यह कैसे संभव था? क्या यह विवाह का नियम था या कोई अद्रिश्य शक्ति?
00:07पांडवों ने अपनी मा कुंती के कहने पर द्रापदी को पांचों भाईयों में बाटा.
00:12भगवान श्री कृष्ण की आग्या थी कि एक समय में एक ही पांडव द्रापदी के साथ रहेंगे. अन्य पांडव के
00:19कक्ष में प्रवेश करने पर एक वर्ष का वनवास भोगना पड़ता था. युधिष्ठिर ने इसी नियम का पालन करते हुए
00:26अपना एक वर्ष का वनवा
00:32द्रापदी का प्रतेक पती के साथ एक पुत्र हुआ जो उनके तेज का अंश थे. यह विवाह एक दिव्य योजना
00:39थी जो भविश्य के युध्ध और धर्म की स्थापना के लिए थी. द्रापदी के पांच पतियों के कारण ही पांडव
00:46पांच भाई के रूप में जाने �
00:48यह विवाह प्राचीन भारत की सामाजिक और आध्यात्मिक मान्यताओं को चुनोती देता है. द्रापदी को स्वयमवर में अर्जुन ने जीता
00:56पर कुंती के वाक्य ने सब बदल दिया. द्रापदी के इस अनोखे विवाह के ऐसे और अनसुने रहस्य जानने के
01:03लिए ला�
01:04और फालो करें.