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महाभारत के महाप्रयाण और पांडवों के स्वर्गारोहण के समय युधिष्ठिर के रथ का जमीन से कुछ इंच ऊपर हवा में तैरने का रहस्य जानिए। देखिए कैसे उनके सत्य और धर्म के प्रभाव से यह चमत्कार हुआ। #Mahabharat #Yudhishtir #SanatanDharm #HinduMythology #Shorts
Transcript
00:01ुदिश्थिर के रत के जमीन से हवा में तैरने का खौफनाक सक्ष।
00:04ुरुक्षेत्र के भीशन युद्ध के बाद, जब पांडवों ने महाप्रयान की ओर कदम बढ़ाया,
00:10अब धर्मराज युदिश्थिर का दिव्यरत किसी भी साधारन रत की तरह नहीं चल रहा था,
00:15इस रत के चारों पहिये जमीन को छूने के बजाए हवा में तैर रहे थे,
00:19रिशियों और देवताओं ने जब यह चमतकार देखा,
00:22तो उनके मन में भी प्रलय जैसा कौतुहल मच गया,
00:25आखिर क्या वजह थी कि इस धर्ती पर चलने वाला रत आकाश में तैर रहा था,
00:30शास्त्रों के अनुसार यह चमतकार युदिश्थिर के अटूट सत्य और धर्म के पालन का परिनाम था,
00:36युदिश्थिर ने जीवन में कभी जूट नहीं बोला था,
00:40यहां तक कि उनका रत भी प्रित्वी के मोह से मुक्त था,
00:43लेकिन जैसे ही उनके मन में एक पल का अहंकार आया,
00:47रत जमीन पर आगिरा,
00:48धर्म और सत्य के ऐसे अनसुने रहसियों को जानने के लिए अभी लाइक और फॉलो करें,
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