00:00च्या आप जानते हैं मत्स्यगंधा के सत्यवती बनने का वह है रहस्य। जिसने महा भारत की पूरी धारा बदल दी।
00:06यमुना नदी की लहरों के बीच पलने वाली उस कन्या के शरीर से हमेशा मचली की दुरगंध आती थी।
00:13एक दिन उस रहस्यमय नौका में सवार हुए महान रिशी पराशर जिनकी योग शक्ती ने सब बदल दिया।
00:19रिशी पराशर ने अपनी दिव्यद रिष्टी से पहचान लिया कि यह साधारन कन्या नहीं, बलकि भविश्य की महारानी है।
00:27तन्या की विंती पर महर्शी ने अपनी योग माया से यमुना के बीचों बीच एक अद्भुत द्वीप का निर्मान किया।
00:33उस कोहरे से घिरे गुप द्वीप पर पहुँचते ही वातावर्ण में एक अद्भुत और अलोकिक चमतकार घटित हुआ।
00:40महर्शी पराशर ने अपनी योग शक्ती से उस द्वीप पर ऐसा कोहरा फैलाया कि सूर्य की किरने भी छिप गई।
00:47उस चमतकारिक मिलन के बाद महर्शी ने मत्स्य गंधा को दिया ऐसा वर्दान जो किसी ने नहीं सोचा था।
00:53मचली की दुरगंध हमेशा के लिए गायब हो गई और वह बन गई योजन गंधा यानी सत्यवती जिसकी खुश्बू दूर
01:01तक महक्ती थी।
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