जैसलमेर. तेज गर्मी और उमस के बीच पसीने से तरबतर चेहरे। पैरों की त्वचा जगह-जगह छिल चुकी है। कई पैरों में छाले हैं। चलने पर दर्द होता है, फिर भी कदम थमते नहीं। कोई धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है तो कोई बाबा का जयकारा लगाते हुए अपने साथियों से आगे निकल रहा है। रास्ते में कोई पूछता है—‘कैसे हो भाई?’ जवाब मिलता है—‘बाबा बुला रहे हैं, पहुंच ही जाएंगे।’
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