00:00हाथों में हथियार, कंदों पर बंदूख और जंगलों में गुजरती जिन्दगी
00:04लेकिन आज हम आपको दिखा रहे हैं एक ऐसी तस्वीर जो सायद आपने पहले कभी नहीं देखी होगी
00:11यहाँ बंदूख नहीं है, हिंसा नहीं है, बलकि है जिन्दगी को नए सीरे से सुरू करने की कोशिस
00:18यह तस्वीरे हजारी बाद नकसल ओपन जेल की है
00:22और ETV भारत पहली बार आपों यहां रहा रहे हैं पुर्व नकसलियों की सिर्फ तस्वीरे ही नहीं बलकि उनका वीडियो
00:28भी दिखा रहा है
00:29वीडियो में कभी हत्यार थामने वाले हाथ, आज सुई धागा थामे नजर आ रहे हैं
00:35पूर्व महिला नकसली सिलाई कड़ाई सीख रहे हैं तो वहीं पूर्व पूरुस नकसली भी अलग-अलग हुनर सीख कर अपने
00:42भविस को समारने की कोशिश कर रहे हैं
00:44कभी जंगल की जिंदगी का हिस्सा रहे, ये लोग अब किताबों से लेकर रोजगार तक के हुनर सीख रहे हैं
00:50कोई सिलाई कटाई सीख रहा है, कोई बुनाई, तो कोई मुर्गी पालन और खेती किसानी का परसिक्षन ले रहा है
00:56यानि जिस हाथ ने कभी हथियार उठाया था, उसी हाथ को अब रोजगार का साधन बनाने की कोशिश की जा
01:03रही है
01:27हजारी बात के इस ओपेंजेल में फिलहाल एक सोचोबिस आत्म समर्पित नकसली रह रहे हैं
01:31इनमें 96 पुरुस और 28 महिलाएं हैं, इनके साथ 9 बच्चे भी हैं, जिनमें 4 लड़के और 5 लड़किया हैं
01:39यहां 11 पती-पतनी के जोड़े भी रह रहे हैं, यानि बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति की जिन्दगी में नहीं, बलकि
01:46पूरे परिवार की जिन्दगी में लाने की कोशिश है
01:49नकसलवात छोड़कर मुख्यधारा में लोटना सिर्फ हतियार छोड़ देने भर की कहानी नहीं है, असली चुनोती उसके बाद सुरू होती
01:56है, परिवार चुलाना, रोजगार हासिल करना और समाज में दोबारा समाने जिन्दगी जीना, इसलिए सरकार की पनर्वास निती
02:04के तहत इन लोगों को रोजगार का परशिक्षन दिया जा रहा है, मकसद साफ है, जब ये लोग ओपें जिल
02:11से बाहर निकले, तो उनके पास सिर्फ अतीत की कहानी नहीं हो, बलकि भविस बनाने का हुनर भी हो, अब
02:18कोशिस यह भी है कि इन नए उत्वादों को बजार मिले
02:21ताकि परशिक्षन सिर्फ परशिक्षन ही नहीं रह जाए, बलकि उससे रोजगार और आमदनी का रास्ता भी खुले, जेल परशासन की
02:29मैनफेक्षिन यूनिट और बिकरी विवस्ता को इस पनरवास्त से जोड़ने की त्यारी है, चुकि अभी तुरन तो ये जेल से
02:48निकल
02:48होता है, शिलाई कराई भी हम लोग जेल में भी करा सकते हैं, जितने भी सेंट्रल जेल हैं, सेंट्रल जेल
02:57करावा कुल मेरे नौ जेल हैं जहां पर मेरी मनिफेक्षिन भी नीट है, पांचों सेंट्रल जेल के अलावा भी दनवाज,
03:07तक फुल नौ जेल में सेंट्रल में मनि
03:36The most important thing here is that there is no change here, but there is no change here.
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