00:00महादेव बेठे थे तो सब आगई उनके पास देवता लोग यह देवता आप अपर से बहुत जब डानाओ नहीं मिलते
00:07तो यह आपर समी लड़ जाते हैं तो यह सारे की सारे अपने-पने वाहन ले करेके आ गए
00:13बोलते हैं, हमारा फैसला नहीं हो पा रहा है, हम में से किसका वहान सबसे बढ़िया है
00:17महादे उभी चौके होंगे, बोले होंगे कौन इनका निप्टारा करे
00:20बोले काम करो, जाओ पूरी प्रत्री का चक्कर लगा आओ, जिसका वहान सबसे बढ़ी आओगा, सबसे पहले लौट आएगा
00:27ठीक, सारे निकल गए, उसमें हमारे गणेश जी भी आये हुए थे, उनके पास चुखा
00:32बोले ये पिताजी ने मेरे ही खिलाफ, ये किस तरह के प्रतियोगता रख दी, ये तो कोई बड़े हाथी पर
00:40है, कोई दुरुत पक्षी पर है, कोई किसी पर है, सबके पास अपने अपने जबरदस्त है, मेरे पास चुखा
00:47तो मैं तो किसी गिंती में ही नहीं आऊँगा
00:51तो सब निकल गए
00:52जब सब निकल गए तो गणेश जी बोले सोचते
00:55तो विनायक को बुद्धि का स्वामी बोलते है
00:57बोले कुछ भी करो सबसे पहले बोध होना चाहिए
01:00तो कर्म से पहले क्या होना चाहिए
01:01ज्ञान, चूब कि कर्म से पहले ज्ञान होना चाही, इसलिए किसी की भी पूझा करो, उससे पहले गणेश पूझान होता
01:08है, वो इसी बात का संकेत है, कुछ भी और कर लो उससे पहले बोध तो होना चाहीं है, बिना
01:12बोध के कुछ करोगे, तो वो पागलपनी होगा, सबसे �
01:15तो जब सब निकल गए अपना अपना लेकर के तो बोले मैं बताता हूं उन्होंने शिव जी कही चक्कर मार
01:20दिया वहीं अपना मस्त बैठ गए लड़ू खाने लगे तो यह सब हाफते हूं उते लोटे थोड़ी देर में सब
01:25दियोता लोग अपना अपना परिक्रमा करके तो �
01:27सब आगे तो देखते हैं पहली बैठें वयरते तुम क्या किया गर रों जो मेरा हो गया मर देव ने
01:32पूचा कैसे तुम्हारा ऑले आप ही है आपकी परकरमा दिन पूरा ब्रहमान तो आप की कर ली तो सब जगे
01:38की हो गई और फिर महाँदेव ने फैसला दिया
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