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भारत और चीन के बीच की एलएसी (LAC) पर आखिरकार क्या चल रहा है, इसका असली सच अब सामने आ चुका है जिसे देश के वीर वायुसेना और थलसेना के अधिकारियों ने खुद बयां किया है। इस वीडियो में हम इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे की गहराई में उतरेंगे और देखेंगे कि कैसे हमारे सैनिक कठोर मौसम और दुष्कर परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। पंद्रह हजार से अट्ठारह हजार फीट की ऊंचाई पर बने अनचाटर्ड पोस्ट्स और हाई-एल्टीट्यूड वॉर जोन की कठोर वास्तविकताओं को समझाया गया है जहां ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड के बावजूद जवानों का हौसला बुलंद रहता है। चीनी पीएलए की हर एक हरकत पर भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना किस तरह से चौबीस घंटे अपनी पैनी नजर रखती है, इसका एक रोमांचक खुलासा किया गया है। बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर में हो रहे तेजी से विकास, जैसे नई सड़कें, सुरंगें और एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स, ने हमारी रक्षात्मक क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। इस कहानी में हम उन अनकही कहानियों और रणनीतिक रणनीतियों पर भी बात करेंगे जो आम तौर पर दुनिया की नजरों से छिपी रहती हैं। ये अनुभव बताते हैं कि कैसे हमारे अधिकारियों और जवानों की चतुराई और दिलेरी की वजह से भारत हमेशा रणनीतिक बढ़त में रहता है। आखिरकार, यह पूरी कहानी सिर्फ एक सीमा विवाद की नहीं है, बल्कि उन बहादुर दिलों की गाथा है जो हर पल देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाज़ी लगाते हैं।

What actually happens along the heavily contested India-China Line of Control has long remained shrouded in mystery, but seasoned Air Force and Army officers are now lifting the veil on the reality. This deep-dive exploration takes you straight to the frontlines of the high-altitude terrain where Indian soldiers stand guard at altitudes exceeding 15,000 feet amidst freezing temperatures and harsh oxygen-depleted conditions. We examine the round-the-clock surveillance and tactical readiness employed by the Indian military to counter Chinese PLA movements in real-time. The rapid modernization and infrastructure push—featuring strategic tunnels, all-weather roads, and advanced landing grounds—has fundamentally altered the tactical balance along the frontier. Military commanders share rare insights into how joint operations between the Army and Air Force ensure complete dominance and quick response capabilities in remote valleys. Beyond the geopolitical tensions, this narrative highlights the extraordinary human resilience, mental fortitude, and strategic brilliance required to defend one of the world's most challenging borders. Tune in to understand the true magnitude of India's defense preparedness and the unwavering commitment of its armed forces protecting the motherland.

#IndiaChinaBorder #IndianArmy #IndianAirForce #LAC #BorderSecurity #MilitaryStrategy #IndianDefense #Geopolitics

~HT.318~ED.106~PR.512~GR.506~VG.HM~

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00:00अकर्ष देखो आप भारत और चीन SEO में एक साथ मिल चुके हैं भारत और चीन ब्रिक्स के दो मदबूत
00:09स्थम्भ हैं तो एक बहुत शांदार पिक्चर है स्लिपिंग विद एनिमी
00:17हिंदी में शायद अनुवाद होगा कि मरता क्या ना करता हमें चीन की दरकार है और चीन को हमेरी दरकार
00:25है संदे ये हमेशा रहता है आगर देखो भाई भाई के बीच में संदे होता है पाप बेटे के बीच
00:34में तनाव रहता है लेकिन उसके बावजूद दुनिया आगे बढ
00:40भारत और चीन के बीच में जो वहार है वो इस बात पर ज्यादा निर्बर होना चाहिए कि दोनों देश
00:47किस तरह से एक दूसरे के साथ चल सकते हैं, एक दूसरे की ज्यादा मदद कर सकते हैं, बनिस्बत की
00:54छोटे-छोटे माइनर इरिटेंट्स, छोटी-छोटी परेशानिया
00:58वो हमेशा रहेगी, नाख पे एक मक्ही हमेशा मिलेगी, लेकिन उसका मतलब नहीं है कि आप नाख कोई काटते हैं,
01:06अब LAC की आकश आपने बात की है, ठीक है, चीन का शेतरफर लाखो वर किलो मेटर है, वो वाकरी
01:15500 मीटर या 1.5 किलो मीटर के बारे में चिंता नहीं करते ह
01:20हूँ, होता ये है क्योंकि जनरल माथूर भी यहां पर है, मैं भी हूँ, होता क्या है कि जो नक्षा
01:28है, नक्षे में जब आप एक लाइन ड्रॉ करते हैं, तो नेविकी मोटाई में ये 500 मीटर, 700 मीटर, 1
01:36.92 मीटर इधर उधर हो जाता है, जब आप एक नक्षे का प्रिंट �
01:41लेते हो, तो वो प्रिंट जो हर रिज लाइन पर तो आप टर्न नहीं कर सकते हैं, रिज लाइन का
01:46मतलब पर कॉंटूर लाइन होती ना, पहाड उधर गया, पहार इधर आए, अब उसको आप ऐसे गुमा गुमा के तो
01:51नहीं ड्रॉक कर सकते हैं, तो वो जब चलते हैं, स्�
02:08उसमें तो अगर मैं देखना चाहूं कई बार तो इधर उधर दो तीन किलोमेटर का फरक पड़ जाता है
02:18तो इस वज़ा से जमीन में जो गुत्तम गुत्ता हुई थी जल्ब अब मैं इस शब्का इस्निमाल करना चाहता हूँ
02:26अब हमने बहुत ज़्यादा रिसोर्सेज और एसोपीज और प्रोटोकॉल बना लिये हैं
02:34यह जमीन में गुत्तम गुत्ता नाव देखिए वो एक किलोमेटर उदर है हम लोग एक किलोमेटर उदर हैं
02:40अब एक मेकनिजम होता है आप कमांडर को पीछे फोन करते हैं कमांडर दिली तक फोन कर सकता है हॉट
02:47लाइंज हैं
02:48लोकल कोर कमांडर क्रू कमांडर टेलीफोन उठाया बात की यार अपने जो शीले अब जनरल मातूर यहां पर हैं
02:55हमारे पाल जाबाज कैप्टेन और मेजर और करनल्स हैं जो देश के लिए जान देना चाहते हैं
03:01जो अब बात ऐसे हो गई है कि वो गुत्तम गुत्ता वाली नौबत भविशे में ना आए
03:09अब मैं करनल बाबू का पुरा सम्मान करता हूँ उनके साथ जो हमारे 22 वहाधूर जवान शहूदी हों उनका
03:17पूरा सम्मान करता हूँ लेकिन भविशे में यहां निश्चित किया जाएगागा प्रोसीजर्स एवाल्व कर लिए गए
03:25जैसे कि जब हमारा पेट्रोल जाता है तो हम पहले से ही उनको बता देते हैं उनका पेट्रोल उसक्ष्टी के
03:32लिए हुआ नहीं आता
03:34इस जरह से जब उनकी पेट्रोल इस तरफ विवादित एरियास की बाग कर रहा हूं
03:38जहां पर हम लोग 3-2⁄किलोमेट्र ऊधर तर हैं वह भी ड्हाई किलोमेटर इस तफ क्लेम कर रहे हैं
03:44तो एसी जगा में जब उनकी पेट्रोल आती है तो पहले से हमें बता देते हैं उस वक्त हाम हमारे
03:50पेट्रोल को भेजते
03:51तो बविश में गुत्तं गुत्ता जमीन पर ना हो एक और चीज़ बताता हूँ देखो बड़ा ही सेंसिटिव मुद्दा है
04:02मैं पता नहीं अब कैसे इसको दुनिया में कई देशों ने इसलिए बॉर्डर तक अपनी फॉज को तैनात नहीं करते
04:11हैं यह ध्यान से सुनने की ब
04:21ना चालू हो जाए या युद्ध जैसी स्तिती ना चालू हो जाए बॉर्डर पर सिर्फ एक पोलिस जैसी और्गिनाइजेशन तैनात
04:29होती है ठीक है और यूरोप में कुछ देश ऐसे हैं जहां पर क्योंकि बॉर्डर पर तनाव था या तनाव
04:40होने की संभावना है बॉर्
04:52कई देशों में अंडर्स्टैंडिंग यूरोपियन देशों में बॉर्डर को लेकर जहां जहां confusion है जैसे यूग तूट किया मैं तीन
05:02चार टूपड़े उनके बॉर्डर पर प्राइवेट सीकूरिटी गार्ड बॉर्डर मैनेजमेंट करते हैं क्योंकि उन्होंने सीख लि
05:22अग्रेसिव होना किसी भी आर्मी का वेवार होता है आर्मी को ट्रीन किया जाता है कि जब आप दुश्मन के
05:28सामने हो तो आपको अपने नतुनेफ लाने हैं आपको को बड़ा करना है दुश्मन को डरा देना है यह आर्मी
05:34की ट्रीनिंग होती है यूरोप में तो उन्होंने
05:37प्राइवेट सिक्रूटी गार्ड से बार्टर मेनेजमेंट कर रहे हैं
05:41उनकी सरकारी पुलिस भी सामने नहीं आती है
05:43तो इस तरह की एक वैवस्ता अगले पचास, सौ या दोसो साल में हमें लाना पड़ेगा
05:49जी आकर्श
05:50सर बहुत अच्छे तरीके से समझाया आपने और जो इंसाइट जो बताए
05:54ये काफी इन्फॉर्मेटिव रहने वाले हैं
05:56मलेका जी आपके कमेंज बारत चाइना के इन बदलते हुए रिस्तों पे
06:00और क्विक्ली फिर हम मातुर साब के पास जाएंगा
06:04बिल्कुल आकर्श जी देखे आइंग दिवनात सर ने पूरा कवर ही कर दिया है
06:09तो जस्ट टू सम इट आप
06:11एक चीज इसमें देखने के लिए होगे आकर्श जी कि
06:15ट्रस्ट और ट्रेड डेफिसिट दोनो है हमारे चाइना के साथ आज के टाइम में
06:20तो उन दोनों को कैसे हम फिल करेंगे
06:23अफ़ोस ब्रिक्स में आपने जैसे बताया कि 45 मिनिट्स की मीटिंग वही उसके बाद रिपोर्ट साई कि वो ठक कही
06:29थे
06:29जिंग पिंग पूरे उससे और उन्होंने डिनर गाला अटाइम नहीं किया
06:34बट जब उन्होंने जो पिच्चर्ज जो तस्वीरे भाहर निकलके आई हैं
06:38चीन को ये समझ में कही न कही आ चुका है कि एलेफिंट और ड्रैगन का टैंगो उसके लिए बहुत
06:45जादा जरूरी है
06:47कही न कही इन दोनों एकॉनमीज का साथ रहना जरूरी है
06:51चाहे वो किसी भी छेत्र में हो आज के टाइम में हम 150 बिलियन डॉलर से उपर का ट्रेड करते
06:57हैं
06:57चीन और इंडिया हमारा रिलेशनशिप एक अजीब रिलेशनशिप है क्योंकि कहीं पर हम कॉपरेट करते हुए दिखाई देते हैं
07:08तो कहीं पर कॉलाइड करते हुए दिखाई देते हैं
07:11थ्री सीज हमारे अलड़े चाइना के साथ मौजूद है
07:14बट इस ब्रिक सम्मेलन में कहीं न कहीं हमने देखा कि
07:17कॉपरेशन इस वाट वी विल फोकस ओन
07:19लास्ट मैने अगर आपको लास्ट मन्त यादो 26 अगस्त को
07:23तो हमारे नसे डोबाल साब गए थे
07:25स्पेशल रेप्रेजेंटेटेटिर्स की मीटिंग में
07:29उसके बाद क्या हुआ
07:30उसके बाद फॉलो अपने यह वाँ बॉर्डर के डिसकस्शन वे
07:33बहुत ओपन डिसकस्शन वे
07:35फॉलोइंग वीक में हुआ कि
07:38जो वाचा बॉर्डर है रुनाचल में
07:40वहाँ पर पहली बार
07:42आर्मी कमांडर्स की मीटिंग होती है
07:43चीन और इंडिया दोनों के आर्मी कमांडर्स
07:46वहाँ पर मौजूद होते हैं
07:47बाउंडरी इशूज हम लोग कही न कहीं
07:50सेटल करना चाते तो
07:51ट्रस्ट इशूज वहाँ से ट्रस्ट डेफिसिट है
07:54हलकी हलकी बीबी स्टेप से
07:55बिल्डप होते वे नजर आ रहा है
07:57कही न कहीं आकर जी और आगे
07:59चीन को भी यह पता है कि कहीं न कहीं
08:02भारत इकलोता ऐसा देश है
08:04जो हर एक कैंप में मौझूद है
08:06चाहे वो S.E.O. में हो
08:08चाहे वो S.A.R.T. में हो
08:09Q.O.D. में हो
08:10BRICS में हो G7 में हो
08:12कहीं न कहीं भारत की
08:14प्रेजन्स बहुत इंपोर्टन्ट है और यह
08:16चीन एकनॉलेज कर चुपका है
08:17कि भारत अमेरिका इस्रेल के सांथ
08:19भी क्लोज है तो रश्या इरान के सांथ
08:21भी क्लोज है और यह सिर्फ
08:23एक उनीकनेस सिर्फ भारत के पास है
08:25तो चाहे न कहीं ड्राइगन अब हमारा दोस्त बनना
08:29चाहता है बट फिर से वही बात आ जाती है
08:31कर जी देखे बहुत जादा आख के पास जाओ
08:34तो जल भी जाओगे दूर जाओ तो ठंड भी लगती है
08:38तो कहीं न कहीं हमें वो एक सेफ बिस्टंस
08:40मेंटेन करते हुए चलना है
08:42चाहिना के साथ
08:43जी मलेगा जी बहुत अच्छी बात कहीं आपने की
08:45ट्रस्ट डेफिसिट भी है और ट्रेट डेफिसिट भी है
08:48अब ऐसे में बस आखरी कमेंट्स लेना चाहूंगा
08:50जनरल मातुर से
08:51सर क्या कहा अब हमारे
08:54ब्रिक्स में जो हुआ
08:55ग्लोबल डिप्लोमेसी में भारत का दबदबा
08:58कितना मनवाया जाएगा भारत का लोगा कितना मनवाया जाएगा
09:01और क्या अब चाइना हम से थोड़ा
09:03इस चाइना फॉलिंग सेकिंड टू अस नाओ
09:08आकाश जो भारत की सबसे बड़ी ताकत है
09:11और शायद लबदी भी उसको कह सकते हैं
09:14यही है कि भारत सब को समानता से ट्रीट करता है
09:19जी
09:20अमेरिका की जो सबसे बड़ी गलती भूल हुई थी
09:24अमेरिका की डिक्शनरी में एकॉल नाम का शब्द नहीं है
09:29वो साउथ अफरिका के प्रेसिडंट को नौ घंटे बाहर
09:33अपने तरवाजे पर बैठा करके इंतजार करवाते हैं
09:36वो ग्रीन लेंड को कहते हैं आँ खा जाएंगे आपको
09:38जो कनेड़ा जो है वो हमारा एक्यामन माराज है
09:42कहने का अर्थ यह है कि जब आप इस बात पर अपनी चीज़ को अधारित कर रहे हैं
09:48सब बराबर हैं सब की आवाज बराबर हैं सब की रिक्वार्मेंट्स बराबर हैं
09:53तो मेरा यह मानना है कि चीन सामारा सेकंड होगया या हम थर्ड होगया इस बात यह बात भारत के
10:00सिस्टम में नहीं है
10:01पहली बात दूसरी बात ये है कि आप देखिए द्विश्टे खराब हैं इसमें कोई संदे नहीं लेकिन आप L.A
10:12.C. पर स्टेबलिटी को यकीन करवा सकते हैं
10:15स्टेबल करिए आप लाइन अफ एक्शल कंट्रोल को जो करनल देबनाथ बता रहे थे
10:22वो बात मैंने आँखों से मैं रहे चुका हूँ
10:25फिंगर फॉर फिंगर फाइग ये जो बात हो रही है उन्हां पर मैं फिजिकली रहा हूँ पोस्टिंग
10:31तो इसमें क्या है कि जो बाउंडरी जो लाइन अफ एक्शल कंट्रोल है वो अधिकतर जगाए स्टेबल है
10:38कुछ जगाओं पर ये हाल है कि जो एरियाज अफ डिफरिंग परसेप्शन्स उनको कहते है एडी पी
10:43वो कहते हैं कि हमारा फिंगर टू तक अधिकार है या कहीं तक है
10:49हम कहते हैं हमारा फ़लानी जगह तक है
10:51तो पहले उसका एडी पीस का ये सिस्टम था कि आप अपनी पैट्रोल वहां तक ले जाए जो आपका अक्लेमड
10:56एरिया है
10:56वो उनकी पैट्रोल यहां तक लाएंगे और जैसे अब उस चीज़ को अगर आप स्टेबल कर देंगे
11:02तो फिर आप इस चीज़ को आगे बढ़ करके और चीज़ों पर डिसकेशन कर सकते हैं
11:09यह मेरा माणना है आप देखेंगे कि चीन के विचार में बददलाव आया है
11:15अब अगर हम उसको ये कहके कि चीन धोके बाद है चालाक है बैमान है ये है वो है उसको
11:20हम आगे बढ़ाएंगे ही नहीं तो फिर शुरुआत ही नहीं होगी
11:24मेरा कहने का आरती है कि भारत और चीन के संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यक्ता है
11:30लेकिन उसी समय आपको अपने राष्ट्रिय हित अपने सुरक्षा हित और अपने लाइन ओफ एक्च crown में claims के बारे
11:41में कोई compromise नहीं करना है
11:43तो आप अपनी position को line of actual control पर पना करके रखिए और बाकी चीजों में आगे पढ़िए एक
11:51last line में बोलना चाहता हूँ
11:53आकाश वो बहुत जरूरी है कि एशिया के दो बड़े giant चीन और भारत डेड़ अरब population ये जो दो
12:05giant अगर इकटे होंगे
12:06तब कहीं जाकर के असल मेसेज जाएगा डोनल्ड टरंप के गॉल्फ पॉर्स में और यही चीज होके उबर करके आ
12:14रही है
12:14और चीन भी इस बात को realize कर रहा है और ये बात तभी सफल हो पाईगी जिसका बात को
12:19मैं कह रहा हूँ
12:20अगर आप समानता के साथ बराबरी के साथ एक दूसरे के साथ चलेंगे
12:24अगर चीन कहेगा मैं 30.000.000 की अकॉनमी माप तो फिर मुश्किल हो जाएगी
12:29तो मेरा मानना है वी विल हैव टू गिव इट अगो इसको दीजी उन्होंने कितना कॉम्प्राइब मैं बता रहा हूँ
12:37भारत का United Nations में representation ये मानना पहल गाओं को इसके बीच में लाना
12:44Line of Active Control के बारे में बात करना
12:4620 मिनिट की scheduled मीटिंग को 45 मिनिट तक चलते रहने देना
12:51ये तमाम बहुत positive सकारात्मक संकेत हैं आकाश
12:56और इन सकारात्मक संकीतों को एक beginning के तरह हमें इस्तेमाल करना है
13:01लेकिन फिर ये कहुँगा कि अपनी सुरक्षा की जो requirements हैं उन पे बिना compromise किये हुए
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