00:10गाजियबाद में एक ऐसा घर है जहां दाखिल होती ही वातवरण कुछ अलग महसूस होता है।
00:57बलकी अलग-अलग प्रजातियों के हजारों पौधे मौजूद है।
01:00प्रयोग और पौधों की फ्रती लगाव चोड़ा हुआ है।
01:31डौक्टर अखिलेश बताते हैं कि पर्यावरण और पेड़ पौधों के प्रती उनका लगाव आज का नहीं है।
01:38इसकी शुरुआत करीब पाच दशक पहले हुई।
01:411975 में जब उनकी पोस्टिंग मुरादाबाद में थी तब उन्हें पौधों और पर्यावरण को करीब से समझने का अफसर मिला
01:49था।
01:49मुरादाबाद से भीमताल जाना उस समय के लिए एक नियमित गतिविधी बन गया था।
01:55भीमताल में डॉक्टर अखिलेश त्यागी की ट्यूशन कल्चर लाब थी।
02:01वो शनिवार और अविवार को भीमताल जाते और पोधों से जुड़ी तकनीक को समझते थे।
02:07मैंने नाइटी नाइटी में आ गया था तो आज मुझको यहां पर करीब 46 यर हो गए हैं काम पढ़ते
02:15हुए और बहरे तो यह सीमित था हमारी शत्पर ही शत्पर बागवानी के नाम से मेरा टीवी चैनल भी आदा
02:21था दोजार के आसपास में तो महीं से मैंने काम शूलू कर
02:36हैं लाइट भी कंट्रोल है और एयर भी कंट्रोल है आपके पलिशन से मुक्त करता है सारे वातरमन को हमारे
02:43किसी एयर पीरिफायर की जरुरत नी है नॉर्मल ही हमारा एक्युआई जो सवासों से उपड़नी जाता अंदर ज़्यादा पलिटेड होता
02:51है
02:51साल 1980 में गाजयाबाद लोटने के बाद डॉक्टर अखिलेश ने अपने घर में पौधे लगाना शुरू किया
02:58शुरुआत छट से हुई थी धीरे धीरे पौधों की संख्या बढ़ती गई और हर्याली घर के दूसरे हिस्सों तक पहुचने
03:07लगी
03:07कुछ समय बाद घर का लगभग हर हिस्सा पौधों से जुड़ गया
03:12छट पर पौधों की देख भाल करते समय मौसम एक बड़ी चुनोती बनता था
03:18गर्मियों में तेज धूप और सर्दियों में ठंड के कारण पौधों के लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखना कई बार चुनोती
03:26हो जाता था
03:27डौक्टर अखिलेश का घर इस बात का उधारण है कि अगर पौधों को सजावटी वस्तू मानने की जगह उन्हें जीवन
03:35पर्यावरण का हिस्सा समझ कर उनकी जरूरत के हिसाब से देख भाल की जाए
03:40तो एक सामान्य घर को भी बोटैनिकल गार्डन के रूप में बदला जा सकता है
03:45खास बात ये है कि जो भी व्यक्ति डौक्टर अखिलेश के घर जाता है वो उपहार में पौधा जरूर भेट
03:52करते हैं
03:53ETV भारत के लिए शेहजाद आबित की रिपोर्ट
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