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BRICS Summit 2026: क्या Noida के MSME Exporters का खुलेगा किस्मत का ताला या फायदा सिर्फ Big Exporters को? भारत में आयोजित BRICS Summit 2026 से क्या वाकई नोएडा और देश के छोटे MSME कारोबारियों की किस्मत बदलने वाली है, या इसका असली मुनाफा सिर्फ देश के बड़े Exporters बटोर ले जाएंगे? देखिए इस खास रिपोर्ट में नोएडा के एक्सपोर्ट हब की पूरी ग्राउंड रियलिटी।

As the 18th BRICS Summit 2026 wraps up in New Delhi, local MSME exporters in Noida and major industrial hubs across North India are evaluating its impact. While the summit promises enhanced cross-border trade, local currency settlements, and supply chain integration among member nations, experts and small business owners debate whether the benefits will reach small-scale manufacturers or remain confined to India's top corporate exporters.

#BRICSSummit2026 #NoidaMSME #Exporters #OneindiaHindi

~HT.410~PR.250~ED.104~GR.506~VG.HM~

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00:00देखिए ब्रिक्स मेलन जो है, MSME सेक्टर कुछ शादा वो हमने तेखा रहे हैं
00:04डॉलर्स की बजाए आपका लेन देन अगर इसमें हो तो कुछ फरक देगा
00:07तो क्या सिस्टम बनता है अभी तक तो बहुत जल्दी बनना तो मुझे उमीद नहीं है
00:11आप कंपेर करें MSME और GST में, GST में तो बहुत लाब हुआ है
00:15तो MSME सेक्टर को इन पिछले कुछ बरसों में आप क्या देख पा रहे हैं कुछ इसमें है लाब
00:21लोग कहते हैं कि नोकरिया नहीं है हमें तो अबर करनी मिलते हैं तो काम करें
00:27चाइना के सीजिंग पिंग आ रहे हैं रूस के पुठिन आ रहे हैं और बहुत से देशों को लोग आ
00:32रहे हैं
00:33देखो वो तो मुझे लगता है कि मेंली वो डॉलर को अगेंस्ट एक ये मोर्चा है उससी के लिए मुलागाते
00:40हो दिए
00:40अमेरिका के बाद जो फानेंशल सुपर पावर चाहिए नहीं है देश में ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर के काफी चर्चा हो
00:48रही है आम लोहों को बहुत उमीद है उद्योक से जुड़े लोगों को
00:54अधर को बहुत उमीद है ऐसा कहा जा रहा है लेकिन हमें तब पता लगे जब हमें उस सेक्टर का
01:01कोई ब्यक्ति मिले और जानकार मिले हमारे साथ अनिल चौधरी जी हैं काफी सेनियर अभी पती हैं मेडिकल एकुप्मेंट्स का
01:13काम है एक्सपोर्ट भी रहा है आपका स्व
01:24MSME सेक्टर को जिसको भारत सरकार भी काफी पिछले कोछ सालों से कह रही है कि आप इसमें उसको उभरता
01:33देख रहे हैं उसको फाइदा होता देख रहे हैं देखिए ब्रिक्स मेलन जो है मेरेकल आट-दस साल तो हो
01:39गए मुझे एक्जेक डेट याद नहीं है कौन से संज में
01:43शुरूआ लेकिन काफी टाइम से सुन रहे हैं जे इन आट-दस सालों में तो हमने कोई इसके करण MSME
01:51सेक्टर को फाइदा हो हमने देखा नहीं है बिल्कुँ कोई फाइदा नहीं ब्रफन अभी एक बहुत बात हो रही है
01:58कि भारत की कोसिस है कि डॉलर पे निर्भरता कम की �
02:02है डॉलर का बिरोध नहीं कर रहा है भारत हाला कि रूस और चाइना हो सकता है कि सीधे मुकाबले
02:08को सोचते हो लेकिन भारत ब्रोध लेकिन भारत की जो उसने ऑप्सन रखा है वो डिश्टल करेंसी का बात करी
02:16है और लोकल करेंसी का जो है सेटलमेंट की बात की है तो यह कै
02:23कि अधीstar एना है कि इसरे जोड़न कि इसे हम डालब पर कर सकते हैं क्या इस्सेया प्लोग ओ और
02:37इंपोर्ट और एक्सपोर्ट में कोई लाब मिल सकता है डिपेंडेंसी तो जरूर कम हो जाएगी अगर हम डॉलर के सिवाग
02:45आप किसी भी चीज़ को देखे कर एक ही पर निरबर हैं तो उसके वाए अगर आप तीन चाहिसा हैं
02:53तो आपको कंपेटिशन में कुछ ने कुछ वा
03:06तो क्या यूआन और उसमें रुपे में हो जाएगा उसका आपस में मतलब सेटिलमेंट तो जुरूर फैदा होगा होगा कितना
03:15फैदा हो सकता है यह नहीं कह सकते हैं लेकिन एजी बहुत हो जाएगा अगर ऐसा होता है तो यह
03:22एक यह एक उमिद है मानलो रुपे से पेमें�
03:35जब होगा तो कैसे होगा यह तो लेकिन अगर आपको लगता है डिश्टर करेंसी से लें दिन हो तो फायदा
03:41हो सकता है एक चीज में देख रहा था मैंने काफी आंकड़े देखे सर तो भारत का जो ब्यापार घाटा
03:49है इन देशों से मतलब यह कहा जा रहा है कि जीटीपी क
04:02सिर्फ 28% है इन देशों के बीच में तो उनमें ब्यापार कम है पेख चाकरा तो मैं समझते हैं
04:20जादो आप ही एक्सपोर्ट करते हो मेडिकल इंस्टुमेंट्स का तमाम का एकुपमेंट का तो वो क्या इन देशों में होता
04:27है अमेरिका या इन ब्रिक्स के लावा है
04:30हमारा मेडिकल र्कुपमेंट जो है वो यौ एमेरिका रष्या इन देश ब्रिक्स इन देश समय हो गया है इसे टो
04:50है वो घृड्री का ये साउथ अफ्रीका का ओंशवय्ग को स्थी
05:09तो अगर इसमें हमारा डिजिटल करेंसी में होगा तो लाव होगा डॉलर्स के बजाए आपका लेंदेन अगर इसमें हो तो
05:14कुछ फरक बड़ेगा
05:15तो क्या सिस्टम बनता अभी तक तो बहुत जल्दी बनना तो मुझे उमीद नहीं है यहां पर आपस में जब
05:22लोगों की बात होती है तो इस ब्रिक्स सम्मेलन को देखे बो लोग आप से कुछ उत्साहप दिखाते हैं अपना
05:28या कोई हो रहा है कोई मतलब नहीं करें अभी ऐ
05:44कहां तक इनको सफलता मिलती है अभी तो वही नहीं खतम हो रहा है अभी तो अगर आप से समझूं
05:53कि आप जो मेडिकल एकुपमेंट हैं वो पिछले दस सालों में छे सालों में पास सालों में इनका बैपार मांग
06:03भारत के आपके बढ़ी है या क्या दिक्कते आई है या बह
06:11लेकिन अफ्रीका में वा रखास तो अपसे जो भी बड़ी है मैं दा की मोटी शॉट् अमेरिका भी है जैसे
06:19छाउट मेर्का की कंटीस हैे लेकिन यॉरोप में और डिव डॉलब्ट कंटी meni बड़ी में वहां अगर बड़ी हो और
06:29तो दवाया मोगेरा की मार्के बड़ी हो
06:38वोई एक्सपोर्ट करते हो और भी कुछ उसके अलावा यहां वैसे और क्या-क्या मेडिकल एकुमेंट्स लोग कर रहे हैं
06:45असपास और दूसरी वैपारी
06:56सब्सक्राइब करते हैं अगर थोड़ा सा मैं और एक सवाल पूछू आपसे केबल आपका स्वास्त भी मुझे पता लगा भी
07:08उतना ठीक नहीं तो एमसमी सेक्टर को इन पिछले कुछ बर्सों में आप क्या देख पा रहे हैं कुछ इसमें
07:17है
07:17अप है लाब या अभी अब संसाही की वाजए से यह एक सिस्ट नहीं वह लाप साही कि विज्शनां का
07:24यह क्या वाजाय ह। यह यह
07:51तो सरकार, मंत्री ये भी तो सब आपके ही हैं तो ये का उन पर दबाव या नियंतर नहीं है
07:56इनका।
07:58मुझे लगता नहीं है। फेल है। ब्यूरोक्रैसी सरकार से उपर ही है। पहले भी उपकर थी। पहले वो था मनमर्जी
08:07बहुत ज्यादा थी।
08:09अब थोड़ी से रिस्टिक्शन है जब से ये नहीं सरकार रही है तो थोड़ा सा फरक है। बहुत ज्यादा नहीं
08:17है।
08:18मुला ऐसा नहीं कि बैपारी खुल के अच्छे मन से बैपार कर सकता है लाव ले सकता है नहीं कर
08:24रहे हैं जैसे जीएस्टी का अब आप कंपेर करें
08:28में MSME और जीएस्टी में जीएस्टी में तो बहुत लाव हुआ है अच्छा काम और दूसरा जो बिजनस में फैदा
08:36हुआ है वो इंफ्रासेक्टर जो बनाया सड़कें बनी हैं उनसे बड़ा फरक बड़ा है
08:43अच्छा मतलब सरकारी कुछ काम ऐसे हुए है कि MSME अच्छे सड़क बनने से जैसे हमारे प्रोस में ही है
08:50उनका लोजिस्टिक का काम है तो उनका यह उपीनियन है कि जैसे उनका यहां से जातर समान चनना ही जाता
08:58है तो एक तो रस्ते में वो सेल्टेक्स के वो खतम हो गए �
09:04चुंगी हुंगी वो लाइने खतम हो गई तीन तीन चार्टे मार लाइन लगते थी अब टनर टन गाड़ी जाती है
09:12यह जीस्टिक विज़े से खतम हो गए और फिर सड़क अच्छी हो गई तो उनका यह कहना है कि जो
09:23चैने में तीन चेकर लगाते तो वही गाड़ी चार च
09:30अगर आपके पास मालत चार्ट रख हैं तो इंडरेक्टली चेंट रख हो गए और सड़क अच्छी है तो वेरेंटियर क्योंकि
09:41रस्ते का टाइम भी बच गया चार्चर घंड़े आप उसके टैक्स की लाइन में लगे हैं कागच परूपर आ रहे
09:49हैं इस सब कर रहे हैं तो
09:51अगर कोई पच्छे परशन फाल तो बहुत बड़ा हो गया ना अच्छा सरकार एक्सपोर्ट के लिए कैसे करके आप लोगों
09:59की हैल्प को हो रही है क्या पहले से बहतर हो रही है इसमें सरकार की तो बड़ी अच्छी पालिसी
10:04है लेकिन हमारी तरफ से कोई इन्नोवेशन न
10:21वजyasय कि से माने एक्सरे मसीन मना रहा हो लेकिन आप ऊस्वाद हो और चीज है मोता है क्या है
10:26सरकार करके ओहिए हम्हारो पास इस तरह का स्किल्द वर्कर नहीं है टेखलोजी नहीं है इन्वेस्टमेंट नहीं है झो जो
10:33काम करें के किसी का दिली नहीं सबसे वोग कहते हैं
10:54पिछले बीज दिन से लगावा है एक helper आया है, नोकरी तो लोग करें बेरोजगारी बहाते हैं?
11:02बेरोजगारी तो है, काम करने वाले नहीं है, उल्टी बात है यह, बेरोजगारी है यह नहीं, बना इस्किल नहीं है,
11:09पर यह कह सकता हूं किया है?
11:10अब helper भी नहीं काम करने को राजी, जब आप घर में फ्री राशन दे दोगे, जो सरकार्द की जो
11:19गलती है, कि जो हर एक आपमी को घर में आपने राशन दे दिया, वो किसान है, आठ भाई है,
11:25दो-दोजार उनको वैसे पहुंच गए, नोकरी वो कही न कहीं करी रहे हैं, तो �
11:35नहीं भी नोकरी है, तो उनका पेट भर रहा है, खाली राशन से पेट कहां बर जाएगा, बाकि चोरी शेकारी
11:43भी है ना, चोरी शेकारी भी तो गंदाई है, जिसने काम नहीं करना हो, चोरी शेकारी करना है, लेकिन आप
11:50जो बता रहे हैं, मैनली जो officer सही है, वो अभी आप
12:03तो ये ब्रिक्स से आप क्या लाह होता है, उससे कोई फैदा नहीं है, हमें यहां के छोटे manufacturer को
12:10कोई बड़े उस पर होता हो, अमानी अंडानी की लेवल पे या बड़े लेवल पे कुछ होता हो, तो होता
12:16हो, ये जिनकी turnover 10 क्रोड के आसपास है, 20 क्रोड के आसपास है, फेक्
12:33माना जाता है, तो उसको तो कुछ ऐसा, लाव नहीं देखना है, अडानी मानी जैसों को आपको लगता है, वो
12:41हो सकता है, मुझे पता नहीं, बड़े-बड़े प्रजेक्ट होते हो, उसमें जिसमें छोड़ा आदम भाल पार्टिसपेटी नहीं करवाएगा, तो
12:50उसमें ब�
13:03हो सकता है, कि इस लेवल पर कुछ एक दूसरे की जूड़ा है, अभी आपकी यहां पर आसपार जो लोग
13:09हैं, उन्हें यह ऐसा कुछ लाव नहीं दिख रहा है, मिलिक से, होगा भी नहीं, अभी तक तो कोई ऐसी
13:17बिजनस को लेकर तो कोई पालिसी चाइना के सी जिंग पिं
13:32हैं, डॉलर के अगेंस्ट, डॉलर पर डिपेंडेंसी नहीं हो, और उसमें अभी तक तो ब्रिक्स का मुझे तो यही समझ
13:43लगा है, कि करनसी रिपलेस करना चाहते हैं, क्योंकि चाहिना को इसमें बहुत अड्वांटेज है, क्योंकि अमेर्गा के बाद तो
13:53फैनेशल सुप
14:02यही बात लग दिया, तो यह वारता थी, निल चौदरी जी से, जो यहां के MSME से अच्छे उद्वपतियों में
14:10हैं, और काफी इनका जो मेडिकल एकुपमेंट है, वो एक्सपोर्ट होता है, लगी राय थी, आप इस राय को कैसे
14:16देखते हैं, अलकि इनका मानना है, ब्रिक्
14:30और उन अच्छी उजनाओं का सरकार की, यहां पर लोगों को लाब नहीं मिले देती, तो फलाल आपकी क्या रहा
14:36है, आप कमेंट स्वाक में जरूब बताइएगा, फलाल इस वीडियो में इतना ही, वीडियो जनलिस धुरुप बबर के साथ, शिविन
14:42गौर, वन इंडिया, �
14:44नोड़ा!
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