00:00देखिए ब्रिक्स मेलन जो है, MSME सेक्टर कुछ शादा वो हमने तेखा रहे हैं
00:04डॉलर्स की बजाए आपका लेन देन अगर इसमें हो तो कुछ फरक देगा
00:07तो क्या सिस्टम बनता है अभी तक तो बहुत जल्दी बनना तो मुझे उमीद नहीं है
00:11आप कंपेर करें MSME और GST में, GST में तो बहुत लाब हुआ है
00:15तो MSME सेक्टर को इन पिछले कुछ बरसों में आप क्या देख पा रहे हैं कुछ इसमें है लाब
00:21लोग कहते हैं कि नोकरिया नहीं है हमें तो अबर करनी मिलते हैं तो काम करें
00:27चाइना के सीजिंग पिंग आ रहे हैं रूस के पुठिन आ रहे हैं और बहुत से देशों को लोग आ
00:32रहे हैं
00:33देखो वो तो मुझे लगता है कि मेंली वो डॉलर को अगेंस्ट एक ये मोर्चा है उससी के लिए मुलागाते
00:40हो दिए
00:40अमेरिका के बाद जो फानेंशल सुपर पावर चाहिए नहीं है देश में ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर के काफी चर्चा हो
00:48रही है आम लोहों को बहुत उमीद है उद्योक से जुड़े लोगों को
00:54अधर को बहुत उमीद है ऐसा कहा जा रहा है लेकिन हमें तब पता लगे जब हमें उस सेक्टर का
01:01कोई ब्यक्ति मिले और जानकार मिले हमारे साथ अनिल चौधरी जी हैं काफी सेनियर अभी पती हैं मेडिकल एकुप्मेंट्स का
01:13काम है एक्सपोर्ट भी रहा है आपका स्व
01:24MSME सेक्टर को जिसको भारत सरकार भी काफी पिछले कोछ सालों से कह रही है कि आप इसमें उसको उभरता
01:33देख रहे हैं उसको फाइदा होता देख रहे हैं देखिए ब्रिक्स मेलन जो है मेरेकल आट-दस साल तो हो
01:39गए मुझे एक्जेक डेट याद नहीं है कौन से संज में
01:43शुरूआ लेकिन काफी टाइम से सुन रहे हैं जे इन आट-दस सालों में तो हमने कोई इसके करण MSME
01:51सेक्टर को फाइदा हो हमने देखा नहीं है बिल्कुँ कोई फाइदा नहीं ब्रफन अभी एक बहुत बात हो रही है
01:58कि भारत की कोसिस है कि डॉलर पे निर्भरता कम की �
02:02है डॉलर का बिरोध नहीं कर रहा है भारत हाला कि रूस और चाइना हो सकता है कि सीधे मुकाबले
02:08को सोचते हो लेकिन भारत ब्रोध लेकिन भारत की जो उसने ऑप्सन रखा है वो डिश्टल करेंसी का बात करी
02:16है और लोकल करेंसी का जो है सेटलमेंट की बात की है तो यह कै
02:23कि अधीstar एना है कि इसरे जोड़न कि इसे हम डालब पर कर सकते हैं क्या इस्सेया प्लोग ओ और
02:37इंपोर्ट और एक्सपोर्ट में कोई लाब मिल सकता है डिपेंडेंसी तो जरूर कम हो जाएगी अगर हम डॉलर के सिवाग
02:45आप किसी भी चीज़ को देखे कर एक ही पर निरबर हैं तो उसके वाए अगर आप तीन चाहिसा हैं
02:53तो आपको कंपेटिशन में कुछ ने कुछ वा
03:06तो क्या यूआन और उसमें रुपे में हो जाएगा उसका आपस में मतलब सेटिलमेंट तो जुरूर फैदा होगा होगा कितना
03:15फैदा हो सकता है यह नहीं कह सकते हैं लेकिन एजी बहुत हो जाएगा अगर ऐसा होता है तो यह
03:22एक यह एक उमिद है मानलो रुपे से पेमें�
03:35जब होगा तो कैसे होगा यह तो लेकिन अगर आपको लगता है डिश्टर करेंसी से लें दिन हो तो फायदा
03:41हो सकता है एक चीज में देख रहा था मैंने काफी आंकड़े देखे सर तो भारत का जो ब्यापार घाटा
03:49है इन देशों से मतलब यह कहा जा रहा है कि जीटीपी क
04:02सिर्फ 28% है इन देशों के बीच में तो उनमें ब्यापार कम है पेख चाकरा तो मैं समझते हैं
04:20जादो आप ही एक्सपोर्ट करते हो मेडिकल इंस्टुमेंट्स का तमाम का एकुपमेंट का तो वो क्या इन देशों में होता
04:27है अमेरिका या इन ब्रिक्स के लावा है
04:30हमारा मेडिकल र्कुपमेंट जो है वो यौ एमेरिका रष्या इन देश ब्रिक्स इन देश समय हो गया है इसे टो
04:50है वो घृड्री का ये साउथ अफ्रीका का ओंशवय्ग को स्थी
05:09तो अगर इसमें हमारा डिजिटल करेंसी में होगा तो लाव होगा डॉलर्स के बजाए आपका लेंदेन अगर इसमें हो तो
05:14कुछ फरक बड़ेगा
05:15तो क्या सिस्टम बनता अभी तक तो बहुत जल्दी बनना तो मुझे उमीद नहीं है यहां पर आपस में जब
05:22लोगों की बात होती है तो इस ब्रिक्स सम्मेलन को देखे बो लोग आप से कुछ उत्साहप दिखाते हैं अपना
05:28या कोई हो रहा है कोई मतलब नहीं करें अभी ऐ
05:44कहां तक इनको सफलता मिलती है अभी तो वही नहीं खतम हो रहा है अभी तो अगर आप से समझूं
05:53कि आप जो मेडिकल एकुपमेंट हैं वो पिछले दस सालों में छे सालों में पास सालों में इनका बैपार मांग
06:03भारत के आपके बढ़ी है या क्या दिक्कते आई है या बह
06:11लेकिन अफ्रीका में वा रखास तो अपसे जो भी बड़ी है मैं दा की मोटी शॉट् अमेरिका भी है जैसे
06:19छाउट मेर्का की कंटीस हैे लेकिन यॉरोप में और डिव डॉलब्ट कंटी meni बड़ी में वहां अगर बड़ी हो और
06:29तो दवाया मोगेरा की मार्के बड़ी हो
06:38वोई एक्सपोर्ट करते हो और भी कुछ उसके अलावा यहां वैसे और क्या-क्या मेडिकल एकुमेंट्स लोग कर रहे हैं
06:45असपास और दूसरी वैपारी
06:56सब्सक्राइब करते हैं अगर थोड़ा सा मैं और एक सवाल पूछू आपसे केबल आपका स्वास्त भी मुझे पता लगा भी
07:08उतना ठीक नहीं तो एमसमी सेक्टर को इन पिछले कुछ बर्सों में आप क्या देख पा रहे हैं कुछ इसमें
07:17है
07:17अप है लाब या अभी अब संसाही की वाजए से यह एक सिस्ट नहीं वह लाप साही कि विज्शनां का
07:24यह क्या वाजाय ह। यह यह
07:51तो सरकार, मंत्री ये भी तो सब आपके ही हैं तो ये का उन पर दबाव या नियंतर नहीं है
07:56इनका।
07:58मुझे लगता नहीं है। फेल है। ब्यूरोक्रैसी सरकार से उपर ही है। पहले भी उपकर थी। पहले वो था मनमर्जी
08:07बहुत ज्यादा थी।
08:09अब थोड़ी से रिस्टिक्शन है जब से ये नहीं सरकार रही है तो थोड़ा सा फरक है। बहुत ज्यादा नहीं
08:17है।
08:18मुला ऐसा नहीं कि बैपारी खुल के अच्छे मन से बैपार कर सकता है लाव ले सकता है नहीं कर
08:24रहे हैं जैसे जीएस्टी का अब आप कंपेर करें
08:28में MSME और जीएस्टी में जीएस्टी में तो बहुत लाव हुआ है अच्छा काम और दूसरा जो बिजनस में फैदा
08:36हुआ है वो इंफ्रासेक्टर जो बनाया सड़कें बनी हैं उनसे बड़ा फरक बड़ा है
08:43अच्छा मतलब सरकारी कुछ काम ऐसे हुए है कि MSME अच्छे सड़क बनने से जैसे हमारे प्रोस में ही है
08:50उनका लोजिस्टिक का काम है तो उनका यह उपीनियन है कि जैसे उनका यहां से जातर समान चनना ही जाता
08:58है तो एक तो रस्ते में वो सेल्टेक्स के वो खतम हो गए �
09:04चुंगी हुंगी वो लाइने खतम हो गई तीन तीन चार्टे मार लाइन लगते थी अब टनर टन गाड़ी जाती है
09:12यह जीस्टिक विज़े से खतम हो गए और फिर सड़क अच्छी हो गई तो उनका यह कहना है कि जो
09:23चैने में तीन चेकर लगाते तो वही गाड़ी चार च
09:30अगर आपके पास मालत चार्ट रख हैं तो इंडरेक्टली चेंट रख हो गए और सड़क अच्छी है तो वेरेंटियर क्योंकि
09:41रस्ते का टाइम भी बच गया चार्चर घंड़े आप उसके टैक्स की लाइन में लगे हैं कागच परूपर आ रहे
09:49हैं इस सब कर रहे हैं तो
09:51अगर कोई पच्छे परशन फाल तो बहुत बड़ा हो गया ना अच्छा सरकार एक्सपोर्ट के लिए कैसे करके आप लोगों
09:59की हैल्प को हो रही है क्या पहले से बहतर हो रही है इसमें सरकार की तो बड़ी अच्छी पालिसी
10:04है लेकिन हमारी तरफ से कोई इन्नोवेशन न
10:21वजyasय कि से माने एक्सरे मसीन मना रहा हो लेकिन आप ऊस्वाद हो और चीज है मोता है क्या है
10:26सरकार करके ओहिए हम्हारो पास इस तरह का स्किल्द वर्कर नहीं है टेखलोजी नहीं है इन्वेस्टमेंट नहीं है झो जो
10:33काम करें के किसी का दिली नहीं सबसे वोग कहते हैं
10:54पिछले बीज दिन से लगावा है एक helper आया है, नोकरी तो लोग करें बेरोजगारी बहाते हैं?
11:02बेरोजगारी तो है, काम करने वाले नहीं है, उल्टी बात है यह, बेरोजगारी है यह नहीं, बना इस्किल नहीं है,
11:09पर यह कह सकता हूं किया है?
11:10अब helper भी नहीं काम करने को राजी, जब आप घर में फ्री राशन दे दोगे, जो सरकार्द की जो
11:19गलती है, कि जो हर एक आपमी को घर में आपने राशन दे दिया, वो किसान है, आठ भाई है,
11:25दो-दोजार उनको वैसे पहुंच गए, नोकरी वो कही न कहीं करी रहे हैं, तो �
11:35नहीं भी नोकरी है, तो उनका पेट भर रहा है, खाली राशन से पेट कहां बर जाएगा, बाकि चोरी शेकारी
11:43भी है ना, चोरी शेकारी भी तो गंदाई है, जिसने काम नहीं करना हो, चोरी शेकारी करना है, लेकिन आप
11:50जो बता रहे हैं, मैनली जो officer सही है, वो अभी आप
12:03तो ये ब्रिक्स से आप क्या लाह होता है, उससे कोई फैदा नहीं है, हमें यहां के छोटे manufacturer को
12:10कोई बड़े उस पर होता हो, अमानी अंडानी की लेवल पे या बड़े लेवल पे कुछ होता हो, तो होता
12:16हो, ये जिनकी turnover 10 क्रोड के आसपास है, 20 क्रोड के आसपास है, फेक्
12:33माना जाता है, तो उसको तो कुछ ऐसा, लाव नहीं देखना है, अडानी मानी जैसों को आपको लगता है, वो
12:41हो सकता है, मुझे पता नहीं, बड़े-बड़े प्रजेक्ट होते हो, उसमें जिसमें छोड़ा आदम भाल पार्टिसपेटी नहीं करवाएगा, तो
12:50उसमें ब�
13:03हो सकता है, कि इस लेवल पर कुछ एक दूसरे की जूड़ा है, अभी आपकी यहां पर आसपार जो लोग
13:09हैं, उन्हें यह ऐसा कुछ लाव नहीं दिख रहा है, मिलिक से, होगा भी नहीं, अभी तक तो कोई ऐसी
13:17बिजनस को लेकर तो कोई पालिसी चाइना के सी जिंग पिं
13:32हैं, डॉलर के अगेंस्ट, डॉलर पर डिपेंडेंसी नहीं हो, और उसमें अभी तक तो ब्रिक्स का मुझे तो यही समझ
13:43लगा है, कि करनसी रिपलेस करना चाहते हैं, क्योंकि चाहिना को इसमें बहुत अड्वांटेज है, क्योंकि अमेर्गा के बाद तो
13:53फैनेशल सुप
14:02यही बात लग दिया, तो यह वारता थी, निल चौदरी जी से, जो यहां के MSME से अच्छे उद्वपतियों में
14:10हैं, और काफी इनका जो मेडिकल एकुपमेंट है, वो एक्सपोर्ट होता है, लगी राय थी, आप इस राय को कैसे
14:16देखते हैं, अलकि इनका मानना है, ब्रिक्
14:30और उन अच्छी उजनाओं का सरकार की, यहां पर लोगों को लाब नहीं मिले देती, तो फलाल आपकी क्या रहा
14:36है, आप कमेंट स्वाक में जरूब बताइएगा, फलाल इस वीडियो में इतना ही, वीडियो जनलिस धुरुप बबर के साथ, शिविन
14:42गौर, वन इंडिया, �
14:44नोड़ा!
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