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भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही Trade Deal अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आखिर America को India की इतनी जरूरत क्यों है? China Plus One Strategy क्या है? Donald Trump ने भारत पर कौन-कौन से Tariffs लगाए थे? और अगर India-US Trade Deal सफल हो जाती है तो इससे भारत की Economy, Jobs, Manufacturing, Semiconductor Industry, Pharma, IT और Exports पर क्या असर पड़ेगा इस वीडियो में हम India-US Trade Deal की पूरी कहानी आसान भाषा में समझेंगे। जानेंगे कि आखिर यह डील पिछले कई सालों से क्यों अटकी हुई थी, Dairy Sector और Agriculture को लेकर क्या विवाद हैं, और क्यों पूरी दुनिया इस समझौते पर नजर बनाए हुए है।

The long-awaited Trade Deal between India and the United States now appears to be entering its final stage. Why does America need India so much? What is the China Plus One Strategy? What tariffs did Donald Trump impose on India? And if the India-US Trade Deal is finalized, how could it impact India's economy, jobs, manufacturing sector, semiconductor industry, pharma, IT services, and exports? In this video, we will explain the complete story of the India-US Trade Deal in simple language. You'll learn why this agreement has remained stuck for several years, what the major disputes are regarding the Dairy and Agriculture sectors, and why the entire world is closely watching this deal.

#IndiaUSTradeDeal #IndiaUSRelations #TrumpTariff #ChinaPlusOne #Semiconductor #IndiaEconomy

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00:44BHAARAT KOO YAH AMERICA KOO
00:46AJA HUM BHAARAT AMERICA TRADE DIL KÍ POOLRI KAHANI KOO
00:49AASAN BHAASA MEN SEMJHAENGAY
00:51LAKIN AB IS KAHANI MEN EK BADA MODE ACHUKAY HAY
00:54PICHLAY KAHI SALOUN SÉ
00:56JIS BHAARAT AMERICA TRADE DIL POR SEPH BATCHYTH HO RAHI THI
00:59WAH AH BAP NÉ SAB SÉ NIRNNÁYK CHARN PÉ PAHUNCH GAYA HAY
01:02TÁJA RIPORTS KEE ANUNUSAR
01:04BHAARAT OURA AMERICA KEE BIEC
01:05INTERNUM TRADE AGREMENT KÍ VARTA
01:07ANTIM CHARN MEN PAHUNCH CHUKY HAY
01:09OR DONE O DÉSOU KE MUKH VARTAKAR
01:11NAY DILLY MEN SEMJHAOTE KEEK KANUNI
01:14BASODO KO ANTIM ROOP DENEME MEN JUTHAY HUYAY HAY
01:17AMERICA KEE TARAP SE IS BATCHYTH KAHANI TRITW
01:19USTR KEEK CHIEF NEGOSIETER
01:22BRANDON LEACH KAR RAHAY HAY
01:24JABKI BHAARAT KEE TARAP SE
01:26WADJEE VIVHAG KEE ATIRIK TASACHYOU
01:27DARPANJAN BATCHYTH KA NETRITW
01:30KER RAHAY HAY HAY
01:30MEDIA RIPORTS KEE MUTABIK
01:32Aگلے کچھ हब्तों में
01:34SEMJHAOTE POR HASTA AKCHAR HONE KEE
01:35SEMBHAWNAYE JATAYE JA RAHAY HAY
01:37RIPORTS MEN EYADAWAH KIA JA RAHAY HAY
01:39KIKI AMERICA BHAARAT OUTSPADO POR
01:41PRABHAWI TARIF MEN BADY KATAUTI POR
01:43VICHAR KER RAHAY HAY
01:44WHEHIN BHAARAT DWORA ROOSY TEL KHARIDNAY
01:47से जुड़े कुछ ब्यापारिक
01:48मुद्दों पर भी दोनों देशों के वीज
01:50सकरात्मक बाची चल रही है
01:52दूसरी तरफ भारत अमेर की
01:54कृसी और ओध्योगी उत्पादकों को
01:57अपने बाजार में अधिक पहुँच देने के लिए
01:59तयार दिख रहा है
02:00लेकिन उसने अपने समवेदन सील डेरी
02:02और प्रमुक क्रिसी छेतरों की सुरक्षा को
02:05प्रात्मिक्ता दी है
02:06यानि कि जिस डील को लेकर
02:08पिछले 6-7 वर्सों से केवल
02:10चर्चाएं हो रही थी अब वह पहली बार
02:26की संतुलन पर भी भारी असर पढ़ सकता है
02:28अब सबसे पहले बात करते हैं
02:30कि आखिर ये ट्रेड डील कब से अटकी हुई है
02:33तो भारत और अमेरिका के बीच
02:35सीमित व्यापार समझोते
02:36यानि कि लिमिटेड ट्रेड डील की चर्चा
02:392018-19 के दोरान तेज हुई थी
02:42उस समय अमेरिकी राष्टपती
02:44डोनाल टरम्प लगातार कहते थे
02:46कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर
02:48बहुत ज़ादे इंपोर्ट ड्यूटी लगाता है
02:50इसके बाद 2019 में
02:52अमेरिका ने भारत का
02:54जी-एस-पी यानि कि
03:05जी-एस-पी खतम होने के बाद
03:08दोनों देशों ने एक ब्यापक ब्यापार
03:10समझोते पर बातचीच सुरू की
03:11लेकिन कई बड़े मुद्दों पर सहमती
03:14नहीं बन सकी इनमें सामिल थे
03:16अग्रिकल्चर मार्केट एक्सेस
03:17डेरी प्रोडक्ट्स
03:22यही कारण है कि लगबग 6-7 साल बाद भी
03:25यह डील पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले पाई है
03:28अब सवाल उठता है कि
03:30अमेरिका भारत में इतनी दिल्चस्पी क्यों दिखा रहा है
03:33बहुत से लोग सोचते हैं कि
03:34अमेरिका भारत की मदद करना चाहता है
03:37लेकिन असल वज़े इससे कई ज़्यादा रणनीतिक है
03:40सबसे पहली और बड़ी वज़े है
03:43चीन का विकल्प
03:44आज अमेरिका और चीन के बीच
03:46आर्थिक और रणनीतिक प्रतियस फर्दा लगातार बढ़ रही है
03:49कई अमेरिकी कमपनियां अपने उत्पादन का
03:52कुछ हिस्सा चीन से बाहर ले जाना चाहती है
03:54उन्हें ऐसे देश की जरूरत है
03:57जहां बड़ा घरीलू बाजार हो
03:59स्रम लागत अपेक्छा कृत कम हो
04:01राजनीति स्थिर्ता सामिल हो
04:03और लोकतांत्रिक ब्यवस्था पूरी तरीके से हो
04:06भारत इन सभी सर्तों पर काफी हद तक खरा उतरता है
04:09यही वज़े है कि अमेरिका भारत को
04:12चाइना प्लस वन स्टैटेजी के तहत
04:14एक महत्तपूर साचेदार के रूप में देखता है
04:17अब दूसरी बड़ी वज़े है
04:19भारत का विसालुप भोगता बाजार
04:21भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है
04:231.4 अरप से अधिक लोगों का यह बाजार
04:27दुनिया की लगबग हर बड़ी कमपनी को आकरसित करता है
04:30अमेरिकी कमपनिया चाहते हैं कि
04:32एपल भारत में अधिक आइफोन बेचे और बनाए
04:35टेसला भारतिय बाजार में प्रवेस करे
04:38एमाजॉन अपना ब्यापार बढ़ाए
04:40गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपनी पकड और मजबूत करे
04:43भारत आने वाले वरसों में दुनिया के सबसे बड़े
04:46कंजूमर मार्केट्स में से एक माना जा रहा है
04:49और तीसरी वज़े है सप्लाई चैन सिक्योरिटीज
04:52कोविड नाइंटी महामारी और चीन अमेरिका तनाओ के बाद
04:56अमेरिका नहीं चाहता है कि वैस्विक मैनुफेक्चरिंग केवल चीन पर निर्भर रहे
05:00इसलिए कमपनिया उत्पादन को कई देशों में बाटने की रणनीती अपना रही है
05:05भारत इस बतलाओ का सबसे बड़ा लाभारती बन सकता है
05:08अब सवाल आता है कि इस डील से सबसे ज़्यादा किसे होगा
05:12तो सचाईया है कि दोनों ही देशों का इसका फायदा मिलेगा
05:16लेकिन सौट टम में अमेरिका को कुछ फायदे मिल सकते हैं
05:20क्योंकि वह भारत में अपने क्रिसी उत्पाद और द्योगिक सामान
05:24और कुछ अन्य उत्पादों की बहतर पहुत चाहता है
05:26वहीं भारत कुछ सम्वेदन स्लील छेत्रों को लेके अभी भी सतर पना हुआ है
05:31उदाहरन के लिए डेरी सेक्टर
05:33आपको बता दें कि इंडिया का डेरी मार्केट बहुत बड़ा है
05:36भारत का डेरी बाजार लगभग 130 से 150 बिलियन डॉलर
05:41यानि की 21 लाग करोड से जादा का है
05:44इस दुनिया का ये सबसे बड़ा डेरी बाजार है
05:47देश की अर्थब्योस्ता में इसका 5% योगदान माना जाता है
05:51ऐसे में किसी और को इस मार्केट में एंट्री देना
05:55सीधे तरीके से अपने लोगों के साथ
05:57कॉम्पेडीशन करना हो जाएगा
05:58जिससे इस सेक्टर्स में भी काफी उतार चढ़ाओ आ सकता है
06:02जो कि इंडिया बिलकुल नहीं चाहता है
06:04और अगली बड़ी वज़ा है यहां के लोग
06:06इंडिया में दूद को पूजा से लेके
06:08हर जरूरी कामों में इस्तेमाल किया जाता है
06:11पर यूएस में प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए
06:13वहां की गायों की फीडिंग में
06:15नॉन वेच का इस्तेमाल भी होता है
06:17जो कि यहां के लोगों के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है
06:20इसलिए लॉन टम विनर भारत ही होगा
06:23क्योंकि हमारे पास बेचने के लिए बहुत बड़ा बाजार है
06:26अगर ब्यापार समझोता सफल होता है
06:28और निवेज बढ़ता है
06:30तो भारत को कई बड़े फाइदे मिल सकते हैं
06:33जिसमें सबसे पहले
06:34मैनुफेक्चरिंग एक्सपेंसिस
06:36एक्सपोर्ट गूरूथ
06:37फॉरेंड डैरेक्ट इन्वेस्मेंट में वृद्धी
06:39नई नौकरियों का स्रिजन
06:41और ग्लोबल सप्लाई चेन में
06:43महत्वपोर्भूमिका मानी जाएगी
06:45यही कारण है
06:46कि कई विसे सग्गे लंबी आवदी में
06:48भारत को इसका बड़ा लाभारती मानते हैं
06:50अब बात करते हैं उन सेक्टर्स की
06:52जिनें हर डील में सबसे ज़्यादा फाइदा हो सकता है
06:54इसमें सबसे पहले आता है
07:13आने वाले दसक में भारत की किस्मत बदल सकता है
07:15जी हाँ
07:16सेमी कंड़क्टर इंडस्ट्रीज
07:18आज दुनिया की लगभग हर आधुनिक टक्नीक
07:20चाहे वो स्मार्टफोन हो
07:22इलेक्ट्रिक वीकल हो
07:23या फिर आर्टिफीसिल इंटेलिजेंस हो
07:25या डिफेंस एक्यूप्मेंट हो
07:27सबकी न्यू सेमी कंड़क्टर चिप्स पर हिट्टी की हुई है
07:31अमेरिका और चीन के बीच
07:32बढ़ते टेक्नोलोजी संगर्श के कारण
07:34अमेरिका अपनी सेमी कंड़क्टर सप्लाई चेन को
07:37अधिक सुरक्चित और विविद बनाना चाहता है
07:40ऐसे में भारत उसके लिएक महत्वपूर साजेदार बनकर उभर रहा है
07:44भारत पहले ही सेमी कंड़क्टर मैनुफेक्टरिंग
07:47और चिप पैकेजिंग के छेत्र में
07:49अर्बो डॉलर की निवेशकों को अकरसित करने की कोसिस कर रहा है
07:52यदि भारत अमेरिका ट्रेड डिल सफल होती है
07:55तो अमेरिकी कंपणियों के लिए भारत में निवेश करना और आसान हो सकता है
07:59इस से चिप मैनुफेक्टरिंग, इलेक्टरोनिक प्रोडक्शन, हाई टेक जॉप्स और एडवांस टेकनोलोजी ट्रांसपर जैसे छेत्रों में तेजी आ सकती है
08:08कई एक्सपोर्ट्स मानते हैं कि आने वाले वर्सों में सेमी कंड़क्टर सेक्टर भारत के लिए वैसा ही गेम चेंजर साबित
08:15हो सकता है
08:16जैसा आईटी सेक्टर 1990 में और 2000 के दसक में बना था
08:21दूसरा बड़ा छेत्र है फार्मा इंडस्ट्री भारत को दुनिया की जैनेरिक मेडिशिन कैपिटल कहा जाता है
08:27अमेरिका भारती दवा कंपणियों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है
08:32हाला कि बहुत धिक संपदाधिकार यानिक intellectual property और patent property को लेके दोनों देशों के बीच मतभेध हमेशा बने
08:41रहते हैं
08:41तीसरा important सेक्टर है IT सेक्टर
08:44TCS, Infosys, Vipro और HCL जैसी कंपणिया पहले से ही अमेरिकी बाजार पर काभी निर्भर हैं
08:51अगर services trade को लेके नई सुविधाय मिलती हैं तो इन कंपणियों को अत्रिक लाव मिल सकता है
08:57इसके अलावा textile और auto component sector को भी बड़ा फायदा मिल सकता है
09:02भारत पहले से ही auto parts export में तेजी से आगे बढ़ रहा है
09:07अमेरिकी बाजार में बहतर पहुँच मिलने से ये छितर और मजबूत हो सकता है
09:11अब बात करते हैं डोनाल्ड टरम्प के tariff की
09:14की मतलब डोनाल्ड टरम्प ने अभी तक इंडिया पे कितना tariff लगाया है
09:18एक बड़ी गलत फैमी गया भी है कि टरम्प ने भारत के खिलाप चीन जैसा ब्यापक tariff war शुरू कर
09:25दिया था
09:25असल में ऐसा बिल्कुल नहीं था
09:272019 में अमेरिका ने भारत का GSP दरजा खत्म कर दिया था
09:31जिससे लगबख 5.6 बिलियन डॉलर के भारती निर्यात पर मिलने वाली विसेश व्यापारिक सुबिधा समाप्त हो गई थी
09:39इसके अलावा टरंप एड्मिनिस्ट्रेशन ने राष्टिय सुरक्षा की आधार पर कई देशों के तहट भारत की स्टील्स पर 25 पोसंट
09:46और एलूमुनियम पर 10 पोसंट का tariff लगाया था
09:49जवाब में भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर सूल्क लगाये थे
09:53टरंप अक्सर भारत को tariff king कहते थे
09:55लेकिन उस समय अमेरिकी उत्पादों पर भारत का import duty काफी उच्छा था
09:59हारले डैविट्सन मोटर साइकल इसमें सबसे चर्चित एक्जामपल बना हुआ था
10:04जिसका जिक्र टरंप कई वार सार्वजनिक मंचों पर भी जाकर कर चुके हैं
10:08अब बात करते हैं डोनाल टरंप और प्रधान मंतरी के रिस्तों की
10:11राजनीतिक अस्तर पर टरंप और प्रधान मंतरी नरेन मोदी के संबंध काफी अच्छे माने जाते हैं
10:16दुनिया ने हेलो डी मोदी और नमस्ते ट्रम जैसे बड़े कारकरम भी देखे हैं
10:21हाला कि बैक्तिकत और राजनीतिक रिष्टे अच्छे होने के बावजूद विव्यापारिक वारताओं में
10:26दोनों देशों ने हमेशा अपने अर्थिक हितों को प्रात्मिकता दी है
10:29यही कारण है कि दोस्ताना संबंध होने के बावजूद ट्रेट डील बार-बार अटकती रही है
10:35आखिर यह डील बार-बार फस्ती क्यों है
10:37सबसे बड़ी वज़य है अग्रिकल्चर सेक्टर
10:40अमेरिका चाहता है कि उसके किसान भारत में अधिक क्रिशी उत्पाद बेच सके
10:44वहीं भारत अपने करोडों किसानों की आये और बाजार की सुरक्षा को प्रात्मिकता देता है
10:49दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है डेरी सेक्टर
10:52भारत नहीं चाहता है कि विदेशी डेरी उत्पाद बिना परियाब सुरक्षा उपायों के बड़े पैमाने पर बाजार में प्रवेश करें
10:59Medical Devices
11:00अमेरिका चाहता है कि कुछ medical उपकरणों पर मूलन नियंत्रण कम किया जाए
11:05जबकि भारत सस्ती सौस्त सेवाओं को बनाय रखना चाहता है
11:09यही कारण है कि बाजचीत आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम समझोता अभी भी नहीं हो पाया है
11:15लेकिन अगर ये डील सफल हो जाती है तो तस्वीर पूरी तरीके से बदल सकती है
11:20कल्पना कीजिए अर्बो डॉलर का नया इन्वेस्मेंट मिले लाख हो नई नौकरिया मिले
11:25मैनुफैक्चरिंग ग्रोथ बढ़े ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़े
11:30यही वज़े है कि पूरी दुनिया इस डील पर नज़र रखे हुए है
11:34क्योंकि यह केबल ब्यापार समझोते नहीं है
11:37यह दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थवे उस्ताओं के बीच आर्थिक साज़ेदारी की कहानी है
11:43एक तरफ अमेरिका को चीन का मजबूत विकल्ब चाहिए
11:46तो दूसरी तरफ भारत को निवेश, तकनीक और वैसुविक वाजारों तक बहतर पहुँच चाहिए
11:52अब सवाल सिर्फ इतना है कि दोनों देश अपने अपने हितों के बीच कितना संतुलन बना पाते हैं
11:58क्योंकि जिस दिन ये डील पूरी तरीके से सफल हुई उस दिन सिर्फ ब्यापार नहीं बदलेगा
12:04संभव है कि एसिया की आर्थिक स्थिती का संतुलन भी एक नए दोर में प्रविश कर जाए
12:09आपकी इस विशय पर क्या राय है हमें कॉमेंट करके जरूर बताएं
12:13ऐसी ही और खबरों और अपडेट्स को जानने के लिए देखते रहें
12:16गुड रिटरंस डिजिटल
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