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00:44BHAARAT KOO YAH AMERICA KOO
00:46AJA HUM BHAARAT AMERICA TRADE DIL KÍ POOLRI KAHANI KOO
00:49AASAN BHAASA MEN SEMJHAENGAY
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01:44WHEHIN BHAARAT DWORA ROOSY TEL KHARIDNAY
01:47से जुड़े कुछ ब्यापारिक
01:48मुद्दों पर भी दोनों देशों के वीज
01:50सकरात्मक बाची चल रही है
01:52दूसरी तरफ भारत अमेर की
01:54कृसी और ओध्योगी उत्पादकों को
01:57अपने बाजार में अधिक पहुँच देने के लिए
01:59तयार दिख रहा है
02:00लेकिन उसने अपने समवेदन सील डेरी
02:02और प्रमुक क्रिसी छेतरों की सुरक्षा को
02:05प्रात्मिक्ता दी है
02:06यानि कि जिस डील को लेकर
02:08पिछले 6-7 वर्सों से केवल
02:10चर्चाएं हो रही थी अब वह पहली बार
02:26की संतुलन पर भी भारी असर पढ़ सकता है
02:28अब सबसे पहले बात करते हैं
02:30कि आखिर ये ट्रेड डील कब से अटकी हुई है
02:33तो भारत और अमेरिका के बीच
02:35सीमित व्यापार समझोते
02:36यानि कि लिमिटेड ट्रेड डील की चर्चा
02:392018-19 के दोरान तेज हुई थी
02:42उस समय अमेरिकी राष्टपती
02:44डोनाल टरम्प लगातार कहते थे
02:46कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर
02:48बहुत ज़ादे इंपोर्ट ड्यूटी लगाता है
02:50इसके बाद 2019 में
02:52अमेरिका ने भारत का
02:54जी-एस-पी यानि कि
03:05जी-एस-पी खतम होने के बाद
03:08दोनों देशों ने एक ब्यापक ब्यापार
03:10समझोते पर बातचीच सुरू की
03:11लेकिन कई बड़े मुद्दों पर सहमती
03:14नहीं बन सकी इनमें सामिल थे
03:16अग्रिकल्चर मार्केट एक्सेस
03:17डेरी प्रोडक्ट्स
03:22यही कारण है कि लगबग 6-7 साल बाद भी
03:25यह डील पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले पाई है
03:28अब सवाल उठता है कि
03:30अमेरिका भारत में इतनी दिल्चस्पी क्यों दिखा रहा है
03:33बहुत से लोग सोचते हैं कि
03:34अमेरिका भारत की मदद करना चाहता है
03:37लेकिन असल वज़े इससे कई ज़्यादा रणनीतिक है
03:40सबसे पहली और बड़ी वज़े है
03:43चीन का विकल्प
03:44आज अमेरिका और चीन के बीच
03:46आर्थिक और रणनीतिक प्रतियस फर्दा लगातार बढ़ रही है
03:49कई अमेरिकी कमपनियां अपने उत्पादन का
03:52कुछ हिस्सा चीन से बाहर ले जाना चाहती है
03:54उन्हें ऐसे देश की जरूरत है
03:57जहां बड़ा घरीलू बाजार हो
03:59स्रम लागत अपेक्छा कृत कम हो
04:01राजनीति स्थिर्ता सामिल हो
04:03और लोकतांत्रिक ब्यवस्था पूरी तरीके से हो
04:06भारत इन सभी सर्तों पर काफी हद तक खरा उतरता है
04:09यही वज़े है कि अमेरिका भारत को
04:12चाइना प्लस वन स्टैटेजी के तहत
04:14एक महत्तपूर साचेदार के रूप में देखता है
04:17अब दूसरी बड़ी वज़े है
04:19भारत का विसालुप भोगता बाजार
04:21भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है
04:231.4 अरप से अधिक लोगों का यह बाजार
04:27दुनिया की लगबग हर बड़ी कमपनी को आकरसित करता है
04:30अमेरिकी कमपनिया चाहते हैं कि
04:32एपल भारत में अधिक आइफोन बेचे और बनाए
04:35टेसला भारतिय बाजार में प्रवेस करे
04:38एमाजॉन अपना ब्यापार बढ़ाए
04:40गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपनी पकड और मजबूत करे
04:43भारत आने वाले वरसों में दुनिया के सबसे बड़े
04:46कंजूमर मार्केट्स में से एक माना जा रहा है
04:49और तीसरी वज़े है सप्लाई चैन सिक्योरिटीज
04:52कोविड नाइंटी महामारी और चीन अमेरिका तनाओ के बाद
04:56अमेरिका नहीं चाहता है कि वैस्विक मैनुफेक्चरिंग केवल चीन पर निर्भर रहे
05:00इसलिए कमपनिया उत्पादन को कई देशों में बाटने की रणनीती अपना रही है
05:05भारत इस बतलाओ का सबसे बड़ा लाभारती बन सकता है
05:08अब सवाल आता है कि इस डील से सबसे ज़्यादा किसे होगा
05:12तो सचाईया है कि दोनों ही देशों का इसका फायदा मिलेगा
05:16लेकिन सौट टम में अमेरिका को कुछ फायदे मिल सकते हैं
05:20क्योंकि वह भारत में अपने क्रिसी उत्पाद और द्योगिक सामान
05:24और कुछ अन्य उत्पादों की बहतर पहुत चाहता है
05:26वहीं भारत कुछ सम्वेदन स्लील छेत्रों को लेके अभी भी सतर पना हुआ है
05:31उदाहरन के लिए डेरी सेक्टर
05:33आपको बता दें कि इंडिया का डेरी मार्केट बहुत बड़ा है
05:36भारत का डेरी बाजार लगभग 130 से 150 बिलियन डॉलर
05:41यानि की 21 लाग करोड से जादा का है
05:44इस दुनिया का ये सबसे बड़ा डेरी बाजार है
05:47देश की अर्थब्योस्ता में इसका 5% योगदान माना जाता है
05:51ऐसे में किसी और को इस मार्केट में एंट्री देना
05:55सीधे तरीके से अपने लोगों के साथ
05:57कॉम्पेडीशन करना हो जाएगा
05:58जिससे इस सेक्टर्स में भी काफी उतार चढ़ाओ आ सकता है
06:02जो कि इंडिया बिलकुल नहीं चाहता है
06:04और अगली बड़ी वज़ा है यहां के लोग
06:06इंडिया में दूद को पूजा से लेके
06:08हर जरूरी कामों में इस्तेमाल किया जाता है
06:11पर यूएस में प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए
06:13वहां की गायों की फीडिंग में
06:15नॉन वेच का इस्तेमाल भी होता है
06:17जो कि यहां के लोगों के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है
06:20इसलिए लॉन टम विनर भारत ही होगा
06:23क्योंकि हमारे पास बेचने के लिए बहुत बड़ा बाजार है
06:26अगर ब्यापार समझोता सफल होता है
06:28और निवेज बढ़ता है
06:30तो भारत को कई बड़े फाइदे मिल सकते हैं
06:33जिसमें सबसे पहले
06:34मैनुफेक्चरिंग एक्सपेंसिस
06:36एक्सपोर्ट गूरूथ
06:37फॉरेंड डैरेक्ट इन्वेस्मेंट में वृद्धी
06:39नई नौकरियों का स्रिजन
06:41और ग्लोबल सप्लाई चेन में
06:43महत्वपोर्भूमिका मानी जाएगी
06:45यही कारण है
06:46कि कई विसे सग्गे लंबी आवदी में
06:48भारत को इसका बड़ा लाभारती मानते हैं
06:50अब बात करते हैं उन सेक्टर्स की
06:52जिनें हर डील में सबसे ज़्यादा फाइदा हो सकता है
06:54इसमें सबसे पहले आता है
07:13आने वाले दसक में भारत की किस्मत बदल सकता है
07:15जी हाँ
07:16सेमी कंड़क्टर इंडस्ट्रीज
07:18आज दुनिया की लगभग हर आधुनिक टक्नीक
07:20चाहे वो स्मार्टफोन हो
07:22इलेक्ट्रिक वीकल हो
07:23या फिर आर्टिफीसिल इंटेलिजेंस हो
07:25या डिफेंस एक्यूप्मेंट हो
07:27सबकी न्यू सेमी कंड़क्टर चिप्स पर हिट्टी की हुई है
07:31अमेरिका और चीन के बीच
07:32बढ़ते टेक्नोलोजी संगर्श के कारण
07:34अमेरिका अपनी सेमी कंड़क्टर सप्लाई चेन को
07:37अधिक सुरक्चित और विविद बनाना चाहता है
07:40ऐसे में भारत उसके लिएक महत्वपूर साजेदार बनकर उभर रहा है
07:44भारत पहले ही सेमी कंड़क्टर मैनुफेक्टरिंग
07:47और चिप पैकेजिंग के छेत्र में
07:49अर्बो डॉलर की निवेशकों को अकरसित करने की कोसिस कर रहा है
07:52यदि भारत अमेरिका ट्रेड डिल सफल होती है
07:55तो अमेरिकी कंपणियों के लिए भारत में निवेश करना और आसान हो सकता है
07:59इस से चिप मैनुफेक्टरिंग, इलेक्टरोनिक प्रोडक्शन, हाई टेक जॉप्स और एडवांस टेकनोलोजी ट्रांसपर जैसे छेत्रों में तेजी आ सकती है
08:08कई एक्सपोर्ट्स मानते हैं कि आने वाले वर्सों में सेमी कंड़क्टर सेक्टर भारत के लिए वैसा ही गेम चेंजर साबित
08:15हो सकता है
08:16जैसा आईटी सेक्टर 1990 में और 2000 के दसक में बना था
08:21दूसरा बड़ा छेत्र है फार्मा इंडस्ट्री भारत को दुनिया की जैनेरिक मेडिशिन कैपिटल कहा जाता है
08:27अमेरिका भारती दवा कंपणियों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है
08:32हाला कि बहुत धिक संपदाधिकार यानिक intellectual property और patent property को लेके दोनों देशों के बीच मतभेध हमेशा बने
08:41रहते हैं
08:41तीसरा important सेक्टर है IT सेक्टर
08:44TCS, Infosys, Vipro और HCL जैसी कंपणिया पहले से ही अमेरिकी बाजार पर काभी निर्भर हैं
08:51अगर services trade को लेके नई सुविधाय मिलती हैं तो इन कंपणियों को अत्रिक लाव मिल सकता है
08:57इसके अलावा textile और auto component sector को भी बड़ा फायदा मिल सकता है
09:02भारत पहले से ही auto parts export में तेजी से आगे बढ़ रहा है
09:07अमेरिकी बाजार में बहतर पहुँच मिलने से ये छितर और मजबूत हो सकता है
09:11अब बात करते हैं डोनाल्ड टरम्प के tariff की
09:14की मतलब डोनाल्ड टरम्प ने अभी तक इंडिया पे कितना tariff लगाया है
09:18एक बड़ी गलत फैमी गया भी है कि टरम्प ने भारत के खिलाप चीन जैसा ब्यापक tariff war शुरू कर
09:25दिया था
09:25असल में ऐसा बिल्कुल नहीं था
09:272019 में अमेरिका ने भारत का GSP दरजा खत्म कर दिया था
09:31जिससे लगबख 5.6 बिलियन डॉलर के भारती निर्यात पर मिलने वाली विसेश व्यापारिक सुबिधा समाप्त हो गई थी
09:39इसके अलावा टरंप एड्मिनिस्ट्रेशन ने राष्टिय सुरक्षा की आधार पर कई देशों के तहट भारत की स्टील्स पर 25 पोसंट
09:46और एलूमुनियम पर 10 पोसंट का tariff लगाया था
09:49जवाब में भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों पर सूल्क लगाये थे
09:53टरंप अक्सर भारत को tariff king कहते थे
09:55लेकिन उस समय अमेरिकी उत्पादों पर भारत का import duty काफी उच्छा था
09:59हारले डैविट्सन मोटर साइकल इसमें सबसे चर्चित एक्जामपल बना हुआ था
10:04जिसका जिक्र टरंप कई वार सार्वजनिक मंचों पर भी जाकर कर चुके हैं
10:08अब बात करते हैं डोनाल टरंप और प्रधान मंतरी के रिस्तों की
10:11राजनीतिक अस्तर पर टरंप और प्रधान मंतरी नरेन मोदी के संबंध काफी अच्छे माने जाते हैं
10:16दुनिया ने हेलो डी मोदी और नमस्ते ट्रम जैसे बड़े कारकरम भी देखे हैं
10:21हाला कि बैक्तिकत और राजनीतिक रिष्टे अच्छे होने के बावजूद विव्यापारिक वारताओं में
10:26दोनों देशों ने हमेशा अपने अर्थिक हितों को प्रात्मिकता दी है
10:29यही कारण है कि दोस्ताना संबंध होने के बावजूद ट्रेट डील बार-बार अटकती रही है
10:35आखिर यह डील बार-बार फस्ती क्यों है
10:37सबसे बड़ी वज़य है अग्रिकल्चर सेक्टर
10:40अमेरिका चाहता है कि उसके किसान भारत में अधिक क्रिशी उत्पाद बेच सके
10:44वहीं भारत अपने करोडों किसानों की आये और बाजार की सुरक्षा को प्रात्मिकता देता है
10:49दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है डेरी सेक्टर
10:52भारत नहीं चाहता है कि विदेशी डेरी उत्पाद बिना परियाब सुरक्षा उपायों के बड़े पैमाने पर बाजार में प्रवेश करें
10:59Medical Devices
11:00अमेरिका चाहता है कि कुछ medical उपकरणों पर मूलन नियंत्रण कम किया जाए
11:05जबकि भारत सस्ती सौस्त सेवाओं को बनाय रखना चाहता है
11:09यही कारण है कि बाजचीत आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम समझोता अभी भी नहीं हो पाया है
11:15लेकिन अगर ये डील सफल हो जाती है तो तस्वीर पूरी तरीके से बदल सकती है
11:20कल्पना कीजिए अर्बो डॉलर का नया इन्वेस्मेंट मिले लाख हो नई नौकरिया मिले
11:25मैनुफैक्चरिंग ग्रोथ बढ़े ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़े
11:30यही वज़े है कि पूरी दुनिया इस डील पर नज़र रखे हुए है
11:34क्योंकि यह केबल ब्यापार समझोते नहीं है
11:37यह दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थवे उस्ताओं के बीच आर्थिक साज़ेदारी की कहानी है
11:43एक तरफ अमेरिका को चीन का मजबूत विकल्ब चाहिए
11:46तो दूसरी तरफ भारत को निवेश, तकनीक और वैसुविक वाजारों तक बहतर पहुँच चाहिए
11:52अब सवाल सिर्फ इतना है कि दोनों देश अपने अपने हितों के बीच कितना संतुलन बना पाते हैं
11:58क्योंकि जिस दिन ये डील पूरी तरीके से सफल हुई उस दिन सिर्फ ब्यापार नहीं बदलेगा
12:04संभव है कि एसिया की आर्थिक स्थिती का संतुलन भी एक नए दोर में प्रविश कर जाए
12:09आपकी इस विशय पर क्या राय है हमें कॉमेंट करके जरूर बताएं
12:13ऐसी ही और खबरों और अपडेट्स को जानने के लिए देखते रहें
12:16गुड रिटरंस डिजिटल
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