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  • 31 minutes ago
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले ईरान ने कूटनीति तेज कर दी है. वो सदस्य देशों को अपने पक्ष में करने की कवायद में जुट गया है. ईरान चाहता है कि ब्रिक्स के सदस्य देश उसके खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करे. वहीं, ब्रिक्स के भीतर, विशेष रूप से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद बढ़ गए हैं. उनकी वजह से ब्रिक्स घोषणा पत्र प्रभावित हो सकता है, क्योंकि इस संघर्ष को लेकर दोनों की अपनी-अपनी राय है. सुप्रीम कोर्ट ने 4 से 6 सितंबर तक ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीशों के मंच की मेजबानी की, जिसमें ईरान ने सभी सदस्य देशों से ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा करने का आह्वान किया था. साथ ही, सदस्य देशों से कानून के साथ यानी ईरान के साथ खड़े होने की अपील की.  

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00:03नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर संबेलन से पहले इरान ने कुट नीती तेज
00:09कर दी है।
00:30क्योंकि इस संघर्ष को लेकर दोनों की अपनी अपनी राय है।
00:33सुप्रियम कोट ने 4 से 6 सितंबर तक ब्रिक्स मुख्यन आधिशों के मंच की मेजवानी की।
00:39जिसमें इरान ने सभी सदस्य देशों से इरान की संप्रभूता और शित्रिय अखंता के उलंगन की निंदा करने का अहवान
00:46किया था।
00:47साथ ये सदस्य देशों से कानून के साथ यानी इरान के साथ खड़े होने की अपील की।
01:17सुजागर कर दिया है। मैसे इरान और संयुक्द अरव अमिरात के भी संबन और भी बिगर गए हैं।
01:22SAYUKD ARAV AMIRAT NAY IRAN POR APNIN SHYTRI POR BALASTIC MISIL HAMILIKA AROP LAGATE HUI
01:28AUGUST MEN IRAN KAY SAAT SABHI AARTHIK OR VARNAJIK SAMBANTH TODD YAY
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