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China लंबे समय से Arunachal Pradesh पर अपना दावा करता रहा है, लेकिन अब Chinese platform Sohu की एक analysis में PLA यानी People’s Liberation Army के सामने Arunachal को लेकर बड़ी मुश्किलों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, Arunachal का बेहद दुर्गम Himalayan terrain, खराब मौसम और सबसे बड़ी चुनौती यानी logistics, China के लिए बड़ी परेशानी बन सकते हैं। किसी इलाके में सैनिक पहुंचाना एक बात है, लेकिन उन्हें लंबे समय तक ammunition, fuel, food और बाकी जरूरी सामान पहुंचाते रहना दूसरी। इसी वजह से Arunachal को लेकर PLA की चुनौती सिर्फ युद्ध की नहीं, बल्कि लगातार supply बनाए रखने की भी है।

वहीं China Tibet में roads, tunnels और railway connectivity का तेजी से विस्तार कर रहा है, तो India भी Arunachal Pradesh में border infrastructure और military preparedness को मजबूत कर रहा है। इस बीच Arunachal में India-China के बीच पहली Corps Commander-level military talks भी हुई हैं। आखिर Arunachal पर कब्जा करना PLA के लिए इतना मुश्किल क्यों है?

China की तैयारी क्या है और India किस तरह जवाब दे रहा है? पूरी कहानी जानिए इस रिपोर्ट में।

China has long maintained its claim over Arunachal Pradesh, but a recent analysis published by Chinese platform Sohu has highlighted serious challenges that the People’s Liberation Army (PLA) could face in any attempt to capture and hold the region. The biggest obstacles, according to the analysis, are Arunachal Pradesh’s rugged Himalayan terrain, extreme weather and the enormous logistical challenge of supplying troops in remote areas. The report also highlights China’s massive infrastructure push in Tibet, including roads, tunnels and rail connectivity towards the Arunachal border. At the same time, India has been rapidly strengthening its own border infrastructure and military preparedness across Arunachal Pradesh.

The developments come amid the first Corps Commander-level military talks between India and China held in Arunachal Pradesh, adding another layer to the story. So, what makes Arunachal such a difficult battlefield for the PLA? How is China strengthening its position in Tibet, and how is India responding?

Watch the full story to understand the growing strategic contest along the India-China border.

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Transcript
00:00जिस अरुनाचल प्रदेश पर चाइना अपना दावा करता रहा है उसी अरुनाचल को लेकर चाइनीज मीडिया की एक रिपोर्ट ने
00:07बड़ा स्ट्राटेजिक सवाल खड़ा कर दिया है
00:10सवाल ये है कि अगर चाइना रोनाचल प्रदेश में कोई बड़ा मिलिटरी ओप्रेशन करता है
00:15तो क्या पी एले सिरफ पहाडों तक पहुच पाएगी
00:19या फिर वहां लंबे वक्त तक अपनी सप्लाई और मिलिटरी प्रिजेंस मेंटेन कर पाएगी
00:24इंडिया और चाइना के बीच एले सी पर अब भी बॉर्डर डिस्प्यूट बना हुआ है
00:30जिहां 2020 के गलवान क्लैश के बाद इस्टन लदाक में लंबे वक्त तक मिलिटरी स्टैंड ओफ रहा
00:36इसके बाद कई राउंज की मिलिटरी और डिप्लोमाटिक टॉक्स भी हुई
00:40अक्टूबर 2014 में कजान में पीम नरेंद्र मोदी और चाइनीज प्रेसिडेंट जी जिंग पिंग की मीटिंग के बाद
00:47देपसांग और देमचोक में पेट्रोलिंग अरेंजमेंट्स को लेकर भी प्रोग्रेस हुई है
00:51लेकिन अरुनाचल प्रदेश अब भी बेहत सेंसिटिव सेक्टर है
00:56चाइना पूरे अरुनाचल प्रदेश पर क्लेम करता है और इसको साउथ तिबित कहता है
01:01जबकि इंडिया इसे अपना अभिन हिस्सा मानता है
01:05इसी बीच साथ सिप्टेंबर की रिपोर्ट के मताबिक
01:08चाइनीज प्लैटफॉर्म सोहू पर पब्लिश्ट एक अनलेसेज में कहा गया
01:12कि फिलाल अरुनाचल में किसी बड़े मिलिटरी उपरेशन के सामने
01:16पी एले को कई सीरिस चालेंजिस का सामना करना पड़ेगा
01:20अनलेसेज में चार बड़ी वज़ा बताई गई है जानते हैं क्या
01:24इंडिया मिलिटरी की प्रपेर्डनेस
01:26बेहद मुश्किल पहाडी टेरेन और वेदर
01:29इंडिया का स्ट्रेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पोटेंशल डिप्लोमाटिक प्रेशर
01:34लेकिन सबसे एहम मुद्ध है लोजिस्टिक्स का
01:37चाइनीज आनलेसिस के मुताबिक पहाडों तक ट्रूप्स को पहुचाना एक चालेंज है
01:42लेकिन उसके बाद फूड, फ्यूल और अम्यूनिशन की सप्लाई को लगातार मेंटेन करना और भी मुश्किल हो सकता है
01:50खासकर सर्दियों में जब डिफिकल्ट वेदर सप्लाई लाइन्स को अफेक्ट कर सकती है
01:55चाइना ने तिबित में इंफ्रास्ट्रक्टर को जरू स्ट्रेंथन किया है
01:59लहासान नैंग्ची रेलवे और पाइमेदोग रोड जैसे प्रोजेक्ट्स ने कनेक्टिविटी इंप्रूफ की है
02:05पाइमेदोग रूट की डिस्टिंस करीब 360 किलो मीटर से घटकर 175 किलो मीटर हुई है
02:12लेकिन सोहू अनलेसिस के मुताबक फ्रंट लाइन तक लास्ट माइल सप्लाई अभी भी एक मेजर चैलेंज है
02:19इंडिया भी अरुनाचल में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलिचरी प्रिपेर्नेस को स्ट्रेंथन कर रहा है
02:24इसी बीच 6 सेप्टेंबर को इंडिया और चाइना के कॉर्ब्स कमांडर लेवल ओफिसर की अरुनाचल प्रोदेश में पहली मीटिंग हुई
02:32वाचा देमाई बॉर्डर परसनल मीटिंग पॉइंट पर हुई है और इस मीटिंग में इंडियन साइड का लीडर्शिप लेस्टन एंड जोर्नल
02:39गिरीश कालिया ने किया है
02:41इसी कुछ दिन पहले 25 अगस्त को NSA अजीद दोबाल और चाइनीज फॉरन मिनिस्टर वैंगी की भी बीजिंग में एक
02:51बाउंडरी टॉक हुई थी
02:52एक तरफ बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर और मिलिटरी प्रिपेर्डनेस जारी है वही दूसरी तरफ डारेक्ट मिलिटरी डायलोग के भी चैनल्स अक्टिव है
03:00हाला कि सोहु का अनलेसिस चाइना की ओफिशन मिलिटरी पॉलिसी नहीं है
03:05इसलिए इसे बीजिंग की स्ट्राटेजी में कनफर्म्ड चेंज माना जिल्दबाजी होगी
03:11लेकिन अरुनार्चल में स्ट्राटेजी कॉंपेटिशन सरफ सोल्जर्स और वेबिन्स कर नहीं
03:15पलकी रोद्स, तनल्स, लोजिस्टिक्स, मिलिटरी प्रेडनेस और डिप्लोमसी हर फ्रंट पर डेवलप्मेंट से इपॉर्टन है
03:23इंडिया-चाइना बॉर्डर से हर जुडी बड़ी अपडेट के लिए देखते रहिए OneIndia Hindi

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