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वीडियो जानकारी: 22.08.2026, गोवा

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Transcript
00:00हम आठवी में थे ICSC Board में तब Merchant of Venice Shakespeare की पढ़ते थे उसमें एक चरित्र है उसको
00:08व्यापार में घाटा हो जाता है तो वो अपना घाटा पूरा करने के लिए जाता है और एक उसमें चरित्र
00:17दिखाये गया है शायलॉक दज्यू वो उसके पास जाता है कहता है मुझे और पैसा
00:24जो है तुम उढ़ार दे दो इस चरित्र का नाम नहीं यादा रहा है पर इसका दोस्त होता है तो
00:29उससे बोलता है यह तुम क्या कर रहे हो अब जो डूब गया तुम क्यों लगे हो उसके पीछे की
00:35वसू लूँगा तो बोलता देखो जब मैं छोटा था ना तो मैं तीर ती
00:53फल पे तीर मारा तो तीर फल पे लगा नहीं तीर आगे चला गया जहाण में आगे गिर गया तो
00:58फिर वो अपनी सतुराई बताता है बोलता है फिर पता है मैं क्या करता था क्या करते थे बोलता है
01:03मैं बिलकुल उसी जगह खड़ा हो करके उसी फल पे दुबारा तीर मारता �
01:08और ये दूसरा तीर भी वही जाके गिरता था जहाँ पहला गिरा हूँ
01:11तो इस चरह से मुझे दोनों तीर मिल जाते हैं
01:17शेक्स्पियर तो अभी कुछ सौ साल पहले थे
01:20गीता तो और हजार साल पहले की है
01:23इनसान नहीं बदला है
01:24इनसान की जब कामनाई पूरी नहीं होती ही
01:27चोट लगती है तो उसको ये नहीं दिखाई देता है
01:29कि कामनाई खराब थी
01:32उसको लगता है किसमत खराब थी
01:34तो हम क्या कहा करते हैं
01:37पुरानी राहों पर चलते हुए
01:40नई मन्जिलों तक कैसे पहुँच जाओगे
01:43परलगातार कामना की आशा यही रहती है
01:46मैं भी वैसे ही रहूँगा जैसा था
01:48मेरी भीतरी मशीनरी भी वैसे ही चलेगी जैसे चलती है
01:52तर्क बुद्धी औगेरा मेरे उसी प्रणाली पर चरेंगे
01:56जैसे हमेशा चलते रहे है
01:57लेकिन इस बार अंजाम मुझे
01:59अलग मिल जाएगा सुखद मिल जाएगा
02:02नहीं
02:03तुम जैसे रहे हो तुमें फिर से वही अंजाम मिलेगा
02:07जो अतीत में मिलाए
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