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  • 7 weeks ago
26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. शुरुआत में कहा गया कि इलाके में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप से ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूट गया. लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इस थ्योरी को खारिज करते हुए इसे एक बड़ा एवलांच और चट्टान खिसकने की घटना बताया तो आखिर उस दिन पहाड़ों के बीच ऐसा क्या हुआ जिसने जलप्रलय ला दिया?लगातार बारिश और बर्फ पिघलने से मिट्टी व चट्टानों की पकड़ कमजोर हो चुकी थी. नेपाल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा से 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व रसुवागढ़ी के पास भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानी मलबा भोटे कोशी की सहायक नदी 'लैंडे खोला' में समा गया. नदी में अचानक आई इस बाढ़ ने भारी गाद और बड़े-बड़े पत्थरों के साथ नीचे की बस्तियों पर कहर बरपा दिया.  नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की जांच बताती है कि इस विनाश का असली केंद्र तिब्बत के पहाड़ थे. 'द इंडियन अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर' ने 26 अगस्त की सुबह ठीक 8 बजकर 22 मिनट पर रसुवा क्षेत्र में जमीन के 10 किलोमीटर नीचे 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। माना जा रहा है कि इसी झटके से तिब्बत का 'जिर्क ग्लेशियर' टूटकर ध्वस्त हो गया। इस विशाल एवलांच के मलबे ने नदी का प्राकृतिक बहाव रोक दिया और जब यह रुकावट टूटी, तो त्रिशूली नदी घाटी में पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब फैल गया.  सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' यानी GLOF की घटना थी। नेपाल 2024 में भी ऐसी आपदा झेल चुका है.

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00:03ुचबिस अगस को नेपाल में आई विनाशकारी बाण्डे भारी तवाही मचाई
00:07शुरुवात में कहा गया कि राके में आए 4.4 तिवृता के भुकम से गेशियर का निचला हिस्सा तूड गया
00:14लेकिन अमेरिकी भुब्यागानिक सर्वेक्षन USGS ने इस थियोरी को खारिश करते हुए इसे एक बड़ा एवलांच और चटान खिसकने की
00:22घटना बताया
00:22तो आखिर उस दिन पहाडों की पीच ऐसा क्या हुआ जिसने जल प्रलै ला दिया
00:27लगातार बारिश और बर्फ पिखलने से मिट्टी और चटानों की पकर कमजोर हो चुकी थी
00:31नेपाल राष्ट्री आपदा प्रबंधन प्रादिकरन के अनुसार नेपाल चीन सीमा से 20 किलोमीटर उत्तरपूर रसुबा गढ़ी के पास भारी मात्रा
00:40में बर्फ और चटानी मलवा भोटे कोशी कीम सहायक नदी लैंडे खोला में समागया
00:45नदी में अचानक आई इस बार नी भारी गाद और बड़े बड़े पत्थरों के नीचे की बस्तियों पर कहर भरपा
00:51दिया
00:53नाशनल रिमोर्ट सेंसिंग सेंटर की जाज बताती है कि इस विनाश का असली केंद्र तिबबत के पहार थे
00:58इंडियन अर्थक्विक नेटवर्क सेंटर ने 26 अगस्त की सुभा ठीक 8 बच कर 22 मिनट पर रसुबा शित्र में जमीन
01:06के 10 किलोबीटर नीचे 4.9 तिवृता का भुकम दर्ज किया
01:10माना जा रहा है कि इसी जटके से टिबबत का जिर्ख ग्लेशियर तूटकर ध्वस्त हो गया
01:16इस विशाल एवलांच के मलवे ने नदी का प्राकृतिक बहाव रोग दिया और जब यह रुकाबर टूटी तो त्रिशुले नदी
01:23घाटी में पानी, कीचर और मलवे का सहलाब फैल गया
01:27सेटलाइट तस्मीरों के अध्यन से ब्यग्यानिकों ने पुष्टिक की कि या ग्लेशियल लेक आउट्वर्स फ्लड यानी जी एलो एफ की
01:33घटना थी
01:34नेपाल दो हजार चॉबिस में ऐसी आवदा जिर चुका है
01:38आर्क्टिक और अंटार्क्टिक के बाद हिंदुकों श्रिमाले छित्र को दुनिया का तीसरा धुब और सबसे बड़ा बर्फ का भंडार माना
01:45जाता है
01:46लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के चलते सद्यों से जमी ये बर्फ तेजी से पिघल रही है
01:51जिसे जमी हुई चटानियो और मिट्टी खिसकर जानलेवा एवलांच बन रही है
01:55यह संकर सिर्फ नेपाल तक सिमित नहीं है
01:582021 में उत्राखंड के चमूली में ग्लेशियर तूटने से भारी तबाई हुई
02:032023 में जॉर्जिया के उत्तर पश्वी इलाके राचा के एक रिसॉट में भूस कलन से 33 लोगों की जान गई
02:1120 मई 2025 को सुर्जर लैंड के ब्लैटन गाओं का 90 प्रतिशत हिसा बिर्च ग्लेशियर के ध्वस्त होने से बरवाद
02:19हो गया
02:21सुर्जे लैंड में समय रहते चितामरी जारी कर दी गई और रेस्क्यू उपरेशिन शुरू हुआ जिससे लोगों की जान बच
02:27गई
02:27आज आधुनिक तक्नीक से नदी के जलस्तर, मुसलाधार बारिश और भूकम्पिय हलचल की रियर टाइविंग मॉनिटरिंग संभब है
02:34हाला कि अत्यादिक लागत की वज़ा से विकास्षिल देशों के लिए ऐसे सिस्टम लगाना एक बड़ी चुनौती है
02:40रहा की बात यह है कि पिछले साल Green Climate Fund ने नेपाल की मॉनिटरिंग इंफ्रास्रक्चर को अपवेट करने का
02:48ऐलान किया था
02:49ग्लेशिरों की पिगलने का दूसरा सबसे खतरनाक पहलू है पीने का पानी
02:53भारत, नेपाल, पाकिस्तान और चीन के करोडों लोगों की जिन्दगी और जिवन दाइनी नदिया इन्हीं ग्लेशिरों पर ठीकी है
03:00इनका तेजी से खत्म होना एक भैंकर जलसंकर की ओर इशारा कर रहा है
03:06ग्रीन हाउस गैसों के उस सर्जन में कटाउती करके ही ग्लेशिरों को पिगलने से धीमा किया जा सकता है
03:12अर्ली वर्निंग सिस्टम प्राकृतिक महाविनाश को भले न रोख सके
03:16लेकिन समय पर चितावनी देकर हजारों बेकसूर जिन्दगियों को जरूर बचा सकते हैं
03:22ब्यूरो रिपोर्ट एटीबी भारत

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