00:00साइकलोजी यह है कि जब कोई भी ऐसी अफवा फैलती है एक पहले कोई धार्मिक कारेग्रम में भी इसा वाता
00:09जिसमें काफी लोग मर गये थे यूपी में जहां पर फैलती है कि देखिए कुछ होने वाला या हो गया
00:14है तो बहुत से लोगों को अफरा थपरी हो जाती है और �
00:17बिना सोते समझे एक तरफ भागने लगते हैं बागने लगते हैं तो फिर एक दम सारे लोग उसी तरफ भागते
00:24हैं तो तो बहुत लोग
00:30कौका आपस में दब मर जाते हैं और अएसी इंसिदेंट में कभी भी किसी भी आदमी की मोद जो हुई
00:36है कई भी तर्थो झाल की जाता है कि वह किसी वीड़के लोगों के अंदर जाते हैं और दबने के
00:45बाद उनका उनकी चली जाती है यहां तक पुलिस की पेसे मामले में जो
00:50कोहीं पुलिस को ऐसी खबर मिलती है कि ऐसी भगदर का की वज़े से कोई ऐसा इंसीनिंट हो गया है
00:56तो सबसे पहली बात को है कि जब तक पुलिस को खबर मिलेगी तब तक तो बहुत कुछ नुक्सान हो
01:00चुका होता है लेकिन उसके बाद भी पुलिस की यह जूटी है कि वह �
01:05लाउड स्पीकर पर लाउड हेलर पर बताएं लोगों को घबराने के जूट नहीं है भगदर नावजें से काम ले और
01:12जो भी कोई अफवाएं फेला रहा है उसको अफवाओं को फेलाने से रोके जाए और कोई और ज्यादा गलत तरीके
01:21से किसी प्रिकार की बात को इंट्र
01:34हो जाता है या मर जाता है तो अगलता है तो वह कंट्रोल कौड करने कि बात को करने के
01:44लिए
01:46मैं समझता हूँ पुलिस को बड़ा ही उसके साथ में से काम लेना है
01:51और पब्लिक का कोपरेशन बहुत उसमें साथ जरूरी है
01:55तो यह सब जिए आपके को उसमें करना चाहिए
01:57गोल्डी जिब सब लंबे वक्स से आपने इस तरह के धार में कायो जोनों को देखा है
02:02और भगदर बचाई है आपने और इसके लावा लोगे मन में सवाल होता है
02:08कि आखिर अगर कभी आप इस तरह की भगदर में फंस गए तो वहाँ पर करना क्या चाहिए
02:11क्या इस तरह के वो चैश्रत धालू हो या दूसरा कोई पक्ष हो सकता है
02:15उनको भागना चाहिए उस वक्त अपनी जान बचाने के लिए रुकना चाहिए
02:19कौन सी ऐसी प्रक्रिया कौन सा ऐसा काम कर सकते हैं लोग जिससे उनको कम से कम हानी हो
02:25सबसे पहले तो जो भी ऐसी घटना होने की तेगार पर होती हैそう बड़े लोगों को चाहिए
02:31की जो बच्चे हैं या विमेन हैं उनको शुरक्षी जगें पर रखें उनको भगने की बजाए ऐसी जगें पर शुरक्षी
02:39जगें ढूंडे जाए वही आसपास ही ताकि एकदम जिस दर्ग से भागना है उदर क्योंगी रास्ते कम होते हैं वहां
02:45ते भागदोड में जब उनक
03:03पर शुरक्षी जगें ढूंडे जाए जहां पर जादा लोग इखठे ना आ सकें ऐसी जगें पर उनको देखना चाहिए ना
03:13कि भगदर के साथ जो लोग भाग रहें उदर ही भागना उससे वह ज्यादा मैं समझता हूं उनका नुक्षान हो
03:20सकता है तो उससे बसना चाहिए
03:21उसको ये भी चाहिए कि पुलिस की जो आनूंसमेंट है उसका पालन करें
03:28पुलिस जो बताती है क्योंगी पुलिस अपने पुलिस तरीके से उसको कंत्रोल करती है और वह जो न स्टेटेजी पुलिस
03:33बना है कि पुलिक का और के प्यूर OF
03:51बिल्कुल डिजीपी साब हमाई साथ डॉक्टर निशा खन्ना भी हमें जॉइन कर चुकी है मनोवे ग्यानी के तौर पर निशा
03:56मैं में बहुत शुक्या वन इंडिया को वक्त देने के लिए
03:58मैं आपसे सवाल मेरा सबसे पहले यही तहने वाला है कि बहक्दडर के वक्त सबसे ज़्यादा आपके मास डिस्क, आपके
04:06मन, आपके दिमाग में क्या चल रहा होता है
04:08यह सब ज़्यादा समझना ज़रूरी होता है, उसी के बाद आप कुछ नर्ण लेते हैं, आप भागना ज़रूरी समझते हैं,
04:14जैसा कि DGP साब ने बताया कि बच्चे और महिलाओं को बचाने की कोशिश करते हैं, आप खुद को अलग
04:18करते हैं, आप से यही समझना चाहेंगे
04:38वो भगदड की हाने को कम से कम कर पाएं, दिख्यों ऐसी पर्टिक्लो स्टेजिस में, बोस्ट आफ दे टाइम क्या
04:44होता है, हम फ्लाइट या फाइट की मोड में होते हैं, तो फाइट की मोड में क्या हो गया, सर्वाइपल
04:49मेकैनिजम काम करा, कि मुझे खुद को बचाना ह
04:52जैसे ही किसी ने रूमर फैलाया, अब वा फैलाई कि भाई बिजली की तार गेड़ गई है, तो सबसे पहले
04:58हमारी बॉडी को लगता है, कि अब मैं, मैं अपने आपको कही किसी तरीके से, जिसे बोलते हैं, मुझे अपने
05:06आपको खोना नहीं है, तो यह सर्वाइब, एक हो
05:22हो जाता है, तो जब सर्वाइब, जैसे हमारे सामने शेर आ गया, तो हमें, हमें पहले ही महसूस होता है,
05:27कि हमें उससे बचना है, तो उस बचने में हमारा दिवाग काम करना बंद कर देता है, तो ऐसे सिचुएशन
05:34में, मोस्ट आप टाइम यह हाधसे होते हैं, क्यूंकि हम
05:38फाइट मोड में आ गए हैं, कि मुझे अब अपने आपको बचाना है, और वो मास लेवल पर होना है,
05:44और देखिए, जब भी ऐसी चीज़े होती हैं, तो हमारे यहां ऐसे भी लोग होते हैं, जो मौके का फाइदा
05:50उठाते हैं, चाहे वो जन संक्या, समाज में 10% ऐसे लोग
06:08इज़ें कहीं न कहीं, हमने समझना पड़ेंगा, और false psychosis, कि डर का, डर में हमें क्या होता हैं, हम
06:16कि अपने आपको प्रोठेक्ट करना होता है, और उसी डर की व столько हैं से, क्योंकि हम anxious' करते कि
06:21future में क्या होगा,
06:22फ्यूचर में कहीं हम अपने आपको खो तो नहीं देंगे हमारी जान तो नहीं चली जाएगी या मुझे अपने साथ
06:27-साथ अपने घर वालों को भी बचाना है और लिजिए प्लेस में तो लोग जाते भी क्यों है क्योंकि वो
06:34विश्वास करते हैं कि जो हम नहीं कर सकते वो भ
06:52भाइट या फ्लाइड वाइड मिज्यॉरटी अफ थाईप फिर हम फ्रीज या फ्लाउप और अदर स्टेजिज बे आते हैं जो कि
06:58फ्यर की होती है क्रता है situation में है जिसमें हम फ्रीज मोड में चले जाएगे और इस पर्टिकलर सिट्वेशन
07:08में जो लोग है मुझे
07:10प्लाइट मोड में ही जाते हैं
07:13क्योंकि मुझे अपने आपको बचाना है
07:15बिल्कुल आपने बताया कि हमें क्या नहीं करना
07:18एक और इसका जो दूसरा पक्ष है कि आखिर हम करें क्या
07:20कोई भी हम में से आप मैं या कोई भी इस तरह की भगदड़ का शिकार हो सकता है
07:24तो भीड में सबसे पहला अगर हम कोई उपाय कह लिजिए
07:28सबसे पहला सॉलुशन की तरह अगर दिमाग लगाएं
07:30तो क्या हो सकता है
07:32देखिए सबसे पहले कि अगर ये खबर आई है
07:35तो हम उस खबर को कितना सही मानते हैं
07:39और एक इंसान कह रहा है
07:40ये हमारे समाज का ये है
07:44कि हम किसी भी information को double check नहीं करते हैं
07:47वो double check करना बहुत जरूरी है
07:50अगर हम double check करेंगे दुसरा situations जो है
07:53वो बहुत release हो सकती है
07:55जैसे आपके पास WhatsApp पर information आती है
07:57तो WhatsApp पर information ऐसे spread होती है
08:00बिना उसकी acknowledgement किये कि वो सही है या गलत है
08:03अगर आपको किसी रिष्टेदार ने, किसी दोस्त ने कोई बात की है
08:07तो हमारा दिमाग पहले वो information को collect नहीं करता कि ये हुई है
08:11सीधा इस survival mode में चला जाता है
08:13इसी लिए को हम emotional regulation बोलते है
08:17हमारा खुद पर कितना control है
08:20अगर ऐसी situation में कुछ हुआ है
08:22तो हमने पहले अपने आपको comfort कराना है
08:25कि अगर ऐसा अगर कोई महौल में हो गया है
08:28तो जतना हम सहीम रखेंगे
08:30उतना ही situation से बाहर जल्दी निकल पाएंगे
08:32और अराम से निकल पाएंगे
08:34क्योंकि self awareness कम है
08:36self awareness का मतलब है
08:37मेरे behavior का दूसरों पर क्या असर होगा
08:52से 15% लोग है
08:54जिने ये समझ में आता है
08:56मैं क्या चाहता हूँ
08:58और मेरे behavior का दूसरों पर क्या आसर पड़ेगा
09:01और अगर मुझे कोई बात कहीं जा रही है
09:04तो मैं उसे feedback पे तोर पर लूँ
09:06नहीं लूँ
09:06और मुझे किसी बात को सुनकर
09:09react नहीं करना है
09:11रिस्पॉंड करना है
09:13तो कहीं न कहीं ये हमें
09:14इंडिकेशन भी देता है
09:16कि जब हम किसी कठिन समस्या में
09:18या स्ट्वेस की सिचुएशन में आते हूं
09:21तो हमें सायम रखता है
09:23और वो कंट्रोल हमारे हाथ में है
09:26इंवार्मेंट हमें
09:29जिसे impact करेगा
09:30पर उस environment से हमें impact नहीं होना
09:33उसके लिए हमें अपने आप पर काम करने की जरुरत है
09:36तो जब mass level पर काम हो रहा है
09:38और mass level पर problem आ रही है
09:40तो हर इंसान की अपनी जिमेदारी बनती है
09:43ऐसी situation पर आकर
09:45सबको ये बोले कोई भी जो जादा
09:48कि इस वक्त संयम रखना है अगर यह लोग भाग रहे तो दस पंद्रा लोग या पचास लोग ऐसे भी
09:55होते बोल यह भागिये मत शांती बनाए रखिए तो शायद उस भीड को कंट्रोल किया जा सकता और मैं फिर
10:04वही कहूंगी कि हम दूसरों में जब हम फियर की सिच्वेशन
10:07में होते हैं तो रिलिजिस प्लेसेस पर भी हम ज्यादा इसी वज़ा से जाते हैं कि जो मेरे कंट्रोल के
10:13बार है वो परमात्मा पर फेट में तब दील हो और वो फेट से हमें उस प्रॉब्लम से निकाले तो
10:19जिस परमात्मा के धर भी वह आये थे तो मुझे वही लग रहे ह
10:23हम शायद बोलतों रहे हैं पर फेट लेकर नहीं आए अब जो आप सीन्स भी दिखा रहे हैं तो आप
10:28देखिए कैसे श्रधालू मतलब इतना फेट लेकर आ रहे हैं पर वो फेट श्याद सोच में है एक्शन में नहीं
10:35बिल्कुल मैं आपके बाद से ही एक सवाल निकलता है और एक और चोटा सवाल मैं जोड़ूँगा आपने का कि
10:40इस तरगे कोई अफ़वाह आती है जिसकि आज करेंट वाले तार का जिकर हुआ तो इंस्टेंट कई बार होता है
10:47कि फोन भी नहीं होता साथ में फोन जमा हो जात
11:03आपसे कि वहां उस वक्त ऐसा क्या दिमाग काम करता है कि एक तरफ एक लाइन में एक सुर में
11:08लोग भागना शुरू जाते हैं कई बार हमने देखा कि कोई गेट खुलता है तो एक छोड से भगदर होती
11:13है लेकिन जब हमने बिहार देखा उज्जैन देखा वहां पे तो का
11:32का म को कर रहे हैं तो अधिकतर हम यही सोचते हैं वह सही कर रहे हैं और उसी में
11:37हमारा दिमाग चलता है तो हम एंफ्लूएंस बहुत जादा होते हैं जहां मास लेवल है गिव फिर एन एक्जामपल आज
11:45करकी जो हमारे इंफ्लूएंसर्जैन अगर आप किसी भी इंसान के 10 �
11:49फॉल्वर देखें, पंद्रा लाग फॉल्वर देखें, बीस लाग फॉल्वर देखें, तो वो इनसान बहुत अच्छा है, बहुत नॉलिजेबल है, पर
11:58अगर किसी जगा पर लोग भीड कम है, तो शायद वो अच्छा नहीं, ऐसा एक बहुत जर्नल एक सोच है,
12:06जैसे आप म
12:19किसी हाईवे पर थी, हाईवे पर दो साइड होती है, एक लेफ्ट और एक राइड जो आने मतलब इस एक
12:25रोड थी, जिस पर दो लाइन थी, एक तरफ जा रहे थे, और अधिक तरह हम देख रहे थे, ब्लाइं
12:31बहुत लंबी दी और एक तरफ लाइड चोटी दी, तो मुझ
12:45अधिक रहे हुए, आगे वाले लोगों को रोक रही थी, यह मैं सोच रही थी, कि मुझे लाइन से नहीं
12:52अतना आगे वाले लोगों को रोक रही है, 15 मिनट बाद मुझे पता चला, वो इतनी लंबी लाइन जो थी,
12:58उसमें से आदी से ज़्यादा लाइन तो CNG की थी, जो इ
13:14जो डर लग रहा है, तो मैं इस situation में मेरे पास क्या options हैं, और मैं कौन सा सही
13:20decision ले सकता हूं, emotional dysregulation में जो regulation का जो first step होता है, मैं क्या मैसूस कर रहा
13:28हूं, मेरे पास क्या options है, मेरा mind और body एक alignment में है, और मैं right decision हूं, यह
13:37सब उन seconds में करना होता है, और वो again मैं वही seconds में करने की �
13:42यह हर इंसान का conscious decide करता है, जैसे मुझे cold ring पीनी है के नहीं पीनी है, वो मेरी
13:48सेहत के लिए नुकसान दायक है, हम ही decide करते हैं, तो cold ring खाने पीने से लेकर है, उसी
13:56तरह जब stress की situation में आते हैं, तो वो भी हमारी conscious choice में हो जाता है, कि मुझे
14:03यह करना है या नहीं करना है, और �
14:07यह एक दिन में नहीं आता है, यह प्रैक्टिस से आता है, अगर हम प्रैक्टिस करेंगे, जतने भी लोग यहां
14:16शामिल थे, अधिक्तर वो कितने पड़े लिखे लोग थे, अगिन, self-awareness का वैसे पड़े लिखे होने से भी कोई
14:22नाता नहीं है, बट हम कितना situation को समझते हैं
14:28और कितना कंट्रोल कर सकते हैं, कई बार बहुत सारे लोग अवेर भी होते हैं, पर उनमें आवाज उठाने की
14:34हमत नहीं होती, क्योंकि उन्होंने कभी लीडर्शिप लिया ही नहीं होता, और अधिकतर ऐसा होता है कि जो लोग लीडर्शिप
14:41की पोजीशन में होते हैं, उनक
14:55झाल
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