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Bihar Lakhisarai Stampede पर उठे बड़े सवाल, Electric Wire की अफवाह या भारी अव्यवस्था? जानिए आखिर लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में क्या हुआ था और कैसे इस तरह की भगदड़ से बचा जा सकता है।

A tragic stampede at the Ashok Dham Temple in Lakhisarai district, Bihar, resulted in the death of 7 female devotees and left several injured during the Shravan Monday pilgrimage. The incident was triggered by an unprecedented rush of devotees, breaking barricades, and panic caused by rumors of a live electrical wire falling. This video dives deep into the causes of the Bihar stampede, crowd control failures, and key survival strategies and crowd dynamics science to save lives during a stampede.

#BiharStampede #Lakhisarai #OneindiaHindi #Sawan2026

~HT.410~ED.104~PR.250~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00साइकलोजी यह है कि जब कोई भी ऐसी अफवा फैलती है एक पहले कोई धार्मिक कारेग्रम में भी इसा वाता
00:09जिसमें काफी लोग मर गये थे यूपी में जहां पर फैलती है कि देखिए कुछ होने वाला या हो गया
00:14है तो बहुत से लोगों को अफरा थपरी हो जाती है और �
00:17बिना सोते समझे एक तरफ भागने लगते हैं बागने लगते हैं तो फिर एक दम सारे लोग उसी तरफ भागते
00:24हैं तो तो बहुत लोग
00:30कौका आपस में दब मर जाते हैं और अएसी इंसिदेंट में कभी भी किसी भी आदमी की मोद जो हुई
00:36है कई भी तर्थो झाल की जाता है कि वह किसी वीड़के लोगों के अंदर जाते हैं और दबने के
00:45बाद उनका उनकी चली जाती है यहां तक पुलिस की पेसे मामले में जो
00:50कोहीं पुलिस को ऐसी खबर मिलती है कि ऐसी भगदर का की वज़े से कोई ऐसा इंसीनिंट हो गया है
00:56तो सबसे पहली बात को है कि जब तक पुलिस को खबर मिलेगी तब तक तो बहुत कुछ नुक्सान हो
01:00चुका होता है लेकिन उसके बाद भी पुलिस की यह जूटी है कि वह �
01:05लाउड स्पीकर पर लाउड हेलर पर बताएं लोगों को घबराने के जूट नहीं है भगदर नावजें से काम ले और
01:12जो भी कोई अफवाएं फेला रहा है उसको अफवाओं को फेलाने से रोके जाए और कोई और ज्यादा गलत तरीके
01:21से किसी प्रिकार की बात को इंट्र
01:34हो जाता है या मर जाता है तो अगलता है तो वह कंट्रोल कौड करने कि बात को करने के
01:44लिए
01:46मैं समझता हूँ पुलिस को बड़ा ही उसके साथ में से काम लेना है
01:51और पब्लिक का कोपरेशन बहुत उसमें साथ जरूरी है
01:55तो यह सब जिए आपके को उसमें करना चाहिए
01:57गोल्डी जिब सब लंबे वक्स से आपने इस तरह के धार में कायो जोनों को देखा है
02:02और भगदर बचाई है आपने और इसके लावा लोगे मन में सवाल होता है
02:08कि आखिर अगर कभी आप इस तरह की भगदर में फंस गए तो वहाँ पर करना क्या चाहिए
02:11क्या इस तरह के वो चैश्रत धालू हो या दूसरा कोई पक्ष हो सकता है
02:15उनको भागना चाहिए उस वक्त अपनी जान बचाने के लिए रुकना चाहिए
02:19कौन सी ऐसी प्रक्रिया कौन सा ऐसा काम कर सकते हैं लोग जिससे उनको कम से कम हानी हो
02:25सबसे पहले तो जो भी ऐसी घटना होने की तेगार पर होती हैそう बड़े लोगों को चाहिए
02:31की जो बच्चे हैं या विमेन हैं उनको शुरक्षी जगें पर रखें उनको भगने की बजाए ऐसी जगें पर शुरक्षी
02:39जगें ढूंडे जाए वही आसपास ही ताकि एकदम जिस दर्ग से भागना है उदर क्योंगी रास्ते कम होते हैं वहां
02:45ते भागदोड में जब उनक
03:03पर शुरक्षी जगें ढूंडे जाए जहां पर जादा लोग इखठे ना आ सकें ऐसी जगें पर उनको देखना चाहिए ना
03:13कि भगदर के साथ जो लोग भाग रहें उदर ही भागना उससे वह ज्यादा मैं समझता हूं उनका नुक्षान हो
03:20सकता है तो उससे बसना चाहिए
03:21उसको ये भी चाहिए कि पुलिस की जो आनूंसमेंट है उसका पालन करें
03:28पुलिस जो बताती है क्योंगी पुलिस अपने पुलिस तरीके से उसको कंत्रोल करती है और वह जो न स्टेटेजी पुलिस
03:33बना है कि पुलिक का और के प्यूर OF
03:51बिल्कुल डिजीपी साब हमाई साथ डॉक्टर निशा खन्ना भी हमें जॉइन कर चुकी है मनोवे ग्यानी के तौर पर निशा
03:56मैं में बहुत शुक्या वन इंडिया को वक्त देने के लिए
03:58मैं आपसे सवाल मेरा सबसे पहले यही तहने वाला है कि बहक्दडर के वक्त सबसे ज़्यादा आपके मास डिस्क, आपके
04:06मन, आपके दिमाग में क्या चल रहा होता है
04:08यह सब ज़्यादा समझना ज़रूरी होता है, उसी के बाद आप कुछ नर्ण लेते हैं, आप भागना ज़रूरी समझते हैं,
04:14जैसा कि DGP साब ने बताया कि बच्चे और महिलाओं को बचाने की कोशिश करते हैं, आप खुद को अलग
04:18करते हैं, आप से यही समझना चाहेंगे
04:38वो भगदड की हाने को कम से कम कर पाएं, दिख्यों ऐसी पर्टिक्लो स्टेजिस में, बोस्ट आफ दे टाइम क्या
04:44होता है, हम फ्लाइट या फाइट की मोड में होते हैं, तो फाइट की मोड में क्या हो गया, सर्वाइपल
04:49मेकैनिजम काम करा, कि मुझे खुद को बचाना ह
04:52जैसे ही किसी ने रूमर फैलाया, अब वा फैलाई कि भाई बिजली की तार गेड़ गई है, तो सबसे पहले
04:58हमारी बॉडी को लगता है, कि अब मैं, मैं अपने आपको कही किसी तरीके से, जिसे बोलते हैं, मुझे अपने
05:06आपको खोना नहीं है, तो यह सर्वाइब, एक हो
05:22हो जाता है, तो जब सर्वाइब, जैसे हमारे सामने शेर आ गया, तो हमें, हमें पहले ही महसूस होता है,
05:27कि हमें उससे बचना है, तो उस बचने में हमारा दिवाग काम करना बंद कर देता है, तो ऐसे सिचुएशन
05:34में, मोस्ट आप टाइम यह हाधसे होते हैं, क्यूंकि हम
05:38फाइट मोड में आ गए हैं, कि मुझे अब अपने आपको बचाना है, और वो मास लेवल पर होना है,
05:44और देखिए, जब भी ऐसी चीज़े होती हैं, तो हमारे यहां ऐसे भी लोग होते हैं, जो मौके का फाइदा
05:50उठाते हैं, चाहे वो जन संक्या, समाज में 10% ऐसे लोग
06:08इज़ें कहीं न कहीं, हमने समझना पड़ेंगा, और false psychosis, कि डर का, डर में हमें क्या होता हैं, हम
06:16कि अपने आपको प्रोठेक्ट करना होता है, और उसी डर की व столько हैं से, क्योंकि हम anxious' करते कि
06:21future में क्या होगा,
06:22फ्यूचर में कहीं हम अपने आपको खो तो नहीं देंगे हमारी जान तो नहीं चली जाएगी या मुझे अपने साथ
06:27-साथ अपने घर वालों को भी बचाना है और लिजिए प्लेस में तो लोग जाते भी क्यों है क्योंकि वो
06:34विश्वास करते हैं कि जो हम नहीं कर सकते वो भ
06:52भाइट या फ्लाइड वाइड मिज्यॉरटी अफ थाईप फिर हम फ्रीज या फ्लाउप और अदर स्टेजिज बे आते हैं जो कि
06:58फ्यर की होती है क्रता है situation में है जिसमें हम फ्रीज मोड में चले जाएगे और इस पर्टिकलर सिट्वेशन
07:08में जो लोग है मुझे
07:10प्लाइट मोड में ही जाते हैं
07:13क्योंकि मुझे अपने आपको बचाना है
07:15बिल्कुल आपने बताया कि हमें क्या नहीं करना
07:18एक और इसका जो दूसरा पक्ष है कि आखिर हम करें क्या
07:20कोई भी हम में से आप मैं या कोई भी इस तरह की भगदड़ का शिकार हो सकता है
07:24तो भीड में सबसे पहला अगर हम कोई उपाय कह लिजिए
07:28सबसे पहला सॉलुशन की तरह अगर दिमाग लगाएं
07:30तो क्या हो सकता है
07:32देखिए सबसे पहले कि अगर ये खबर आई है
07:35तो हम उस खबर को कितना सही मानते हैं
07:39और एक इंसान कह रहा है
07:40ये हमारे समाज का ये है
07:44कि हम किसी भी information को double check नहीं करते हैं
07:47वो double check करना बहुत जरूरी है
07:50अगर हम double check करेंगे दुसरा situations जो है
07:53वो बहुत release हो सकती है
07:55जैसे आपके पास WhatsApp पर information आती है
07:57तो WhatsApp पर information ऐसे spread होती है
08:00बिना उसकी acknowledgement किये कि वो सही है या गलत है
08:03अगर आपको किसी रिष्टेदार ने, किसी दोस्त ने कोई बात की है
08:07तो हमारा दिमाग पहले वो information को collect नहीं करता कि ये हुई है
08:11सीधा इस survival mode में चला जाता है
08:13इसी लिए को हम emotional regulation बोलते है
08:17हमारा खुद पर कितना control है
08:20अगर ऐसी situation में कुछ हुआ है
08:22तो हमने पहले अपने आपको comfort कराना है
08:25कि अगर ऐसा अगर कोई महौल में हो गया है
08:28तो जतना हम सहीम रखेंगे
08:30उतना ही situation से बाहर जल्दी निकल पाएंगे
08:32और अराम से निकल पाएंगे
08:34क्योंकि self awareness कम है
08:36self awareness का मतलब है
08:37मेरे behavior का दूसरों पर क्या असर होगा
08:52से 15% लोग है
08:54जिने ये समझ में आता है
08:56मैं क्या चाहता हूँ
08:58और मेरे behavior का दूसरों पर क्या आसर पड़ेगा
09:01और अगर मुझे कोई बात कहीं जा रही है
09:04तो मैं उसे feedback पे तोर पर लूँ
09:06नहीं लूँ
09:06और मुझे किसी बात को सुनकर
09:09react नहीं करना है
09:11रिस्पॉंड करना है
09:13तो कहीं न कहीं ये हमें
09:14इंडिकेशन भी देता है
09:16कि जब हम किसी कठिन समस्या में
09:18या स्ट्वेस की सिचुएशन में आते हूं
09:21तो हमें सायम रखता है
09:23और वो कंट्रोल हमारे हाथ में है
09:26इंवार्मेंट हमें
09:29जिसे impact करेगा
09:30पर उस environment से हमें impact नहीं होना
09:33उसके लिए हमें अपने आप पर काम करने की जरुरत है
09:36तो जब mass level पर काम हो रहा है
09:38और mass level पर problem आ रही है
09:40तो हर इंसान की अपनी जिमेदारी बनती है
09:43ऐसी situation पर आकर
09:45सबको ये बोले कोई भी जो जादा
09:48कि इस वक्त संयम रखना है अगर यह लोग भाग रहे तो दस पंद्रा लोग या पचास लोग ऐसे भी
09:55होते बोल यह भागिये मत शांती बनाए रखिए तो शायद उस भीड को कंट्रोल किया जा सकता और मैं फिर
10:04वही कहूंगी कि हम दूसरों में जब हम फियर की सिच्वेशन
10:07में होते हैं तो रिलिजिस प्लेसेस पर भी हम ज्यादा इसी वज़ा से जाते हैं कि जो मेरे कंट्रोल के
10:13बार है वो परमात्मा पर फेट में तब दील हो और वो फेट से हमें उस प्रॉब्लम से निकाले तो
10:19जिस परमात्मा के धर भी वह आये थे तो मुझे वही लग रहे ह
10:23हम शायद बोलतों रहे हैं पर फेट लेकर नहीं आए अब जो आप सीन्स भी दिखा रहे हैं तो आप
10:28देखिए कैसे श्रधालू मतलब इतना फेट लेकर आ रहे हैं पर वो फेट श्याद सोच में है एक्शन में नहीं
10:35बिल्कुल मैं आपके बाद से ही एक सवाल निकलता है और एक और चोटा सवाल मैं जोड़ूँगा आपने का कि
10:40इस तरगे कोई अफ़वाह आती है जिसकि आज करेंट वाले तार का जिकर हुआ तो इंस्टेंट कई बार होता है
10:47कि फोन भी नहीं होता साथ में फोन जमा हो जात
11:03आपसे कि वहां उस वक्त ऐसा क्या दिमाग काम करता है कि एक तरफ एक लाइन में एक सुर में
11:08लोग भागना शुरू जाते हैं कई बार हमने देखा कि कोई गेट खुलता है तो एक छोड से भगदर होती
11:13है लेकिन जब हमने बिहार देखा उज्जैन देखा वहां पे तो का
11:32का म को कर रहे हैं तो अधिकतर हम यही सोचते हैं वह सही कर रहे हैं और उसी में
11:37हमारा दिमाग चलता है तो हम एंफ्लूएंस बहुत जादा होते हैं जहां मास लेवल है गिव फिर एन एक्जामपल आज
11:45करकी जो हमारे इंफ्लूएंसर्जैन अगर आप किसी भी इंसान के 10 �
11:49फॉल्वर देखें, पंद्रा लाग फॉल्वर देखें, बीस लाग फॉल्वर देखें, तो वो इनसान बहुत अच्छा है, बहुत नॉलिजेबल है, पर
11:58अगर किसी जगा पर लोग भीड कम है, तो शायद वो अच्छा नहीं, ऐसा एक बहुत जर्नल एक सोच है,
12:06जैसे आप म
12:19किसी हाईवे पर थी, हाईवे पर दो साइड होती है, एक लेफ्ट और एक राइड जो आने मतलब इस एक
12:25रोड थी, जिस पर दो लाइन थी, एक तरफ जा रहे थे, और अधिक तरह हम देख रहे थे, ब्लाइं
12:31बहुत लंबी दी और एक तरफ लाइड चोटी दी, तो मुझ
12:45अधिक रहे हुए, आगे वाले लोगों को रोक रही थी, यह मैं सोच रही थी, कि मुझे लाइन से नहीं
12:52अतना आगे वाले लोगों को रोक रही है, 15 मिनट बाद मुझे पता चला, वो इतनी लंबी लाइन जो थी,
12:58उसमें से आदी से ज़्यादा लाइन तो CNG की थी, जो इ
13:14जो डर लग रहा है, तो मैं इस situation में मेरे पास क्या options हैं, और मैं कौन सा सही
13:20decision ले सकता हूं, emotional dysregulation में जो regulation का जो first step होता है, मैं क्या मैसूस कर रहा
13:28हूं, मेरे पास क्या options है, मेरा mind और body एक alignment में है, और मैं right decision हूं, यह
13:37सब उन seconds में करना होता है, और वो again मैं वही seconds में करने की �
13:42यह हर इंसान का conscious decide करता है, जैसे मुझे cold ring पीनी है के नहीं पीनी है, वो मेरी
13:48सेहत के लिए नुकसान दायक है, हम ही decide करते हैं, तो cold ring खाने पीने से लेकर है, उसी
13:56तरह जब stress की situation में आते हैं, तो वो भी हमारी conscious choice में हो जाता है, कि मुझे
14:03यह करना है या नहीं करना है, और �
14:07यह एक दिन में नहीं आता है, यह प्रैक्टिस से आता है, अगर हम प्रैक्टिस करेंगे, जतने भी लोग यहां
14:16शामिल थे, अधिक्तर वो कितने पड़े लिखे लोग थे, अगिन, self-awareness का वैसे पड़े लिखे होने से भी कोई
14:22नाता नहीं है, बट हम कितना situation को समझते हैं
14:28और कितना कंट्रोल कर सकते हैं, कई बार बहुत सारे लोग अवेर भी होते हैं, पर उनमें आवाज उठाने की
14:34हमत नहीं होती, क्योंकि उन्होंने कभी लीडर्शिप लिया ही नहीं होता, और अधिकतर ऐसा होता है कि जो लोग लीडर्शिप
14:41की पोजीशन में होते हैं, उनक
14:55झाल
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