00:00मोते ने बदाया ने रिजन कर दिया
00:04मेरे जैन्जी जनरेशन के लेजी दोस्तो
00:07सिस्टम ने हम बेरोजगार लोगों को कोक्रोज बोला है
00:10तो हमने सोचा क्यों ना हम सब मिलकर अपनी ही पार्टी बनाए
00:13इसलिए बनिये कोक्रोज जन्ता पार्टी
00:16अभीजी दिपके ने एलान किया है कि कौकरुप जिन्ता पार्टी का जन सहलाब उतरने वाला है दिल्ली में
00:33हर आंदोलन की एक शुरुवात होती है
00:35कुछ आंदोलनों की शुरुवात संसत से होती है
00:38कुछ अदालतों से
00:39और कुछ साधारन लोगों के उस फैसले से
00:43जब है चुप रहने से इनकार कर देते हैं
00:56करीब डेड महीने तक एक छोटा सा विरूध
00:58देश के सबसे चर्चित युवान दोलनों में बदल गया
01:05उसकी रण भूमी थी दिल्ली का जंतरमंतर
01:17उसकी मांग थी जवाब देही
01:23उसकी ताकत थे देश भर से आए हजारों युवा
01:34कौकरोच की सियाथा में हर पड़ाव पर मौझूद था
01:37वन इंडिया
01:43आंधोलन के परिणाम की भविश्वानी के लिए नहीं
01:46किसी राजनीतिक समिक्षा के लिए नहीं
01:48पबलिसिटी के लिए भी नहीं
01:51कदम दरकदम इस संग्रश का साक्षे बनने के लिए
01:54वन इंडिया का क्रू तैनाद था
02:10एक नए इतिहास को दस्तावेज में कैद करने के लिए
02:14वो इतिहास जो लिखा जा रहा था जंतरमंतर की प्राचीर से
02:196 जून बो दिन जब पहली बार कौकरोच का आंदोलन
02:23सोशल मीडिया पेज से निकल कर भारत की धरती बर उत्रा
02:27शुरुआत में हर दूसरे प्रटेस्ट जैसा लगने वाला ये मूवमेंट
02:31देखते ही देखते देश भर के छातर युवाओं को आकरशित करने लगा
02:35आंदोलन का दाइरा बढ़ता गया
02:37लखनव, पुने, हैदराबाद, जैपुर और देश के कई अन्यकोने
02:42थोड़े ही वक्त में कारवां बढ़ा होता गया
02:45कुछ लोग अपनी आवाज बुलंद करने आये थे
02:47कुछ मदद का हात बढ़ाने तो कुछ इस एधिहासिक मोड का गवाह बनने पहुचे थे
02:53जैसे जैसे लोग आकर मिलते गए, कारवां बढ़ता गया
02:56और फिर पूरे देश की नजरे इस आंदोलन पर टिक गई
03:00लेकिन ये आंदोलन अपने सबसे एहम अध्याय की तैयारी कर रहा था
03:08दिल्ली, 20 जून
03:10आंदोलन भारत की सियासी धड़कन कहे जाने वाले ठिकाने पर पहुच चुगा था
03:16देखते ही देखते ये प्रदर्शन स्थल एक नए आशियाने में तबदील हो गया
03:20आशियान प्रदर्शन कारियों का
03:23स्टूडेंट्स, टीचर्स, पेरेंट्स, वॉलन्टीर्स, प्रोफेशनल्स, सीनियर सिरिजन्स और आमनागरिक
03:29यहां हर दिन की शुरुवात सूरज उबने से पहले होती थी और राते मध्यरात्री के पार तक गुंजार रहती थी
03:36यान दोलन अब महस सांसे नहीं ले रहा था, बलकि एक सूव व्यवस्थित आकार ले रहा था
03:42यह प्रदर्शन देश की सबसे ज्यादा नजर रखी जाने वाली खबरों में से एक बन चुका था
03:48शुरुवात में जिस आंदोलन को तथा कथित में इन्स्ट्रीम मीडिया लगभग नजर अंदास कर रहा था
03:53अब देश के कोने कोने से पत्रकार वहाँ जुटने लगे
04:06कुछ दूर से परिस्थितियां समझ रहे थे तो कुछ आंदोलन कारियों के बीच ही जम गए थे
04:12इतने लंबे आंदोलन को कवर करना किसी चुनोती से कम नहीं होता
04:16यहां पल-पल खबरें बदलती हैं अफवाही सच से तेज दोडती हैं और दावो प्रतिदावों की होड मची रहती है
04:27इस पूरे घटनाकरम के दौरान वन इंडिया का ध्यान जमीनी रिपोर्टिंग और निश्पक्षता पर डिका रहा
04:33कोई भी खबर दिखाने से पहले हर पहलू की पुष्टी करना और सीधे मौके से मिली जानकारी पर ही भरोसा
04:39करना
04:39कई हफ़तों के दौरान हमारे पत्रकारों ने सेलिब्रेशन के लमोहों को देखा
04:44प्रतिरोध का जोश और जुनून
04:46कई बार ठका देने वाले दिन तीखी बहसे, सहयोग, समरपण, विरोध
04:52फिर आता है 20 जुलाई, एक ऐसा दिन जिसने इस अंदोलन का रुख ही मोर दिया
05:08अंदोलन कारियों का जन सैलाब निकला
05:10माहोल में तनाव, चिंता, जोश, आक्रोश, इमोशन्स का गजब कॉंट्रास्ट
05:16पुलिस ने इनकलाबी भीड को पीछे हटाने की कोशिश की
05:19सेंट्रल दिल्ली मानो च्छावनी में तब्दील हो गई हो
05:22जड़ पे शुरू हुई, लाठिया चली, पत्थर और आसू गैस के गोले दागे गए
05:27कई प्रदर्शनकारी जखमी हुए, सुरक्षाबल के जवानों को भी चोटे आए
05:31दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हालाद बेगाडने के आरोप लगाए थे
05:36जैसे जैसे हालाद बेकाबू हो रहे थे, हमारे कैमरे हर एंगर और हर जगर से इस युगांत्रिक आंदोलन को दर्च
05:43कर रहे थे
05:44राजनी दिखल चल तेज हो गई, सवाल उठाए गए और बैठकों का दौर चला
05:49केंद्रिय सिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्विकार कर लिया गया
05:54इसके तुरंत बाद आंदोलन कारियों ने प्रदर्शन खत्म करने का एलान कर दिया
05:59देश के लोग तांत्रे के तिहास में ये एक मील का पत्थर था
06:15पत्रकारता अकसर एक बेहत सीधे सवाल से शुरू होती है
06:18क्या हुआ था और इस सवाल का जवाब देने के लिए चाहिए धैर्या, मौजूद्गी और अटूट निष्ठा
06:246 जून के सांकेतिक प्रदर्शन से 25 जुलाई की अंतिम घोशना तक
06:30वन इंडिया मैदान में डटा रहा
06:31जब अनेक स्वेंभू मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन की आवाज को नजर अंदास किया
06:36वन इंडिया अपनी पूरी शक्ती और निष्ठा से बिना आल्गरिदम और एकॉनमी की चिंदा किये
06:42मैदान में डटा रहा
06:54सरक से लेकर संसथ तक
06:56ग्राणून जीरो से लेकर स्टूडियो तक
06:57वन इंडिया लोकतंत्र के चौथे स्थम्भ की शबत का जीवंत निर्वाह करते हुए
07:02इस पूरे विवर्ष को निरंतर तटस्त स्वर देता रहा
07:06क्योंकि जब इतिहास लिखा जाता है
07:08तो वो केवल समाचार की सुर्खियों के दम पर नहीं
07:11बलकि उन लमहों से लिखा जाता है
07:13जिने हैं करतव्य निष्ट मीडिया के कैमरे
07:16खामोशी से दर्च कर रहे होते हैं
07:18यह उन सभी बैच्चों के लिए
07:20जिनकी जिन्दगी परमाने बदाने लिए थी
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