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करीब 50 दिनों तक दिल्ली का जंतर-मंतर एक ऐसे युवा आंदोलन का गवाह बना, जिसने देखते ही देखते देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 6 जून से 25 जुलाई तक चले इस सफर में हजारों युवा जुड़े, आंदोलन ने राष्ट्रीय स्वरूप लिया और सत्ता के सामने जवाबदेही के सवाल खड़े किए। यह सिर्फ एक Protest की कहानी नहीं, बल्कि उस आंदोलन के इतिहास बनने की कहानी है। इस Documentary में देखिए CJP Movement की पूरी Inside Story—शुरुआत, विस्तार, Jantar Mantar, 20 जुलाई का Parliament March, टकराव, Turning Point और आंदोलन का अंत। साथ ही देखिए OneIndia की 50 दिनों की painstaking Ground Reporting—जब कई बड़े मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को नजरअंदाज किया, OneIndia की टीम लगातार Ground Zero पर मौजूद रही।



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~HT.178~GR.510~PR.100~VG.HM~

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Transcript
00:00मोते ने बदाया ने रिजन कर दिया
00:04मेरे जैन्जी जनरेशन के लेजी दोस्तो
00:07सिस्टम ने हम बेरोजगार लोगों को कोक्रोज बोला है
00:10तो हमने सोचा क्यों ना हम सब मिलकर अपनी ही पार्टी बनाए
00:13इसलिए बनिये कोक्रोज जन्ता पार्टी
00:16अभीजी दिपके ने एलान किया है कि कौकरुप जिन्ता पार्टी का जन सहलाब उतरने वाला है दिल्ली में
00:33हर आंदोलन की एक शुरुवात होती है
00:35कुछ आंदोलनों की शुरुवात संसत से होती है
00:38कुछ अदालतों से
00:39और कुछ साधारन लोगों के उस फैसले से
00:43जब है चुप रहने से इनकार कर देते हैं
00:56करीब डेड महीने तक एक छोटा सा विरूध
00:58देश के सबसे चर्चित युवान दोलनों में बदल गया
01:05उसकी रण भूमी थी दिल्ली का जंतरमंतर
01:17उसकी मांग थी जवाब देही
01:23उसकी ताकत थे देश भर से आए हजारों युवा
01:34कौकरोच की सियाथा में हर पड़ाव पर मौझूद था
01:37वन इंडिया
01:43आंधोलन के परिणाम की भविश्वानी के लिए नहीं
01:46किसी राजनीतिक समिक्षा के लिए नहीं
01:48पबलिसिटी के लिए भी नहीं
01:51कदम दरकदम इस संग्रश का साक्षे बनने के लिए
01:54वन इंडिया का क्रू तैनाद था
02:10एक नए इतिहास को दस्तावेज में कैद करने के लिए
02:14वो इतिहास जो लिखा जा रहा था जंतरमंतर की प्राचीर से
02:196 जून बो दिन जब पहली बार कौकरोच का आंदोलन
02:23सोशल मीडिया पेज से निकल कर भारत की धरती बर उत्रा
02:27शुरुआत में हर दूसरे प्रटेस्ट जैसा लगने वाला ये मूवमेंट
02:31देखते ही देखते देश भर के छातर युवाओं को आकरशित करने लगा
02:35आंदोलन का दाइरा बढ़ता गया
02:37लखनव, पुने, हैदराबाद, जैपुर और देश के कई अन्यकोने
02:42थोड़े ही वक्त में कारवां बढ़ा होता गया
02:45कुछ लोग अपनी आवाज बुलंद करने आये थे
02:47कुछ मदद का हात बढ़ाने तो कुछ इस एधिहासिक मोड का गवाह बनने पहुचे थे
02:53जैसे जैसे लोग आकर मिलते गए, कारवां बढ़ता गया
02:56और फिर पूरे देश की नजरे इस आंदोलन पर टिक गई
03:00लेकिन ये आंदोलन अपने सबसे एहम अध्याय की तैयारी कर रहा था
03:08दिल्ली, 20 जून
03:10आंदोलन भारत की सियासी धड़कन कहे जाने वाले ठिकाने पर पहुच चुगा था
03:16देखते ही देखते ये प्रदर्शन स्थल एक नए आशियाने में तबदील हो गया
03:20आशियान प्रदर्शन कारियों का
03:23स्टूडेंट्स, टीचर्स, पेरेंट्स, वॉलन्टीर्स, प्रोफेशनल्स, सीनियर सिरिजन्स और आमनागरिक
03:29यहां हर दिन की शुरुवात सूरज उबने से पहले होती थी और राते मध्यरात्री के पार तक गुंजार रहती थी
03:36यान दोलन अब महस सांसे नहीं ले रहा था, बलकि एक सूव व्यवस्थित आकार ले रहा था
03:42यह प्रदर्शन देश की सबसे ज्यादा नजर रखी जाने वाली खबरों में से एक बन चुका था
03:48शुरुवात में जिस आंदोलन को तथा कथित में इन्स्ट्रीम मीडिया लगभग नजर अंदास कर रहा था
03:53अब देश के कोने कोने से पत्रकार वहाँ जुटने लगे
04:06कुछ दूर से परिस्थितियां समझ रहे थे तो कुछ आंदोलन कारियों के बीच ही जम गए थे
04:12इतने लंबे आंदोलन को कवर करना किसी चुनोती से कम नहीं होता
04:16यहां पल-पल खबरें बदलती हैं अफवाही सच से तेज दोडती हैं और दावो प्रतिदावों की होड मची रहती है
04:27इस पूरे घटनाकरम के दौरान वन इंडिया का ध्यान जमीनी रिपोर्टिंग और निश्पक्षता पर डिका रहा
04:33कोई भी खबर दिखाने से पहले हर पहलू की पुष्टी करना और सीधे मौके से मिली जानकारी पर ही भरोसा
04:39करना
04:39कई हफ़तों के दौरान हमारे पत्रकारों ने सेलिब्रेशन के लमोहों को देखा
04:44प्रतिरोध का जोश और जुनून
04:46कई बार ठका देने वाले दिन तीखी बहसे, सहयोग, समरपण, विरोध
04:52फिर आता है 20 जुलाई, एक ऐसा दिन जिसने इस अंदोलन का रुख ही मोर दिया
05:08अंदोलन कारियों का जन सैलाब निकला
05:10माहोल में तनाव, चिंता, जोश, आक्रोश, इमोशन्स का गजब कॉंट्रास्ट
05:16पुलिस ने इनकलाबी भीड को पीछे हटाने की कोशिश की
05:19सेंट्रल दिल्ली मानो च्छावनी में तब्दील हो गई हो
05:22जड़ पे शुरू हुई, लाठिया चली, पत्थर और आसू गैस के गोले दागे गए
05:27कई प्रदर्शनकारी जखमी हुए, सुरक्षाबल के जवानों को भी चोटे आए
05:31दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हालाद बेगाडने के आरोप लगाए थे
05:36जैसे जैसे हालाद बेकाबू हो रहे थे, हमारे कैमरे हर एंगर और हर जगर से इस युगांत्रिक आंदोलन को दर्च
05:43कर रहे थे
05:44राजनी दिखल चल तेज हो गई, सवाल उठाए गए और बैठकों का दौर चला
05:49केंद्रिय सिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्विकार कर लिया गया
05:54इसके तुरंत बाद आंदोलन कारियों ने प्रदर्शन खत्म करने का एलान कर दिया
05:59देश के लोग तांत्रे के तिहास में ये एक मील का पत्थर था
06:15पत्रकारता अकसर एक बेहत सीधे सवाल से शुरू होती है
06:18क्या हुआ था और इस सवाल का जवाब देने के लिए चाहिए धैर्या, मौजूद्गी और अटूट निष्ठा
06:246 जून के सांकेतिक प्रदर्शन से 25 जुलाई की अंतिम घोशना तक
06:30वन इंडिया मैदान में डटा रहा
06:31जब अनेक स्वेंभू मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन की आवाज को नजर अंदास किया
06:36वन इंडिया अपनी पूरी शक्ती और निष्ठा से बिना आल्गरिदम और एकॉनमी की चिंदा किये
06:42मैदान में डटा रहा
06:54सरक से लेकर संसथ तक
06:56ग्राणून जीरो से लेकर स्टूडियो तक
06:57वन इंडिया लोकतंत्र के चौथे स्थम्भ की शबत का जीवंत निर्वाह करते हुए
07:02इस पूरे विवर्ष को निरंतर तटस्त स्वर देता रहा
07:06क्योंकि जब इतिहास लिखा जाता है
07:08तो वो केवल समाचार की सुर्खियों के दम पर नहीं
07:11बलकि उन लमहों से लिखा जाता है
07:13जिने हैं करतव्य निष्ट मीडिया के कैमरे
07:16खामोशी से दर्च कर रहे होते हैं
07:18यह उन सभी बैच्चों के लिए
07:20जिनकी जिन्दगी परमाने बदाने लिए थी
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