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  • 2 days ago
पूरा देश अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारियों में जुटा है. इस जश्न में फहराए जाने वाले भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सफर अक्सर महाराष्ट्र के नांदेड़ से ही शुरू होता है. नांदेड़ के 'खादी ग्रामोद्योग भवन' में 100 से ज्यादा कारीगर दिन-रात हाथ से काते गए खादी के कपड़ों से तिरंगा तैयार कर रहे हैं, जिन्हें देश के कोने-कोने में सप्लाई किया जाता है.हालांकि, दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार द्वारा 'फ्लैग कोड' में किए गए संशोधन के बाद से पॉलिएस्टर और मशीन से बने झंडों को भी फहराने की अनुमति मिल गई है. सस्ते पॉलिएस्टर के झंडे बाजार में आने से पारंपरिक खादी के तिरंगे की मांग और इसे बनाने वाले संगठनों के कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है. नांदेड़ में बन रहे इन खास खादी के झंडों की पूरी कहानी और कारीगरों की चुनौतियां जानने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें.

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Transcript
00:12
00:30of the people who work in India and have a lot of people who are ready to work in a
00:35lot of
00:37The printing and printing are all done here.
00:41They are all supplied in India.
00:44Where are you?
00:47The MP, the U.P, the Himachal Pradesh, the Punjab, the Karnataka, the Kandar Pradesh,
00:55और तमिनाडो देश के सभी कोने में फ्लैग जाता है
00:59नांदेड केंडर भारत के उन्चुनिंदा अधिकरत जंडा निर्मार केंडरों में से एक है
01:04जो फ्लैग कोड के नियमों के अनुसार उदगीर से लाए गए खादी के कपड़े को तिरंगे में बदलते हैं
01:11दिसम्बर 2021 में केंडर सरकार ने फ्लैग कोड यानि भारतिय ध्वज सहीता में संचोधन किया था
01:17इस संचोधन के जरिये राष्टिय ध्वज को हाथ से बने होने के साथ साथ
01:22मशीन से निर्मित और पॉलियस्टर सहीत, सूती, उनी, रेश्मी और खादी के कपड़ों से बनाने की अनुमति दी गई
01:30खादी के जंडों की तुलना में गैर खादी और मशीन से बने जंडे सस्ते हो गए हैं
01:35सरकार द्वरा अनुमति दिये जाने के बाद पॉलियस्टर और अन्य कपड़ों के जंडे बाजार में आ गए हैं
01:41इससे पारंपरिक खादी बनाने वारे लोगों और संगठनों के कारोबार पर असर पड़ा है
02:26पूरा भारत अपना अस्सीमा सुतंत्रता दिवस मनाने की तयारी कर रहा है
02:31ऐसे में नांदेर में बने खादी के जंडे देजभार की यात्रा करेंगे
02:35और अपने साथ कारीगरी और राश्चे गौर्व की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे
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