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अमेरिकी अदालत (US District Court of New York) द्वारा न्याय विभाग (DoJ) के आपराधिक मामले को खारिज किए जाने के बाद अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कंपनी के 3 लाख से अधिक कर्मचारियों को संबोधित किया। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले 'अपनी बात, अपनों के साथ' कार्यक्रम के तहत उन्होंने समूह के इतिहास के सबसे कठिन दौर और उससे मिली सीख पर खुलकर अपनी बात रखी। मामला खारिज होने के बाद गौतम अदाणी ने कहा कि इस फैसले से उनके मन में जीत या प्रतिशोध की बजाय विनम्रता आई है और न्याय प्रणाली में उनका विश्वास मजबूत हुआ है। अपने संबोधन में उन्होंने धैर्य, सत्य और पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा- "सच्चाई को शोर की आवश्यकता नहीं होती, इसे केवल समय की आवश्यकता होती है।"

इस वीडियो रिपोर्ट में जानिए:

अमेरिकी अदालत द्वारा मामला खारिज किए जाने पर गौतम अदाणी का बड़ा बयान
2023 हिंडनबर्ग रिपोर्ट और ₹20,000 करोड़ का FPO वापस लेने का असली कारण
16 साल की उम्र में घर छोड़ने से लेकर पिता शांतिलाल अदाणी के दिए संस्कार
खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी बड़ी उपलब्धियां
'विज़न 2047': भारत के शताब्दी वर्ष को लेकर अदाणी ग्रुप का रोडमैप

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#GautamAdani, #USCourt, #AdaniGroup, #AdaniNews, #BusinessNews

Timestamp
00:00 - US कोर्ट से बड़ी राहत: अदाणी पर मामला खारिज

00:35 - 'अपनी बात, अपनों के साथ': 3 लाख कर्मचारियों को संबोधन

01:10 - "जीत या प्रतिशोध नहीं": न्याय प्रणाली पर भरोसा

01:48 - ₹20,000 करोड़ का FPO वापस क्यों लिया? अदाणी का सच

02:25 - "सच्चाई को समय चाहिए": कानूनी लड़ाई पर बोले अदाणी

03:02 - व्यक्तिगत अनुभव: अहमदाबाद छोड़ने से लेकर पिता के संस्कार तक

03:40 - मुंद्रा, खावड़ा और नवी मुंबई एयरपोर्ट: कर्मचारियों का जताया आभार

04:15 - विज़न 2047: स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष के लिए बड़ा लक्ष्य

~GR.510~HT.408~VG.HM~

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Transcript
00:00झाल झाल
00:31मेरे अदानी परिवार के साथियों, आप सभी को मेरा स्ने पूर्वा नमस्कार।
00:46कुछ दिनों में हम सब 15 अगस्ट मनाएंगे।
00:5515 अगस्ट मेरे लिए केवल एक राष्ट्रिय पर्व नहीं है।
01:07यहर वर्ष मुझे विनम्र भी बनाता है और आभारी भी।
01:16विनम्र इसलिए क्योंकि हम जिस स्वतंत्र भारत में आज सास ले रहे हैं, वह हमें विरासत में मिला है।
01:34और आभारी इसलिए क्योंकि इस आजादी के लिए भावत से लोगों ने अपना सब कुछ देश को समर्पित कर दिया।
01:53किसी ने अपना घर छोड़ा, किसी ने अपना परिवार छोड़ा, किसी ने अपने जिवन के सबसे अच्छे वर्स देश के
02:10नाम कर दिये।
02:13और किसी ने अपना जिवनी नौचावर कर दिया।
02:22आज हम जो कुछ भी कर पा रहे हैं, जो कुछ भी बना पा रहे हैं, जो भविश्य के सपने
02:33देख पा रहे हैं, वह उनके त्याक का ही परिणाम है।
02:41इसलिए पंद्रा अगस्ट मेरे लिए केवर्ण उत्सव का दिन नहीं है, आपार का दिन भी है।
02:52और सायद यही आपार हमें जिवन की एक और भावत बड़ी सीख देता है।
03:05के कोई भी बड़ा परिवर्दन बिना त्याक के नहीं होता, बिना धैर्यक के नहीं होता।
03:18और यदि में अपने जिवन के सफर को देखो, तो मुझे भी यही सत्य दिखाई देता है।
03:31इस स्वर की कृपा से जिवन ने मुझे मेरी अपेक्साओं से कहीं ज्यादा दिया।
03:42लेकिन उससे भी ज्यादा जिवन ने मुझे सिखाया।
03:49और सायद अब समय आ गया है कि परिवार के मुख्या होने के नाते, जिवन ने जो मुझे सिखाया,
04:03उसमें से कुछ बाते मैं आप सभी के साथ साजा करू।
04:14साथियों कुछ महीने पहले एक मैं श्रमिक दिवस के अउसर पर हमने अपनी बात अपनों के साथ चालू किया था।
04:30जब हम पहली बात अपनी बात अपनों के साथ के माद्यम से जुड़े थे।
04:39तब अपने श्रम के सम्मान की बात की थी। मैंने कहा था कि किसी भी संस्ता की सबसे बड़ी सकती
04:52उसकी मसीने नहीं है।
04:56उसके लोग होते है। उस दिन पर मेरे मन में एक और बात थी।
05:08कि इतने बड़े परिवार में सवाद किवल मिटिंग्स और कॉम्मिनिकेशन तक सिमित नहीं होना चाहिए।
05:21उसमें अपना पन भी होना चाहिए। विश्वास भी होना चाहिए।
05:28और एक दूसरे से सीखने का अवसर भी होना चाहिए।
05:34इसी भावना से यह सम्भाद चालूवा
05:41आज हमारी दूसरी मुलाकात है
05:44और मुझे विश्वास है
05:46कि आने वाले वर्षों में
05:50अपनी बात अपनों के साथ
05:54हमारे अदानी परवार की
05:56एक सुन्दर परंपरा बन जाएगी
06:02एक ऐसा आफसर जह हम
06:06शिर्फ अपने काम की नहीं
06:10अपने जीवन की भी बात करेंगे
06:13जब मैं अपने जीवन की सफर को याद करता हूँ
06:19तो सबसे पहले
06:22अपने माता पिता के चेरे
06:25सामने आते है
06:28मैं खुद को
06:32सव बाग्य साली मानता हूँ
06:34कि मेरा जनम
06:37ऐसे परिवार में हुआ
06:41जहां सादन सिमित थे
06:45लेकिन संसकार और सिमित थे
07:17मेरे पिता जी
07:19वचन छोटा या बड़ा नहीं होता
07:23वचन तो वचन होता है
07:26और उसे निभाना ही होता है
07:28और यदि लोग
07:31आपके सब्दपर विश्वास करते हैं
07:35तो जीवन में उससे बड़ा कोई सम्मान नहीं
07:39आज
07:41पिछे मुड़ कर देखता हूँ
07:44तो महसूस करता हूँ
07:47कि यदि
07:50मेरे जीवन की कोई सबसे बड़ी विरासत है
07:54तो वचन की नहीं
07:57विश्वास की विरासत है
08:01मेरी माता जी
08:03ने हमें एक अलग तरह की सीख दी
08:08उन्होंने
08:10त्याग क्या होता है
08:13साथगी क्या होती है
08:16और परिवार का अर्थ क्या होता है
08:21यदि बिना कहे सिखाया
08:23मा
08:25बहुत कम बोलती थी
08:28लेकिन उनका स्ने
08:30अम्मेसा बोलता था
08:34आज भी
08:36जब बच्पन को याद करता हूँ
08:39तो सबसे पहले
08:43मा के हाथ के खाने की कुस्बू याद आती है
08:46गर की
08:48गर्मा हट याद आती है
08:52और मा का पुछा हुआ
08:55एक छोटा सा प्रश्ण खाना खाया
09:05हम सभी के जीवन में
09:09कुछ ऐसी यादे होती है
09:12जो समय के साथ
09:15पुरानी नहीं होती
09:20और यही आदे
09:23हमें जमीन से जुड़े रखती है
09:25आप लोग जानते है
09:29कि मुझे
09:30आगे की पढ़ाई करने का अवसर नहीं मिला
09:34उस समय
09:37सायत
09:38यह एक कमी लगती थी
09:43लेकिन
09:45आज
09:45पीछे मुण कर देखता हूँ
09:48तो लगता है
09:51इश्वर ने
09:53मेरे लिए
09:56सीखने का
09:57एक दूसरा रास्ता चून रखा था
10:00मेरे टीचर्स
10:02बहुत थे
10:06लेकिन उनमें सबसे बड़ा टीचर
10:10जीवन था
10:11जीवन की सबसे बड़ी सीख
10:14हमेशा
10:17बड़ी गटनाओं से नहीं मिलते
10:21कहीं बार
10:22वह छोटी छोटी गटनाओं से वें
10:25छिपी होती है
10:29और कहीं बार
10:30वह सीख
10:33हमें हर रोज मिलने वाले लोग सिखा जाते हैं
10:38कभी मौले का छोटा सा किराना दुकानदार जो बिना किसी कागज के सिर्फ विश्वास पर उधार दे देता है
10:52कभी किसी टेक्निशन की कर्तव निस्टा
10:58या किसी सिक्यॉरिटी स्टाप की सावदानी
11:02अमें जिम्मिदारी का अर्थ समझा देती है
11:05यदि सिखने की विनम्रता हो
11:08तो जीवन में
11:11हर व्यक्ति
11:13आपका टीचर बन सकता है
11:16फिर भी
11:17कि मैं अपने सभी युवा साथियो
11:21और आपके बच्चों से एक बात
11:25अवश्य कहना चाहता हूँ
11:28जदि आपको
11:30अच्छी पढ़ाई का अवसर मिला है
11:34तो उसे पूरे मन से अपनाईए
11:38क्योंकि अच्छी पढ़ाई
11:42आपको सोचने के सकती देती है
11:45और जिवन आपको उन विचारों की परिक्षा लेने का
11:51अवशर देता है
11:52दोनों साथ हो
11:54तो सीख भी गहरी होती है
11:58और व्यक्तित्व भी निखरता है
12:03समय का चक्रा आगे बढ़ा
12:06और एट दिन
12:09गर छोड़ने का समय भी आ गया
12:14में मात्रव सोरा वरस का था
12:18दिल में उत्सा भी था
12:22सपने भी थे
12:24और थोड़ी सी आसंका भी
12:27मुझे बिलकुल नहीं पता था
12:30कि जिवन
12:33मुझे कहां ले जाएगा
12:34मेरे पास
12:36कोई बहुत बड़ा प्लान नहीं था
12:40बस एक विश्वास था
12:45कि मिहनत करूँगा
12:47तो जिवन रास्ता दिखा देगा
12:53मुझे लगता है कि आप में से
12:57बहुत से साथियों ने भी अपने जिवन में ऐसा ही कोई दिन देखा होगा
13:04जब आपने अपने गाउं अपने सहर और अपने परिवार को पीछे छोड़कर एक नए बहुश्य की तलास में पहला कदम
13:19रखा होगा
13:20उस समय हम केवल एक सहर नहीं छोड़ते हैं
13:28हम अपने जिवन का एक इसा पीछे छोड़ जाते हैं
13:33आज भी मुझे लगता है कि जिवन का सबसे कठीं कदम अक्सर पहला ही होता है
13:45लेकिन वही पहला कदम हमें आकार देने लगता है
13:55यह केवल गवतम अदानी की कहानी नहीं है यह हर उस साथी की कहानी है
14:05जिसने अपने घर से दूर है कर देश के किसी कौने में एक प्रुजेक को अपना सपना बनाया
14:19यह उन बहुत से एंजिनियरों की कहानी है उन लाखों श्रमिकों को कहानी है उन परिवारों की कहानी है
14:31जिन्होंने अपने प्रिया जननों को देश निर्मान के लिए गर से दूर भेजा।
14:42यह आप सब की कहानी है आपके परिश्रम की कहानी है, आपके द्यौक की कहानी है और आपके विश्वास की
14:54कहानी है
14:57क्योंकि जीवन में एक दिन हम सब को अपना गर छोड़कर अपने सपनों की और पहला कदम रखना पड़ता है।
15:14जब मैं पहली बार मुंबई पहुंचा तो मैं सिखना चाहता था, काम को समझना चाहता था, लोगों को समझना चाहता
15:28था और सायत खुद को भी समझना चाहता था।
15:36मुंबई मेरे लिए केवल एक सहर नहीं था, वह मेरी पहली उनिवर्सिटी थी, मुंबई में मैंने हिरों का व्यपार चालू
15:48किया,
15:52लोग हिरे के चमक देखते हैं, लेकिन मैंने एक और बात देखी, कोई भी हिरा अपनी खान से निकलते ही,
16:05नहीं चमकता हूँ,
16:09उसे तराशना पड़ता है, तहर्यर से, लगन से, बार बार, आज लगता है, इनसान भी, सायथ ऐसा ही होता है,
16:26हम सब के बीदर एक संभावना होती है, लेकिन उस संभावना की चमक, जीवन की महनत, जीवन के संगर्ष, और
16:42जीवन के अनुगोहों से ही बाहर आती है,
16:47समय के साथ मैंने एक मात समझी, व्यपार की असली नियुग,
16:57माल या पैसे पर नहीं, विश्वास पर खड़ी होती है,
17:03किसी भी सौदे से पहले, लोग आप पर विश्वास करते हैं, और वही सबसे बड़ी पुंधी बढ़ जाती है,
17:15दीरे-दीरे, जीवन आगे बढ़ता गया, साथी जुड़ते गए,
17:25जिम्मेदारिया बढ़ती गई, छुटी-छुटी कोशी से,
17:30दीरे-दीरे एक बड़ा समु में बदल गए, लेकिन यदि कोई मुझसे पूछे कि इस सफर में सबसे बड़ा निवेश
17:46क्या था,
17:48तो मेरा उत्तर होगा, विश्वास, ट्रस्ट, मुद्रा जैसा पॉट मनाना, खावडा जैसा, विश्व का सबसे बड़ा रिनियोबल एनर्जी पार्क खड़ा
18:06करना,
18:08नवी मुंबई जैसा इंटरनेशनल एरपोर्ट मनाना, या गोडा जैसे,
18:17प्रुजेक को साका करना, मेशक अत्यांत कठिं कार्य है, लेकिन इन सभी अनुबवों ने,
18:31मुझे एकी बात सिखाई, सबसे कठिं निर्मान किसी प्रुजेक का नहीं विश्वास का होता है,
18:46और सायद, जीवन ने मुझे सबसे बड़ी सिख भी विश्वास के बारे में ही दी,
18:58दीरे दीरे मुझे समझ आया कि विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पुंजी है,
19:11जिसके पास विश्वास है, उसके पास सब कुछ है, और जिसने विश्वास खो दिया, उसने सब कुछ खो दिया,
19:25जीवन ने मुझे यभी सिखाया, कि विश्वास परिवार का हो, मित्रों का हो, सह कर्मियों का हो,
19:43हमारे एंप्लॉईज और वर्कर्स का हो, कस्टमर का हो, भागी दारी का हो, या समाज का, उसकी नीव,
20:01हम्मे साथ चरित्रप पर खड़िव होती है, विश्वास मागा नहीं जाता,
20:09कमाया जाता है, और एक बार नहीं, हर दिन कमाया जाता है,
20:19सायद, इसी कारण, जिवन ने मुझे, एक और, बहुत बड़ी सीख दी,
20:31जितना बड़ा सफर होगा, उतना बड़ा मंथन होगा, और उतनी ही बड़ी परिक्षा होगी,
20:42हम सब दे, समुद्र मंथन के कथा सुनी है, जैसे जैसे जीवन आगे मरता गया,
20:51समझ आया, कि यह केवल एक कथा नहीं, बलकि जीवन का शत्य है, मंथन होगा, तो सबसे पहले, अम्पृत नहीं
21:05निकलेगा,
21:07सबसे पहले विष निकलेगा, और यहीं से जीवन हमारी परिक्षा लेने लगता है, मंथन,
21:21परिष्टित्यों के परिख्षा नहीं लेता, मंठन चरित्र के परिख्षा लेता है, हर व्यक्ति के जीवन में, हर परिवार के जीवन
21:33में, हर संस्ता के जीवन में,
21:36ऐसी परिक्षाय आती है, कुछ हम खुद चुद्धे हैं और कुछ जीवन खुद हमारे सामने लेकर आता है।
21:51जितना में हमारी सभ्यता, हमारे इतियास और हमारे महापुरुसों के जीवन को पढ़ता हूं,
22:07उतना ही एक सत्य और स्पस्ट होता जाता है।
22:15बड़े सफ़र कभी सरल नहीं होते। बगवान राम का जीवन देखिए।
22:26बनवास के बिना रामायन पूरी नहीं होती।
22:33बगवान श्री कृष्ण का जीमन देखिए।
22:37जन्म से लेकर अंत तक हर चरण एक नई चुनोती लेकर आया।
22:46संबुद्र मंधन की कता देखिए।
22:52अमृत की प्राप्ति से पहले विश्ट का निकालना अनिवाजिय था।
23:00महादेव ने उस विश्ट को धरन किया।
23:07ताकि श्रुष्ट्री की रक्षा हो सके।
23:11महाबारत देखिए।
23:15धर्मपांडवों के साथ था पिरवे वनवास मिला।
23:22अपमान भी सहना पड़ा और युद्ध भी लड़ना पड़ा।
23:28यदि हम अपने स्वतंतरता संग्राम को देखे।
23:35तो महात्मा गादी हो।
23:39सरदार पटेल हो।
23:44नैता जी सुभास चंद्र बोजो।
23:48या अन्य स्वतंतरता सैनानी।
23:51नहीं उनमें से किसी का मारन संग्र से अलग नहीं था।
23:59तब लगता है सायद।
24:03जीवन का यही नियम है।
24:07जीने बड़ी जिम्मेदार्या निभानी होती है।
24:11उनके जीवन में बड़ी परिक्साहे भी आती है।
24:18कुछ वर्स पहले हमारे समु के सामने भी ऐसी ही एक बड़ी परिक्साह आई।
24:32हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आई।
24:35शैर बाजार में अनेक प्रस्न उठे।
24:40अंसर्टिनिटी का मातावन बंग गया।
24:44उसी समय हमारा फॉलो ऑन पब्लिक आफर जिसे एप्टियो भी कहते हैं चल रहा था।
24:57देश-विदेश के बहुत से इन्वेस्टर्ज ने हम पर विश्वास करते हुए लगबग 20 अजार करोर का निवेश किया था।
25:08पिर हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद हमारे शेर प्राइस में तेज से गिरावट आई।
25:16इसका सिदा असर उन इन्वेस्टर्ज पर पड़ा जिनोंने हमारे एप्पियो में निवेश किया था।
25:25उनके निवेश का मुल्य तेजी से घट गया था। कानूनी ड्रस्टी से हमारे पास उस पुरी पक्विया को जारी रखने
25:40का पुरा अधिकार था।
25:42शेर बजार में किम्मतों का उपर नीचे होना एक सामन्य बात है। हम चाते तो वर आसी अपने पास रख
25:52सकते थे।
25:54लेकिन जीवन में हर निणाय केवल कानून से नहीं लिया जाता। कानून उमें अधिकार देता है।
26:05लेकिन हमारा वैल्यू सिस्टम बताता है उस अधिकार का उपयोग कब करना है और कब नहीं।
26:18उस समय मुझे अपने पिता जी की एकी सीखा आद आई। विश्वास किसी भी कानूनी अधिकार से बढ़ा होता है।
26:32मुझे यह शुकार नहीं था कि जिन लोगों ने हम पर विश्वास करके अपना पैसा लगाया।
26:41वे पहले ही दिन अपने निवेश का मुल्य गटता हुआ देखे।
26:49इसलिए हमने पूरी रासे वापस लोटाने का निड़ लिया।
26:58कुछ समय बहुत से लोगों ने कहा ऐसा मत के लिए।
27:05कुछ लोगों ने कहा इत्यास में ऐसा कभी नहीं हुआ।
27:11कुछ लोगों ने कहा यह भावनात्मक्निर है हो सकता है।
27:20वे अपनी जगा सही रहे हो लेकिन उस समय मेरे सामने के वर एक प्रस्न था।
27:33क्या जिन लोगों ने हम पर विश्वास करके अपना पैसा लगाया है।
27:39हम उनके विश्वास के साथ ज्याय कर रहे है।
27:47जब मैंने कुछ से पूरी इमानदारी के साथ यह प्रस्न पूछा।
27:53तो उत्तर बिलकुल स्पस्ट था। हमें उनका पैसा वापस लोटा देना चाहिए।
28:03तो मेरे लिए बाकी सब तर्क महत्वहीन हो गए।
28:11इसलिए हमने बीस अजार करोड की पूरी रासी वापस लोटा दिया।
28:19उस दिन हमने कोई सामान्य निन नहीं लिया।
28:25हमने केवल वही किया जो हमारे संस्कार हमारे वैल्यूस और मेरे पिता जी की सीख हमें करने के लिए कह
28:38रही थी।
28:40हमने पिता जी से मिली विश्वास की विरासत निभाई।
28:48साथियों साख एक निन में नहीं बनती और एक निन से भी नहीं बनती।
28:56उसे दसकों तक हर छोटे बड़े निर्णे में जीना पड़ता है।
29:02हमारी निरंतर कोशिश रही है कि जिसका भी हमारे उपर एक रुप्या भी दे है।
29:11उसका सम्मान पूर्वक और समय पर भुकतान हो।
29:18चाहे वह कोई बैंक हो। कोई इन्वेस्टर हो। कोई बंट धारक हो।
29:28या हमारा कोई छोटा सा ओपरेशनल पातना। विश्वास केवल बड़े निर्णे से नहीं बनता।
29:38वह हर दिन अपने दायत्य निमाने से ही बनता है। आज यही अदानी ग्रुप का डिफाइनिंग कल्चर है।
29:52हिंडन्बर्ग आया और चला भी गया। लेकिन अदानी ग्रुप अपनी वैल्यूस पर अडिग रहा।
30:00अपने लोगों के विश्वास पर कड़ा रहा। और पहले से अधिक मजबुत होकर उपरा।
30:10लेकिन मुझे आज भी एक बात का अफसोस है। कुछ लोगों के लालच की बजह से शेर मार्केट में बहुत
30:23से छोटे इन्वेस्टर्स को नुक्सान उठाना पड़ा।
30:27उठ समय हमने अपने इन्वेस्टर के हीद को सबसे उपर रखा।
30:36और सायद हमारे विश्वास की सबसे बड़ी कसोटी थी।
30:43लेकिन जिवन की परिक्षा है। यहीं समाप्त नहीं हुई।
30:52उसके बाद एक और कथिन परिक्षा हमारे सामने आई।
30:58अमेरिका में एक न्याइक प्रक्रिया चारू हुई स्वभाविक रूप से उसने भी अनेक प्रस्ण खड़े किये।
31:12बहुत सी बाते कही गई। बहुत सी धानाय बनाई गई।
31:19कहीं लोगों ने नीड़ भी बहुत जंदी सुना दिये।
31:27लेकिन हमें अपने सत्य पर पुरवाज विश्वास्ता किसीलिए हमने सोर का रास्ता नहीं चुना।
31:37हमने धर्य का रास्ता चुना। हमने सयम रखा।
31:46हमने नाईक प्रक्रिया को सम्मान दिया।
31:51तथ्यों पर परोशा रखा।
31:55और सबसे बढ़कर अपने सत्य पर विश्वास रखा।
32:03मैंने अपने आप से बार बार एक ही बात कही।
32:12सत्य को सोर की आवश्यक्त्या नहीं होती।
32:19उसे केवल समय की आवश्यक्त्या होती है।
32:27आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो संतोष इस बात का नहीं है,
32:34कि हमने कठिन समय पार किया।
32:39संतोष इस मात का है कि इसी दौरां हम सब दे मिलकर अधानी गुरूप को नई उच्चाईयों तक पहुंचा है।
32:52उन दो वर्षों में हमने अपने इत्यास का सर्व श्ट्रेश्ट प्रदर्शन किया।
33:01नए प्रोजेक्ट से आगे बढ़े। नई उपलब्द्या आसिल हुई।
33:08और सबसे बड़ी बात हमारा बविश्य पहले से अधिक मजबुत हुआ।
33:17यही मेरे लिए मन्थन का अम्रुत है।
33:23आज बहुत से लोग इसे अमारी जीत मानते हैं।
33:30मैं उनकी बावना का सम्मान करता हूँ।
33:34लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूँ।
33:38मुझे यह किसी एक टकर्ण की जित से कहीं बड़ी बात लगती है।
33:44मुझे यह एक संस्ता के रूप में हम सब की सामुईक सीख दिखाई देती है।
33:53हमने सिखा कि विश्वास की सबसे कठिन परिक्षा कठिन समय में होती है।
34:03हमने सिखा कि किसी संस्ता की सबसे बड़ी सकती उसके लोग होते है।
34:14और हमने यह भी सिखा कि विश्वास एक बार जिद लेने भर की बात नहीं है।
34:22उसे हर दिन अपने काम से अपने व्यवार से और अपने चरित्र से बार बार अरजित करना पड़ता है।
34:35आज यदि मेरे मन में सबसे अधिक कोई भावना है तो वह भी जय की नहीं आभार की है।
34:50आप आप सब के प्रति आपके परिवारों के प्रति उन सभी साथियों के प्रति जिनोंने सामान्य परिस्तितियों में ही नहीं
35:10बलकि सब कुछ असामान्य होते हुए भी अपना विश्वास बनाय रखा अपना काम नहीं छोड़ा अपनी निष्टा नहीं छोड़ी और
35:24इस संसा का हाथ नहीं छोड़ा।
35:28जनि आज इस पूरे सफर के सबसे बड़ी उपलब्दि के बारे में मुझसे पुछा जाए तो मेरा उत्तर मुंद्रा नहीं
35:41होगा, खावडा नहीं होगा, गोडा नहीं होगा और नवी मुंबई एरपॉर्ट भी नहीं होगा।
35:48मेरा सबसे बड़ी उपलब्दि आप है। हमारा अदानी परिवार है, क्योंकि प्रोजेक्ट्स एंजिनरिंग से बनते हैं, लेकिन भान संसाय लोगों
36:09के चरित्र से बनती है।
36:11कुछ समय पहले मैं खावडा गया था, 47 डिग्री से अधिक्त आपमान, तेज दूर, दूर दूर तक फैला रेगिस्तार और
36:28उन कथिंच परिस्तितितियों में दिन रात काम करते हमारे बहुत से साथी, में वहां एक युवा एंजिनियर,
36:40अमित कुमार से मिला, वह भिहार के एक छोटे से काम से था, मैंने उससे पूछा,
36:52कर से इतने महिनों तक दूर रहकर इतनी कथिंच परिस्तितियों में काम करना मुश्किल नहीं लगता।
37:04वह मुश्कूर आया। और बोला, सर, मुश्किल तो लगता है, मा की याद भी आती है।
37:19लेकिन जब यह प्रोजेक्ट पुरा होगा, तो मुझे जीवन पर दर्वर रहेगा और उसमें मेरा भी थोड़ा सा युगदान है।
37:32मैंने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा। उसने बताया कि उसकी मा की आखों की रोशनी दीरे दीरे कम
37:44होती जा रही है।
37:46समय पर अच्छा इलाज उप्रद नहीं हो पाया और उसे सबसे अधिक जिंता अपनी नौकरी की नहीं, अपनी मा की
38:00आखों की थी।
38:05विकास केवल पॉट्स, पावर प्लांट्स या एरपॉट्स बनाने का नाम नहीं है।
38:14विकास किसी मा की आखों में फिर से रोशनी लाने का नाम भी है।
38:21सायद कुशिशं मेरे मन में एक विचार और स्पस्ट हुआ।
38:33यदि हम वर्ल क्लास इंफ्रास्टर बना सकते हैं तो क्या हम लाखों लोगों के जीवन में नहीं रोशने भी नहीं
38:46ला सकते।
38:48बाद में विहार के सफर के दौरान जब अनेक परिवारों से मिला तो महसूस हुआ कि यह तहानी किवल एक
39:01परिवार की नहीं थी।
39:04यह बहुत से परिवारों की कहानी थी। उसी अनुभव ने हमारी सोच को एक नहीं दिसा दी।
39:13और इसी भावना से अखंड जूती के साथ हमारी साजेदारी प्रारम्भूवी।
39:22आज यह केवल एक अस्पताल या आखों के स्वास्ते की एक परिवद्ना नहीं है।
39:33यह इस विश्वास का विश्तार है कि किसी भी उद्योग की सबसे बड़ी सफलता तब होती है।
39:43जब उसका भाव समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
39:52मुझे यह कहते हुए संतोष होता है कि डॉक्टर प्रिती अदानी के नेत्युत्व में
39:59अदानी फांडेशन इसी सोच को देश के अनेक हिस्सों में पढ़ाई।
40:10स्वास्तिय, पोशन, human empowerment और सामुदाइक विकास के माध्यम से आगे बढ़ाने की कोसिस कर रहा है।
40:26हम जानते हैं कि देश की आफ़स सक्तियाय बहुत बड़ी है।
40:33हमारा योगदान उसकी तुलना में बहुत छोटा है।
40:38लेकिन यदि हम किसी एक परिवार के जीवन में आसा जगा सके।
40:48यदि किसी एक बच्चे को बहतर भविश्य दे सके। यदि किसी एक मा की आखों में रोशनी बचा सके। तो
41:05वह कोशिश सार्थक है।
41:08जब बारत अपनी आजादी के सौ वर्स पूरे करेगा।
41:20तब इत्यास केवल यह न पूझेगा कि हमने कितने गिगावाट के उत्पादन शम्ता स्तापित की।
41:34कितने पॉट्स बनाएं। कितने एरपोर्ट्स बनाएं।
41:41इत्यास यह भी पूझेगा कि हमने कितने जीवन बदले।
41:50कितने सपने को नई उडान दी। कितने परिवारों को जीवन में नई रोशनी लाई।
42:01और उस प्रस्ण का उत्तर कोई रिपोर्ट नहीं देगी, कोई प्रुजेक नहीं देगा, उस प्रस्ण का उत्तर आपका योग्नान देगा,
42:18आपकी निश्टा देगी।
42:22क्योंकि भारत का बविश्य किसी एक व्रक्ति के हाथों में नहीं, करोडों युवाव के हाथों में है।
42:34और मुझे पुरा विश्वास है कि आपका योगदान भारत के इस बविश्य का सबसे प्रभावी उत्तर होगा।
42:47वैसे बच्चन कहते ही हम सब के मन में सबसे पहले अमिताब बच्चन जी का नाम आता है लेकिन आज
43:04में बीक भी नहीं बीगर भी की बात कर रहा हूं।
43:11जी हां मैं डॉक्टर हरीवन्स राइब बच्चन की बात कर रहा हूं।
43:18उन्होंने लिखा है तू न थकेगा कभी तू न रुकेगा कभी तू न रुकेगा कभी बाकी कविता आप अवश्य पढ़िएगा।
43:38लेकिन इन दो पंक्तियों में भी मुझे जीवन का साथ दिखाई देता है।
43:45साथियों जीवन में चुनोतिया आएगी। वे आने ही है।
43:56हमारे सम्मू के सामने भी आएगी। आपके जीवन में भी आएगी।
44:04कोई भी बड़ा सफ़र उनसे अचुता नहीं रहता। लेकिन जब भी जीवन आपके सामने कोई नया समुद्र मंथन लेकर आए।
44:20अपनी वैल्यूस को मत छोड़िए। अपने चरित्र से समझोता मत किजिए। अपने साथियों पर विश्वास रखिए।
44:31अपने परिवार पर विश्वास रखिए। अपने देश पर विश्वास रखिए। और सबसे बढ़कर सत्य पर विश्वास रखिए।
44:43क्योंकि जिवन ने मुझे यही शिखाया है कि मन्थन से मत डरिये, मन्थन मत रोकिये।
44:55आज हमारी दूसरी मुलाकात थी, लेकिन हमारी बाचेत अभी पूरी नहीं हुई है, अभी बहुत से सफर बाकी है।
45:12बहुत सी कहानिया बाकी है, हुद्रा की भी है, हाव्रा की भी, धारावी की भी, अदानी फर्मटेशन की भी, और
45:28उन महुत से साथियों की भी, जो इन कहानियों के पास्तव इगनायक है।
45:39हम फिर मिलेंगे इसी अपने पन के साथ, इसी विश्वास के साथ, इसी परिवार के साथ, मैं आप सभी को
45:49और आपके परिवारों को रदे से प्रणाम करता हूं।
45:56आपका विश्वासी मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।
46:03इश्वर से केवल यही प्रात्ना करता हूं।
46:10कि वह हम सब को स्वस्त रखे, महफूज रखे और मिलकर भारत की सेवा करने की शक्ति देता रहे।
46:26आप सभी को और आपके परिवारों को स्वतंतरात्य दिवस की आदिक सुपामनाय धन्यवाद जाहिंड।
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