00:001991 भरत बदल रहा था, देश की अर्थवियावस्था खुल रही थी, और मुंबाई का शेर बजार तेजी से उपर जा
00:09रहा था, और इसी बदालते बजार के बीच एक नाम उभार रहा था, हर्शद महता, वो किसी बड़े घराने से
00:16नहीं आया था, लेकिन उसने एक चीज बह�
00:29मुंबाई के शेर बजार में गुंजने लगा, लोग उसके हर कदाम पर नजर रखने लगे, और ट्रेडर्स ने उसे एक
00:36नाम दिया, बिग बुल,
00:37उननीस सौ इक्यानवे से उननीस सौ बननावे के बीच, सेंसेक्स ने एक जबरदस छलांग लगाई, लगभग एक हजार पॉइंट से
00:46बढ़कर, करीब साड़े चार हजार तक, और इस तेजी के बीच, उस स्टॉक ब्रोकर का असर और गहरा होता गया,
00:54लेकिन एक सवाल अ�
00:57इतनी बड़ी बाइंग के लिए पैसा आ कहां से रहा था, एक ब्रोकर के पास आखिर इतना पैसा आया कहां
01:04से, जावाब शेर बजार में नहीं, बैंकिंग सिस्टम में छुपा था, गवर्मेंट सिक्योरिटीज की खरीद फरोख्त के नाम पर, बैंक्स
01:13के बीच पैसा बह�
01:26पत्य होता कि कुछ वक्त बाद उन्हें दुबारा खरीद लेगा, इन डील्स में ब्रोकर्स का रोल सिर्फ शेर्स खरीदने तक
01:32नहीं था, वो बैंक्स के बीच एक ब्रिज की तरह काम करते थे, और इस ब्रिज के जरीए बहुत बड़ी
01:40रकम मार्केट तक पहुँच सकती �
01:41लेकिन हर बार सिक्योरिटीज को फिजिकली ट्रांसफर करना जरूरी नहीं था, उनकी जगह एक डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल होता था, बैंक
01:50रिसीट यानी बी आर, कागस पर लिखा ये रिसीट एक बड़े ट्रांजाक्शन का सबूत बन सकता था, और यहीं से
01:59सिस्टिम
01:59की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आई, कुछ ट्रांजाक्शन में ऐसे बैंक रिसीट का इस्तेमाल हुआ, जिनके पीछे जरूरी सिक्योरिटी मौजूद
02:09ही नहीं थी, बंकों को लग रहा था की ट्रांजाक्शन के पीछे सिक्योरिटी मौजूद है, लेकिन कुछ �मामलों म
02:15प्राइस में कगाज पर सिक्योरिटी थी, असल में नहीं और इसी गाप ने पैसोन के एक खतारनक फ्लो को जनम
02:23दिया। यही पैसा आगे स्टॉक मार्केट में लगाया जा सकता था।
02:27ब्रोकर बड़े पैमाने पर सिलेक्टिट शेर्स खरीदने लगा और मार्केट में डिमांड अचानक बढ़ने लगी। जब बाइंग बढ़ी तो सिलेक्टिट
02:36शेर्स के दाम भी तेजी से बढ़ने लगे। लोगों ने देखा कि प्राइसिस लगातार उपर जा रहे हैं और
02:42फिर और जादा लोग मार्केट में पैसा लगाने लगे। हर तरफ सिर्फ एक ही तस्वीर नजर आ रही थी। पैसा,
02:49सकसिस और लगातार बढ़ता मार्केट। लोगों को लगा ये सिर्फ एक ब्रिलियंट इन्वेस्टर की कहानी है। अब वो सिर्फ एक
02:58ब्रोकर नहीं रह
02:59था। वो एक सेलेब्रिटी बन चुका था। अखबारों में उसकी तस्वीरें छपती थी। इन्वेस्टर्स उसकी चाल देखते थे। और बजार
03:09उसे बिग बुल कहने लगा। एक इन हर किसी को ये कहानी इतनी परफेक्ट नहीं लग रही थी। कुछ लोगों
03:15ने सवाल �
03:15उठाना शुरू किया। आखिर इतने बड़े ट्रांजेक्शन के पीछे असली सिक्योरिटीज कहां थी। 23 अपरेल 1992। एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट ने
03:26पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को हिला दिया। रिपोर्ट में एक बड़े बैंक ट्रांजेक्शन पर सव
03:45लगे। और जिस मार्केट में कल तक जशन था। वहाँ अब पैनिक था। जो मार्केट कल तक आसमन छू रहा
03:52था। अब तेजी से नीचे आ रहा था। शेर प्राइसिस टूतने लगे। इन्वेस्टर्स की दौलत घट्टी गई। और हजारों लोगों
04:00का भरोसा हिल गया�
04:01अब सवाल सिर्फ मार्केट क्रैश का नहीं था। सवाल था पैसा गया कहां। इन्वेस्टिगेटर्स ने ट्रांजैक्शन्स को ट्रेस करना शुरू
04:09किया। और एक के बाद एक कनेक्शन सामने आने लगा। अब सरकर ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
04:27बैंकिंग
04:29एक हैरान कर देने वाली रकम। सिक्योरिटी स्कैम का अंदाजा लगभग 4,000 करोड रुपे लगाया गया। 1992 के भारत
04:39के लिए एक बेहत बड़ी रकम। जिस आदमी को कल तक मार्केट का बादशा माना जाता था। अब वो कनूनी
04:46मुश्किलों में घीरा था। गिरफतार
04:59बैंकिंग सिस्टम की कई कमजोरियां सामने ला दी और सवाल उथने लगा इतनी बड़ी गड़बड इतने वक्त तक कैसे चलती
05:07रही। इस स्कैम के बाद फाइनशल सिस्टम में बड़े बडलव लाए गए। ट्रेडिंग और सेटलमेंट को जादा ट्रांसपेरेंट बना
05:28जाए तो पूरा फाइनशल सिस्टम खत्रे में पड़ सकता है। हरशद महता की कहानी सिर्फ एक स्कैम की कहानी नहीं
05:35बनी। वो एक मिसाल बन गई। लेकिन सवाल आज भी वही है क्या वो मास्टर माइंड था या एक ऐसे
05:43सिस्टम का चेहरा जो पहले से ही कमजोर था।
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