Skip to playerSkip to main content
How did one stockbroker become the most powerful man in India's stock market—and then become the face of one of the country's biggest financial scandals?

This under-6-minute cinematic documentary tells the story of the 1992 Harshad Mehta securities scam—from the explosive rise of the stock market to the banking loopholes, Bank Receipts, market crash and the investigation that followed.

We explore:

🔹 The rise of the "Big Bull"
🔹 How Ready Forward Deals worked
🔹 The role of Bank Receipts
🔹 How banking money reached the stock market
🔹 Why share prices exploded
🔹 How the scandal was exposed
🔹 The market crash and investor panic
🔹 The investigation and its massive scale
🔹 The reforms that followed
🔹 The lessons India's financial system learned

Watch till the end for the question that still makes this story fascinating:
Was it simply the story of one man—or a story about weaknesses within an entire financial system?

⏱️ Story Duration: Under 6 Minutes

This video is a cinematic historical reconstruction created for educational and storytelling purposes. Visuals are dramatized and may not represent exact historical events or individuals.

#HarshadMehta #HarshadMehtaScam #BigBull #StockMarket #IndianStockMarket #1992Scam #StockMarketScam #Finance #IndianHistory #FinancialScandal #BusinessHistory #ScamStory #StockMarketIndia

Category

📺
TV
Transcript
00:001991 भरत बदल रहा था, देश की अर्थवियावस्था खुल रही थी, और मुंबाई का शेर बजार तेजी से उपर जा
00:09रहा था, और इसी बदालते बजार के बीच एक नाम उभार रहा था, हर्शद महता, वो किसी बड़े घराने से
00:16नहीं आया था, लेकिन उसने एक चीज बह�
00:29मुंबाई के शेर बजार में गुंजने लगा, लोग उसके हर कदाम पर नजर रखने लगे, और ट्रेडर्स ने उसे एक
00:36नाम दिया, बिग बुल,
00:37उननीस सौ इक्यानवे से उननीस सौ बननावे के बीच, सेंसेक्स ने एक जबरदस छलांग लगाई, लगभग एक हजार पॉइंट से
00:46बढ़कर, करीब साड़े चार हजार तक, और इस तेजी के बीच, उस स्टॉक ब्रोकर का असर और गहरा होता गया,
00:54लेकिन एक सवाल अ�
00:57इतनी बड़ी बाइंग के लिए पैसा आ कहां से रहा था, एक ब्रोकर के पास आखिर इतना पैसा आया कहां
01:04से, जावाब शेर बजार में नहीं, बैंकिंग सिस्टम में छुपा था, गवर्मेंट सिक्योरिटीज की खरीद फरोख्त के नाम पर, बैंक्स
01:13के बीच पैसा बह�
01:26पत्य होता कि कुछ वक्त बाद उन्हें दुबारा खरीद लेगा, इन डील्स में ब्रोकर्स का रोल सिर्फ शेर्स खरीदने तक
01:32नहीं था, वो बैंक्स के बीच एक ब्रिज की तरह काम करते थे, और इस ब्रिज के जरीए बहुत बड़ी
01:40रकम मार्केट तक पहुँच सकती �
01:41लेकिन हर बार सिक्योरिटीज को फिजिकली ट्रांसफर करना जरूरी नहीं था, उनकी जगह एक डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल होता था, बैंक
01:50रिसीट यानी बी आर, कागस पर लिखा ये रिसीट एक बड़े ट्रांजाक्शन का सबूत बन सकता था, और यहीं से
01:59सिस्टिम
01:59की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आई, कुछ ट्रांजाक्शन में ऐसे बैंक रिसीट का इस्तेमाल हुआ, जिनके पीछे जरूरी सिक्योरिटी मौजूद
02:09ही नहीं थी, बंकों को लग रहा था की ट्रांजाक्शन के पीछे सिक्योरिटी मौजूद है, लेकिन कुछ �मामलों म
02:15प्राइस में कगाज पर सिक्योरिटी थी, असल में नहीं और इसी गाप ने पैसोन के एक खतारनक फ्लो को जनम
02:23दिया। यही पैसा आगे स्टॉक मार्केट में लगाया जा सकता था।
02:27ब्रोकर बड़े पैमाने पर सिलेक्टिट शेर्स खरीदने लगा और मार्केट में डिमांड अचानक बढ़ने लगी। जब बाइंग बढ़ी तो सिलेक्टिट
02:36शेर्स के दाम भी तेजी से बढ़ने लगे। लोगों ने देखा कि प्राइसिस लगातार उपर जा रहे हैं और
02:42फिर और जादा लोग मार्केट में पैसा लगाने लगे। हर तरफ सिर्फ एक ही तस्वीर नजर आ रही थी। पैसा,
02:49सकसिस और लगातार बढ़ता मार्केट। लोगों को लगा ये सिर्फ एक ब्रिलियंट इन्वेस्टर की कहानी है। अब वो सिर्फ एक
02:58ब्रोकर नहीं रह
02:59था। वो एक सेलेब्रिटी बन चुका था। अखबारों में उसकी तस्वीरें छपती थी। इन्वेस्टर्स उसकी चाल देखते थे। और बजार
03:09उसे बिग बुल कहने लगा। एक इन हर किसी को ये कहानी इतनी परफेक्ट नहीं लग रही थी। कुछ लोगों
03:15ने सवाल �
03:15उठाना शुरू किया। आखिर इतने बड़े ट्रांजेक्शन के पीछे असली सिक्योरिटीज कहां थी। 23 अपरेल 1992। एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट ने
03:26पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को हिला दिया। रिपोर्ट में एक बड़े बैंक ट्रांजेक्शन पर सव
03:45लगे। और जिस मार्केट में कल तक जशन था। वहाँ अब पैनिक था। जो मार्केट कल तक आसमन छू रहा
03:52था। अब तेजी से नीचे आ रहा था। शेर प्राइसिस टूतने लगे। इन्वेस्टर्स की दौलत घट्टी गई। और हजारों लोगों
04:00का भरोसा हिल गया�
04:01अब सवाल सिर्फ मार्केट क्रैश का नहीं था। सवाल था पैसा गया कहां। इन्वेस्टिगेटर्स ने ट्रांजैक्शन्स को ट्रेस करना शुरू
04:09किया। और एक के बाद एक कनेक्शन सामने आने लगा। अब सरकर ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
04:27बैंकिंग
04:29एक हैरान कर देने वाली रकम। सिक्योरिटी स्कैम का अंदाजा लगभग 4,000 करोड रुपे लगाया गया। 1992 के भारत
04:39के लिए एक बेहत बड़ी रकम। जिस आदमी को कल तक मार्केट का बादशा माना जाता था। अब वो कनूनी
04:46मुश्किलों में घीरा था। गिरफतार
04:59बैंकिंग सिस्टम की कई कमजोरियां सामने ला दी और सवाल उथने लगा इतनी बड़ी गड़बड इतने वक्त तक कैसे चलती
05:07रही। इस स्कैम के बाद फाइनशल सिस्टम में बड़े बडलव लाए गए। ट्रेडिंग और सेटलमेंट को जादा ट्रांसपेरेंट बना
05:28जाए तो पूरा फाइनशल सिस्टम खत्रे में पड़ सकता है। हरशद महता की कहानी सिर्फ एक स्कैम की कहानी नहीं
05:35बनी। वो एक मिसाल बन गई। लेकिन सवाल आज भी वही है क्या वो मास्टर माइंड था या एक ऐसे
05:43सिस्टम का चेहरा जो पहले से ही कमजोर था।
Comments

Recommended