00:00लानत है ऐसे पती पर जिसको पतनी की देह ये जता कर हासिल करनी होती है कि तेरे खर्चे उठाता
00:09हूँ ना चल अब बिस्तर पे लेट जा इसके लिए एक शब्द होता है वेश्या वृत्ति भले ही आपने इन
00:16शब्दों का इस्तिमाल ना किया हो पर अगर भीतर ये भाव भी
00:20कि उसकी देह मेरी इसलिए है क्योंकि उसके खर्चे तो मैं ही उठाता हूँ मेरे घर मेन रहती है
00:25खुद तो कुछ कमाती नहीं मेरे इस तुकणों पर जीती है अगर आपके भीतर ये भाव भी आ गया है
00:31और इस भाव में आपने उसके शरीर को छुआ है
00:35तो आप अपनी पतनी को नहीं एक वेश्या को सपर्श कर रहे हो
00:38आपने अपनी पतनी को बहुत नीचे गिरा दिया
00:40आपने अपने रिष्टे का ये अपमान कर दिया
00:44इसी तरीके से उसमें
00:47अगर ये भाव आ गया है कि उसके पैसों पर तो मेरा अधिकार है
00:50कैसे तुम्हारा अधिकार है बताओ ना
00:52पती के पैसो पर तुम्हारा अधिकार कैसे हो गया
00:56तुम देखने ही रही हो कि तुम में भी यही भाव है कि चू कि
01:00मैं उसके लिए खाना बनाती हूँ
01:01उसके कपड़े धोती हूँ
01:02उसको सेक्स देती हूँ
01:04और उसके लिए बच्चे पैदा करें तो इसलिए उसके पैसो पर मेरा हक है
01:07ये तो services हैं तुम service provider हो
01:11services है कि नहीं
01:12खाना बनाने वाली made होती है
01:14वो service provider है
01:16और तुम कह रही हो मैं तेरे लिए ये सब करती हूँ
01:18तो तेरे पैसो पर मेरा हक है
01:19तो फिर अपने आपको पत्नी क्यों बोल रही हो
01:21काम वाली ही बोलो न
01:23ये रिष्टा कैसा है
01:26जिसमें एक दूसरे से कहा जा रहा है
01:27मैंने तेरे लिए ये किया है तू मेरे लिए अब ये कर
01:29मैंने तेरे लिए ये किया है तू मेरे लिए कर
01:30ये कैसा रिष्टा है
01:31यह प्रेम तो नहीं है, तो कुछ और है, और जो भी यह बड़ा गंदा है, ऐसे तो नहीं जीना.
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