00:00मेरा एक भाई था, बाई साल के था, तबियत खराब हुआ तो होस्पीटल में पपाजी ले गए तो आहां पता
00:05चला कि कैंसर है, तो वो बहुत तकलीफ में था, अब मेरा ये कुछ चन है कि हम उसके साथ
00:11सहज नहीं रह पायों, तो हमको लगते रहता है कि सबसे कुरूर हामी ह
00:19आप उस मौके पर अपराधी नहीं हो गई है, आपकी तकलीफ इस माननेता पर अधारित है, कि मैं एक व्यक्ति
00:27हूँ, मैं एक स्तर का जीवन जीती हूँ, एक केंदर का जीवन जीती हूँ, आप नहीं सवाल कर रही है
00:33कि मैं अपने सारे रिष्टों में प्रेमपूर्ण क्य
00:45के साथ उस इस्थिति विशेश में मैं अलग हो जाती, यह संभव नहीं है, आपने उसके साथ वही करा जैसे
00:53आप हो, और वैसे आप सब के साथ हूँ, और हर स्थिति में हो, और यह नियम बस आप पर
00:59लागू नहीं होता, मुझ पर भी लागू होता है, हम सब पर लागू हो
01:13फिर पांदर विस मिनिट बाद वही टेंग्चन वही का ट्रीट में चल ला जाता हूँ
01:18वीडियो भर से बात नहीं बनती है और जब बिलकुल संकट कक्षण आ जाए उस वक्त ही आप स्मरन शुरू
01:28कर दें तो उससे भी बात नहीं बनती है थोड़ी लंबी साधना लगती है
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