00:00हिमन सुरेन सरकार क्या सिच्मुश दबाव में हैं दर्मेन प्रदान के तरह क्या यहां भी जहार खळट में भी स्वानों
00:06के बाद किसी स्टीफ़ी की हम कर सकते हैं समभावना
00:09देखे दवाव में तो है निश्यत तोर पर हेमन सुरेन को अभी अभी सत्ता तो मिली नहीं है
00:152019 से लगतार हो सत्ता में है
00:1719 से 24 में उनके पास जो जनता के द्वारा दिया गया बहुमत था उनके गड़बंधन को
00:22उससे बड़ा बहुमत 2024 वाले चुनावे उनको मिला
00:25अकेले उनको 34 सीटे मिली थी उनके जो महागडबंधन को 56 सीटे मिली थी
00:3081 में से तो जनता की काफी ज़्यादा पेक्षाएं थी खासकर इवाओं की चात्रों की
00:35लेकिन उन उमीदों पर आशाओं पर खरी उतरती हुई तो सरकार दिख नहीं रही अगर लगातार पेपर लिख हो रहा
00:42है
00:42तो अगर वो केंद्र की समस्या है तो जारखंड की भी समस्या है जारखंड की वसड़कों पर है और दबाव
00:47का ही नतीजा है
00:48जैसा कि मैंने बताया था कि चार मंत्रियों का एक समूह बनाया गया है जो जाकर इन से बात करेज़े
00:54आपको ज्याँ रखना होगा. जैसे यो आबादी जयादा संख्या में है, राज्यों में भी जारकंड में भी यमआओ की ताजात
01:02काफी जादा है.
01:022024 के चुनाव में हमने देखा था कि कैसे हेमन सुरेट जेल से लोट कर आते हैं उनसे चुनाव के
01:08दौरान
01:09कैसे युवाओं का उनके और आकरशनर दिखा था बड़ी संख्या में युवाओं ने जेमेम कोड दिया था
01:13तब ही सरकार बन पाई थी, repeat हो पाई थी तो सरकार दबाओ में हैं, अगर यह सारी जो पाँच
01:20बड़ी मांगे हैं, अगर वो मांगे पूरी नहीं हो पाती हैं, यह आंदूरन और चलता है
01:2425 जुलाई से जला है और किस्ता है तो हो सकता है कि इस्तीफे तक भी बात आ जाए लेकिन
01:31मुझे ऐसा नहीं लगता कि जारखंड में कोई स्तीफा होगा क्योंकि दिल्ली वाला जंतरमंतर वाला जो आंदोलन था उस आंदोलन
01:37में आपको देखना पड़े है कि वो भीड क्या थ
01:50लेकिन मैंने बीजेपी का जो छात्र संगठन है अखिल भारती विध्यार्थी परशक उसके नेताओं को वहाँ पर बड़ी संख्या में
01:57देखा नहीं है चात्रों की मौझे दिखी है तो दबाव में है जारखंड की हमन सुरें सरकार इस्तीफा होगा या
02:04नहीं ये इस बात
02:05पर निर्भर करेगा कि कितने लंबे समय तक इस आंदोलन को टालती रहती है सरकार अगर गंभिरता से लेकर अभी
02:11विचार करेगी बातचीत करेगी तो हो सकता है बात यहीं पर रुख जाए जैसा कि नरेन मोधी सरकार ने किया
02:17था लंबा खिच गया आंदोलन सोनम वंग्च
02:35शिविन जी आपके पास लोटना चाहेंगे अंधिम सवाली लेंगे आपसे और समझना चाहेंगे क्योंकि जब हम नजर डालते हैं सीजेपी
02:41के प्रोटेस्ट पे तो देखते हैं चैजून के आसपास वो प्रोटेस्ट शुरू हुआ लेकिन 20 तारीक के आसपास वो अपने
02:47�
02:47असली रंग में नजर आया, वहां से मांगो पर बात हुई, वहां से समझौते की में इस सस्ती नजर आई
02:53और दो दिन दिन में हमने देखा कि आंधोलन खत्म होता है, 36 दिन लगबग लगे, सीजेपी को इस जीत
02:58हांसिल करने में, जहरकंट वाले आंधोलन को लेकर आपको कि
03:02इन चात्रों को कितना इंतिजार करना पड़ेगा, अगर हम बात करें, अगले 24-48 गंटे या 72 गंटे में इस
03:08आंधोलन की क्या रूप देखा देख पा रहे हैं, आप कितने सफलों पाएंगे चात्र?
03:12देखें इस आंधोलन को जिस तरह भी बैभब ने कहा, और रोवनी ने कहा, समर्थन को बास्तर में राज्ट, जो
03:20दिल्ली का अंधोलन था, उसे राजनिटिक दनों का एक समर्थन बड़ा मजबूता, किसानो काविश्त मर्थन थे, लेकिन बहुश्त मर्थन थे,
03:27लेकिन ब
03:41तक बात पहुशने लगी थी तो इसलिए आपने देखा कि अंतिम चड़नों में जब बहुत बड़ी संख्या मैं बार बार
03:47कह रहा हूं संख्या नहीं होगी लोग सड़तों पर नहीं उतरेंगे तो सरकारें उसी साफ से अपना तोल करके ताकत
03:53तोल के डिसीजन लेती इसमें क
03:56कि अंजाब बाला मामला देख लो बहां भी इस तरह का अंदोला नहीं है तो बहां कोई इस तरह की
04:00चीज़े नहीं हो रही है कहीं हो नहीं जहां पर आप देखेंगे कि जहां पर संख्या बल है अब यहां
04:06क्या दिक्कत है जो आपने कहा भी बीजे पी का अकिलवारती बिद
04:22पहले हो रखी हो उसके खिलाप इतना बड़ा आंदोलन दखाओ तो वो जाने का मुह क्या रहेगा आत्मी गिलानी सी
04:28अगर हमारी तरफ से पहले गलती हो उसी तरही गलती फिर विरोधी ने कई हो उंगली तो उठा सकते कि
04:37बहां पर ये गलत हो रहा है लेकिन उतना प्रेसर उ
04:52प्रूसी बात मीडिया की बात है देखिए मीडिया का सीजेपी आंदोलन को लेकर जिस तरह से राज सुरू में काफी
04:58तरह जो मेंस्टी मीडिया की हम बात करते हैं वो गायब रहे उसको यहां पर इसके लिए उसे काफी आकरोज
05:05का सामना करना पड़ा लोगों ने कई लोग
05:21के साथ अक्तर दिखाई देती थी लोगों का मानना था कि यह सरकारी तरफ ज़्यादा जुगा हो इसका आप मुद्दों
05:27की तरफ जो नहीं है तो इस समय मीडिया के पास दो मौके हैं एक तो वो आम जन की
05:31अवाज उठाने की भी बात कर सकती है दूसरे CJP में जो उसको आई
05:51लेकिन बहाँ पर सचाई यह है जो मेरे सूतर बताते हैं उतनी बड़ी संक्या में लो या उतना ज्यादा उस्सा
05:56नहीं है उतना ज्यादा बहाँ पर ठात्रों का समर्थन फाइनसली भी उनको उतना समर्थन नहीं मिल पा रहा है तो
06:02यह समस्या है अब बीजेपी पीछे से क
06:04इस तरह समर्थन करती है चुकि यह मामला उप सिर्छ चातांदोलन का नहीं रह गया यह पेपर रीक का नहीं
06:10रह गया यह एक्टुली एंडियो इंडिया गटवंदन के बीच में एक दूसरे के मूँ पर तमाचा माने का टूल भी
06:16बन गया है तो अब इस टूल का इस्तिमाल क�
06:32आतु उसको लेके अगर चात्रों एक लिए फैसले लिए जाते रहें नुका साथ देने में यह रह्ट होगी तो चात्र
06:39अंदोलन और इवाओं के मिन्स्चित तोर पर राजनेतिक दलों के ना कि चात्रों और इवाओं के हिसाथ होंगे मेरा यह
06:47मानना है मैं मानता हूँ कि CJ
06:49किसमें अपना स्टेंड खिलियर करना चाहिए कि इतना करना चाहिए कि उन च्छात्रों को लगे जिन ही। बहुत सरी राजनेतिक
07:08बजा हैं।
07:09लेकिन दबाव इतना बनेगा कि जिस तरह कि वो बात कर रहे हैं कि पब्लिक में आकर के उनसे डिबेट
07:15की जाए.
07:15वो गर नहीं पाएंगे, यह थीक भी नहीं रहे हैं, इसका बीच का रास्ता निकालना जरूरी है, और मुझे लगता
07:25है, यह रास्ता चुकि जो मुक महतो हैं, उनका भूखरता समया, उन्होंने इस तरह से पानी और वो कहा था,
07:32तो कमचे का पानी और नवक लेना तो सुरू क
07:34कर दिया है, लिक्षित तौर पर इसका हल निकलेगा, जल्दी निकलेगा, बेकुल, किर्शफ जी आपसे भी सवाल लगवग यही, समझना
07:40भी चाहेंगे इसके साथ ही, यह BGP की अपनी क्या भूमिका है, सत्ता धीशों की अपनी क्या भूमिका है, जो
07:45बेशक जहारखंड म
07:46सत्ता में नहीं है, लेकिन विपक्ष के तौर पर कितना साथ दे रहे हैं, जब जंतर मंतर हम याद करते
07:51हैं, सीजेवी प्रोटेस्ट याद करते हैं, तो जाहिर तौर पर वहाँ पर लेफ्ट की भूमिका तमाम विपक्षी दलों का पहुंचना,
07:56अकिलेश यादव, केश्र
07:57जिवार, जिब पल्यादर जैसे तमाम दिगज पहुंचे थे, तो वहाँ चात्रों में होसला बड़ा, लगातार संख्या बढ़ती नजर आई थी,
08:02जैसे कि कृश्व जी बताई रहे हैं, ग्राउंड रिपोर्ट की चात्रों की उतनी संख्या जारकंट में मौचूद नही
08:08हैं, वैसा दमखम नजर नहीं आ रहा जैसा जंतर मंतर पे था, तो आप कैसे देख रहे हैं इस नादूलं
08:13के भविश्य को आने वाले चौबिस, तरदालिस या फिर भातर गंटों को लेकर, या मुकुन जरासी बात मैं आपको जोड़
08:18दूँ, बल्कुल, शेवें जी, यह �
08:25बल्कुल, यह राज़नी थी, कई बाद चात्रों के साथ, सरकार के स्टैट क्या रहते हैं, वहां अगर कोई ऐसी बात
08:32होती है, जिस तरे इमोसन ने देखिए, भ्रहंदूस्तान हुपी कोई भी प्रदेश हो, जहारखंट भी वैसा ही है, अगर चात्रों
08:38के साथ, सरकार को �
08:41जैसे यहां पर आपस में कान्फिक्त हो गया और लाठी वाठी भी चलती दिखाई दी, तो फिर आंदोलन और भ्याबय
08:48और बड़ा हो जाता है, या फिस तरह सोनम बांक चुप को जिस तरह से उठाया गया था, तो ऐसी
08:52चीजों से सरकार को बचने के बजाए, वह उनका कद
09:11परतन वाली स्थिति होंगों उस पर डिपेंड करेगा मुकुर्ण बेलकुश वाण जी
Comments