00:00विदेश से आने वाला पैसा भारत में कहां आएगा किस संस्था को मिलेगा कहां खर्च होगा और अगर उस पैसे
00:06से कोई स्कूल, अस्पतार, अनथाले या दूसरी संपती बनाई गई है तो उसका मालिकाना और नियंत्रण किसके पास होगा।
00:14इन्हीं सवालों को लेकर संसत से लेकर सडक तक बहस तेज हो गई है।
00:44अगर इस बिल मैं ऐसा क्या है जिस पर इतना बवाल मचा हुआ है।
00:48क्या सरकार सच्वें NGO की संपती अपने कबजे में ले सकती है।
00:52इसाइस अंगठनों को इससे इतनी चुनता क्यूं है।
00:55और सबसे बड़ा सवाल FCRA बिल 2026 विदेशी फंडिंग को पारदर्शी बनाएगा या सरकार के हाथों में ज्यादा ताकत देगा।
01:04आए पूरी कहानी समझते हैं।
01:05नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं One India Hindi।
01:13सबसे पहले समझते हैं FCRA आखिर है क्या।
01:17FCRA यानि की Foreign Contribution Regulation Act ये कानून भारत में विदेशी सोर्स से मिलने वाले चंदे और योगदान को
01:24नियंतरत करता है।
01:25किसी NGO Trust या संस्था को विदेश से पैसा प्राप्त करना है तो उसे FCRA के तहत registration या निरधारित
01:32प्रक्रिया का पालन करना होता है।
01:34विदेशी योगदान के इस्तिमाल, banking, record और reporting से जुड़े नियम भी इसी ढहाचे के तहत आते हैं।
01:40यानि सरकार विदेशी पैसे पर पूरी तिरह रोक नहीं लगाती बलकि ये तै करती है कि विदेशी पैसा कहां से
01:46आए, किस के पास जाए और किस उदेश्य से इस्तिमाल हो।
02:10सबसे बड़े विवाद पर, FCRA Amendment Will 2016 में एक महतोपुन व्यवस्था प्रस्ताविद की गई है, Designated Authority, यानि कि
02:18एक नामित प्राधिकारण, अगर किसी संस्था का FCRA registration रद्ध हो जाता है, संस्था खुद अपना registration surrender कर देती
02:26है, या उसका registration खत्म होने के बाद वो समय पर renew नहीं ह
02:31होता, तो उसके विदेशी योगदान और उस से जुड़ी संपतियों को लेकर ये प्राधिकार अन्भूमिका निभाएगा, यही प्रावधान पूरे विवाद
02:40का केंदर है, माले जी किसी संस्था ने विदेशी फंड की मदद से एक अस्पताल बनाया, वर्चु तक वो अ
03:00स्टेटिस बहाल नहीं करा पाती, तो संपति के स्थाई हस्तनांतरन का रास्ता खुल सकता है, यानि मामला सिर्फ विदेशी बैंक
03:09खाते में पड़े पैसे तक समित नहीं है, बात उन संपतियों तक पहुँचती है, जो विदेशी योगदान से वनाई गई
03:15है, सरकार के हा�
03:26या एजनसी को ट्रांसफर करने या निर्धारित प्रक्रिया के तहरत बेचने का प्रावधान भी प्रस्तावित है, बिक्रे से मिलने वाली
03:34रकम, Consolidated Fund of India में जमा के जाने की ववस्ता बताई गई है, लेकिन यहाँ एक महतोपून बात समझना
03:41जरूरी है, सरकार का कहना है क
03:43यह ववस्ता सीधे संपत्ती हडपने के लिए नहीं, बलकि उन संपतियों के प्रबंधन के लिए है, जिनका SCR status खत्म
03:50हो चुका है, सरकार के नुसार मौझूदा कानून में विदेशी योगदान से बनी संपतियों के संबंध में प्रबंधन और निप्टान
03:57की प्रक्रिया
03:58को लेकर वेवारिक कमी थी, प्रिस्तावित संशुधन उस प्रक्रिया को स्पश्ड करता है, सरकार ये भी कह रही है कि
04:04अगर संस्था अपना SCR registration बहाल करा लेती है, तो प्रिस्तावित विवस्ता में संपत्ती और अप्रयोक्त विदेशी फंड वापस करने
04:13का रास्ता मौ�
04:13जूद है, यानि सरकार का तर्क है, ये स्थाई कपजे का पहला कदम नहीं, बल्कि निगरानी और संरक्षन की विवस्ता
04:19है, लेकिन विपक्ष क्यों भड़का हुआ है, यहीं से राजुनितिक विवाद शुरू होता है, विपक्ष और नाकरिक समाज के कुछ
04:27संगठनों का
04:28कहना है कि प्रस्तावित वबस्था सरकार को बहुत व्यापक अधिकार ते सकती है, उनकी चुनता है कि अगर किसी संस्था
04:34का FCR registration किसी विवाद या प्रिशासने के कारण से खत्म होता है, तो विदेशी फंड से बनी उसकी संपत्ती
04:42भी सरकारी नियंत्रण में जा सकती है, �
04:46और यही वज़ा है कि विपक्ष इसे NGO की स्वतंतरता और संस्थागत स्वायरता के लिए चुनौती बता रहा है, अलोचकों
04:53का तर्ख है कि एक अस्पताल, स्कूल या सामाजिक संस्था सिर्फ इसले सरकारी नियंत्रण में नहीं जाने चाहिए, क्योंकि उसकी
04:59FCR स्थी ब�
05:13पड़ गई है, अब उस सवाल पर आते हैं, जिसने इस विबाद को और समेधन शील बना दिया है, कुछ
05:17असाई संगठनों और चर्च समुहों ने प्रस्तावित कानून को लेकर चिंता जताई है, उनका कहना है कि भारत में कई
05:24एसाई संस्थाय, शिक्षा स्वास्त अनाथा
05:26समाजिक सेवा और दूसरे कल्यानकारी शेत्रों में काम करती है, और इसमें से कुछ को विदेशी योगदान मिलता है, इसलिए
05:33उन्हें डर है कि नए प्रावधानों का असर उनके द्वारा संचालित संस्थानों और विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर
05:40पड़
05:56होती है, यानि बहस का असली सवाल ये है कि कानून का इस्तिमाल वेवहार में कैसे होगा और सरकार की
06:03शक्तियों पर क्या सुरक्षा कवच होंगे, सरकार का जवाब क्या है, केदर सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है
06:12कि बिल किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने
06:15के लिए नहीं है, सरकार का कहना है कि इसका उद्देश विदेशी फंटिंग के निगरानी मजबूत करना, प्रिशासनी कम्यों को
06:21दूर करना और जवाब देही बढ़ाना है, सरकारी पक्ष के मुताबिक विदेशी धन भारत में आये तो उसका इस्तिमाल होशित
06:28उद्दे�
06:40सरकार का तरकी ये भी है कि विदेशी प्रभाव और विदेशी फंडिंग के निगराने सिर्फ भारत में हो, कई देशों
06:47में विदेशी प्रभाव और विदेशी वितिया योगदान से जुड़े अलग-अलग नियामक धांचे मौजुद हैं, एक और बड़ा बदलाओ, र
07:06धारित प्रक्रिया के तहट प्रमाण पत्र समाप्त हो जाता है, तो उसके FCR स्टेटस के खत्म होने की सिथी पैदा
07:13हो सकती है, यानि सिर्फ सरकार द्वारा रेजिस्ट्रेशन रद करना ही एक मातर सिथी नहीं है, रिन्वल ना होना भी
07:19महत्वपुन हो सकता है, इसका मतल�
07:34प्रावधान वाले अलग-अलग प्रकार की संगठन, समाजिक, श्यक्षनिक, धार्म, एक सांस्कृतिक और अनिसंस थाएं इसके दाइरे में आ सकती
07:41है, बशर्ते FCR के तहट विदेशी योगदान प्राथ कर रही है, यानि यह सिर्फ किसी एक प्रकार के NGO का
07:47कानून नहीं ह
07:48असर काफी व्यापक हो सकता है, सजा की प्रावधान में भी बदलाओ, बिल में FCR उलंगन के लिए अधिक्तम कारावास
07:55की अबधी को पाच वर्ष से घचा कर एक वर्ष करने का प्रिस्ताव भी शामिल है, पहली नजर में यह
08:01प्रावधान सकती बढ़ाने के बजाए कुछ
08:03मामलों में दंड को कम करता हुआ दिखाई देता है, लेकिन दूसरी तरफ बिल अनुपालन और जवाब देही से जुड़े
08:09धामचे को मजबूत करने की कोशिश करता है, यानि ये बिल सिर्फ एक दुशा में सकती नहीं करता बलकि FCR
08:15विवस्था के अलग-अलग हिस्सों मे
08:17बदलाओ करता है, अब सबसे बड़ा सवार, क्या सरकार NGO की संपती बेच सकती है, प्रस्तावित रवस्था में कुछ परस्तितियों
08:23में हाँ, लेकिर इसे ऐसे समझना जरूरी है कि ये अधिकार FCR certificate की समापती से जुड़ी प्रक्रिया के तहत
08:30प्रस्तावित है, अगर संस्
08:45स्थाई हसनांत्रन या फिर निप्यान की व्यवस्था लागू हो सकती है, इसलिए ये कहना कि सरकार किसी भी NGO की
08:53संपती कभी भी जब्त कर लेगी, बिल की पूरी दस्वीर नहीं बताता, लेकिन ये भी उतना ही महतोपुर्ण है कि
09:00प्रस्तावित कानून को विदेशी फंड
09:03से बने संपतियों के मामले में पहले की तुलना में स्पष्ट और व्यापक प्रशासनिक भूमिका देता है, धार्मिक संपतियों को
09:12लेकर क्या प्रावधान है, ये भी बहुत महतोपुर्ण पहलू है, प्यारस के मुताबिक अगर संबंदित संपती पूजास्थल है, तो �
09:20designated authority को उसके धार्मिक चरत्र को बनाय रखने की विवस्था करनी होगी, सरकार्गियों से भी ये कहा गया है,
09:27कि धार्मिक और समाजिक संस्थाओं की गतिविधियों के संबंध में बिल का उद्देश्य, नियमन और जवाब दे ही है, किसी
09:35विशेश धर्म को निशाना बनाना
09:36नहीं, यानि धार्मिक संस्थाओं को लेकर उठ रहे चिन्ताओं का जवाब इसी कानून और इसकी सुरक्षा और लागू होने वाले
09:44नियमों के आधार पर दिया जा रहा है, तो सबसे जरूरी सवाल,
09:57FCR ए इतना महत्वपुन क्यों है?
10:17संस्थाओं को लेकर पूरी भहस है, एक तरफ राष्टे सुरक्षा और पारदर्शीता, दूसरी तरफ सिविल सोसाइटी की सोतंदरता और संस्थागत
10:27स्वायता, और आप 2026 में इतना बड़ा विवाद क्यों, क्योंकि ये सिर्फ पुराने FCR नियमों को थोड़ा बदलने
10:46जब की बड़ी संख्या में प्रमार्पत्र रद्ध या फिर समाप्त भी हो चुके हैं, 2019 से 2022 के बीच 13
10:53,520 संगठनों ने कुल 55,741 करोड रुपे का विदेशी योगदान प्राप्त किया था, इन आकड़ों से अंदाज लगाया जा
11:02सकता है कि विदेशी फंडिंग का नेट
11:15पुणबार, FCRA Amendment Bill 2026 अभी संसद में 24 धीन है, यानि कि इसे अंतिम कानून मान लेगा सही नहीं
11:22होगा, सरकारी से संसद के मनसुन सत्र के एजिंटे में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, इस बीच विपक्ष
11:28और प्रभावित समू इसके प्रावधानों पर सवाल उठा
11:31रहें, आने वाले समय में संसद की बहस के दौरान ये साफ हो सकता है कि designated authority की शक्तियां
11:37कतनी व्यापक होगी, संस्थाओं को क्या कानूनी सुरक्षा मिलेगी और संपतियों के स्थाई हस्तानांटरंट की प्रक्रिया में किस तरहे की
11:45अपील या फिर समिक्षा व्यवस्था ह
12:16यही वैस सवाल हैं, जिनके जवाब इस पूरे विवाद की दिशाताय करेंगे
12:17वैद्य गतिविदिया अनावश्यक सरकारी निंत्रण के नीचे न आ जाएं।
12:47और नियंत्रण के बीच की सीमा भी उतनी ही महत्तोपुन है। और यही वज़ा है कि FCR बिल
12:532026 आने वाले दिनों में संसद की भीतर ही नहीं बलकि देश भर में एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी
12:59बहस का विशय बना रह सकता है। इस ख़बर में इतना ही हमने कोशिश की है कि आपको FCR से
13:04जूड़ी सारी जानकारिया इस सब वीडियो के मात्यम से दी जाए
13:07FCR क्या है क्यों इंपोर्टेंट है विपक्ष का हंगामा क्यों है जो दूसरे धर्मों के लोग है हिसाई धर्म के
13:13लोग वो चिंदित क्यों है इस कानून के अंदर क्या है इससे क्या क्या देश को फाइदा होगा क्या क्या
13:18क्या लोगों को फाइदा होगा सरकार क्या क्या कर
13:20सकती है तुम जो लगता है कि मैंने 360 डिग्री एंगल से आपको सबकू समझा दिया है अगर वीडियो पसंद
13:26आई हो तो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेर कीजिए ताकि एफसी आरे पर ब्रामा
13:30खबरों से लोग बच पाए और सठीक जानकारी उनको मिल पाए और देश-दुनिया की बाकी खबरों के लिए देखते
13:35रहे हैं वनिट्या हिंती
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