00:00बद्दी बद्दी गालिया बोली किसी भी सब्समाज को शोभा न दे ऐसे शब्दों का प्रयोक किया गए मुझे तो गालिया
00:06दी गई मेरी स्वर्गिये माता को भी गालिया दी गई कि बच्पन में गलतिया होती है और बच्पन में गलतियों
00:13से सुधरने का अफसर भी होता है
00:15हाई फ्रेंड्स आज तो मन करता है बत आप से ही बाते करूँ जंतर मंतर पर जो कुछ भी हुआ
00:25देश और दुनिया ने देखा है कुछ शरार्थी बच्चों ने भद्दी भद्दी गालिया बोली
00:35किसी भी सब्दे समाज को शोभा न दे ऐसे शब्दों का प्रयोक किया गया मुझे तो गालिया दी गई मेरी
00:44स्वर्गिये माता को भी गालिया दी गई ना जाने कितना भद्दा स्वरूप था
00:52लेकिन मैं आज बात कर रहा चाहता हूं कि बच्च्पन में गल्तिया होती है और बच्पन में गल्तियों से सुधरने
01:04का अवसर भी होता है और यही तो बच्पना है और इसलिए
01:11मैं समाज के अंदर जो आक्रोश है उसको भली बात ही समझ सकता हूँ एक कल्चुरल शौक है कि हमारी
01:23बेटिया इस प्रकार की भाषा कैसे बोल सकती है लेकिन समय है इन बच्चों को गले लगा करके रहा दिखाने
01:34का एक गुमरा बच्चे है उनको रहा दिखाना हमारा काम ह
01:39है उनको सजा देना अदालतों के चक्कर कटवाना समाज में उनको प्रताडित करना इससे हम परिसित्या नहीं बदल पाएंगे
01:50मैं उन्हें माप करना चाहता हूँ समाज भी मेरी इस बात को स्विकार करे क्योंकि मेरे मन में एक ही
02:02भाव है कभी कभी दातों तले हमारी जीब आ जाती है
02:09खुन निकल आता है लेकिन हम दात तोड़ते नहीं है क्योंकि दात भी हमारे है जीब भी हमारी है बच्चे
02:19भी हमारे है उन्हें रहा दिखाना हमारा काम है गुमरा को रहा दिखाना कठीन होता है लेकिन कठीन काम हमको
02:26करना और इसलिए आओ मैं इन बच्चों को कहता हूँ
02:31बचाओ, हम देश के लिए साथ मिलकर के आगे बढ़ें, कुछ नया सिखें, गल्तियों से भी सिखें, अपने सपनों को
02:41लेकर के चल पड़ें, देश बहुत आगे बढ़ रहा है, आगे बढ़ने वाला है, और आपका भी आगे बढ़ना निस्सित
02:51हो, यही मेरा सपना है, मैं �
02:54आपके लिए जीता हूँ, आपके भुधिवल भविश के लिए कपता हूँ, आओ, हम मिलकर के देश को आगे बढ़ाएं, बहुत
03:03बहुत धन्यवाद दोस्तों, बस आओ, गल्तियों से शिखो, आगे बढ़ो
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