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क्या भगवान जगन्नाथ वास्तव में श्रीकृष्ण का ही स्वरूप हैं?

इस विस्तृत हिंदी डॉक्यूमेंट्री में जानिए श्रीकृष्ण के अंतिम क्षणों से लेकर भगवान जगन्नाथ के प्रकट होने तक की अद्भुत पौराणिक यात्रा।

महाभारत के बाद गांधारी के श्राप, द्वारका के विनाश, श्रीकृष्ण के दिव्य हृदय, नील माधव, राजा इन्द्रद्युम्न, विश्ववसु, दारु ब्रह्म, विश्वकर्मा, अधूरी मूर्ति, नवकलेवर और रथ यात्रा जैसे रहस्यमयी प्रसंगों को इस फिल्म में विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

यदि आपको सनातन धर्म, हिंदू पुराण, भगवान कृष्ण, भगवान जगन्नाथ और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहस्य जानना पसंद है, तो यह वीडियो आपके लिए है।

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🚩 जय जगन्नाथ
💙 जय श्रीकृष्ण
🕉️ हरि बोल

महत्वपूर्ण सूचना:

यह वीडियो स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, क्षेत्रीय परंपराओं और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित एक भक्तिपूर्ण एवं शैक्षिक प्रस्तुति है। विभिन्न परंपराओं में कथा के कुछ विवरण अलग हो सकते हैं।

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भगवान जगन्नाथ
जगन्नाथ की पूरी कहानी
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कृष्ण का दिव्य हृदय
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Transcript
00:28नमस्कार!
00:30उनके हाथ और पैर अधूरे क्यों है? उनकी आखें इतनी बड़ी और बिना पलग जपकाए लगातार देखने वाली क्यों है?
00:38ये एक ऐसा रहस्य है जिसने सदियों से बड़े बड़े विद्वानों को भी हैरान कर रखा है? जरा इस तुलना
00:45को देखिए! आम तोर पर जब ह
00:46किसी भगवान की मूर्ती की कलपना करते हैं, तो वो एकदम सम्मित यानि सिमिट्रिकल होती है, शारीरिक रूप से एकदम
00:52पूर्ण, लेकिन पुरीमी विराजमान भगवान जगनात का रूप बिलकोल अलग है, उनके हाथ पैर सपष्ट नहीं है, और वो बड़ी
01:00-बड़ी
01:16युद्ध के अंत में जब माता गांधारी ने अपने सौ पुत्रों को खो दिया, तो उन्होंने उस भयंकर दुख में
01:23भगवान श्री कृष्ण को एक शाप दे दिया, उन्होंने कहा कि जिस तरह उनका वंश खत्म हुआ है, ठीक 36
01:31सालों के भीतर कृष्ण का यदुवंश �
01:33अब ही आपस में लड़कर मिट जाएगा, और स्वर्ण नगरी द्वारका समुंदर में डूब जाएगी, और श्री कृष्ण वो बस
01:41मुस्कुरा दिये, क्योंकि वो जानते थे कि ये सब उनकी ही रची हुई लीला का हिस्सा है, अब इस टाइम
01:48लाइन पर नज़र डालिए
01:49ठीक, 36 साल बाद वो खौफनाक श्राप सच साबित हुआ, यादुवंशियों में भयंकर कलह हुई और द्वारका डूबने लगी, इसी
01:58विनाश के बीच एक जंगल में श्री कृष्ण एक पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे, उनके लाल चरन किसी
02:05कमल की तरह चमक रहे
02:07तब ही जरा नाम के एक शिकारी ने दूर से उन चरनों को हिरन समझ कर तीर चला दिया, जब
02:12शिकारी रोने लगा, तो कृष्ण ने उसे समझाया कि ये कोई भूल नहीं थी, बरकि त्रेता युग में राम अफ्तार
02:19के दौरान बालीवद के कर्मों का हिसाब था, इसे ही कहत
02:34अगनी में उनका पूरा शरीर भस्म हो गया, लेकिन एक चीज थी जो जली ही नहीं, जी हां वो था
02:40श्री कृष्ण का दिव्य और चमकता हुआ हृदय, वो हृदय जिसमें पूरी स्रिष्टी का प्रेम समाया था, अगनी भी उसका
02:47कुछ नहीं बिगार पाई, तभी अचान
03:04दिव्य हृदय ने युगों और महासागरों को पार करते हुए एक बहुत लंबी यात्रा की, और ये बहता हुआ फृदय
03:12आखिरकार कहां पहुचा? उडिसा में, महानदी के तटपर. वहां सबर जनजाती के मुखिया विश्व वसु ने इस चमकते हुए काष्ठ
03:22खंड को
03:22देखा और तुरंद इसकी दिव्यता को पहचान लिया. उसने इसे एक गुप्त गुफा में स्थापित किया और नाम दिया नील
03:29माधव. विश्व वसु की भक्ती में कोई दिखावा नहीं था. बस एक भक्त का अपने भगवान से सीधा और सच्चा
03:37जुडाव था.
03:38खैर, ऐसी अलोकिक बात भला कितने दिन शुप सकती थी. अवंती के राजा इंद्रद्युम्न के कानों तक इस छिपे हुए
03:46देवता की खबर पहुँच कई. राजा विश्व के बहुत बड़े भक्त थे. उन्होंने तुरंत विद्यापती नाम के एक बहुत ही
03:53चतुर और
03:54साहसी ब्रामपड को नील माधव को खोजने के इस मिशन पर भेज दिया. सबर गाउं पहुचकर विद्यापती ने एक बहुत
04:01ही गजब का दिमाग लगाया. उसने मुख्या की बेटी ललिता से शादी कर ली. फिर काफी मिननतों के बाद ससर
04:08विश्व वसू उसे नील माध�
04:14पर पट्टी बंधी रहीगी. विद्यापती मान गया, लेकिन काफी चालाकी से उसने अपनी मुठी में सरसों के दाने भर लिये
04:21और पूरे रास्ते उन्हें एक-एक करके गिराता रहा. काफी स्माठ है ना? इसका नतीजा क्या हुआ? कुछ महीनों बाद
04:28जब बारिश हु�
04:28तो वो सरसों के दाने हरे भरे पौधों की एक कतार में बदल गए. राजा इंद्रद्युम्न ने इसी रास्ते को
04:35फॉलो किया और गुफा तक पहुँच गए. लेकिन वहां पहुँचकर उनका दिल तूट गया. गुफा पूरी तरह खाली थी. नील
04:42माधव वहां से गायव
04:44वो चुके थे. राजा पूरी तरह तूट चुके थे. लेकिन उनकी ये निराशा ज्यादा देर नहीं टिकी. उसी रात भगवान
04:51विश्नु उनकी सपने में आए. उन्होंने कहा कि वो नील माधव के रूप में अब नहीं रह सकते. लेकिन राजा
04:57को एक नया काम सौपा. भ
05:12उसी से जगनात, बलभद्र और सुभद्रा की तीन मूर्तियां बनानी है. अगले ही दिन चमतकार हुआ. वो विशाल और दिव्वे
05:21लकडी सच में किनारे पर तैरती हुई आई. लेकिन एक नई परेशानी खड़ी हो गई. राज्य की सेना और बड़े
05:29-बड़े हाथी मिलक
05:30उस लकडी को हिला तक नहीं पाए. तब राजा ने आदिवासी मुख्या विश्ववसु को बुलाया. और जैसे ही विश्ववसु ने
05:38उसे अपने सच्चे मन से चुआ, वो भारी भरकम लकडी एकदम हलकी हो गई. और तो और कोई भी मूर्तिकार
05:45उस बेहत कठोर लकडी प
05:59काम पूरा करने के लिए उससे बिलकुल अकेले एक बंद कमरे में ठीक 21 दिनों का समय चाहिए. अगर किसी
06:06ने भी बीच में दर्वाजा खोला, तो वो काम वहीं छोड़कर चला जाएगा. राजा ने शर्त मान ली, भारी दर्वाजा
06:13बंद कर दिया गया. अंदर से लगाता
06:15चीनी और हथोड़े की आवाजें आ रही थी, लेकिन पंद्रवें दिन. अचानक वो आवाजें बिलकुल बंद हो गई. एकदम सन्नाटा,
06:23सोचे उस वक्त महल में कैसा भारी सस्पेंस और बेचैनी रही होगी. रानी गुंडिचा बुरी तरह घबरा गई. उन्हें लगा
06:30
06:30शायद वो बूढ़ा इंसान भूख प्यास से अंदर ही दम तोड़ चुका है. उनके बार बार जिद करने पर सोलवे
06:37दिन राजा ने दर्वाजा खुलवा दिया. शर्त तोट चुकी थी. अंदर वो मूर्तिकार नहीं था और तीनों मूर्तिया बिलकुल अधूरी
06:44थी. उन
07:00अच्छा थी. आकाशवानी ने कहा, मेरे ये बड़ी-बड़ी आँखें इसलिए हैं ताकि मैं बिना पलक जपकाए हर पल अपने
07:07भकतों को देख सकूँ. मेरे हाथ-पैर इसलिए अधूरे हैं क्योंकि मुझे किसी की मदद करने के लिए किसी शारेरिक
07:13साधन की जरूरत नह
07:28आनी श्री कृष्ण के उसी धड़कते हुए अमर हिदय को भगवान जगनात की लकडी की मूर्ती के अंदर स्थापित कर
07:34दिया. कहते हैं कि राजा उस लकडी के अंदर उस दिव्य धड़कन को साफ साफ सुन सकते थे.
07:40अब आप सोच रहे होंगे कि क्या ये सब बस इतिहास की बाते हैं? बिल्कुल नहीं. आज की इस मौडन
07:46दुनिया में भी ये रहिस्य एक आसाधारन परंपरा के रूप में जीवित है. हर 12-19 साल में नव कलेवर
07:53नाम का एक अनुष्ठान होता है. इसमें पुरानी मूर्तिय
08:08आज भी बिना किसी रुकावट के जारी है. और ये महा कावे जैसी यात्रा हर साल रत यात्रा के रूप
08:15में अपना सबसे भव्य रूप लेती है. इस दिन भगवान सिर्फ मंदिर की दिवारों में कैद नहीं रहते, बलकि विशाल
08:22रतों पर सवार होकर खुद सड़कों पर
08:38करते हैं. हम इनसान हमेशा परफेक्शन या पूर्णता के पीछे भागते हैं, जो अकसर बहुत दूर लगती है. तो क्या
08:45भगवान जगनात का ये अधूरा रूप वास्तव में ईश्वर और इनसान के बीच सबसे सच्चे और उत्तम जुडाव को नहीं
08:52दर्शाता? शाय�
09:10झाल
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KidsMania25
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