00:00जब सरहत पर युद्ध चल रहा हो और मिसाइले दागी जा रही हो तब अगर अचानक जंग में घायल हुए
00:05सेनिकों के आकड़े गायब होने लगे तो आप क्या सोचेंगे?
00:08क्या ये कोई तक्नीकी खराबी है या फिर युद्ध की असली और कड़वी सच्चाए को चिपाने की सोची समझी कोशश?
00:15अमेरिकों और इरान के बीच चल रहे तनाव के बीच पेंटगॉन यानि अमेरिकी रक्षा मंत्राले के एक नए और हरान
00:21करने वाले डेटा ने पूरी दुनिया को चोका दिया है
00:24अचानक से अमेरिकी सेनिकों की मोतो और उनके घायल होने की आकडों में एक बड़ा उच्छाल देखा गया है
00:30आखिर पेंटगॉन के इस नई रिकॉर्ड के पीछे का सच क्या है
00:34और क्यों इस डेटा ने अमेरिकी राजनीती से लेकर आम जनता के बीच भूचार ला दिया है
00:39आए इस पूरी कहाने को परदर परद सबश्टे है
00:42खबर ये है कि CNN के एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक पेंटगॉन ने अपने Defense Casuality Analysis System यानि कि
00:50DCAS को अपडेट किया है
00:51और जैसे ही ये डेटाबेस अपडेट हुआ बैसे ही एक अजीब बात सामया है
00:55डेटाबेस में अचानक चार ऐसी मोटों को दोबारा जोड़ दिया गया जुन्हें पहले ही दट्च नहीं किया गया था
01:02इतना ही नहीं, 140 से जादा घायल सैनिकों के नाम भी अचानक इस सरकारी डेटाबेस में शामिल कर दिये गए
01:08अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि क्या 600 से जादा सैनिक मारे गए हैं?
01:27तब से लेकर अब तक कुल 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए और 624 सैनिक घायल हुए
01:33लेकिन सवाल आकडू का नहीं, सवाल पेंटागॉन की नियत और ट्रांस्पिरिंसी का है
01:37कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब पेंटागॉन इस डेटाबेस में एक नई काटिगरी जोडता है
01:42जिसका नाम रखा गया है Overseas Operations
01:44इस नई काटिगरी में 7 जुलाई के बाद से मारे गए और घायल हुए सैनिकों का हिसाब किताब रखा गया
01:50है
01:51अब आप सोच रहे होगे कि 7 जुलाई की ही तारीख को क्यों चुना गया
01:55दरसल CNN के अनुसार 7 जुलाई वही तारीख है जब अमेरीकी राष्टपती डॉनल्ड श्रम्प ने संसत
02:00यानि कॉंग्रेस को वर पावर्स नोटिफिकेशन भेजा था
02:04ट्रम्प सार्शन का कहना है कि इरान के साथ जो सीजफायर हुआ था वो खत्म हो चुका है
02:09और 7 जुलाई से शुरू हुई ये लड़ाई संखर्ष के एक बिल्कुल नए चरण को दर्शाती
02:13लेकिन चौकाने वाली बात ये है कि इस नई काटेगरी में पेंटागॉन ने साफ साफ लिखा ही नहीं कि ये
02:19डेटा किस खास जंका है
02:20सैनिकों के विक्तिगत नाम और वियोरे इसमें जरूर दर्ज है
02:23जैसे कि जॉर्डन में इरानी हमले में मारे गए अमेरिका के तीन जवान और उतरी इराक में इरानी ड्रोन को
02:29सुरक्षत तरीके से नश्ट करने के दोरान जान गवाने वाला एक और अमेरिकी सैनिक
02:33अगर हम पूरे युद की मानिवे कीमत को देखे तो सच वाकई डराने वाला है
02:38जब ये जंग शुरू हुई थी तो पहले चरण में इसे उपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया था
02:43इस पहले चरण में 14 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और 400 से जादा घायल हुई थे
02:48और जब इन पुराने आकडों को नई Overseas Operations वाली लिस्ट के साथ जोड़ा जाता है
02:53तब जाकर कुल आकडा बनता है 18 मोते और 624 घायल
02:57अब बड़ा सवाल ये उठता है कि पेंटागॉन ने इस एक ही युद्ध को दो अलग-अलग हिस्सों में क्यों
03:02बाटा
03:02क्या ये आकडों को छोटा और कम खतरनाक दिखाने की कोई रणीती थी
03:06जब पतरकारों ने और खुद अमेरिकी सांसदों ने पेंटागॉन से पूछा कि इरानी हमलों की बीच आकडों में ये रुकावट
03:13और कमी क्यों आई थी
03:14तो आपको जानकर हैरानी होगी कि रविवार दो पहर तक पेंटागॉन की तरफ से इस पर कोई जवाब आया ही
03:20ने
03:20अब ये मामला सर्फ सेनिकों के आकडों तक सीमित नहीं रह गया ये कानूनी और राजनीतिक दंगल बन चुका है
03:25अमेरिका में साल 1973 का एक कानून है वार पावर साग्ड ये कानून कहता है कि राष्ट्रपती बिना अमेरिकी संसत
03:33की मंजूरी के केवल 60 दिनों तक ही कही सेने कारवाई कर सकते हैं
03:3860 दिन पूरे होता ही उन्हें या तो जंग रोक नहीं होगी या फिस संसत से इजासत लेनी होगी
03:43यहां ट्रम्प प्रसाचुन ने एक नया कानूनी तर्क पेश किया
03:46उनका कहना है कि बीच में जो युद विराम हुआ उसने उस 60 दिन की समय सीमा की घड़ी को
03:52रोक दिया था
03:53और 7 जुलाई से जब दोबारा लडाई शुरू हुई तो वोच साथ दिन का टाइमर रीसेट हो गया
03:58यानि शून्य से फिस से शुरू हो गया
04:14वह रिपब्लिकन पार्टी की वरिष्ट सीने टरलिसा मुर्कॉवस्की ने चिंता जुताई है कि अगर राश्टपती ऐसे ही युद विराम का
04:21बहाना बनाकर 60 दिन की घड़ी को रीसेट करते रहे
04:24तो अमेरिकी राश्टपती बिना संसत की मंजूरी के सालों तक जंग लड़ता रहेगा
04:30दूसरे तरफ अमेरिका के विदेश मंत्री मारको रूबियो का तर्क ये है कि खुद वार पावर से आक्ठी गैर समविधानी
04:36तो सवाल ये नहीं है कि फाइलों में काटिगरीज कैसे बदली गई
04:39सवाल ये है कि क्या जंग की कीमत को काज़ी जोड घटाव से कम किया जा सकता है
04:44अच्रा अमेरिकी जवानों की जान जा चुकी है
04:47चैसे उसे जाता सैनिक जखमी है और इरान अमेरिका का ये संगर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है
04:52एक तरफ ट्रांस्परिंसी पर उठते सवाल है और दूसरी तरफ राष्ट्रपती के अधिकारों को लेकर समविधान की खीचा थन है
04:58लेकिन इस पूरे सियासी और सैनिक खेल के बीच सबसे बड़ा सवाल आज भी वही खड़ा है
05:03क्या वार पावसाक की इस कानूनी दाव पेच के सहारे अमेरिका एक ऐसी अंचाही और अनंत जग की तरफ बढ़
05:09रहा है
05:10जिसकी असल कीमत आखिरकार सरहद पर खड़े सैनिकों को ही चुकानी पड़ेगी
05:14आप इस पूरे मुद्धे पर क्या सूचते है
05:16क्या पेंटगॉन को हता हातों के आकड़े इस तरह अलग-अलग बाटने चाहिए थे
05:20कॉमेंट सेक्शन में अपनी राए ज़रूर बताए देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहे
05:24One India Hindi
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