00:00जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब अपने लक्ष के लिए पूरी महनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलती, हिम्मत
00:06पूरी तरह से तूड़ जाती है
00:08सफल हुए या सफल हुए ये थोड़ा बाद की बात है
00:10ज्यादा पहले की बात यह है कि किस काम में सफल हुए या सफल हुए, तुम्हें कैसे पता कि तुम
00:16जिस काम में लगे थे, जिस लक्ष के पीछे लगे थे, वो करने लायक था ही, यह तुम्हें कैसे पता,
00:23आधिकांशता हमारे साथ यह होता है कि हमने जो लक्ष चुने होते है
00:27हम जिन कामों में लगे होते हैं
00:29वो काम सिर्फ भेड़ चाल के कारण हमने चुने होते हैं
00:34वो लक्ष वास्तों में हमारी अपनी समझ से निकल लई नहीं होते हैं
00:40चुकि वो काम तुम्हारे अपने अंतस से नहीं निकला है
00:44इसलिए तुम उस काम को अपनी पूरी उर्जा भी नहीं दे पा रहे हैं
00:46क्योंकि दिल तो है नहीं ना उसमें
00:49जो आदमी साहस के साथ अपने लिए एक सही लक्षे, सही काम, सही अभियान खोज लेता है
00:56वो आदमी फिर बहुत मुश्किल से रुकता है
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