00:00ज्यादा तर लोग जो कहते हैं पर पौधों में भी तो जान होती है न ये ले भाई खाले अरे
00:04पौधों में भी तो जान होती है
00:08वो ये कहकर क्या जायस ठहराना चाहते हैं कि पशु को खा लो क्योंकि पौधों में भी जान होती है
00:14तो पशु को खा सकते हैं
00:16तो यह पशु है यह पौधा है हमने का इसमें भी जान होती है तो पशु को खा सकते हैं
00:21तो ठीक है अब यह मनुष्य है यह पशु है इसमें भी जान होती है तो चलो मनुष्य को खा
00:26लेते हैं
00:29क्या समस्या हो गई इतने मर रहे हैं काहे को जलाते हैं उनको अरे वो प्रोटीन हैं और भारत में
00:38बहुत प्रोटीन डिफिशियंसी है
00:43क्या समस्या हो गई
00:46क्या समस्या हो गई बताओ तो
00:47और हम तो मारने की भी बात नहीं कर रहे हम तो कह रहे हैं
00:49मर गया है तब ही खालो हिंसा भी नहीं है
00:51क्या समस्या हो गई
00:55क्योंकि दोनों में जान होती है
00:58तो फिर पशु और मनुष्य भी एक बराबर है क्योंकि दोनों में जान होती
01:01तो फिर मनुष्य भी खालो ना मनुष्य में क्यों रुक रहे हो
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