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Vikram 1 Rocket Launch: अंतरिक्ष में गूंजा 'वंदे मातरम्', PM Modi के इस पोस्टकार्ड में क्या है खास? भारत की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है।

भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इस बार यह कमाल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सहयोग से हैदराबाद स्थित एक निजी स्पेस टेक स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने कर दिखाया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre) से लॉन्च किए गए देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' (Vikram-1) ने दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर सफल उड़ान भरी और कुछ ही मिनटों में अपने पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित कर दिया। इस ऐतिहासिक मिशन को 'मिशन आगमन' (Mission Aagaman) नाम दिया गया है, जो भारत के एक नए अंतरिक्ष युग की शुरुआत का प्रतीक है।

इस मिशन की सबसे खास बात केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि इसके साथ अंतरिक्ष में भेजी गई भावनात्मक और भारत की वैज्ञानिक विरासत से जुड़ी वस्तुएं हैं। इस रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के हाथों से लिखा हुआ 'वंदे मातरम्' अंकित एक विशेष पोस्टकार्ड भेजा गया है। इसके अलावा, भारत को विज्ञान के क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचाने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई (Dr. Vikram Sarabhai), सर सी. वी. रमन (Sir C.V. Raman) और मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (Dr. A.P.J. Abdul Kalam) की सूक्ष्म प्रतिमाएं (Micro-statues) भी अंतरिक्ष भेजी गई हैं। साथ ही 18 कैरेट सोने से बना एक छोटा रॉकेट मॉडल भी इस सफर का हिस्सा रहा, जिसने इस लॉन्चिंग को बेहद अनोखा बना दिया है।

आपको बता दें कि स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना इसरो के ही दो पूर्व वैज्ञानिकों ने सरकारी सेवा छोड़कर की थी, जिनका पहला ऑर्बिटल मिशन आज पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहा है। इस रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे (Space Debris) को साफ करने वाली नई रोबोटिक तकनीक और कम लागत में छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की क्षमता का भी सफल परीक्षण किया गया है। पीएम मोदी ने इस बड़ी कामयाबी पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि भारत अब वैश्विक स्पेस मार्केट में अपनी निजी क्षमता का लोहा मनवा चुका है। इस गौरवशाली मिशन की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट और पर्दे के पीछे की कहानी जानने के लिए देखें वनइंडिया हिंदी की यह विशेष प्रस्तुति।

India has scripted history in space technology with the successful maiden orbital launch of 'Vikram-1', a rocket developed entirely by the private aerospace firm Skyroot Aerospace. Launched from ISRO's Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota, 'Mission Aagaman' successfully placed its payloads into Low Earth Orbit. The landmark mission carried several symbolic items representing India's cultural and scientific heritage, including a handwritten 'Vande Mataram' postcard by PM Narendra Modi, micro-statues of legendary scientists Dr. Vikram Sarabhai, Sir C.V. Raman, and Dr. A.P.J. Abdul Kalam, alongside an 18-karat gold rocket model.

#Vikram1Launch #SkyrootAerospace #MissionAagaman #PMModiSpacePostcard

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Transcript
00:004, 3, 2, 1, 0
00:22भारत ने अंतरिक्ष के छेत्र में एक और एतिहासी को प्लब्धी हासिल कर ली है
00:26इस बार ये काम केवल इसरों ने नहीं बलके भारत की एक नीजी स्पेस कंपनी ने कर दिखाया है
00:49है एडराबाद से स्काइरूट एरोस्पेस के पहले और्बिटल रॉकेट विक्रम एक ने अपने पहले ही मिशन में
00:56सफलता पुर्वग पृत्वी की कक्षा में पहुँचकर नया इतिहास रच दिया है
01:01इस मिशन की सबसे खास बाद सिर्फ रॉकेट की सफलता नहीं बलके उसके साथ अंतरिक्ष में भेजी गई
01:07वे प्रतिकात्मक चीजें भी हैं जो भारत की वैज्यानिक विरासात और राष्ट्रिय भावना का प्रतिनिधित्व करती हैं
01:14नमस्कार मेरा नाम है रिचापर आशर और आप देख रहे हैं वान इंटिया हैं
01:28श्री हरी कोटा सित इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉंच किये गए विक्रम एक रॉकेट ने दोपहर 12
01:35बज कर 5 मिनट पर सफल उडान भरी
01:38शुरुआत में लॉंच सुभे 11 बज होना था लेकिन नेविगेशन सिस्टम में समभावी तकनीकी संकेत मिलने के बाद कुछ समय
01:46के लिए उडान टाल दी गई
01:47सभी तकनीकी जांच पूरी होने के बाद रॉकेट ने सफलता पुर्वक उडान भरी और कुछी मिन्टों में अपने सभी पेलोड
01:54को लगभग 450 किलोमेटर उचाई पर प्रत्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर दिया
01:59ये मिशन इसलिए भी अतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार किसी नीजी भारत्य कंपनी ने अपने दम पर
02:06और बिटल रॉकेट तयार करके उसे सफलता पुर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है
02:10अब तक इस तरह की मिशनों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से इस रो निभाता रहा है
02:15विशेश अग्योगा मानना है कि इससे भारत के नीजी स्पेस सेक्टर को वैश्विक बाजार में नहीं पहचान मिलेगी
02:21और छोटे उग्रहों के कमलागत वाले प्रोजेक्शन पर बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में भारत मजबूत कदम बढ़ा रहा है
02:28इस मिशन का नाम मिशन आगमन रखा गया
02:30मिशन के साथ कई ऐसे विशेश वस्कुए भी अंतरिक्ष भेजी गए जिनोंने इस भावनात्मक और एतिहासिक दोनों ही दिश्टी से
02:37एक पास बना दिया
02:38इनमें सबसे अधिक चर्चा प्रधार मंती नरेंद्र मोदी के हाँ से लिखे वन्दे मातरम और पोस्ट कार्ट की हो रही
02:44है
02:45इसे इस मिशन के साथ अंतरिक्ष भेजा गया है
02:48इसके अलावा भारती वैज्ञानिकों इंजिनियरों और अंतरिक्ष यातरियों के संदेश वाले पोस्ट कार्ट भी इस मिशन का हिस्सा बने
02:55भारत की वैज्ञानिक विरासत को सम्मान देनी के लिए देश के महान वैज्ञानिक डॉक्टर विक्रम सारा भाई, सर सीवी रमन
03:03और डॉक्टर एपी जी अब्दुलकलाम की सुक्ष प्रतिमाये भी रोकेट के साथ अंतरिक्ष में भीजी के है
03:20यही नहीं, 18 कैरेट सोने से बना एक छोटा रोकेट मॉडल भी इस एतिहासिक कम मिशन में शाविल कहा
03:27इस मिशन का एक और महतुकून उदेश नई अंतरिक्ष तकनीकों का परिक्षन करना भी था
03:32इनमें छोटे उब्रहों को कम लागत में अंतरिक्ष तक पहुचाने वाली तकनीक के साथ-साथ अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे को
03:39हटाने के लिए विक्सीत रोबोटिक तकनीक का भी परिक्षन किया गया
03:42वविशु में यही तकनीक अंतरिक्ष में सुरक्षा और सैटेलाइट संचालन गिलिए बहुत एहम सावित हो सकती है
03:48स्काइरूट एरोस्पेस की कहानी भी प्रणा धायाग है
03:52इस कंपनी की स्थापना इसरों के दो पूर्व वैज्यानिकों ने की थी
03:55सरकारी सेवा छोड़कर उन्होंने नीजी स्पेस टेक्नोलोजी के छेतर में कदम रखा
04:00और आज उसका पहला और्बिटल मिशिन ही सफल हो गया
04:03प्रधार्मंति नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धी को भारत के लिए अतिहासिक्षन बताया
04:08और वैज्यानिकों इंजिनियरों तथा पूरी टीम को बढ़ाई दी
04:11उनका कहना है कि भारत अब अंतरिक शेतर में केवल सरकारी एजेंसियों तक समित नहीं है
04:16बलकि नीजी कंपनिया भी वैश्वीक स्तर पर अपने उक्षमता साबित कर रही है
04:20कुल मिलाकर विक्रम एक ये सफल ताक येवल एक रॉकेट लाउंच नहीं बलकि भारत के नए स्पेस यूग की शुरुआत
04:27मानी जा रही है
04:27इसे देश में निवेश, रोजगार, नवाचार और अंतराश्ट्य स्पेस मार्केट में भारत की भागिदारी को निगती मलने की उमीद है
04:35आने वाले वर्षों में भारत का निवजी अंतरिफुज छेतर दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्पेस एकोसिस्टम में शामिल हो
04:43सकता है
04:43इस ख़बर में इतना ही जो भी अपर वो हम आपको पुम्शाते रहेंगे तब तक देश दुनिया की बागी ख़बरों
04:48के लिए देखते रहें वोन इंडिया है
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