पुलिस चौकियों को चकमा देकर दौड़ती गाड़ियां, जिले में फैल रहा नेटवर्क
सवाईमाधोपुर. खाद की कालाबाजारी पूरे जिले में खुलेआम चल रही है। पुलिस, परिवहन और कृषि विभाग की मौजूदगी के बावजूद रोजाना दर्जनों गाड़िया तिरपाल से ढककर निकल रही हैं और किसानों को महंगे दामों पर यूरिया व डीएपी खरीदने को मजबूर कर रही हैं। इसका जीता‑जागता उदाहरण गत बुधवार को बहरावंडा खुर्द में सामने आया, जब पुलिस की नाकाबंदी में पकड़ी गई पिकअप से 100 कट्टे अवैध यूरिया जब्त किए। यह घटना केवल एक कार्रवाई नहीं बल्कि पूरे जिले में फैले उस गहरे जाल का आईना है, जहां माफिया और बड़े खाद विक्रेता मिलकर किसानों की कमर तोड़ रहे हैं। प्रशासन की चुप्पी और विभागों की अनदेखी इस खेल को और ताक़त दे रही है। इससे किसानों की खेती की तैयारी अधर में लटक रही है और महंगे दामों पर खाद खरीदना उनकी मजबूरी बन गया है।
प्रशासन की चुप्पी और किसानों की टूटी कमर
जिले में खाद की कालाबाजारी का खेल अब इतना बड़ा और संगठित हो चुका है कि यह केवल एक‑दो घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में रोजाना खुलेआम चल रहा है। तिरपाल से ढकी पिकअप और ट्रैक्टर‑ट्रॉलियाँ दिनदहाड़े निकलती हैं, पुलिस चौकियों और थानों को चकमा देकर सीधे मध्यप्रदेश और आसपास के गांवों तक पहुंच जाती हैं। किसानों का आरोप है कि यह गाड़ियां सवाईमाधोपुर शहर से लेकर गंगापुरसिटी, कुण्डेरा, उलियाना, निवाई, जयपुर और कोटा तक से खाद लादकर निकलती हैं और फिर महंगे दामों पर बेची जाती हैं। किसानों की जेब पर सीधा वार हो रहा है और खेती की तैयारी अधर में लटक गई है। नादौती से एमपी के सोईकलां सप्लाई के लिए ले जा रहे थे यूरिया गत बुधवार को बहरावंडा खुर्द में जब्त की गई 100 कट्टे यूरिया की खेप इस पूरे खेल का जीता‑जागता उदाहरण है। पुलिस की नाकाबंदी में पकड़ी गई पिकअप से जब कृषि विभाग ने कार्रवाई की तो यह साफ हो गया कि जिले में कालाबाजारी का जाल कितना गहरा है। पिकअप में भरे अवैध यूरिया के कट्टे तिरपाल से ढककर नादौती से मध्यप्रदेश के सोईकलां सप्लाई के लिए ले जा रहे थे। लेकिन पुलिस गश्त के दौरान रोककर कार्रवाई की। जब्त खाद को ग्राम सेवा सहकारी समिति के गोदाम में रखवाया गया और आवश्यक वस्तु अधिनियम व उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत मामला दर्ज कराया।
दुकानदारों की मनमानी, नियमों की उड़ा रहे धज्जियां
किसानों ने बताया कि कृषि आयुक्त के आदेशों की अनदेखी कर बड़े खाद विक्रेता बिना आधार कार्ड, जमाबंदी और फार्मर आईडी के ही पिकअप चालकों को भारी मात्रा में खाद बेच रहे हैं। किसान संघ के जिला मंत्री बनवारी लाल मीना और प्रांत प्रमुख सुमेर सिंह राजावत ने मांग की है कि दुकानदारों के स्टॉक और पोश मनीन का मिलान कर वास्तविकता की जांच की जाए। तभी कालाबाजारी पर रोक लग सकेगी। किसानों की कमर तोड़ रही कालाबाजारी ग्रामीणों ने बताया कि चम्बल नदी और अन्य सीमाओं पर कृषि विभाग की निगरानी न होने से माफिया और खाद विक्रेताओं की चांदी कट रही है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत और पुलिस‑परिवहन विभाग की अनदेखी से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। किसानों को मजबूरी में महंगे दामों पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है और खेती की तैयारी पर सीधा असर पड़ रहा है। यह स्थिति किसानों की आर्थिक रीढ़ तोड़ रही है और प्रशासन की चुप्पी इस काले कारोबार को और ताक़त दे रही है।
.............................. इनका कहना है...
पुलिस गश्त के दौरान नादौती से एमपी के सोईकलां की ओर पिकअप में ढककर यूरिया के कट्टे ले जा रहे थे। सूचना पर मौके पर पहुंचे और यूरिया जब्त कर ग्राम सेवा सहकारी समिति के गोदाम में रखवाया है। आगे भी कार्रवाई की जाएगी। पिकअप चालक के खिलाफ खंडार थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। खेमराज मीणा, सहायक निदेशक, कृषि विस्तार, सवाईमाधोपुर
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