सवाईमाधोपुर. मजदूर दिवस पर जिले की तस्वीर मजदूरों की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही का आईना बनकर सामने आई है। श्रम विभाग और ठेकेदारा की लापरवाही मजदूरों पर भारी पड़ रही है। हालात यह है कि सुरक्षा मानकों की रोज धज्जियां उड़ रही है। सुरक्षा के बिना श्रमिक हर रोज़ जान जोखिम में डालकर काम कर रहे है।
जिले में बड़ी-बड़ी इमारतों, सीवरेज की सफाई, भवन निर्माण, रस्सी पकडकऱ पेटिंग, विद्युत पोलों पर चढऩे, बहुमंजिला इमारतों में निर्माण सामग्री पहुंचाने आदि कार्य में मजदूर जोखिम लेकर कार्य करते है। यहां तक की उनकी जान को भी खतरा बना रहता है लेकिन उनको सुरक्षा को लेकर कोई संसाधन व उपकरण तक उपलब्ध नहीं कराए जाते है। कानून और मानक साफ कहते हैं कि बिना सुरक्षा इंतजाम काम कराना अपराध है, फिर भी ठेकेदारों और विभाग की चुप्पी मजदूरों को मौत के मुंह तक धकेल रही है। सरकार ने श्रमिकों के उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित की है लेकिन उनका लाभ दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इतनी मशक्कत के बाद भी उनके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर ना तो सरकारी गंभीर है और ना ही श्रम विभाग व जिम्मेदार ठेकेदार। इससे मजदूर हरपल जान जोखिम में डालकर काम कर रहे है, पर उनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है।
कई बार हो चुके है हादसे, नहीं ले रहे सबक
निर्माणाधीन भवनों व बहुमंजिला इमारतों का कार्य करते समय जिले में कई हादसे हो चुके है। इनमें मजदूर अपनी जान भी गंवा चुके है। पूर्व में जिला मुख्यालय पर आलनपुर में सीवरेज का कार्य करते समय मिट्टी ढहने से कई श्रमिक घायल गए थे। गत साल ठींगला में निर्माणाधीन अस्पताल में कार्य करते समय गिरने से एक श्रमिक की मौत हो गई थी। ये घटनाएं प्रशासन और श्रम विभाग की अनदेखी का सबूत हैं।
यहां नहीं चलता श्रम कानून श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए कई कानून बनाए गए है लेकिन होटलों, दुकान एवं कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों का शोषण करने वाले मालिकों पर कोई भी कानून लागू नहीं होता है। शहर में प्रतिबंध के बावजूद श्रमिकों से बंधुआ मजदूर की तरह आज भी 12 घंटे काम लिया जाता है। ऐसे में इन मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। सुरक्षा मानकों की हो रही अनदेखी
हर दिन मजदूरो के मामलों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है। अक्सर इमारतों के निर्माण के दौरान ऐसा देखा गया है। खासकर इमारतों की पेंटिग के काम में मजदूरों को लटक कर काम करना पड़ता है। सुरक्षा बेल्ट के बिना ही मजदूर रस्सी के सहारे लटक कर काम करते दिखते है। उन्हें काम कराने वाले ठेकेदारों की ओर से सुरक्षा बेल्ट तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है, जबकि सुरक्षा मानक में इसका उल्लेख है कि किसी भी हाल में बिना सुरक्षा बेल्ट के काम नहीं कराएंगे। यही हालात सरकारी कामों में भी दिखने को मिल रहे है। इसका नतीजा है कि अक्सर दुर्घटनाएं होती है और मजदूरों को जान से हाथ धोना पड़ता है।
आज भी मजदूरों को ना तो कार्यों के दौरान सुरक्षा मिलती है और ना ही उनको उनके हित में चलने वाली विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी है। आज भी बड़े मॉल या बिल्डिंगो के निर्माण कार्य हमारे आस पास चल रहे होते है, वहां ऊंचाई पर उन मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई हेलमेट या बेल्ट या दस्ताने कुछ भी नहीं होते है और तो और गंदे नालो या सिवरेज की सफाई करने के लिए सफाईकर्मी बिना हाथों में दस्ताने या जूते पहने ही उतर कर साफ करते है। इससे बीमारिया फैलने की आशंका रहती है, जबकि श्रमिकों के लिए कामकाज स्थलों विशेषकर जोखिम भरे निर्माण कार्यों आदि स्थलों के लिए मानक निर्धारित है। जिनकी खुली अवहेलना की जा रही है। आगामी दिनों में श्रमिकों की हितों व सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार, जिला प्रशासन व श्रम विभाग से मांग की जाएगी।
इनका कहना है... ऊंची इमारतों पर बिना सुरक्षा के काम कर रहे मजदूरो के बारे में रिपोर्ट ली जाएगी। श्रम निरीक्षकों को सर्वे के लिए भेजा जाएगा। बिना सुरक्षा उपकरणों के जान जोखिम में डालकर काम कराने वाले ठेकेदारों को पाबंद कर कार्रवाई की जाएगी। संदीप कुमार, सहायक श्रम आयुक्त, सवाईमाधोपुर
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