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  • 2 days ago
उत्तराखंड में पिछले महीने कुछ विवादों के कारण निहंग सिख चर्चाओं में रहे. 16 जून को स्थानीय लोगों के साथ कर्णप्रयाग में निहंग सिखों का झगड़ा हो या फिर रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे पर निहंग सिखों के कब्जे का मामला या फिर देहरादून जिले में हिमाचल और उत्तराखंड बॉर्डर पर ताजा विवाद, उन्होंने सबका ध्यान खींचा. सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर निहंग कौन होते हैं. उनका इतिहास क्या है. और उनकी पहचान किन आधारों पर बनी है.मामला धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है. इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इतिहास परंपरा और वर्तमान स्थिति को समझना आवश्यक है. ईटीवी भारत के आज के एक्सप्लेनर में जानिए सिख इतिहास में निहंगों की भूमिका क्या रही है और उनकी परंपरा आज भी क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है? 

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00:08उत्राखन की सडकों पर एक तरफ हाथ में हथियार लहराते, निहंग सिख दिखे तो दूसरी तरफ कानून विवस्था के स्थिती
00:16को सम्हाल रहे पुलिस के जवान नजर आए।
00:32निहंग सिखों की वजह से सरकार से लेका प्रशासन और पुलिस सबके हाथ पाव फूल गए। अचानक निहंग सिख मीडिया
00:41के सुर्खियों में आ गए। लोग निहंग सिखों को लेकर तरहा तरहा के सवाल करने लगे।
00:47इंटरनेट पर निहंग की हिस्ट्री खंखाली जाने लगी।
00:51ETV भारत के आज के एक्स्प्लेनर में जानेंगे निहंग कौन होते हैं, उनका इतिहास क्या है और उनकी पहचान किना
00:59धारों पर होती है।
01:00उत्रखंड की बरफीली वादियों के बीच सिख आस्था का केंडर हेम कुन्ड साहिब।
01:06इनही पहाडों में हल्ही में कुछ ऐसा हुआ जिसने एक बार फेर निहंग सिखों की परमपरा और पहचान को चर्चा
01:14मिला दिया।
01:15निहंगों की परमपरा और योगदान की बात करे तो उनका गौरफ शाली इतिहास है।
01:22अन्याय और अधर्म के खिलाफ युद्ध लड़कर धर्म की रक्षा निहंगों की पहचान रही है।
01:29निहंग सिख धर्म के उस युद्धा वर्ग का हिस्सा है जिसकी अस्थापना धर्म, समाज और कमजोरों की रक्षा के उद्देश
01:38से हुई थी।
01:39निहंगों का इतिहास उस महान सिख परमपरा से जोड़ा हुआ है जब खालसा पंथ की स्थापना हुई।
01:46वो दौर था सत्रहवी सदी के अंतका। भारत की राजनीती में जबरदस्त सियासी उथल पुथल मची थी।
01:57ततकालीन, मुगल, शासक और अंजेब की कटरपन थी, दमनकारी नीती और गैर मुसलमानों पर उसके अत्याचारों से जनता तरस्त थी।
02:07लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता खत्रे में थी। ऐसे में सिख गुरुओं ने आध्यात्मिक शक्ती के साथ साथ सैन्य शक्ती को
02:17भी जरूरी माना।
02:19गुरु गोविन सिंग ने सन 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की और इसी से विकसित हुई अनुशासित योधाओं की
02:30वो परंपरा जो अन्याय के खिलाफ हत्यार उठाने के साथ साथ सेवा, त्याग और मानफता की रक्षा को भी अपना
02:38धर्म मानती थी।
02:41गुरु गोविन सिंग जी ने संत और सिपाही दोनों गुड़ों वाले सिख तयार किये।
02:48इन योधाओं को अध्यात्मिक अनुशासन के साथ साथ युध कौशल भी सिखाया गया।
02:54समय के साथ यही योधाओ परंपरा निहंगों के रूप में प्रसिद्ध हुई।
02:58सिख इतिहास में उन्हें अकाल सेना या गुरु की फौच के नाम से भी जाना जाता है।
03:06निहंग शब्द की उत्पत्ती को लेकर विद्वानों की अलग-अलग राये है।
03:10एक मत के अनुसार है।
03:12ये शब्द फार्सी भाषा से आया है जिसका अर्थ मगरमच या ऐसा निर्भिक योधा जो किसी भी परिस्थिती में विचलित
03:22ना हो।
03:23वही सिख परंपरा में निहंग उस खासा योधा को कहा जाता है जिसने अपना जीवन गुरु के मर्यादा, धर्म की
03:31रक्षा और मानफता की सेवा के लिए समर्पत कर दिया हो।
03:35यही कारण है कि निहंगों को केवल एक धार्मिक समोदाय नहीं, बल्कि साहस, त्यार, अनुशासर और निर्भयता का प्रतीक भी
03:45माना जाता है।
03:46बल्कि इसके लिए एक कठोर और अनुशासित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
04:06निहंग बनने के लिए पहले खालसा परंपरा में दिक्षित होना पड़ता है।
04:11फिर सिख धर्म के पवित्र दिक्षा समहारों में दिक्षित होना पड़ता है, जिससे अमरत चकना कहते हैं।
04:19उन्हें हर वक्त पाच, ककारो, बिना कटे बाल यानी केश, लकडी की कंगी, लोहे का कंगन, कछरा और क्रपाण धारन
04:29करना होता है।
04:30इसके अलावा, गुरु ग्रंथ साहिप के प्रती, पूर्ण आस्था, नियमित रूप से गुरुवाणी का पाठ और कठोर धार्मिक अनुशासन का
04:39पालन आवश्यक है।
04:42नए निहंगों को वरिष्ट निहंगों के मार्ग दर्शन में लंबे समय तक फथियार संचालन, गतका, घुड़सवारी, सेवा, सैयम और धार्मिक
04:54मर्यादा का अभ्यास कराया जाता है।
04:57इसलिए निहंग बनना एक जीवन शैली और आजीवन अनुशासन का विश है। इनकी वेश भूशा भी उन्हें अलग पहचान देती
05:08है। गहरे नीले रंग का चोला, उची पगड़ी, पगड़ी पर लोहे का चक्र और कमर में शस्त्र धारन करना।
05:17जहां तक बात निहंगों के निवास स्थान का है, तो उनका कोई एक अस्थाई निवास शेत्र नहीं होता। पंजाब के
05:26आनंद पुरसाहिप, अमरितसर पटियाला और तलवंडी साबो जैसे धार्मिक केंद्रों में निहंगों के प्रमुख जथे मौजूद है।
05:34इसके आलावा देश भर में होने वाले धार्मिक आयोजनों, नगर कीर्तन, हुला मुहला और बड़े गुरु द्वारों में भी उनकी
05:42सक्रिय भागिदारी रहती है।
05:44कई निहंग डेरों में रहकर धार्मिक जीवन व्यतीत करते हैं, जबकि कई जथे लगातार यात्रा करते हुए सेवा और धार्मिक
05:53कारिक्रमों में शामिल होते रहते हैं।
05:55लंगर सेवा, श्रद्धालों की सहायता और पारंपरिक युध कला का प्रसिक्षण भी उनके प्रमुख कारे हैं।
06:03सिख इतिहास में निहंगों ने अनेक महत्वपूर्ण युध और संगहर्शों में भूमी का निभाई है।
06:10एहमद शाह अबदाली के आकरमणों के दोरान गुरुद्धारों की रक्षा, श्रद्धालों की सुरक्षा और सिख परंपराओं को जीवित रखने में
06:21उनका एतिहासिक योगदान देखने को मिलता है।
06:24बाबा दीप सिंग, बाबा विनोद सिंग और अकाली फूला सिंग जैसे वीरियो धाओं को निहंग परंपरा की प्रेणा दायक विरासत
06:34का हिस्सा माना जाता है।
06:35निहंग सिखों के साथ ताजा विवाद उत्राखन के चमोली में स्थित सिखों के पवित्र धर्मस्थल हेमकुंड साहिब को लेकर सामने
06:45आया।
06:45सिख धर्म के दस्वे गुरू श्री गुरु गोबिंद सिंग जी ने अपनी आत्मकथा विचित्र नाटक में बताया कि इस जन्म
06:53से पहले उन्होंने हिमाले के हेमकुंड परवत पर साथ चोटियों के बीच स्थित एक जील के किनारे तपस्या की थी।
07:01इसलिए हेमकुंड स
07:03साहिप से सिखों की गहरी आस्था जोड़ी।
07:33बाद में यानी 27 जून को अदालत ने चारों को जमानत दे दी। ताजा घटना क्रम में एक बार फिर
07:41निहंग परंपरा को समझने का मौका दिया है।
07:44ऐसे में ये जरूरी है कि ऐसे विवादों के बाद किसी भी तरह की बात या टिपड़ी बहुत सोच समझ
07:51कर करनी चाहिए।
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