00:13मतुरा में श्रिक्रिष्म जन भूमी को लेकर एक बार फिर देश की राजनीती और धार्मिक विमर्ष गर्मा गया है
00:19संत समाज ने श्रिक्रिष्म जन भूमी मुप्ती के लिए कार सेवा का एलान कर दिया है
00:24चित्रगुप्त पीठा दिश्वर स्वामी सचिदनन महराज और निर्मोही अखाडे के संतों ने मतुरा में बैठक करके बकाईदा पोस्टर भी जारी
00:32कर दिये हैं
00:33और दावा किया गया है कि आंदोलन उसी तरह होगा जैसे कभी अयोध्या में राम जन भूमी आंदोलन हुआ था
00:39इस एलान के बाद जहां हिंदू संगटनों के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाय सामने आ रही हैं
00:45वही मुसलिम पक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मल रही है
00:48तो अब सवाल सिर्फ एक धार्मिक्स थलका नहीं रह गया है
00:52बलकि कानून, अदालत, राजनीती और सामाजिक सोहार्थ का भी बन गया है
00:58नमस्कार, मेरा नाम हरिचा पराशर और आप देख रहे हैं One India Hindi
01:02मतुरा का श्रकृष्ण जनभूमी और शाही इदगाह विवाद आज का नहीं है
01:07ये विवाद कई दशकों से अदालत में लंबीत है
01:10हिंदु पक्ष का दावा है कि जिस स्थान पर शाही इदगाह मस्जिद मौजूद है
01:16वही भगवान श्रकृष्ण की वास्तिक जन्स थली है
01:19उनका कहना है कि मुगलिव शासक और अंग्जेब के शासनकाल में
01:23वहां मौजूद प्राप्षी मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का दिर्मान कराया गया था
01:28दूसरी और मुस्लिम पक्ष लगातार इस दावे का विरूत करता रहा है
01:32और कहता रहा है कि शाही इदगाह एक वैद्ध धार्मिक स्थल है
01:37तथा 1968 में दोनों पक्षों के बीच हुए समझोते के बाद ये मामला समाप्त माना जाना चाहिए
01:44यही वजह है कि ये पूरा विवाद फिलहाल नियायालाय में विचारधीन है और अंतिम फैसला अभियाना बाकी है
01:51इसे बीच चित्रगुप्त पिठादिश्वर स्वामी सचिदानन महराज ने एक बड़ा एलान करते हुए
01:56श्रीकृष्ण जन भूमी मुक्ती के लिए कारसेवा आंदोलन शुरू करने की घोशना की है
02:01संतो का कहना है कि या आंदोलन पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण होगा
02:05उनके अनुसार जिस प्रकार अयोध्या आंदोलन के दोरान देश भर के श्रधालूओं ने कारसेवा की थी
02:12उसी प्रकार श्रीकृष्ण जन भूमी के लिए भी जन समर्थन जुटाया जाएगा
02:18हलाकि अयोध्या का कारसेवा देश में आज भी एक काले इतिहास के तोर पर देखा जाता है
02:24जब बहुत सारे कारसेवा को ने अपनी जान गवादी थी
02:26एक बहुत बड़ा विवाद हो गया था दो पक्षों के बीच बहुत जड़पे हो गई थी
02:31और उसका केस चलते चलते अब जाके वहाँ पर राममंदिर का निर्मान हुआ है
02:35यानिकी सालों की मेहनत तो अगर ऐसा ही कुछ मतुरा में भी आयोजित करने की कोशिश की जा रही है
02:41तो कहीं न कहीं देश में एक और बड़ा बबाल सामने आ सकता है
02:46संतों ने बकाइदा पोस्टर जारी करके लोगों से बड़ी संख्या में मतुरा पहुँचने की अपील की है
02:51निर्मोही अखाडे ने भी इस अभ्यान का समर्थन किया है
02:54अखाडे के संतों का कहना है कि श्रकृष्म जर्म भूमी हिंदूों की आस्था का केंद्र है और उसका समधान होना
03:01चाहिए
03:01हाला कि संतों के भीतर भी इस बात पर अलग-अलग राय है कि आंदोलन का स्वरूप क्या हो और
03:08कानून का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाए
03:11इस पूरे घटना क्रम के बीच सबसे दिल्चस्प्रक्रिया विश्व हिंदू परिशद की रही है
03:17रामंदिर आंदोलन में सबसे एहम भूमी का निभाने वाली विश्व हिंदू परिशद ने इस बार संतों द्वारा घोशित का अरसेवा
03:23के आपचारिक दूरी बना ली है
03:25विखिप का कहना है कि श्रुक्रिष्म जनभूमी का मामला अदालत में लंबित है और संगठन न्याईक प्रक्रिया का सम्मान करता
03:32है
03:32संगठन का मानना है कि किसी भी प्रकार की कारवाई कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए
03:38इस बयान के बाद राजनितिक गल्यारों में ये चर्चा भी शुरू हो गई है कि आखिर राम मंतिर आंदोलन का
03:44नितर तो करने वाला संगठन इस बार प्रत्यक्ष रूप से आगी क्यों नहीं आ रहा
03:50उधर सत्त समाज का कहना है कि उनका उदेश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है बलकि जन जागरन
03:57करना है
03:58उनका दावा है कि कारसेवा का अर्थ केवल निर्मान कारे नहीं होता बलकि समाज को किसी धार्मिक उदेश्य के लिए
04:04संगठित करना भी कारसेवा का ही हिस्सा है
04:07हलाकि आलोचको का कहना है कि इस तरह के आवाहन से सामाजिक तनाव पढ़ सकता है और कारून विवस्था की
04:14चुनोती खड़िक हो सकती है
04:16रस्वेच और इंडिया इमाम एसोसियेशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने भी इस पूरे घटना करम पर तीखी प्रतिक्रिया दी
04:24है
04:24उन्होंने आरोप लगाया है कि इस तरह के कारसेवा आवाहन देश में नफरत फैलाने का प्रयास है
04:30उन्होंने कहा कि अतीत की घटनाओं को दोराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और किसी भी विवाद का समधान अदालत
04:37तथा सम्मिधान के दाएरे में रहकर होना चाहिए
05:00पाक्षा ऐसा बताएं जिसने जाकर अपने हाथ से किसी मंदिर को तोड़ा हूँ
05:08पहले संच्छे इस्वी में जो हिंदु राजा थे, वो फुद मंदिरों को तोड़ते थे, मौर्टियों को खंड़न करते थे
05:17उसके बाद में मौगलों के टाइम में जो उनके सेना पती थे, वो जाकर मंदिरों को तोड़ते थे, मौर्टियों को
05:24खंड़ते करते थे
05:24अब राममंदिर में जो कुछ हो रहा है ये सब कुम लोग हैं किसकी ऑुलाद हैं बाबर कि हैं औरंग्जेव
05:35की हैं जहांगियर की हैं किसकी ऑुलाद हैं
05:38ये सब हिंदोस्तान का हरा अदमी देख रहा है और पूरी दुनिया देख रही है कि ये सब मुस्लमानों को
05:45बदनाम करने के एक नापाक साधिश है और जान बोच कर इस तरह के कार सेवा फ़ला सेवा सवाल ये
05:51है कि जो चीज हुई नहीं उसके लिए बाकाईदा इतना बड़
05:55जब राम मंदिर के लिए रत्यात्रानी के लिए थी बावल मसिभ टूपी थी इतने लोगों की जाने गई थी अब
06:03फिर कुछ लोगों को इसी तरह से मारने की इन लोगों की तियारी है
06:11राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर के विश्वे हिंदू परिषद की बैठक अब आयोध्या की जगे बदल करके नहीं दिल्ली
06:19में होने जा रही है
06:33देखें विश्वे हिंदू परिषद एक ऐसा नाम है जब से राम मंदिर अंदुलन हुआ और अब तक यह हमेशा संदे
06:45के घेरे में रहा है
06:47उस वक्त में चौदा सो करोड रुपया जो रत्यासरा के टाइम में एकटा हुआ था उसका हिसाब इन्होना अभी तक
06:56नहीं दिया
06:57अब जो राम मंदिर में चंपतराय को साफ तोर से देखा जा रहा है राम मंदिर शूरी में
07:05कुछ में कहीं न कहीं विश्व परिश्य को किलिंचिक देने के लिए कुछ इस तरह की गतिविदी होने जा रही
07:12हैं
07:13विश्व हिंदु परिश्ट को कहा जाएगा कि नहीं, यह ठीक है।
07:16और चंपत राय को भी कहा जाएगा कि नहीं, वो तो बिल्कुल पाक साफ है, दूर की भूले हैं।
07:21उनोंगे कुछ नहीं किया।
07:23और चमपत्राय जान भूजकर अपने आपको अभी विश्व हिंदु परिश्ड से दूर रखना चाहते हैं।
07:29जो कि विश्व हिंदु परिश्ड का नाम आते ही बहुत सारी चीज़ें देश में लोगों की नजरों में आ जाती
07:35हैं।
07:36और कही नगी फिर वो चौदासो करूर वाला मसला और यह नया मसला यह सारा जोड़कर कही नगी विवाद हो
07:42सकता है।
07:43जब पत्राय खुशार आदमी हैं। इसलिए जान भूजकर अपने आपको थोड़ा लग किये हुए।
07:48राम मंदिर चंदा घोटाले मामले में एसाइटी के जाच स्टेज होने के बाद पुलीस को जेल में बंद पांच आरोपियों
07:56के साथ पूजताच करने की अनुमती जो एवो कोर्ट में देती हैं।
08:02क्या को चुनिक करते हैं।
08:04मैंने पहले भी कहा है, मैं अब भी कह रहा हूं।
08:07कि जो लोग पकड़े गये, जिनके फ़यार हुई है।
08:11ये छोटे लोग हैं, छोटी मचलिया हैं।
08:14बड़ी मचलियों को बचाने के लिए इनको लुखमो बनाया गया है, इनको पकड़ा गया है।
08:19ताकि जो बड़े लोग हैं, उनके नाम ना सके।
08:22इसलिए पुछताच में कि क्या निकलेगा।
08:25कुछ गरीब लोगों को पैसे का लालच देकर कह दिया जाता है।
08:30दो-चार महीने तुम जियर में रहनी ना, हम तुम्हारी मदद करेंगी, फला होगा।
08:34बस यह है कि उनका नाम नहीं आएगा।
08:37अब अपने उपर सब कुछ ले लेना।
08:40ऐसा तो देश में होता आया है।
08:42और यही कहानी अब यहां भी चल रही है।
08:45कि इन छोटे लोगों को पगड़कर यह बताने और दिताने की पुर्णित की जा रही है।
09:03मुलाना साजद रशीदी ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि इतिहास को चुनिंदा तरीके से पेश किया जा
09:09रहा है।
09:10उन्होंने कहा कि मंदिरों को लेकर जो दावे किये जा रहे हैं उन पर इतिहास कारों की अलग अलग राय
09:15रही है।
09:16और पूरे समुदाय को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
09:21उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक भावनाओं का इस्तिमाल करके समाज में धुरुविकरन की राजनीती करना चाहते
09:28हैं।
09:29मौलाना रशीदी ने अपने बयान में विश्व हिंदू परिशद और राम मंदिर से जुड़े हालिया विवादों का उलेग भी।
09:59इस बिलीची राजनीतिक दल भी इस पूरे घटना करम पर नजर बनाये हुए हैं।
10:03एक और कुछ नेता संतों की मांगों के समर्थन में बयान दे रहे हैं।
10:07तो दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक लाब के लिए इस्तिमाल नहीं किया जाना
10:14चाहिए।
10:15विशली शको का मानना है कि श्रकृष्ण जन्भूमी का मुद्दा आने वाले समय में राष्टिय राजनीति का बड़ा विशय बन
10:22सकता है यूकि इसका सीधा संबंध करोडों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है।
10:27मथुरा प्रिशासन भी इस घटना करम को लिकर पूरी तरह सतरक है। स्थानिय प्रिशासन और सुरक्षा एजन्सियां लग अतार स्थिति
10:34पर नजर रखे हुए।
10:35किसी भी संभावित भीर, प्रदर्शन या कानून विवस्था की स्थिति से निपटने के लिए अतरिक्त सुरक्षा इंतजाम किये जा रहे
10:43हैं।
10:44तरुशासन का कहना है कि नियायाले में लंबे तमामलों को देखते हुए किसी भी प्रकार की अवैद गतिविधी की अनुमती
10:51नहीं दी जाएगी और कानून के अनुसार कारवाई होगी।
10:55फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये कारसेवा किवल धार्मेक प्रतिकात्मक कारेक्रम बन कर रहे जाएगी या फिर
11:03ये देश व्यापी आंदोलन का रूप लेगी।
11:05संथ समाज अपने संकल्प पर अडिक दिखाई दे रहा है जबकि दूसरी और मुस्लिम संगठानी से सामाजिक सौहार्थ के लिए
11:11चुनोती बता रहे हैं।
11:13ऐसे में अब सबकी निगाहें अदालत की प्रक्रिया, रुशासन की रणीती और दोनों पक्षों की आगामी गतिविध्यों पर टिकी हुई
11:20है।
11:43पैदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन जान बूच कर ऐसे मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं जो से
11:48समाज में धार्मिक धुरुविकरन बढ़े।
11:51उनके मुताबिक एतिहास को चुनिंदा तरीके से प्रस्तूत करके वर्तमान पीडी के सामने ऐसा नरेटिव तयार किया जा रहा है
11:57जिससे दो समुधायों के बीच अविश्वास पैता हो।
12:02मुलाना रशीदी ने अपने बयान में ये भी कहा कि किसी भी धार्मिक विवाद का समधान अदालत के जरीए होना
12:07चाहिए ना कि सड़क परांदोलन या फिर कारसेवा के जरीए हो।
12:11उनका कहना है कि भारत का समिधान सभी नागरिकों को बराबरी काधिकार देता है और किसी भी विवादित धार्मिक स्थल
12:18पर अंतिम फैसला नयायपाली का ही करेगी।
12:21उन्हों लोगों से शांती बनाय रखने की अपील करती हुए कहा कि किसी भी उकसावे में आने से बचना चाहिए।
12:28हलाकि संत समाज का कहना है कि उनका आंदोलन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है।
12:32उनका दावा है कि ये केवल भगवान श्रीकृष्ण की जनस्थली को लेकर आस्था का प्रश्ण है।
12:38संतो के अनुसार यदि अयोध्या में वर्षों पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है।
12:44तो मतुरा और काशी जैसे मामलो पर भी न्याईक प्रक्रिया के माध्यम से समधान संभव है।
12:50उनका कहना है कि कार सिवा का उदेश्य अदालत पर दबाब बनाना नहीं बलकि समाज को अपनी धार्मिक मानियताओं के
12:56प्रती जागरूप करना है।
12:58यही पर ये विवाद कानूनी रूप से भी विहद महत्यकोन हो जाता है।
13:02श्रक्रिश्म जन भूमी और शाही इद्गास जुड़े कई मुकदमी अलग-अलग अदालतों में विचारा धीन है।
13:07इनमें पूजा के अधिकार, धार्मिक सनरचनाओं के एतिहास, भूमी स्वामित्व और सर्वेक्षन जैसे कई मुद्दे शामिल है।
13:15अदालतों में हिंदु पक्ष की ओर से विभिन नयाच जिकाएं दाखिल की गई हैं।
13:47जबकि मुसलिम पक्ष इन दावों का विरोध कर रहा है।
13:51कई आचिकाओं में इस कानून की समयधानिक वैदेता को भी चुनौती दी गई है।
13:56इसके यह मामला किवल धार्मिक नहीं है, बलकि समयधानिक बहस का भी विशय बन चुका है।
14:04तो यह पूरा मुद्दा आने वाले समय में और अधिक चर्चाओं में रह सकता है।
14:09उतरप्त देश सहित कई राज्यों में धार्मिक और संस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे लगतार राजुनितिक विम्मर्श का हिस्सा बने हुए
14:17है।
14:17राजुनितिक दल खुलकर या परोष रूप से इस विशय पर अपनी अपनी रणनीती बना रहे है।
14:23कुछ दल इसे करोडों लोगों की आस्था से जुड़ा प्रश्म बताते हैं जिबकि कुछ दल इसे चुनावे ध्रुवी करण की
14:29राजुनिति करार देते हैं।
14:32विशेशग्यों का मानना है कि श्रिकृष्ट जनभूमी का मामला आयोध्या से कई मामलों में अलग है।
14:37यहां अदालतों में लंबित मुकद्मों की प्रकृती भी अलग है।
14:41एतिहासिक दस्तावेजों को लेकर अलग-अलग दावे हैं।
14:45और 1968 के समझोते को लेकर भी दोनों पक्ष की व्याख्या अलग है।
14:49इसलिए इस विवाद का समधान भी केवल नियाई प्रक्रिया से ही सम्भूमाना जा रहा है।
14:55सुरक्षा एजिंसिया भी इस पूरे घट्नक्रंप पर लगतार नजर बनाए हुए।
14:59किसी भी संभावित भीर, प्रदर्शन या धार्मिक आयोजन को देखते हुए स्थानिय प्रशासन ने सम्मेदंशील इलागों की निग्रानी बढ़ा दी
15:07है।
15:07सोशल मीडिया पर भी विशेश निग्रानी रखी जा रही है ताकि अब वाहू या भढ़काऊ संदेशों के जरिये महौल खराब
15:14ना किया सके।
15:15प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था से समझोता नहीं किया जाएगा और किसी भी प्रकार की अव्यदिगति विधी पर
15:22ततकाल करवाई होगी।
15:24इस बीच इतिहास को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
15:27एक पक्ष का दावा है कि मुगलकाल में कई मंदिरों को तोड़कर धार्मिक धांचे बनाए गए।
15:31मस्जिदों का निर्मान किया गया है जबकि दूसरा पक्ष इतिहास के इंदाव को अलग व्याख्या से देखता है।
15:38इतिहास कार भी इस विशे पर एक मत नहीं है। यही कारण है कि अदालतें केवल एतिहासिक पुस्तकों के आधार
15:45बढ़ नहीं, बलकि उपलब्द दस्तावेजों, पुरतात्विक साक्षों, राजस्व अभिलेखों और कानूनी रिकॉर्ड्स के आधार पर निर्ने लेती
15:54मत्रा का यह विवाद किवल एक धार्मिक स्थल्तक सिमित नहीं है। इसका सर्थ समाजिक सद्भाव, कानून विवस्था, न्यायक प्रक्रिया और
16:03राष्ट्य और राजनिती तक दिखाई देता है। इसकी हर बयान, हर आंदोलन और हर कानूनी कदम को बेहत साधानी से
16:10दि�
16:24और सम्विधान के दाइरे में रहने की बात दोरा रहे है। विश्व हिंदू परिशत जैसे संगठनों ने तो फिलहाल न्यायक
16:31प्रक्रिया के सम्मान में बात कही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अलग-अलग हिंदू संगठनों की रणीती भी
16:37पूरी तरह एक जैसी नहीं
16:39है। तो अब सबसे महत्रपूर्ण बात यह होगी कि आने वाले दिनों में अदालतों में सुनवाई किस दिशा में आगे
16:46बढ़ती है। प्रशासन कानून विवस्था को किस तरह संभालता है। और दोनों समुदायों के जिम्मेदार लोग शान्ती और संबाद का
16:55रास्ता क
16:55इतना मजबूर करते हैं। क्योंकि मत्रा का ये विवाद केवल अतीद का प्रश्ट नहीं है। बलकि भारत के वरतमान और
17:01भविशे की समाजिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ विशय बन चुका है। आने वाले समय में श्रीकृष्ण जन भूमी से
17:07जुड़ी हर कानूनी का
17:0912 संतों के आंदोलन, मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक तयारियों पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी। अंदिम फैसला
17:17आदालत का होगा। लेकिन अब तक ये मुद्धा राष्ट्य बहस का केंद्र बन कर रह सकता है। और खास करके
17:23इजिस बीचक
17:24सेवा का ऐलान किया गया है। तो इस मुद्धे पर अब एक बार फिर से पूरे देश की नजर टिक
17:29गई है। आने वाले दिनों में क्या होता है इसका अपडेट हम आपको ज़रूर पूचाएंगे। लेकिन इस मुद्धे पर आपकी
17:34क्या राह है हमें कॉमेंट में ज़रू
17:51झाले पर आपकी क्या है।
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