00:01मद्धिप्रदेश के मंदसौर में एक शांत आर्थिक पर्यावरणिये परिवर्तन हो रहा है।
00:09जिले में अलसी का भूसा पहले फेक दिया जाता था अब लिनिन फाइवर में संसाधित किया जा रहा है जिससे
00:15स्थानिये किसानों के लिए आई का एक नया श्रोद बन गया है।
00:21इस परिवर्तन के केंदर में स्वसिक्षित इंजीनियर नहारु खा हैं जिन्होंने जिलाप्रशासन के मदद से एक बेलर मशीन बनाई है।
00:31ये मशीन अलसी के भूसे को निकालती है जिसे फिर लिनिन कपड़ा बनाने के लिए वस्त्र निर्माताओं को अपूर्ति किया
00:38जाता है।
01:06स्थानिय किसानों का कहना है कि इस नई सोच से उनकी आमदनी बढ़ी है और साथ ही पर्यावरण के अनुकूल
01:12खेती के तरीकों को भी बढ़ावा मिला है।
01:15इसे में किसानों को जलाने नहीं पड़ता है वायू पर्दूशन नहीं होता है।
01:20इसे में ये डंठल ले जाने वाले बनाने वाले किसानों को आमदनी भी देते है।
01:26खेतों में नर्वाई इकटी हो जाएगी और इसे किसानों को आमदनी होगी।
01:31तो क्या मज़ा बता रहा है इसके अलसी के वो बनेगा।
01:36हाँ, इसके अलसी का जो ये पूरा इकटा करके बंच उसके बाद इसे मशीन लगा कर उसम निकाला जाएगा।
01:45जब ये इकटा करके हम यदी बाहर भी माल जाता है और यहाँ के परपस के लिए भी यदी बनता
01:51है तो इससे लगभग किसानों को फाइदा होगा। इससे इंकम जनरेट होगी।
01:55जिला प्रिशासन के मताबिक इसका मकसद मनसौर में लगभग 10,000 हेक्टेर जमीन पर खेती के बाद बचे हुए फ्लेक्स
02:03ट्रॉय यानी अलसी के डंठल का इस्तिमाल करना है।
02:07ये पहल स्थानिय किसान उतपादक संगठन की ओर से की गई है।
02:12इसका उदेश यह है कि मनसौर जिले में जो करीब 10,000 हेक्टेर में अलसी उगाई जाती है।
02:19उन किसानों से संपर्क करके उनसे अलसी क्रय करके इसे रेशम में कनवर्ट करके प्रोसेस करके इसे हम या तो
02:27बहार बेचे या एक्सपोर्ट करें।
02:28तो यह पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन और एक एफपीओ के माध्यम से हम लोग रियान्वियन कर रहे हैं।
02:34इसमें end to end हम लोग अलसी रंठल लोगों के खेतों से लेना, उसे विधिवत तरीके से इखटा करना और
02:42इसे स्टोर हाउस तक पहुचाना और उसके बाद उसकी प्रोसेसिंग करना।
02:45ये सारा ही काम हम लोग एक एफपीओ के मदद से और उन्हें भी एक गवर्मेंट हैंडोलिंग दे के करवा
02:51रहे हैं।
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