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  • 4 weeks ago
मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक शांत आर्थिक और पर्यावरणीय परिवर्तन हो रहा है. जिले में अलसी का भूसा पहले फेंक दिया जाता था, अब लिनेन फाइबर में संसाधित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन गया है. इस परिवर्तन के केंद्र में स्व-शिक्षित इंजीनियर नहारू खा हैं, जिन्होंने जिला प्रशासन की मदद से एक बेलर मशीन बनाई है. यह मशीन अल्सी के भूसे को निकालती है, जिसे फिर लिनेन कपड़ा बनाने के लिए वस्त्र निर्माताओं को आपूर्ति किया जाता है.  कभी खेती के कचरे के तौर पर देखे जाने वाले इस उत्पाद को इस पहल ने अलसी की खेती के रूप में एक नई पहचान दी है, जिससे मंदसौर टिकाऊ खेती के लिए एक मॉडल जिले के तौर पर उभरा है. 

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00:01मद्धिप्रदेश के मंदसौर में एक शांत आर्थिक पर्यावरणिये परिवर्तन हो रहा है।
00:09जिले में अलसी का भूसा पहले फेक दिया जाता था अब लिनिन फाइवर में संसाधित किया जा रहा है जिससे
00:15स्थानिये किसानों के लिए आई का एक नया श्रोद बन गया है।
00:21इस परिवर्तन के केंदर में स्वसिक्षित इंजीनियर नहारु खा हैं जिन्होंने जिलाप्रशासन के मदद से एक बेलर मशीन बनाई है।
00:31ये मशीन अलसी के भूसे को निकालती है जिसे फिर लिनिन कपड़ा बनाने के लिए वस्त्र निर्माताओं को अपूर्ति किया
00:38जाता है।
01:06स्थानिय किसानों का कहना है कि इस नई सोच से उनकी आमदनी बढ़ी है और साथ ही पर्यावरण के अनुकूल
01:12खेती के तरीकों को भी बढ़ावा मिला है।
01:15इसे में किसानों को जलाने नहीं पड़ता है वायू पर्दूशन नहीं होता है।
01:20इसे में ये डंठल ले जाने वाले बनाने वाले किसानों को आमदनी भी देते है।
01:26खेतों में नर्वाई इकटी हो जाएगी और इसे किसानों को आमदनी होगी।
01:31तो क्या मज़ा बता रहा है इसके अलसी के वो बनेगा।
01:36हाँ, इसके अलसी का जो ये पूरा इकटा करके बंच उसके बाद इसे मशीन लगा कर उसम निकाला जाएगा।
01:45जब ये इकटा करके हम यदी बाहर भी माल जाता है और यहाँ के परपस के लिए भी यदी बनता
01:51है तो इससे लगभग किसानों को फाइदा होगा। इससे इंकम जनरेट होगी।
01:55जिला प्रिशासन के मताबिक इसका मकसद मनसौर में लगभग 10,000 हेक्टेर जमीन पर खेती के बाद बचे हुए फ्लेक्स
02:03ट्रॉय यानी अलसी के डंठल का इस्तिमाल करना है।
02:07ये पहल स्थानिय किसान उतपादक संगठन की ओर से की गई है।
02:12इसका उदेश यह है कि मनसौर जिले में जो करीब 10,000 हेक्टेर में अलसी उगाई जाती है।
02:19उन किसानों से संपर्क करके उनसे अलसी क्रय करके इसे रेशम में कनवर्ट करके प्रोसेस करके इसे हम या तो
02:27बहार बेचे या एक्सपोर्ट करें।
02:28तो यह पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन और एक एफपीओ के माध्यम से हम लोग रियान्वियन कर रहे हैं।
02:34इसमें end to end हम लोग अलसी रंठल लोगों के खेतों से लेना, उसे विधिवत तरीके से इखटा करना और
02:42इसे स्टोर हाउस तक पहुचाना और उसके बाद उसकी प्रोसेसिंग करना।
02:45ये सारा ही काम हम लोग एक एफपीओ के मदद से और उन्हें भी एक गवर्मेंट हैंडोलिंग दे के करवा
02:51रहे हैं।
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