00:00हमारे भारत में जहां पर हम इस सोच को जीना चाहते हैं कि इस्त्रियों का उठान हो लेकिन यहां पर
00:05हर गाली इस्त्रियों से शुरू होती है ऐसे में एक इस्त्री कैसे खुद के सेल्फ इस्ट्रीम को बढ़ा सकती है
00:11इससे इस्त्रियों के बारे में कुछ नहीं पता चलता है
00:16आप जब महिला को लेके गाली भी दते हो तो आप ये थोड़ी बोलते हो
00:19ये फलानी की नाक या होट या हाथ आपके दिमाग में उसके यौनांग घूम रहे हैं
00:23और यौनांग क्यों घूम रहे हैं कारण हैं गर्ब
00:26इस्त्री को पुरुष ने प्रजनन की मशीन की तरह ही इस्तिमाल किया
00:31इसलिए उसके यौनांग उसके दिमाग में घूमते रहते हैं
00:33तो इसलिए वो जो रिप्रोडेक्शन आपके खोपड़े में लगतार घूमेगा वो आपके मूँ से बार-बार गालियों की तरह निकलता
00:39है
00:39यह गालियों का मनोविग्यास
00:41पुरुष के लिए इस्त्री का शरीर बहुत भयानक बात होती है
00:45सहज नहीं हो पाता हूँ
01:09पुरुष जब महिला के शरीर को गाली की तरह इस्तेमाल करता है
01:13तो उसमें महिला का अपमान तो है ही
01:15पुरुष के लिए तो व्यठा है
01:17व्यठा
01:19उसको कुछ समझ में ही नहीं आरा जंदगी में
01:21वो एक बोज लेकर जी रहा है
01:22यह समस्या इस्त्रियों की नहीं है
01:24तो आप परिशान मत होईए
01:26यह समस्या पुरुषों की है
01:27उनका नर्खे उनको भोगने दीजिए
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