00:00लो एक मिर्ट और सोचो इस बात को
00:02जबसे हमको बता दिया गया है कि हमारी किस्मत लिखने वाला कोई और हमारा पहले ही सब लिख दिया गया
00:08है
00:08तबसे हम इस पर खर्चा करे ही जा रहे हैं
00:10जितना खर्चा हमने ये सब जानने पर करा कि क्या लिखाया है मेरे भागे में उसका एक प्रदशत खर्चा भी
00:17हमने भागे बनाने पर कर दिया होता तो बताओ आज भारत कहा होता पर हम खर्चा करते रहे भागे जानने
00:23पर वो बताएंगे पंडित जी पंडित जी मेरा भाग
00:29बनाया जाता है, हमने बनाया नहीं, हम किसी और से पूछते रहे, और क्यों पूछते रहे, क्योंकि हमने कहा दिया
00:36कोई और है मेरा भाग्य विधाता, जो रच्टा है सब की किस्मतों को,
00:40जबकि अद्वैत वेदान्त आपको साफ बोलता है कि परमसत्ता यहां बैठी हुई है
00:45कोई और नहीं रचता तुमारी किस्मत को
00:47तुम हो तुम हो और तुम ही हो
00:49वेदान्त था हमारे पास पर हमने वेदान्त के अर्थ को भी विकृत कर डाला
00:54हमने का नहीं नहीं नहीं, हमारा भागी विधाता वहाँ बैठा है, आसमानों पर बैठा है।
00:59जोटे मोटे नुकसान नहीं होते हैं।
01:02अंध' विश्वास दीमक है इंसान की।
01:05खा जाता है बोरे तरह से, बहुत बड़े-बड़े नुकसान होते हैं।
01:11नक्तिगत तल पर, पारिवारिक तल पर, सामाजिक तल पर, राश्ट्रिय तल पर
01:15बंदा कहीं गनी बचता है
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