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1.एक वस्त्र अभी बचा है, उसको भी उतार दो || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
2.मेरी मर्ज़ी मैं कुछ भी पहनूँ || आचार्य प्रशांत (2021)
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#WomenFreedom #FreedomOfChoice #WomenEmpowerment #GenderEquality #SelfRespect #Patriarchy #BodyPositivity

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Transcript
00:00देखो कैसे कपड़े पहने, ये नहीं कि पूरे कपड़े पहन के बैठे
00:06मैं तो महिला होता तो कभी ना सुईकार करता कि मुझे कोई आके बताएगी क्या पहनों का क्या नहीं
00:10तू कौन है? शुप
00:13अगर इनसान समझदार है तो उसको पूरा हक है वो क्या पहने, क्या ना पहने
00:19किसी दूसरे को कोई हक नहीं है टीका टिपड़ी करने का
00:23सहज रूप से अगर कोई वस्त्र त्याग दे या कम वस्त्रों में आ जाए
00:29तो मैं कहीं से भी उसको गलत नहीं मानता
00:31अध्यात्मिक देश राय भारत और आप अपने संतों, रिशियों, मुनियों को
00:36कभी बहुत कपड़ों में नहीं देखते होंगे
00:38तो अपने आप में देह में कोई बुराई नहीं है
00:40बात मन्शा की होती है लेकिन
00:42सहज रूप से अगर तुम कम कपड़ों में घूम रहे हो
00:45तो अच्छी बात है चाहे स्तरी हो चाहे पुरुशो
00:48लेकिन अगर नियत यह है कि
00:50जिस्म दिखाके वावाही लूटनी है
00:53पैसा बटोरना है
00:55लोगों का ध्यान खीचना है
00:57तो वो चीज फिर ठीप नहीं होती है
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