00:05वाजल तुमने मेरी बात मान कर मुझे बेहाथ खोश कर दिया और इससे जादा अच्छा काम चुट्टी के दिन हो
00:09ही नहीं सकता कोई भी
00:10मेरा नहीं ख्याल इतना इंट्रस्टिंग है जितनी तुम तारीफ हैं कर रही हो आईला
00:14क्या हुआ है यहाँ
00:24नेना मुझे समझ नहीं आ रहा कि तुमसे क्या को मैं जो भी कहता हूं तुम उसका उलट करती है
00:28और हमेशा कोई नहीं कोई मुश्किल होती है मगर तुम फिर भी किसी नहीं किसी तरह काम्याब हो जाती
00:33मुझे अपनी काबलेक पर भरुसा है
00:36मैं तो सोच रही थी कि पुलीस को कॉल कर देते हैं
00:38ये तो अच्छा हुआ कि सब सॉल्व हो गया वरना ना जाने क्या हो जाता है
00:41ठीक है ठीक है
00:42चलती हूँ रात में मुलाकात होती है तुमसे
00:48तुम मैंसे कोई बताएगा मुझे यहाँ क्या गरबढ हुए है
00:50हाना कोई सिस्पेंस मुवी लग रहे है वो भी पुलिस के साथ
00:53अब तो महीं ने बताओगी या मैं खुद बता हूँ हाँ
00:56अ दरासल डॉक्टर आप मुझे जानते हैं कि जब मैं बोलना शुरू करती हूँ तो चुपोने का नाम ही नहीं
01:01लेती है
01:02तो बेतर यही होगा कि आप ही बता देने अच्छा ठीक है चलो फिर मैं बताता हूँ तुम लोगों ने
01:09यहां जो कुछ भी देखा यह सब द्याना की वज़ा से हुआ है
01:11मतलब कुछ हद तक
01:12यानी
01:14देखो भई आज हमारे यहां एक मरीज आई लड़की थी को 18-19 साल की और उसके साथ उसके वालदेन
01:18भी थे
01:19उसके होने वाला शोहर भी
01:20मगर वो किसी और से महुपत करती थी
01:22और जिस लड़के से वो महुपत करती थी
01:24वो डॉक्टर का कोट पहन कराया हुआ था
01:25यार नेना उसने वो डॉक्टर का कोट कहां से लिये
01:28यकीन करो मुझे नहीं मालू
01:29चलो छूड़ो खेर
01:31मैं बताती हूँ
01:32मुझे समझ आ गया कि वो
01:34वो लड़का उस लड़की से बहुत प्यार करता है
01:36और मुझे ये बात भी समझ आ गई
01:37कि वो उस लड़की को अगवा करने आया था
01:39क्या वाकी लेना
01:40बिल्कुल
01:40किसी भी तरह मैंने सब को बहार निकाला
01:42और उसके बाद मैंने अराम से बैठकर उनकी कहानी सुनी
01:45और उनकी महबद पर पूरा यकीन हो गया मुझे
01:47और फिर भी मैंने अपनी तसल्ली के लिए उनसे एक सवाल किया
01:50और क्या था वो?
01:51और वो एहम सवाल ये था
01:52कि साहिबा कैसी काफी बादी है
02:09और उसके बाद मैंने साहिबा से भी कुछ सवालाद किया
02:11कि जमाल को कैसा कबाब पसंद है
02:13तो उसने भी सही जवाब दिया
02:14इतने में डॉक्टर सिनान वहां आगर और मुझे मजबूरान बाहर आना पड़ा
02:17और मैंने दिली दिल में उनकी मदद करने की ठान ली थी
02:20कि मैं इनकी मदद तो जरूर करूँगी
02:21वो लोग भाग जाते लेकिन साहिबा के बाबा इन्होंने देख लिए
02:24तो मजबूरान मुझे उनके दर्मियान आना पड़ा
02:27और मैंने उसके बाबा को अपनी बातों से ऐसा मुतासर किया कि वो फॉरण मान गए
02:30और ये मसला आराम से हलो गया जैसे कुछ थाई में
02:33ऐसा ही हुआता ना सिनान
02:35तुमने तो हमें हैरान कर दिया ने
02:52लेट्स को
02:55हाँ
02:56तो आज शाहें पर क्या प्रोग्राम है
02:58मुराद की तरफ जा रहे है नूर भी आ रहे है
03:00और मुराद की नेबर भी
03:01ओ हाँ रॉमेंटिक
03:04तुम गॉसिप्स करती थकती नहीं हो क्या
03:07तुमने सिनान को देखा था क्या
03:09वो अच जल्दी चला गया हॉस्पिटल से
03:10हाँ हाँ देखा तो था लेकिन शायद उसे जल्दी कहीं जाना था
03:14कहां जाना था बताओ
03:15मलूं मैं
03:24अमी
03:24क्या है बोलो
03:26इतनी रात गए आप ये क्या बना रहे हैं
03:28हाँ ये मैं अपने
03:31होने वाले पोते के लिए
03:32स्वेटर भुन रही हूँ
03:37पोता
03:38अब ये पोता कहा थे आ गया
03:39हाँ हाँ हग करते हो तुम
03:42क्या तुम मुझे मेरे पोते से महरूम रखना चाहते हो
03:46अरे मेरी प्यारी अमी
03:47प्ली दासा मत करें अभी तो मुझे हेना को अच्छी तरह जानना भी है ना
03:51बस बहुत हो गया मले
03:52अगर तुम नहीं जानते उसे, तो मैं बताती हूँ तुम्हें उसके बारे में, वो वाक़ी बहुत अच्छी बच्ची है, तुम्हारे
03:58बाबा भी नहीं जानते थे शादी से पहले मुझे, हाँ
04:04अम्मी भी न, उसकी मेठी मेठी बातों में फ़स गई, वो किती चला को रहत है यार
04:13इस वक कौन आया होगा
04:14रुखे रुखे, मैं देखता हूँ, बुझे पता है कौन है, उसके सिवा इस वक यहां कौन आ सकता है
04:25हेलो मलिक, कैसे हो?
04:26बिल्कुल ठीक हूँ मैं, यह क्या है? और कौन है तुम्हारे थाद? क्या तुम्हारा भाई भी आया है?
04:34नहीं तो, यह सब मैं खुद लेकर आई हूँ, तुम्हारी मुहापत की खातिर
04:38तुम्हे तुम्हारी मालूमें मैं इस वक कब से इंतजार कर रही थी
04:41अच्छा चलो जड़ा यह तो पकड़ो, अम्मी घर पे है ना?
04:44आ बिल्कुल
04:44यह पल अमारी मुहापत के नाम
04:46अम्मी चान आपकी बहु आ गए
04:50अमारी लुझ कर झालो जो जाए
04:52झालो जो जो जो बहु जो जो जो जो झालो झालो