00:00Pakistan cricket में आखिर चल क्या रहा है?
00:02आज के इस तज्जिये में हम इस वक्ती और जज़बाती तनकीद का बिलकुल नीट्रल होकर जायजा लेंगे जो आज कल
00:09हर तरफ हो रही है
00:09हम इस पूरे केस को छोटे-छोटे हिस्सों में ब्रेकडाउन करेंगे इन्फरादी कम्यूनिकेशन से लेकर बड़े इन्फरस्ट्रक्चर तक तो चलिए
00:17सीधा पॉइंट पर आते हैं
00:18आज हम इन पाँच मेंन पॉइंट्स पर बात करेंगे
00:21पहला, मीडिया ट्रेनिंग कैंप
00:23दूसरा, जुबान और क्यादत
00:25तीसरा, खिलाडियों की वेल्थ और सेल्फ इंवेस्टमेंट
00:28चौथा, मेरिट और हमारा डुमेस्टिक सिस्टम
00:30और आखिर में, जद्दा स्टेडियम का वो अजीब सा तसाद
00:34ये स्ट्रक्चर हमें एक्जाक्ली बताएगा
00:36के ग्राउंड लेवल से लेकर
00:37टॉप मैनेजमेंट तक असल मसला कहा है
00:42पाकिस्तान क्रिक्ट बोर्ड ने लहोर कैंप में
00:44एक नया और काफी इंट्रेस्टिंग इनिशेटिव शुरू किये
00:46खिलाडियों को बाकाइदा इंग्लिश और मीडिया स्किल्स सिखाई जा रही है
00:49बज़ाहिर तो ये चोटी सी बात लगती है न
00:51लेकिन इसके पीछे की ड्रीजनिंग काफी गहरी है
00:53और उसकी एहमियत इस नंबर से समझ आती है
00:5724 से 25 करोड
00:58ज़रा सोचिए नेशनल टीम का कप्तान सिर्फ ग्राउंड में 11 लड़कों को लीड नहीं कर रहा होता
01:04वो इन 24-25 करोड लोगों का ग्लोबल फेस होता है
01:08जब वो दुनिया के सामने खड़ा हो
01:10तो उसकी बातों में एक जबरदस कॉन्फिडन्स झलकना चाहिए
01:13वहां हिचकी चाहट या घबराहट की बिल्कुल कोई गुझाईश नहीं होती
01:17अब आते हैं दूसरे पॉइंट पर
01:19जुबान और क्यादत
01:20यहां हम उन मीडिया क्लासिस की असल वज़ा समझेंगे
01:23जब हम इंटनाशनल लीडर्स को अपने माजी के कपतानों के साथ कंपैर करते हैं
01:27अगर हम ग्लोबल सुपस्टार्स की मिसाल लें
01:30जैसे विराट कोहली, केन विलियमसन या बेन स्टोक्स
01:33ये लोग प्रेस के सामने कितने नैचरल और कॉन्फिडेंट लगते हैं राइट
01:37इनकी कम्यूनिकेशन में एक करिश्मा होता है
01:40लेकिन इसके वरक्स अगर हम अपने माजी के कुछ कपतानों को देखें
01:43तो अनफोचनेटली, मीडिया इंटरैक्शन में उनका कॉन्फिडेंस काफी लो नज़र आता था
01:48और बाच्चीत में वो रवानी नहीं होती थी
01:50इस गैप को समझने के लिए 2019 वर्ल कप की वो प्रेस कॉन्फिरंस याद करें
01:56जिसे सोच ने पॉइंट आउट किया है
01:58एक तरफ इंडियन कपतान ने सहाफी के सवाल का एक लंबा सोचा समझा जवाब दिया
02:03और उसके फॉरण बाद हमारी तरफ से सिर्फ एक इंतहाई मुक्तसर सा जुमला आया
02:07मेरा जवाब भी वही है
02:09एक इतने बड़े मैच से पहले ये वाकई एक अजीब और शरमनाक कॉंट्रास था
02:14जिस पर काफी तनकीद भी हुई
02:16और ये कम्यूनिकेशन का मसला सर्फ प्रेस कॉंफरेंस तक महदूद नहीं है
02:20ड्रेसिंग रूम में टीम के मुरैल पर भी इसका सीथ असर पड़ता है
02:23मिसाल के तौर पर डेब्यू कैब देते वक्त
02:25नासर हुसैन जैसे इंटरनाशनल वेटरेंस ऐसी स्पीचिस देते हैं
02:29जो रॉंग टेख खड़े कर देती हैं
02:30वहीं हमारे लोकल सीनेज आम तोर पर वही पुरानी गिसी पीटी एडवाईज देते हैं
02:34के भाई बस अपनी नैच्रल गेम खिलो
02:36जमीन है असमान का फरक है दोनों में
02:38खैर अब चलते हैं तीसरे पॉइंट की तरफ दौलत बमकाबला खुद पर सरमायाकारी
02:43देखते हैं कि इस सारी बाते हैं खिलाडियों के माइंड सेट और उनके पैसा खर्च करने के तरीकों से कैसे
02:48जुड़ी भी है
02:49कॉमेंटेटर के मुताबिक यहां एक बड़ा अजीब ट्रेंड है
02:51खिलाडी लीग्स और सेंट्रल कॉन्ट्राक्ट से करोडो रुपे कमाते हैं लेकिन अपने उपर अपनी स्किल्स पर इन्वेस्ट नहीं करते
02:58आइडियल तो यह होना चाहिए कि पियार एजेंट्स हायर हों या पावर हिटिंग के लिए कोई स्पेशलाइज बेस्बॉल कोच रखा
03:04जाए
03:04लेकिन रियल लाइफ में पैसों का रुख महंगी गाड़ियों बड़े घरों और रेंटल प्रॉपेटीज की तरफ मुर जाता है
03:10सोर्स का कहना है कि 99 फीसित खिलाडियों का फिनांशल साइकल बस एक ही पैटन पर चलता है
03:15पहले महंगी गाड़ी खरीदो, फिर अपना घर बनाओ, दोस्तों के साथ बाहर खाना खाओ
03:19और एंड में इन्वेस्मेंट के नाम पर कुछ रेंटल प्रॉपेटीज ले लो
03:45उनको मसलसल मुंतखिब कर रहा है
03:46यहां से हम अपने चौथे टॉपिक, मेरिट और डॉमेस्टिक सिस्टम में दाखिल होते हैं
03:51अब फोकस इन्फरादी खिलाडियों से हट कर पूरे सेलेक्शन सिस्टम की खामियों के तरफ शिफ्ट हो रहा है
04:13सिस्टम की खामियों की अगर लिस्ट बनाएना तो वो काफी लंबी है
04:16खिलाडी यी डुमेस्टिक रिकेट का पूरा प्रॉसेस बाइपास करके आ जाते हैं
04:19किसी को अपना रोल तक क्लियर नहीं होता है कि भाई वो लेक स्पिनर है या प्रॉपर बैटिंग ओल राउंडर
04:23सेलेक्शन जाती पसंद और नापसंद पर हो रही है
04:26और सबसे बढ़कर साबिक खिलाडी आज की परफॉर्मेंस के बजाए 20 साल पुरानी कहानिया सुना कर नेरेटिव सेट कर रहे
04:32हैं
04:32ये वाकी अलामेंग है
04:34जब बोर्ड के अंदर इतने सारे इंटरनल इशूस चल रहे हों
04:38तो सवाल ये उठता है कि क्रिकेट बोर्ड को अपने रिसोर्स अपना टाइम और पैसा असल में कहां इन्वेस्ट करना
04:44चाहिए
04:44यहां से सोर्स बड़े पैमाने की प्लैनिंग और इंफरस्ट्रक्चर का जाइदा लेता है
04:49और इस तरह हम आते हैं आखरी हिस्से पर
04:52जद्दा स्टेडियम का तज़ाद
04:54ये पूरे एनलिसिस का सबसे हैरान कुन मैक्रो लेबल पॉइंट है
04:58ये तज़ाद चेक करें ज़रा
05:00एक तरफ तो बोर्ड इतना एंबिशियस हो रहा है
05:02कि साओधी अरब के शहर जद्दा में नया करिकेट स्टेडियम बनाने के M.O.U. साइन हो रहे हैं
05:06और दूसरी तरफ लोकल रियालिटी ये है कि
05:09फैसलाबाद के स्टेडियम को देख कर लगता है
05:11जैसे हम टाइम ट्रेवल करके 1970 की दहाई में वापस आ गए है
05:14ये डिस्कनेक्ट बिलकुल अन्रियल है
05:16इस पॉइंट को समझने के लिए
05:18हवाई जहास का वो पुराना सेफटी रूल याद करें
05:21अनाउस्मेंट होती है न
05:22कि दूसरों की मदद करने से पहले
05:24अपना उक्सिजन मास खुद पहने
05:25सोर्स का मेन आर्गुमेंट भी यही है
05:27पहले अपना लोकल इंफ्रस्ट्रक्चर
05:29अपनी बुन्यादी सहुलिया तो ठीक कर लें
05:31उसके बाद दूसरे मुलकों में
05:32क्रिकेट पहलाने के बारे में सोचिएगा
05:34लेकिन रुकिए इस सारी तनकीद के बावजूद
05:37एक छोटी सी उमीद की किरन बाकी है
05:40हाल ही में प्लेयर सल्मान अली आगा के
05:42एक इंटर्व्यू से लगता है
05:43कि इस लंबे ट्रेनिंग कैंप में
05:45शायद आखिरकार खिलाडी इंग्लेंड और
05:47वेस्ट इंडीज की एहम सीरीज से पहले
05:49अपनी कोर वीकनेसिस पर काम कर पाएंगे
05:51तो आखर में सोचने की बात ये है
05:54क्या ये छोटी छोटी फिक्सिस
05:56जैसे इंग्लिश की क्लासिज या
05:57मीडिया ट्रेनिंग वाकई इस बरसों
06:00पुराने सिस्टम को बदल पाएंगी
06:01या फिर ये बड़े इंफरस्ट्रक्ट्रल फ्लॉज
06:04हमेशा की तरह हावी रहेंगे
06:05अपने जहन में इस बारे में जरूर सोचिएगा
06:07इस तज़िये में हमारे साथ शामिल होने का शुक्रिया