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China has enforced its new Law on Promoting Ethnic Unity and Progress, aiming to strengthen a shared national identity through Mandarin, education, and social integration. While Beijing says the law promotes unity and security, the United Nations, Amnesty International, and Taiwan warn it could restrict minority rights and cultural freedoms. Here's everything you need to know about China's controversial new law.

China में 1 जुलाई 2026 से Law on Promoting Ethnic Unity and Progress लागू हो गया है। सरकार का दावा है कि यह कानून राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को मजबूत करेगा। लेकिन United Nations, Amnesty International और Taiwan का कहना है कि इससे Uyghur, Tibetan समेत कई अल्पसंख्यक समुदायों की भाषा, संस्कृति और पहचान पर खतरा बढ़ सकता है। इस वीडियो में जानिए इस नए कानून की पूरी कहानी और इससे जुड़ा विवाद।

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00:06एक देश, एक भाशा, एक पहचान क्या चाइना में अब सिर्फ यही चलेगा
00:12राश्ट्रपती जी जिन पिंग ने ऐसा कानून लागू कर दिया है जिसे विरोधी सांस्तुतिक बुल्डोजर बता रहे हैं
00:20दावा है कि अब उईगुर, तिबितर और मॉंगोल जैसी अलग पहचान धीरे-धीरे मिटाई जाएगी
00:27स्कूलों से लेकर म्यूजियम तक सिर्फ एक ही राश्ट्र की कहानी सुनाई जाएगी
00:32और अगर विदेश में बैटकर भी चाइना के खिलाफ अगला ववाद का समर्थन किया तो कारेवाई का सामना करना पड़
00:39सकता है
00:39आखिर क्या है जी जिन पिंग का ये नया कानू जिसने चाइना से लेकर युनाइटेट नेशन तक हलचल बचा दी
00:47है
00:47नमस्कार मैं हूँ शाख शर्मा और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी
00:52एक जुलाई दोहजार चब्बेस से चाइना में लौ अन प्रोमोटिंग एथनिक यूनिटी और प्रोग्रेस लागू हो गया है
00:59चाइना की सरकार इसे राष्ट्रिय एकता मजबूत करने वाला एतिहासिक कदम बता रही है
01:05लेकिन दूसरी तरफ United Nation, Amnesty International, Taiwan और कई Human Rights Organization इसे अल्प संख्यकों की पहचान, भाषा और
01:15संख्रिती पर सबसे बड़ा कानूनी हमला बता रहे हैं
01:19सबसे पहले समझते हैं कि आखिर ये नया कानून है क्या
01:23चाइना में आधिकारिक तोर पर 56 एतने ग्रुप्स हैं
01:28इन में बहुसंख्यक, हान्चाइनी समुदाय के अलावा, ओईगुर, तिबितन, मुंगोल, खुई और कई अन्य जातिया समू शामिल है
01:37इन सभी की अपनी भाषाय, परंपराय, संस्कृती और धार्मिक पहचान है
01:42नया कानून कहता है कि इन सभी समुदायों की सबसे पहली पहचान, उनकी जातिये पहचान नहीं, बलगी चाइनीज नेशन होगी
01:50सरकार का लक्ष्य एक ऐसी साजह राश्ट्रिय पहचान तयार करना है
01:55जिसमें सभी समुदाये खुद को सबसे पहले चायना का नागरिक माने
01:59यानि सरकार की नजर में पहले नेशन फिर बाकी पहचान
02:04तो इस कानून में आखिर क्या क्या है
02:07सबसे बड़ा बदलाव एजुकेशन सिस्टम में किया गया है
02:11सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का मुख्य माध्यम मैंडरिन होगा
02:14बच्चों को ऐसी सिक्षा दी जाएगी जिसमें राश्ट्रिय एक ता
02:18चाइनीज हिस्ट्री चाइनीज कॉम्मिनस पार्टी के प्रतिवफादारी पर विशेश दोर रहेगा
02:23इतना ही नहीं म्यूजियम लाइबरी और कल्चरल इंस्टिटूशन में भी ऐसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे
02:29जो चाइना की साजह राश्ट्रे पहचान को बढ़ावा दे
02:33स्थानी प्रशासन को अलग-अलग एथनिक कॉम्मिनिटीज को एक साथ बसाने की योजनाय बनाने का अधिकार भी दिया गया है
02:41ताकि समाज में ज्यादा मेल जोल और एक रूपता लाई जा सके
02:45सरकार का ये कहना है कि इस से सेपरेटिजम कम होगा, टेररिजम पर रोक लगेगी और नाशनल सेक्योरिटी मजबूत होगी
02:52लेकिन यही से विवाद शुरू होता है
02:55Human Rights Organizations का आरोप है कि ये कानून केवल एकता की बात नहीं करता
03:00बलकि धीरे धीरे अलग-अलग समुदायों की पहचान को कमजोर करने का रास्ता तियार करता है
03:06Amnesty International ने कहा है कि ये कानून forced assimilation यानि जबरन एक जैसी राश्ट्रिय पहचान थोपने की नीती को
03:15कानूनी रूप देता है
03:17संगठन का दावा है कि इससे उईगुर, तिबितन और दूसरे अलप संख्यक समुदायों की भाषा, संस्कृती और धार्मिक परंपराओं पर
03:25दबाव बढ़ सकता है
03:26United Nations High Commissioner for Human Rights Volker Turk ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि ये कानून भाषा,
03:34शिक्षा, धर्म, संस्कृती, अभिव्यक्ती और शान्तिपूर्ण सभा की स्वतंत्रिता पर और ज्यादा प्रतिवन्थ लगा सकता है
03:42उन्होंने चाइना से इस कानून पर पुनर्विचार करने की अपील भी की है
03:47लेकिन सबसे बड़ा विवाद एक और है
03:50इस कानून में एक ऐसा प्रावधान है जिसकी वज़ह से दुनिया भर में बहस शिड़ गई है
03:55अगर कोई व्यक्ति, संगठन या शोध करता चाइना से बाहर रहकर भी चाइना की एथनिक यूनिटी के खिलाफ काम करता
04:03है
04:04या सेपरेटिजम को बढ़ावा देता है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कारिवाई की जा सकती है
04:09यही वज़ा है कि विशेशग्य इस कानून को चाइना का लॉंग आम लॉ कह रहे हैं
04:15यानी ऐसा कानून जिसका असर चाइना की सीमाओं से बाहर तक महसूस किया जा सकता है
04:21काइवान ने इस कानून की कड़ी आलोचना की है
04:25ताइवान के foreign ministry का कहना है कि अब दुनिया की किसी भी देश का नागरिक अगर उसकी बाती या
04:31गतिविधिया चाइना को पसंद नहीं आती तो वो भी इस कानून के दाइरे में आ सकता है
04:37ताइवान की mainland affairs council यानी M.A.C. ने आरोप लगाया कि कानून की कई धाराए इतनी व्यापक और
04:45अस्पेश्ट है कि उनका इस्तमाल राजनितिक विरोधियों और आलोचिकों के खिलाफ किया जा सकता है
04:50दूसरी तरफ Beijing इन सभी आरोपों को सिरे से खारिच करता है
04:55चाइना का कहना है कि इस कानून का मकसद किसी समुदाय की भाषा या संस्कृति खत्म करना नहीं है
05:01सरकार के मताबिक ये कानून केवल national unity मस्बूत करने
05:05सेपरेटिजम और टेरिजम पर रोक लगाने और सभी समुदायों के बीच सोशल हार्मनी बढ़ाने के लिए बनाया गया
05:12चाइनीज अधिकारियों का कहना है कि कारेवाइस सिर्फ उन्हीं लोगों पर होगी जो कानून तोड़ेंगे
05:17या देश की एकता को नुकसान पहुचाने की कोशिश करेगी लेकिन असली सवाल यही है कि नाशनल unity के नाम
05:24पर सभी समुदायों की पहचान को एक धाचे में ढालना सही है
05:28क्या एक साजह नाशनल आइडेंटिटी बनाना किसी भी देश का अधिकार है या फिर इससे भाशाई सांस्रितिक और धार्मिक विवर्ता
05:38धीरे धीरे खत्व होने का खत्रा पैदा होता है
05:40फिलाल इतना तै है कि जी जिन्पिन का ये नया कानून चाइना की सीमाओं से निकल कर पूरी दिनिया में
05:47बहस का विशे बन चुका है
05:49एक तरफ बीजिंग इसे देश को मजबूत बनाने वाला कदम बता रहा है तो दूसरी तरफ United Nations और Human
05:56Rights Organizations इसे अलप संख्यकों की पहचान और स्वतन तृता पर बड़ा खत्रा मान रहे है
06:02अब देखना होगा कि आने वाले समय में ये कानून चाइना की National Unity को मजबूत करता है या फिर
06:09वैश्विक स्थर पर उसके खिलाफ नई आलोचनाओं को और तेज करता है
06:12आपकी क्या राय है कि National Unity के लिए एक साजा पहचान जरूरी है या इस से भाशाई और सांस्रितिक
06:20विवर्ता पर खत्रा बढ़ सकता है
06:22अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए और देखते रहिए One India Hindi
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