00:002 अक्तूबर सन 2025 पाकिस्तान की Frontier Works Organization ने एक shipment अमेरका को dispatch कर दी
00:08इस shipment में Antimony, Copper Concentrates, Neodemium और Presiodemium शामिल थे
00:15ये पहली बार था कि पाकिस्तान ने Rare Earth Minerals की कोई भी shipment अमेरका के हवाले की
00:21500 मिलियन डालर्स की ये डील सेप्टेंबर में साइन हुई और October में पहली shipment रवाना हो गए
00:28और उसके बाद दोनों तरफ खामोशी
00:31जैसे ये shipment रवाना हुई, इसके बाद ये खबर मीडिया में गर्दिश करने लगी
00:36कि अमेरका ने similar डील, same डील, इंडिया के साथ भी साइन कर रखी है
00:42इस खबर को लेकर बहुत शोर होना चाहिए था, लेकिन इस खबर को दबा दिया गया
00:47पाकिस्तान के opposition parties ने इल्जाम लगाया कि ये एक secret डील है, lopsided डील है, एक colonial repeat है
00:55लेकिन शायद इसके पीछे की कहानी कुछ और ही थी, कहानी क्या है, आईए समझता है
01:10ये कहानी शुरू होती है, सन 1899 में Pacific Ocean के एक छोटे से जजीरे पे
01:16इस जजीरे का नाम है नोरो और ये 21 किलो मीटर का जजीरा दुनिये के रिमोट तरीन आईलिंज में से
01:23एक है
01:24इस से करीब तरीन मुलक, आस्ट्रेलिया पहुँचने के लिए भी सैंक्रो किलो मीटर का सफर दरकार है
01:30सन 1899 में इस जजीरे पर एक ब्रिटिश आफिसर आता है और इस जजीरे से एक पत्थर को उठा कर
01:38अपनी जेब में डाल लेता है
01:40ये आफिसर वापस आस्ट्रेलिया के शहर सिद्नी लैंड करता है और इस पत्थर को अपने दफ्तर में एक डोर स्टॉपर
01:48के तौर पर इस्तमाल करता है
01:50कोई नहीं जानता कि दुनिया के ये महंगा तरीन पत्थर दोर स्टॉपर के तौर पर इस्तमाल हो रहा है
01:56फिर उसके तीन साल के बाद एक इनसान को ये आइडिया आता है कि ये जो नायाब पत्थर हम नोरू
02:02से लेकर आएं हैं क्यों न इस पत्थर का टेस्ट किया जाए जब इस पत्थर का टेस्ट किया जाता है
02:07तो पता ही चलता है कि इस पत्थर के अंदर दुनिया का प्योरिस्
02:26इस चोटे से जजीरे का कि जिसकी पॉपिलेशन सिर्फ 11,000 होती है और फिर इस जजीरे की तकदीर बदल
02:34जाती है
02:36नोरू की तकदीर कुछ ऐसे बदलती है कि सन 1906 से लेकर सन 2000 तक इतनी क्मपनीज नोरू का रुख
02:44करती हैं
02:45और इतनी इन्वेस्मेंट होती है कि नोरू के लोगों का पर कैपिता जीडिपी इंक्रीज कर जाता है
02:51सन 1970 आते आते नोरू का GDP और पर कापिटा सौधी अरेबिया के बाद दुनिया में सबसे ज़ादा हो जाता
02:59है
02:5911,000 की ये आबादी अब दुनिया की लक्जरी जफोर्ट करती है ट्राइवेट जेट्स में घुमती है इनकी तकदीर बदल
03:07जाती है
03:08लेकिन सन 2000 आते आते नोरू की زमीन से 8 करोड मेट्रिक टन मिनरल्स निकाले जाते हैं नोरू की जमीन
03:17तबाव हो जाती है ये मुल्क कंगाल हो जाता है और फिर ये कामपनीज नोरू से एगजिट करती हैं और
03:23एक बार फिर नोरू की तकदीर यू टरन ले लेती है
03:27आज नूरों की 90 फीसद आबादी मोटापे का उबीसिटी का शिकार है
03:34इंपोर्टेट फूट पर डिपेंडेंट है
03:36एकॉनमी ना होने के बराबर है
03:38और इनका सोर्स ओफ इंकम सिर्फ एक है
03:41और वो आस्ट्रेलिया के रिफ्यूजीज को डीटेन करना
03:44और उस्ट्रेलिया के गर्मिन्ट से पैसे कमाना है
03:47नूरों की तक्दीब में तो यूटर्न ले लिया
03:49पर क्या यही कहानी पाकिस्तान और भारत के साथ रिपीट की जा रही है
03:54कहानी शायद वही है लेकिन इस बार मिनरल्स अलग है
03:59जिस फॉन पर आपकी विडियो देख रहे हैं
04:02क्या आप जानते हैं कि इस एक सौन के अंदर
04:04तक्रीबं स多फे रेर अर्फ मिनरल्स इस्तमाल होते हैं
04:08हर फॉन के अंदर तक्रीबं 0.03 ग्राम रेर अर्फ मिनरल्स इस्तमाल होते हैं
04:29इसका मतलब ये है कि तक्रीबन एक fighter jet के अंदर तक्रीबन डेर करोड मोबाइल फॉन्स के बराबर rare earth
04:37mineral इस्तमाल किये जाते हैं।
04:38आज ये rare earth minerals missile के अंदर drones में, precision weapons में, night goggles में, radar system में हर
04:46जगा इस्तमाल किये जाते हैं।
04:48इसका मतलब ये है कि आज modern warfare के लिए ये इंतहाई जरूरी है और इसके बगेर ना modern warfare
04:56लड़ी जा सकती है, ना technology को आगे बढ़ाया जा सकता है, ना दुनिया की technological demand को पूरा किया
05:04जा सकता है।
05:04और इस सब के उपर सिर्फ एक मुल्क का control है।
05:36Rare Earth Minerals का ये मतलब थोड़ी है कि वो rare हैं।
05:41ये कहानी शुरू होती है सन 1992 में जब चाइना के प्रेजिडेंट डेंजियाओ पैंग ने ये फैसला किया कि चाइना
05:48को एक industrial nation की तौर पर दुनिया पे rise देना है।
05:52और दुनिया में rise देने के लिए हर قوم को कुछ comparative advantage और कुछ competitive advantages की जरूरत होती
05:59है।
05:59इस बात को ऐसे समझें कि आप एक काम अच्छा करते हैं पर वो काम मैं आप से ज्यादा अच्छा
06:06करता हूँ ये मेरा आप के उपर comparative advantage है।
06:10और एक काम आप बिलकुल नहीं करते हैं पर वो काम मैं बहुत अच्छा करता हूँ तो ये मेरा आप
06:15के उपर competitive advantage है।
06:18चाइना ने फैसला ये किया कि हमारा दुनिया में compete करने के लिए comparative और competitive advantage वो rare earth
06:26minerals बनेंगे जो हमारे पास बोटू के अलाखे में बड़ी तादाद में मौजूद हैं।
06:32इसलिए डेंग्जियाओ पैंग ने कहा कि अगर मिडलीस्ट के पास तेल है तो हमारे पास rare earth minerals हैं।
06:48दाम रखा गया mountain pass लेकिन इस सबसे बड़ी mine को environmental concerns की वज़ा से बंद कर दिया गया।
06:56और अमेरिका ने सोचा कि जब सस्ता सामान सामने वाली दुकान से मिल रहा है तो अपना माल निकालने की
07:02जरूरत क्या है।
07:04और अमेरिका ने चाइना से rare earth minerals खरीदने शुरू कर दिये।
07:08चाइना को पिछले 40 सालों में इतना comparative और competitive advantage हासर हुआ
07:14कि आज global scale में अगर rare earth minerals को देखें तो आप सुनकर हैरान हो जाते हैं।
07:20आज चाइना global mining का 70 फीसद, global processing का 90 फीसद, minerals की separation का 85 फीसद और magnet
07:29manufacturing का 94 फीसद ओन करता है।
07:33आपको global supply chain की irony बताओं कि अमेरिका माइन करता है rare earth minerals को और माइन करने के
07:40बाद उन्हें भेज देता है चाइना processing के लिए।
07:44चाइना उन्हें process करता है और वापस भेज देता है अमेरिका, अमेरिका उसे F-35 में इस्तमाल करता है और
07:51फिर वही fighter jet potentially चाइना के खिलाफ इस्तमाल हो सकते हैं।
07:56हर मुल्क एक दूसरे पर dependent है और ये global supply chain का एक बहुत बड़ा लतीफा है।
08:04आज चाइना को पिछले 40 सालों में इतना competitive advantage हासिल हो चुका है कि चाइना जिसको चाहे rare earth
08:12minerals पर blackmail भी कर सकता है।
08:15चाइना ने अपनी protection के लिए December 2014 में rare earth minerals पर ban लगा दिया।
08:21चार rare earth minerals पर complete ban लगाया और April 2025 में 7 और rare earth minerals को भी ban
08:29कर दिया।
08:29फिर October 2025 में 5 additional rare earth minerals को भी ban कर दिया और उसके बाद separation equipment की
08:37export पर भी ban लगा दिया।
08:39नतीशतन मई 2015 तक चाइना के rare earth minerals के export year on year 74% तक गिर गई।
08:48और जैसे ही export गिरी इसके बाद Tesla, General Motors, Defense Contractors सब लाइम में लग गए।
08:55अमेरिका की Pentagon ने सोचा कि हम इस तरह तो पूरी दुनिया पर dependent हो जाएंगे।
09:01लहाजा Pentagon ने 400 million dollars के investment की एक company में जिसका नाम है MP Minerals।
09:08और ये investment की गई Defense Production Act के तहट यानी Korean War के जमाने का वो act जो ये
09:15कहता है
09:16कि ऐसी investment के बदले में जो production हासल की जाए उस पर सबसे पहला हक Pentagon का होगा।
09:24और first purchase agreement के नाम पर ये agreement मनजरे आम पर आया।
09:28That shows कि अमेरिका की desperation कितनी है rare earth minerals को लेकर।
09:34और फिर तारीख ने देखा कि सितंबर 26 दो हजार 25 का दिन आया कि जब पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर
09:41शहबाज शरीफ और आमी चीफ फील मार्शल आसिम मुनीर की वाइट हा।
09:46में US President Donald Trump से मुलाकात हुए।
09:49September 2025 में होने वाली White House में इस मुलाकात में American President Donald Trump के सामने rare earth minerals
09:57के sample रखे गए।
09:59Antimony, Copper, Rare Earth Ores और फिर 8 सितंबर 2025 को पाकिस्तान के FWO और US Strategic Metals के बीच
10:08में एक MOU साइन हुआ।
10:10500 मिलियन डॉलर्स का partnership framework और 2 अक्तूबर को पहली shipment अमेरिका के हवाले कर दी गई।
10:17पाकिस्तान ने अमेरिका को वो Antimony भेजा जो चाइना ने December 2024 में ban कर दिया था।
10:26जिसकी export रोक दी थी उसे पाकिस्तान ने October 2025 में अमेरिका को swap दिया।
10:33USGS का data कहता है कि अमेरिका में 2023 में Antimony की production zero थी।
10:39आज चाइना दुनिया की Antimony की market का 48% operate करता है।
10:44यानि पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद उस वक्त की जब अमेरिका को सबसे ज़्यादा जरूरत थी।
10:50और फिर कहानी में entry होती है इंडिया की।
10:56सितंबर 2024 में पाकिस्तान और USA के बीच में एक मौहिदा तै होता है Rare Earth Minerals को लेकर।
11:04और उसके ठीक एक महीने के बाल अक्तूबर 2024 में इंडिया और US के बीच में critical minerals को लेकर
11:11एक MOU साइन होता है।
11:13ठीक एक महीने के अंदर दो agreement साइन होते हैं जिनकी language सेम है, framework सेम है और pentagon दोनों
11:22agreements को represent करती है।
11:24यह कोई coincidence है यह coordination। देखवे मैं कोई conspiracy theorist नहीं हूँ लेकिन चब 2 और 2-4 नहीं
11:32बनाते तब कहानी समझने का जादा मज़ा आता है।
11:36अमेरिका की strategy बड़ी simple है। पाकिस्तान से चाहिए rare earth minerals, fast extraction, antimony, lithium potential, copper और gold
11:46और इंडिया से चाहिए processing, technology transfer, beach sand minerals और manufacturing का hub और final manufacturing, jobs और security
11:57यह provide करेगा अमेरिका खुद।
11:59सब सवाल यह है कि इंडिया के पास आज दुनिया के 8% global reserves है, which is around 7
12:06million tons, लेकिन production 1% से भी कम है। और उसकी वज़ा यह है कि इंडिया के पास आज
12:14जो beach sand मौजूद है, उसमें thorium mix है। और उसके लिए atomic energy के regulations दरकार है, private mining
12:22को खोलना दरकार है, जिसे 2016 से इंडिया ने ban कर रखा ह
12:27आज इंडिया primarily rare earth minerals export करता है USA को, UK को, France, Germany, Norway और जपान को, लेकिन
12:36चाइना ने अप्रेल 2025 में इंडिया पे export curb लगा दिया और इंडिया की EV industry halt होकर रह गई,
12:45TVS Motors, Bajaj Auto Parts सब डिले हो गए। और जून 2025 में बदले में इंडिया ने जपान के rare
12:52earth minerals को suspend कर दिया,
12:54ताकि अपनी domestic need को पूरा कर सके, लेकिन आज भी इंडिया का 82 फीसद magnets की demand चाइना से
13:03पूरी होती है, तो सवाल ये है कि जब इंडिया ये demand पूरी कर नहीं सकता, तो अमेरिका को इंडिया
13:10की भी जरूरत है और पाकिस्तान की भी जरूरत है, उसकी logic बड़ी simple है, अमेरिका क
13:15वो हर उस मुलक की जरूरत है, जो इस वक्त उसकी demand चाइना के मुकाबले में पूरी कर सके, अमेरिका
13:22खुद भी commission कर रहा है कि डीप सी के अंदर rare earth minerals की exploration शुरू की जाए, और
13:29दुनिया के जिस मुलक से rare earth minerals मिल सकते हैं, वो अमेरिका की domestic consumption को पूरा करें,
13:37अमेरिका ने सिफ इंदिया और पाकिस्तान से deal नहीं की, अमेरिका ने Thailand और Mexico के साथ भी deal की,
13:44और anti-money Thailand से भी और Mexico से भी हासल करना शुरू किया, लेकिन थोड़ी देर पहले मैंने आपसे
13:50बात कही थी, मैंने आपसे ये कहा था कि अगर कोई इंसान cricket खेलना चाहे, तो वो अ
14:07कौन सा प्लेयर दोस्त है और कौन सा प्लेयर दुश्मन, Thailand और Mexico से जो एक्सपोर्ट्स, Rare Earth Minerals की
14:15अमेरिका में लैंड कर रही है, आज मीटिया रिपोर्ट करता है, कि वो भी री लेबल होकर चाइना से ही
14:22आ रही है,
14:23रूटर्स की रिपोर्ट के मताबिक, Thailand की यूनिपिट इंडस्ट्री जिसने तीन हजार टन Rare Earth Minerals अमेरिका को भेजे, उसकी
14:31पेरिंट कमपनी यंक्सन केमिकल्स है, जो के खुद चाइना की कमपनी है, और ये जियो पॉलिटिक्स का खुद से एक
14:40बहुत बड़ा लतीफा है
14:42इस कहानी के सबसे important pivot पे बात करते हैं, पाकिस्तान के Rare Earth Minerals के बारे में, पाकिस्तान का
14:50claim ये है कि पाकिस्तान के पास तकरीबन 6-8 trillion dollars के Rare Earth Minerals के Reserves मौझूद हैं,
14:57लेकिन ये तो सवाल भी नहीं है, सवाल ये है कि इसमें से कितने recoverable हैं, जब आप दुनिया के
15:04data को study करेंगे
15:05तब आपको ये पता चलेगा कि पाकिस्तान के पास जितने Rare Earth Minerals के Reserves हैं, उसमें से शायद 100
15:12-300 billion dollars के Reserves recoverable हैं और वो भी देहाईयों पर फैलावा, यानि पाकिस्तान tier 1 countries में शामिल
15:22नहीं होता, इसके Reserves Australia और China के बराबर नहीं हैं, इसके Reserves अगर हैं तो वो tier 2 countries
15:29के बराबर ह
15:30यानि वेतनाम के बराबर हैं या फिर मयन मार के बराबर हैं और ये Reserves जादा तर गिलगित बलतस्तान और
15:37बलोचिस्तान से आते हैं चहां पर already poverty 70% है, तो यहां पर एक सवाल बनेगा कि ऐसे केस
15:45में इस इलाके की poverty का क्या बनेगा, environmental impact का क्या बनेगा और ये profit किसको जाएगा
15:53आज पाकिस्तान में सेंडक से कॉपर के Reserves निकाले जाते हैं, पिछले 20 साल से ये mines operational हैं, लेकिन
16:01इसका control चाइना के हाथ में हैं, लेहाजा बहुत जरूरी है उन मुलकों को एक नजर देखना जो अपने natural
16:08resources पर depend कर गए, सबसे पहला नाम आता है Democratic Republic of Congo का, जहां पर कोबाल्ट
16:15के कितने Reserves निकले, लेकिन वो आज भी गरीब है, वेंस बेला, ओइल प्रड़क्शन में दुनिया में उसने नाम कमाया,
16:23लेकिन उनकी economy आज भी collapsed है, नोरू जिसके लोग इतने अमीर हो गए, कि private jet में घूमना शुरू
16:31हो गए, आज अपने survival के लिए लड़ रहे हैं, और य
16:45हो जाता है, तो सवाल ये है, कि एक तरफ तो दुनिया में ये मुल्क हैं, और दूसरी तरफ है
16:50नौवे, एक ऐसा मुल्क, जिसने अपने तेल से अपना sovereign wealth fund create किया, और डेर ट्रिलियन डॉलर से अपनी
16:59generations के मुस्तक्बिल को secure किया, आज दोनों रस्ते पाकिस्तान के सामने है
17:05कि पाकिस्तान ने मुस्तक्बिल में नौर्वे बनना है या फिर नोरो
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