00:00न जाने कितने थे जो शान से मरे तब आज हमें राजन्यतिक आज़ादी भी मिली है
00:06मज़बूरी का रोना रोनी लग जाते तो कुछ भी जरूरी नहीं था
00:23बोल रहे थे तुमसे कुछ नहीं चाहिए, बस छोड़ देंगे बाहर जाकर के दुबारा ये बम वगएरा मत फोड़ना, इतना
00:30आश्वासन देदो, हम छोड़ देंगे, हम तुम्हें जानते, चंदर शेकर आजाद, न जाने कितने, आप थोड़ा इतिहास पढ़िए, आप �
00:38भौचके रह जाएंगे, कितने ही युवा सुतनता से नानी थे, जिनको अंग्रेजों न ये तक कहा कि हम तुम्हारा सम्मान
00:45करते हैं, तुम युवा हो, हम तुमको लंडन में पढ़ने के लिए भेजेंगे अपने खर्चे पर, और हम तुम पर
00:53कोई दबाव नहीं बना रह
00:57हो, बस सशस्त्र क्रांति मत करना, तुम मुझ से कुछ बोलना भी चाहते हो, तो बोल लेना, तुम अख़बार में
01:02लिखना चाहते हो, लिख लेना, बस ये मत करना कि तवंचा चला रहे हो, उन्हों ने का नहीं, अंग्रेजों ने
01:08का फिर जान जाएगी तुमारी, हमें त�
01:23तुमारी, क्या तो देखो, अगर बात मुक्ति और मौत की है, तो मुक्ति के लिए तो मौत भी मनजूर है,
01:30अगर यही आखरी शर्त है, हम मरना नहीं चाहते हैं, भाई, हमारा मरने का कोई रादा नहीं हम जीना चाहते
01:37हैं, लेकिन अब अगर हाल यहाँ पहुँच गया है,
01:40कि आखरी शर्त सामने आ गए, आखरी शर्त यही है, कि आखरी मूल ले चुका हो, तो आखरी मूल ले
01:45चुका देंगे, कोई शौक नहीं है हमको वीरगति लेने का, कोई शौक नहीं है शहीद होने का, लेकिन अब अगर
01:52और कोई राह बची ही नहीं है, आखरी यही है, कि जा
01:56तो वो भी ठीक है, मजबूरी क्या है, कोई मजबूरी नहीं है
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