00:00नमस्ते आचारजी अभी मैं बनारस गया हुआ था
00:06और वहाँ पे मैं दो जगह एक साथ ही गया था एक मनी करनी का घाट पे गया था और
00:12एक टेमपल पे गया था
00:13तो जब मनीकरनी का घाट पे गया तो ऐसा लग रहा था की सारी बाते बहुत आसानी से समझ में
00:20आ रही है बट जब मैं टेंपल गया तो वहां सिव नहीं मिले मुझसे.
00:24जेव मैं फोटो थी शिव थी? नए. पहले मिलें शिव से? तो पहचाना कैसे की शिव नहीं मिले?
00:32आप आध्यात्मिक अनुभवों की तलाश में हो, फिजूल किताबें पढ़ लिए, मैं हिमाले वाले उस वाले बाबा के उपास गया,
00:42और वहाँ पर मैंने ये अदभुत सिद्धियां देखी, आप उस तरीकी किसी अनुभव की तलाश में जाते हो, पेरबल अफसाधू,
00:49वो
00:53मैंने कहा पीछे से कि मुड़ो, और वो मुड़ा और उसके मूई नहीं था, या कि वो मुड़ा और उसने
00:59मुझ पर द्रिश्टिपात किया, उसकी आँखों से विचतर लहरे निकली और वो मेरे हिदय को बेद भेद गई, वो जो
01:06नाट किये था फिर आपको मनिकर्णका में
01:08दिखाई देती है, वो आपको नहीं दिखाई देगी मंदिर में, डेथ दो ट्रजिक, इस्टिल ड्रमेटिकली एंटर्टेनिंग, अखबार मौत की खबरों
01:18से भरे रहते हैं, जिंदगी खबर से भरे रहते हैं, और यह आम जिंदगी ही तो है, जो जाकर के
01:23फिर घाट पर �
01:24जल जाती है, उस आम जिंदगी खबर कहीं पढ़ते हो, क्या खबार में? मंदिर में आम जिंदगी दिखाई देती है,
01:30वही आम जिंदगी है, जो अभी यह सब कर रही है, अभी वहां जाएगी, जल जाएगी, नो शम्शान में कुछ
01:36खास है, नो देवाले में, इसका मतलब
01:41जाना जाना तो अंतता है, जा सकते हो, पर उमीदें लेके मत जाओ, जो घर में है, वही शम्शान में
01:47है, और जो घर में है, वही मंदिर में भी है
Comments