00:00एक जमाना था जब बिना देखे शादी हो जाया करती थी और भुड़ा पे तक टिकाव रहती थी
00:05आजकर लिविन में भी रहते हैं, घूमते भी हैं और फिर शादी के कुछ वक्त के बाद डैवास ले ले
00:13लेते हैं
00:14तो यह जो डैवास के केसिस हैं, यह क्यों बढ़ते जा रहा हैं?
00:18फुली बार बोलता हूं, बढ़ते इसलिए जा रहे हैं क्योंकि प्रक्रति ने इंसान को ऐसा बनाया नहीं है कि कोई
00:25भी दो व्यक्ति ता उम्र एक साथ चल सकें
00:30चाहे वो दो बच्चे हों, चाहे दो पुरुष हों, दो इस्त्रियां हों या फिर इस्त्री और पुरुष हों
00:36तो ऐसा कोई प्रक्रति में न बंधन है न व्यवस्था है कि दो लोगों को साथ हमीशा चलना गी है
00:44पहले चल जाता था क्योंकि बहुत तरीके के डर होते थे
00:48हो तो ये भी जाता है कि आप किसी को उम्रकायत की सजा दे दें तो वो जीवन पर जेल
00:52में चल जाए
00:53उसको आप ये थोड़ी कहेंगे कि बहुत प्यार की बात है
00:56क्यों पढ़ने लगा है क्योंकि अब लोगों को हक आ गया है कि वो अलग हो सकते हैं और लोगों
01:01को अर्धिकार रहेगा कि वो अलग हो सकते हैं तो अलग होंगे
01:05मैं बिल्कुल मानता हूँ
01:06और अच्छी तरह मैंने देखा भी है
01:08कि जब माबाब अलग होते हैं
01:11तो उसका परिवार पर विश्रिशकर बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है
01:14ये बिल्कुल देखा है
01:16लेकिन मैंने ये भी देखा है
01:18कि उतना ही बुरा असर है
01:19उसे ज्यादा बुरा असर उन परिवारों में भी पड़ता है
01:22जहां माबाब में दिनरात की कलह रहती है
01:25और जहां दो ऐसे व्यक्ति, एक स्तिरी, एक पुरुष ताथ रह रहे होते हैं
01:30जिनमें आपस में कोई संगती हो ही नहीं सकती
01:33शादी के लिए भी आप जिसको चुनते हो उसमें भी गलती हो सकती है
01:37और उगर वो गलती हो गई है तो उसका सुधार करो
01:40सुधार पहले तो ऐसे किया जाता है कि बातचीत करी
01:42रिष्टा बचाने के उशिश करी
01:44वो भी सुधार का ही एक तरीका है
01:46लेकिन अगर वो तरीका नहीं चलता तो आवश्यक नहीं है कि एक दूसरे के साथ बंधे रहकर के यंत्रणा भोगो
01:52जीवन कर लिए
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