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  • 2 days ago
दिल्ली में सरकार बदल गई, टैंकरों की रूपरेखा बदल गई, लेकिन दिल्ली के कई निवासियों के लिए पानी की जद्दोजहद खत्म नहीं हुई. मेहरौली इलाके की कुसुमपुर पहाड़ी में, पानी की एक-एक बूंद के लिए लोगों को हर रोज संघर्ष करना पड़ता है. दिल्ली जल बोर्ड के टैंकरों के आने के पहले ही सड़कों पर बर्तनों की कतारें लग जाती हैं। टैंकर आते हैं तो लोग अपने रोजमर्रे का काम छोड़ देते हैं और पानी भरने के लिए दौड़ पड़ते हैं.लोगों की शिकायत है कि पाइप से नियमित पानी की सप्लाई सिर्फ वादा थी. टैंकरों के आने का समय भी तय नहीं. अक्सर देरी की वजह से लोगों को देर तक इंतजार करना पड़ता है. भीड़ जमा हो जाती है और आपस में झगड़े भी होते हैं.इलाके की आबादी 30,000 से ज्यादा है। इसे देखते हुए पानी के बोरवेल बेहद कम हैं. लिहाजा लोग टैंकर सप्लाई पर ही निर्भर हैं. कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि पानी के सरकारी स्रोत भी कमर्शियल हो गए हैं. बोरवेल का पानी इस्तेमाल करने के लिए उनसे पैसे मांगे जाते हैं.

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00:05पानी की रूप रेखा बदल गई लेकिन दिल्ली के कई निवासियों के लिए पानी की जतोजहत ख़त नहीं हुई
00:14महरौली इलाके की कुसुमपुर पहाडी में पानी की एक-एक बूंद के लिए लोगों को हर रोज संघर्ष करना पड़ता
00:21है
00:25दिल्ली जल बोर्ट के टैंकरों के आने से पहले ही सडकों पर बरतनों की कतारें लग जाती है
00:31टैंकर आते हैं तो लोग अपने रोजबर्रे का काम छोड़ देते हैं और पानी भरने के लिए दौड़ करते हैं
00:52लोगों की शिकायत है कि पाइप से नियमित पानी की सप्लाई सिर्फ वादा थी
00:57टैंकरों के आने का समय भी तै नहीं
01:00अक्सर देरी की वज़ा से लोगों को देर तक इंतजार करना पड़ता है
01:04भीड जमा हो जाती है और आपस में जगड़े भी होते हैं
01:29इलाके की आबादी 30,000 से ज़्यादा है
01:32इसे देखते हुए पानी के बोर्वेल बहत कम है
01:35लहाजा लोग टैंकर सप्लाई पर ही निर्भर है
01:38कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि पानी के सरकारी श्रोथ भी कमर्शल हो गए है
01:42बोर्वेल का पानी इस्तमाल करने के लिए उनसे पैसे मांगे जाते हैं
02:05कंटेनरों की लंबी कतार और टैंकर का इंतिसार
02:08ये तस्वीर देश की राजधानी के एक इलाके की है
02:12जहां पानी की एक एक बूंद के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता है
02:18हताश लोगों का कहना है कि जब तक समस्या का स्थाई समधान नहीं हो जाता
02:23उनके पास मुश्किल जेलने के सिवाए कोई चारा नहीं
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