00:05हर किसी के होने के बावजूद मैं इतनी अकेली क्यों हूँ?
00:45अकेले पन का प्राथमिक संबन्द भाहर की किसी चीज के होने या ना होने मिलने या ना मिलने से नहीं
00:52है
00:52अकेले पन का प्राथमिक संबंध धीतर की इस भावना से है कि मैं अधूरा हूँ
01:00हमारे सारे रिष्टे इसी अधूरे पन से निकलते हैं इसलिए वेर्थ जाते हैं
01:04हमारी सारी चाहते हैं, हमारा सारा श्रम, हमारे सारे लक्ष, इसी अधूरे पन से निकलते हैं, इसलिए व्यर्थ जाते हैं
01:13अधूरापन हटाने के दो तरीके हो सकते हैं, एक तो ये कि इसको भरने की कोशिश करते रहो जीवन भर
01:19शादी हो जाए, बच्चे हो जाए, पैसा आ जाए, इस्जत मिल जाए
01:22या तो उम्र भर लगे रहो इसमें विर्थ
01:25दूसरा तरीका ये है कि इस मॉडल को ही ठुकरा दो
01:28कह तो अधूरापन हटाने की जरूरत तो तब पड़ेगी ना
01:32जब अधूरापन होगा, कोई अधूरापन नहीं है
01:35मैं इस मॉडल को ही अस्विकार करती हूँ, कैसे अस्विकार किया जाता है
01:38जो भीतर अधूरा बैठा है, उसको जान करके
01:41वही आपन ग्यान है, उसके बिना लोनलिनस नहीं जाती
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