00:00भारत का इतिहास बहुत ही लंबा और बहुत ही सम्रिद रहा है
00:04हम बार-बार किसी और फोर्स से पराधीन हुए है
00:10हमें क्या बदलना चाहिए ताकि हम फिर से पराधीन ना हो
00:14ब्रिटेन ने भारत को नहीं जीता
00:16भारत पहले ही कई टुकडों में बटा हुआ था
00:19और वो सब टुकड़े आपस में लड़ रहे थे उन टुकडों की पहले से जो लड़ाई चल रहे थी ब्रिटेन
00:25ने उसका फायदा उठाया खासकर जो पोस्ट और अरंगजेव एरा था उसमें
00:301708 में औरंगजेव की मौत होती है इसका मतलब जो पूरा उत्तरी और मध्य भारत था वो डिसिंटिग्रेट कर गया
00:37सेंट्रल पावर वहां पर मुगल ही थे बाद औरंगजेव के बार जो शासक आए वो सब ऐसे ही थे
00:42उनमें दमदिलासा नहीं था और दखन की तरफ मराठे प्रबल हो रहे थे इनको खबर भी नहीं हुई अंदाज भी
00:49नहीं लगा कि यह जो गोरे ट्रेडर्स आए यह क्या कर सकते हैं
00:52वो बात यह नहीं थे कि आप बाहर से ही कुछ लोग लट रहे हैं बाहर से इसलिए लट रहे
00:56हैं क्योंकि भीतर से डिवाइडेड थे भीतर ही बटवारा था
00:59प्लासी नहीं जीच सकते थे अगर राजुद दौला के और सेनापती थे उनको मीर जाफर ने अंग्रेजों के हक में
01:08बेचन दिया होता तो
01:09इसी दरीएसे टीपू सल्तान को नहीं हराया जा सकता था अगर अंग्रेजों को वहाँ पर स्थानी समर्थन नहीं मिलता तो
01:16एक लोकल कंफिडेरेजी बनी थी
01:18उसमें हैदराबाद शामिल था उसमें मराठे भी शामिल थे नहीं तो टीपू सल्तान नहीं हर सकता
01:39कर दो कर दो
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