00:00शिर सेना, महराष्ट्र की राजनिती की वो पार्टी जिसने सत्ता भी देखी, संगर्ष भी देखा, लेकिन सबसे ज्यादा देखा बगावत
00:08का दर्थ।
00:09वाला साहब ठाकरे ने जिस संगधन को खड़ा किया, उसे सबसे बड़े जटके बाहर वालों ने नहीं, अपनों ने दिये।
00:16भुजबल से राने, राज ठाकरे से शिंदे तक हर बगावत ने पार्टी का एक हिस्सा अपने साथ ले लिया।
00:24अब एक बार फिर तूटकी आहट है, तो सवाल है, अकर शिफ सेना बार बार क्यों तोटती है।
00:31नमस्कार, मैं हुँ विशाखा शर्मा और आप देख रहे हैं One India Hindi।
01:03बाला साहब ठाकरे ने मराठी मानुष की अवास बुलंद करने के लिए शिफ सेना की स्थापना की।
01:09मुंबई की सटकों से शुरू हुआ ये सफर जल्द ही महराष्ट की राजनीती की सबसे ताकतवर ताकतों में शामिल हो
01:16गया।
01:17लेकिन जैसे जैसे पार्टी बड़ी होती गई वैसे वैसे उसके भीतर सत्ता, संगठन और उत्तराधिकार की लड़ाई भी गहराती गई।
01:25शिफ सेना में पहली बड़ी दरार 1991 में दिखाए थी।
01:29इस बगावत का चहरा थे छगन भुजबल। भुजबल उस दौर में पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे।
01:37ओपिसी समाज में उनकी मजबूत पकड़ थी। लेकिन नित्रत्व को लेकर मतभेद बढ़ते गए और आखिरकार भुजबल ने पार्टी छोड़
01:45दी।
01:45उनके साथ कई विधायक भी चले गए। ये पहली बार था जब शिफसेना को एहसास हुआ कि पार्टी के बड़े
01:52चहरे भी नित्रत्व के खिलाफ खड़े हो सकते हैं।
01:56फिर आया साल 2005 और इस बार बगावत करने वाले नेता थे नरायन राने। राने सिर्फ शिफसेना के वरिष्ट नेता
02:04नहीं थे बल्कि महराश्यों के मुख्यमंत्री भी रह चुके थे।
02:08लेकिन उन्हें लगने लगा कि पार्टी में उनकी भूमी का कम होती जा रही है और उधर ठाकरे का कद
02:14लगातार बढ़ रहा है। नराजगी इतनी बढ़ी कि उन्होंने शिफसेना छोड़ दी और कॉंग्रिस में शामिल हो गए। ये सिर्फ
02:21एक नेता का जाना नहीं था ब
02:35बाला साहब ठाकरे के भतीजे राश ठाकरे ने पार्टी छोड़ दी। एक समय था जब राश ठाकरे को बाला साहब
02:42का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था। उनकी शैली, भाषण और आक्तमक राशनीती ने लोगों को बाला साहब की जलक दिखाई
02:50देती थी। ले
03:04सिर्फ राशनीतिक विभाजन नहीं था, बलकि ठाकरे परिवार की सबसे बड़ी राशनीतिक दरार थी। लेकिन जो 2022 में हुआ, उसने
03:13शिवसेना का पूरा राशनीतिक भुगोल ही बदल दिया। एकनाथ छिंदे ने अपने समर्थक विधायकों के साथ बगावत कर दी।
03:20पहले सूरत, फिर गुहाटी और उसके बाद मुंबई तक चली इस सियासी लड़ाई ने महराश्ट्र की महाविकास अधारी सरकार गिरा
03:28दिया। उधव ठाकरे को मुख्य मंत्री पत छोड़ना पड़ा। इसके बाद मामला अदालत और चुनाव आयोग तक पहचा। और �
03:36फिर आया वो फैसला जिसने भारती राजनीती की सबसे चर्चित लड़ायोग में जगह बनेगी। चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट
03:43को असली शिफसेना और धनुषबान चुनाव चिन दे दिया। जबकि उधव ठाकरे को शिफसेना UBT नाम और मशाल चुनाव
04:05का पाला बदलना नहीं होगा। ये उस पार्टी के लिए एक और बड़ा जटका होगा जो पिछले 6 दश्कों से
04:11बार बार अपने ही निताओं की बगावत का सामना करती रही है। जिल्चस बात ये है कि शिफसेना की लगभक
04:18हर बड़ी तूटके पीछे एक पैटन दिखा�
04:22को लेकर असंतोष कहीं उत्राधिकार की लड़ाई और कहीं सत्ता में हिस्सेदारी का विवाद। भुजबल की बगावत हो राणने की
04:30नराजगी हो राश्ठाकरे का अलग होना हो या फिर शिंदे का विद्रो हर बार संगर्ष पार्टी के भीतर से ही
04:37शुरू हुआ। यान
04:52या फिर उधर ठाकरे इस बार पार्टी को एक जुट रखने में कामियाब होंगे। लेकिन एक बात तैह है शिफसेना
04:59का इतिहास सिर्ष चुनावी जीत और सत्ता का इतिहास नहीं है। ये बगावतों, विद्रोहों और तूट की उन कहानियों का
05:06इतिहास भी है जिन्होंन
05:18जिर्व इतना है कि क्या शिफसेना के इतिहास में अब एक और नया अध्याय जुड़ने वाला है। आप क्या सोचते
05:25हैं? हमें कमेंट करके अपनी राए ज़रूर बताइए। और देखते रहिए OneIndia Hindi!
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