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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना UBT एक बार फिर बड़े संकट का सामना कर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वही पुरानी शिकायतें, जिन्होंने पहले एकनाथ शिंदे की बगावत को जन्म दिया था, अब दोबारा पार्टी में टूट की वजह बन रही हैं? कई बागी नेताओं और सांसदों की नाराजगी को लेकर नए दावे सामने आ रहे हैं। क्या नेतृत्व शैली, संवाद की कमी और संगठनात्मक फैसलों ने पार्टी को कमजोर किया? इस वीडियो में जानिए शिवसेना UBT की अंदरूनी कहानी, बागियों की शिकायतें, उद्धव ठाकरे की चुनौतियां और महाराष्ट्र की राजनीति पर इसके संभावित असर का पूरा विश्लेषण।

The Shiv Sena UBT crisis has once again raised questions about leadership, internal communication, and party unity. Political observers are drawing comparisons between the current situation and the rebellion led by Eknath Shinde, suggesting that some of the same grievances may still exist within the party. Reports of dissatisfaction among leaders and MPs have fueled debate about whether long-standing organizational issues have weakened the party’s structure. In this video, we explore the inside story behind the latest developments, the concerns raised by rebel leaders, and what it could mean for the future of Shiv Sena UBT and Maharashtra politics.

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00:00उद्धो और आदित ठाकरे की एक आदत ने चार साल में दूसरी बार शिउशेना को तोड़ने पर मजबूर कर दिया
00:06जी हाँ चार साल पहले जब एकना शिंदे शिउशेना से अलग हुए थे बगावत की थी और अपना गुट बनाया
00:14था और उस गुट को शिउशेना की मानता दिलवाई तीर कमानवाला निशान ले लिया पार्टी का नाम भी ले लिया
00:18तब भी शिंदे की वही शिकायत थी जो
00:21अभी छे बागी लोगसभा के सांसदों की हैं दोनों की बातें लगबग एक जैसी हैं एक जैसी शिकायत है और
00:29उस इस आधत को लेकर जिस आधत ने दूसरी बार पार्टी को तुड़वा दिया है महराश्ट के सियासी कर यारों
00:36में चर्चाएं लंबे वक्त से होती आ रही
00:51महाराश्ट के राधनिती में भी कम हो रहा है
00:54मंझे हुए राधनिता नहीं है
00:55ये बाते अक्सर महाराश्ट के 86 गल्या़ों में की जाती रही है
00:59फृब नहीं धाकरे घर में रहना पसंद करते हैं
01:03मातो श्री में बैठ कर ही
01:04वो पूरी party कंट्रोल करना चाहते हैं, सब कुछ वहीं से करना चाहते हैं
01:08उनसे उनकी party के विधायक भी समय समय पर मिल नहीं पाते
01:12उनके फोन किया जाता है, उनके जो निली सच्यू है
01:16वो फोन उठाते हैं, लेकिन वो कहते हैं कि साहव भी
01:19बिजी हैं, वेस्ट हैं, वो आपसे बाद में बात करेंगे
01:22ये शिकायत एकनाशिंदे गुट के लगबख सभी विधायकों की थी, 2022 में
01:27ठीक वैसे शिकायत अभी 6 लोगसवा सांसदों की भी है
01:30उद्धो ठाकरे, उनके बेटे आदित ठाकरे, जो शिउसेना, UBT के मुखियां है, सरवे सरवा है
01:35सारे बड़े फैसले वही लेते हैं, ये दोनों ही मातोश्री यानि ठाकरे परिवार का जो आद्धकारिक निवासस्थान है
01:41बहां से कभी निकलते नहीं, लोगसवा सांसदों को अपने पार्टी की मुखिया से भी मिलने के लिए काफी मशक्कत करनी
01:48पड़ती है
01:48अपनी बात रखने के लिए भी उन्हें काफी जादा जो लगाना पड़ता है
01:52और इसी वज़ा से ये छे लोगसवा के सांसद धीरे धीरे शिंदे गुटवाली शुसेना की करीब होते चले गए और
01:59फिर अब जाकर उन्होंने बगावती रुख भी अपना लिया है
02:02इसकोरे मामले को लेकर ठाकरी परिवार के राधनिती कैसी रही है
02:051966 के बाद से शुसेना के स्थापना के बाद से ही ठाकरी परिवार कैसे राधनिती करता आया है
02:09और 2019 के बाद से कैसे चीजे बदलनी शुरू हो गई जब पहली बार ठाकरी परिवार के सिव्यक्त ने
02:14चुनाव लड़ना चुना और आधित ठाकरी वल्ली से विधानसवा चुनाव लड़ते हैं और विधायक बनते हैं
02:19सब कुछ हमने अपने राधनितिक विश्रिशकों से बात की है
02:22अपने शो में आपको वीडियो दिखाते हैं उससे आपको समझ में आएगा कि आखिर ठाकरी परिवार का ये राधनितिक पतन
02:27कैसे हो रहा है क्यों हो रहा है कौन सी बड़ी वजह है
02:30कि हमेशा उद्धो गुट के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है
02:34टीमसी के साथ चलो हमने माल लिया कि उनके हाँ सत्ता गई और बंगाल के राधनिती ही वैसी है कि
02:39सब लोग सत्ता से चिपके रहना चाहते है
02:40तो वहां पर उनको डर सताया उनके बहुत सारे टीमसी की नेताओं पर जनता बहुत आकुरुशित थी अंडे फेके जाने
02:47लगे तो उन्हें अपनी जनता से डर था
02:48इसलिए उपाला बदलने हैं तमाम और वजाएगी नाई जा रही है लेकिन उद्धो ठाकरे तो सत्ता में रहते हुए पार्टी
02:53तूट गई थी उनकी वो जब मुख्यमंत्री थे और चार साल के बाद फिर से तूट गई इसके पीछे क्या
02:58वजा हो सकती अभी मैं संजनी र
03:16दहा है कुछ अगर आप अपने निताओं से लगातार मिलेंगी नहीं तो वो तो आपकी पार्टी छोडएंगे ही ने देखिये
03:22ये बात कुछ हद तक सही भी है लेकिन क्या इसी फॉर्मूले से क्या आमाधी पार्टी तूटी है इसी फॉर्मूले
03:29से क्या त्रेन मुल कॉं�
03:34अगर आज की राजनीती में देखें तो विचार धारा की राजनीती कमोवेस भर्तिय जन्ता पार्टी ही करती है बांकि किसी
03:41खास करके जो एक शत्रिय दल है उसमें कोई ऐसी विचार धारा जैसी इस्तिती है नहीं कोई एक विचार धारा
03:46को लेकर चलते नहीं है और अगर वि
04:03लेकिन आमादी पार्टी के साथ क्या हुआ उनकी तो ऐसी को विचारधारा नहीं थी और उन्हों ने आप जो भी
04:08विचारधारी थे उससे वो डेविएट नहीं कर रहे थे यही इस्तिती तमिल माफ करें यह टीमसी की थी परसी मंगाल
04:14में वहाँ पर भी वो डेविएट नहीं
04:30था और देखिए इस बदलाव की पूरी पटकथा को उन्होंने किस तरह से बदला है पहले कहा जा रहा था
04:42कि
04:42के जो लोग सभासांसत थे वो चाह रहे थे कि जैसे शिवसेना का अलग गुट बन गया उसी तरह उनके
04:49साथ टीम सी का निसान और उनका नाम रहे लेकिन सायोनी घोष्ट चाहती थी कि टीम सी की कोई छाया
04:55भी ने गुट पर ना रहे बिल्कुने एंसी पी आई जैसी पार्ट
05:09जैसे जनता पार्टी में तासर नहीं क्यों होगा जब सायोनी घोष्ट आ सकती है संजे राउत का तो ऐसा हाड
05:14लाइन भी नहीं रहा है जिस तरह से यह आखों में मदीना और हिर्दय में कावा क्या कह रही थी
05:20और देखिए अब आसानी से भार्तिय जनता पार्टी के पाले
05:22कि अब सवाल है कि सायोनी घोष्ट क्यों आई है क्या उनका हिर्दे परिवर्टन हो गया ओर हिंदुतों का तिवर
05:36प्रवाह शुरू हो गया आप जाई ये दोहजार बाइस के पस्चिम महेंगाल शिक्छक भरती घोटाला कि फाइल देखिये
05:45उसमें सायोनी घोश्य भी पूछताच की गई थी
05:47क्या ये डर है? हो सकता है
05:52आखिर अजित पवार 24 गंटे के अंदर पाला बदल के वापस NCP में चले जाते हैं
05:58आते हैं भारते जनता पाटी के साथ सरकार बनाते हैं
06:01उपमुख मंतरी बनते हैं और इन पर केस क्लोज हो जाता है
06:05और अगले दिन वे वापस से ले जाते हैं NCP में
06:09बिल्कुल
06:09आखिर क्या वज़य होती है? विचारधारा से लोग क्यों समझोता कर रहे हैं?
06:14उसकी वज़य भी होनी चाहिए
06:16विचारधारा वाली इस्थिति नहीं है
06:19दूसरी बात भारती जन्ता पार्टी
06:21एक वो पार्टी थी संसद में इसके प्रधान मंतरी कहा करते थे
06:25कि ऐसे इस तरीके से अगर सत्ता मिलती है
06:31तो उस सत्ता को मैं चिमीटे से भी चुना पसंद नहीं करूँगा
06:34अब तो ये है कि सत्ता किसी तरह मिलती है के मूल सत्ता नहीं
06:39मिश्कंटक सत्ता ळेकिन जब BJP के नेता इस तरह के बयान देते थे
06:45अटल ब्यारीवाजपे कि आप बात करें थे कि चिम्टे से छोना पसंद नहीं करूंगा
06:49तब बीजेपी कभी दोसों के पार पहुझ भी नहीं पाई थी लोगसभा में 182 उनका सबसे हाइस नंबर था लोगसभा
06:55में लेकिन जब मोदी की वीजेपी आई तो पहली बार में है इनको लोगसभा में पहुमत मिल गया वो ठीक
07:02है लेकिन देखें किस तरह से विचारधारा
07:04में उहां भी गिरावट आई है अभी इनके लिए लक्ष इनका महतवपूर्ण है राष्टा कोई भी हो अभी इनके लक्ष
07:12के सामने जो चीजे हैं हम उसकी बात पहले कर चुके हैं कई नई चीजे उसमें और होंगी हमारे सहयोगी
07:18है शिवेंद्र जी वो कह रहे थे कि उतर
07:31अभर के हैं उनमें कई सारे मुलकों से बड़ा प्रदेश है उहां के चुनाव की अपनी महत्वा है महत्ता है
07:37उसकी और हो सकता है क्योंकि उत्तर प्रदेश का चुनाव राष्ट्री राजनीति को हमेसा प्रभावित करता है हर वक्त प्रभावित
07:45करता है ना केवल उससे र
08:02तो वो एक इस्थिती है लेकिन आप फिर से हम अगर सिवसेना की तरफ चलें तो मुझे नहीं लगता है
08:11कि यह सर्फ विचारधारा की वज़ा से अभी आए हैं अगर विचारधारा की वज़ा होती तो यह
08:24दो एकनात्स चिंदेजी के साथ आज रही है ये सारी ये जो चोसर का खेल है
08:47ये बिछाया जाता है भारतिय जंता पार्टी के द्वारा इसे संचालित भी किया जाता है भारतिय जंता पार्टी के द्वारा
08:52और अलग-अलग जग होपर अलग-अलग मोहरे होते हैं
08:55जैसे पश्ची मेंगावल के लिए भूपेंदर यादव मोहरे थे, सायोनी घोष मोहरा थी, निशीकांत दुगे मोहरा थे, और काकोली जो
09:04है वो मोहरा थी, रचना बनर जी मोहरा थी, सुधीब बंदोपादाय मोहरा थे, यहाँ पर भी अलग-अलग मोहरे बिछे
09:11होंगे, ल
09:25भारतिय जनता पार्टी के इसका दावर निता में भर-भर के दी है उपर वाले ने, और उसका वो बखुवी
09:32इस्तमाल भी करते हैं, अपनी पार्टी के हित के लिए, अपने सरकार को बचाने और उसे और मजबूत करने के
09:37लिए, हलाकि सरकार पर पिछले 12 सालों में कोई संक
09:52सरकार है केंदर में, हलाकि वो गठबंधन की सरकार है, लेकि सरकार की सेहत पर कभी कोई कमजोरी दिखी नहीं,
09:58कभी कोई प्रशन उठा नहीं, लेकिन फिर भी अगर इस आक्रा मक्ता के साथ, अपने खेमे को मजबूत करने के
10:05लिए भगवाब ब्रिगेड अगर काम कर रहा
10:09है तो मुझे लगता है कि आगे कोई बहुत बड़ी चुनोती है हो सकता है वो UCC भी हो बहुत
10:17सारी
10:17चीजे हैं जो इस सरकार के टुडू लिस्ट में थी बकेट लिस्ट में थी जो कर पाई जैसे धारा
10:25370 का है मामला जैसे राम मंदिर का मामला है हो गया लेकिन अनेक ऐसी चीजे भी है जो इनको
10:32करनी थी और इसलिए इन्हों ने
10:342024 में अब की बार 400 पार का नारा दिया था तब तो 400 पार नहीं हुआ लेकिन अगर 2024
10:43का भूला हुआ
10:442026 में घर आ जाता है तो उसे भूला हुआ नहीं कहेंगे
10:48शायद इनके टार्गेट पर वही 400 पार है अभी भी
10:52बिल्कुल मेरा एक सवाल अभी श्यूसेना यूविटी को लेकर ही है
10:56किशोजी श्यूवें जी आप दों से उसके बाद फिर हम इन सवालों पर भी आगे चलेंगे
10:59कि किंदलों में टूट हो सकती है और इन सारी टूट की पीछे की कहानी इसलिए क्या है
11:04ठाकरे परिवार के बारे में कहा ऐसा जाता था कि भारती रादनीती में थोड़ा अलग तरह करा रादनीतिक परिवार है
11:102019 में आदित ठाकरे वरली से विधानसवा चुनाव लड़ते हैं उससे पहले ठाकरे परिवार के किसी सदस ने
11:15कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा 1966 में शुर से ना बनी थी प्रवोधकन ठाकरे सही हम ले ले ले सीधे
11:21बाला साप ठाकरे फिरुन के बेटे दूसरे भाई के लड़के जो हराज ठाकरे तमाम ऐसे लोग
11:27कहा जाता था कि मातोश्री से ही सब कंट्रोल होता था अगर मातोश्री में बैठक बुलाई जा रही है तो
11:32हर विधायक सांसत का पहुचना जरूरी होता था कोई ना पहुचे ऐसा सवाल भी अकल्पनी है था उस वक्त लेकिन
11:39वही ठाकरे परिवार का दबदबा पिछले पा
11:54है वो जुड़े भी नहीं और जो जुड़े भी उनसे कसम खिलवाई गई अपने बच्चों की किसी देवी मा की
12:01भगवान की और उन्हेंने कसम भी खाली 14 जून की ये बात है आज हम बात करें 17 जून को
12:06और ये लोग सवाई स्पीकर से मिलके शूशेना सिंदेग उठ में ज
12:24कीजिए एक समय ऐसा भी हुआ करता था जब देश के बड़े दिगजनेता हुआ करते थे अटल विहारी वाजपे बड़े
12:33दिगजनेता हुआ करते थे लाद कृष्ण आरवानी तो ये भी बाला सहाब ठाक्रे से मिलने के लिए मुंबई जाया करते
12:39थे आपने कभी येसा स�
12:51सत्ता से उपर रखा था सत्ता की रैट रेस में सत्ता की भागदोर में वो शामिल नहीं थे लेकिन जैसे
12:57ही आपकी महत्वा कांच्छा आपको सत्ता की रेस में ले आती है वैसे ही आप प्रतिदुन्दी हो जाते हैं उससे
13:03पहले वो सनरक्षक थे इसलिए वो उस तरह का रि
13:16कि बावरी विध्वन्स की बात करें तो उसमें तमाम इकाई सामिल थी लेकिन आगे बार कर कौन कह रहा है
13:24कि मेरे शिवस्यानिकों का हाथ नहीं पाऊ है उसमें बिलकुल बाला सहाब ठाकरे कह रहे हैं तो लोग उनकी इस
13:31उसमें कोई इसकाश्रे लेना भी नहीं चाहता था �
13:37अध्वानी जी ने कहा और अध्वारी वाजबे जी का भी काल जाई भाषन है कि कल क्या होगा मुझे नहीं
13:45मालूम तो कोई श्रेन नहीं लेना चाहता था लेकिन इतनी साफ़गोई इसनी अस्पस्टपा के साथ ये कहना कि उसमें हमारे
13:53शिवस्यानिकों का हाथ नहीं पा�
14:02हैं तो कि अमगे उत्तर भाष्तियों से प्रॉब्लें ँपर था सक्ता से अपने आपको उपर भागी दारी सक्ता की लिपसा
14:25हुणने कभी नहीं दिखाए ये हर वक्ति के साथ हर परिवार में भी होता है जब आप
14:30अत्यधिक महत्वा कांग्शी हो जाते हैं जब चाहते हैं कि आपको सारा स्रे मिले सारे पावर आप तक सिमट में
14:36क्या है तब फिर से डिस्ट्रैक्शन होता है फिर वो पावर भागने लगता है उद्धर ठाकरे की राजनीती वहीं पर
14:43आकर के फिशली अगर ये भी अगर वो
14:45सूपर पावर बनना चाहते तो लोग इनको स्विकार कर रहे थे लेकिन जैसे ही ये खुद फुत्र मोह में फसे
14:53सत्ता के लालच में आए फिर ये एक आम शिवशैनिक या फिर एक आम नेता की तरह ही हो गए
14:58शिवशैनिक भी नहीं एक देश में जो आम नेता होता है जो सार
15:13oned the one in the app now
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