00:00उद्धो और आदित ठाकरे की एक आदत ने चार साल में दूसरी बार शिउशेना को तोड़ने पर मजबूर कर दिया
00:06जी हाँ चार साल पहले जब एकना शिंदे शिउशेना से अलग हुए थे बगावत की थी और अपना गुट बनाया
00:14था और उस गुट को शिउशेना की मानता दिलवाई तीर कमानवाला निशान ले लिया पार्टी का नाम भी ले लिया
00:18तब भी शिंदे की वही शिकायत थी जो
00:21अभी छे बागी लोगसभा के सांसदों की हैं दोनों की बातें लगबग एक जैसी हैं एक जैसी शिकायत है और
00:29उस इस आधत को लेकर जिस आधत ने दूसरी बार पार्टी को तुड़वा दिया है महराश्ट के सियासी कर यारों
00:36में चर्चाएं लंबे वक्त से होती आ रही
00:51महाराश्ट के राधनिती में भी कम हो रहा है
00:54मंझे हुए राधनिता नहीं है
00:55ये बाते अक्सर महाराश्ट के 86 गल्या़ों में की जाती रही है
00:59फृब नहीं धाकरे घर में रहना पसंद करते हैं
01:03मातो श्री में बैठ कर ही
01:04वो पूरी party कंट्रोल करना चाहते हैं, सब कुछ वहीं से करना चाहते हैं
01:08उनसे उनकी party के विधायक भी समय समय पर मिल नहीं पाते
01:12उनके फोन किया जाता है, उनके जो निली सच्यू है
01:16वो फोन उठाते हैं, लेकिन वो कहते हैं कि साहव भी
01:19बिजी हैं, वेस्ट हैं, वो आपसे बाद में बात करेंगे
01:22ये शिकायत एकनाशिंदे गुट के लगबख सभी विधायकों की थी, 2022 में
01:27ठीक वैसे शिकायत अभी 6 लोगसवा सांसदों की भी है
01:30उद्धो ठाकरे, उनके बेटे आदित ठाकरे, जो शिउसेना, UBT के मुखियां है, सरवे सरवा है
01:35सारे बड़े फैसले वही लेते हैं, ये दोनों ही मातोश्री यानि ठाकरे परिवार का जो आद्धकारिक निवासस्थान है
01:41बहां से कभी निकलते नहीं, लोगसवा सांसदों को अपने पार्टी की मुखिया से भी मिलने के लिए काफी मशक्कत करनी
01:48पड़ती है
01:48अपनी बात रखने के लिए भी उन्हें काफी जादा जो लगाना पड़ता है
01:52और इसी वज़ा से ये छे लोगसवा के सांसद धीरे धीरे शिंदे गुटवाली शुसेना की करीब होते चले गए और
01:59फिर अब जाकर उन्होंने बगावती रुख भी अपना लिया है
02:02इसकोरे मामले को लेकर ठाकरी परिवार के राधनिती कैसी रही है
02:051966 के बाद से शुसेना के स्थापना के बाद से ही ठाकरी परिवार कैसे राधनिती करता आया है
02:09और 2019 के बाद से कैसे चीजे बदलनी शुरू हो गई जब पहली बार ठाकरी परिवार के सिव्यक्त ने
02:14चुनाव लड़ना चुना और आधित ठाकरी वल्ली से विधानसवा चुनाव लड़ते हैं और विधायक बनते हैं
02:19सब कुछ हमने अपने राधनितिक विश्रिशकों से बात की है
02:22अपने शो में आपको वीडियो दिखाते हैं उससे आपको समझ में आएगा कि आखिर ठाकरी परिवार का ये राधनितिक पतन
02:27कैसे हो रहा है क्यों हो रहा है कौन सी बड़ी वजह है
02:30कि हमेशा उद्धो गुट के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है
02:34टीमसी के साथ चलो हमने माल लिया कि उनके हाँ सत्ता गई और बंगाल के राधनिती ही वैसी है कि
02:39सब लोग सत्ता से चिपके रहना चाहते है
02:40तो वहां पर उनको डर सताया उनके बहुत सारे टीमसी की नेताओं पर जनता बहुत आकुरुशित थी अंडे फेके जाने
02:47लगे तो उन्हें अपनी जनता से डर था
02:48इसलिए उपाला बदलने हैं तमाम और वजाएगी नाई जा रही है लेकिन उद्धो ठाकरे तो सत्ता में रहते हुए पार्टी
02:53तूट गई थी उनकी वो जब मुख्यमंत्री थे और चार साल के बाद फिर से तूट गई इसके पीछे क्या
02:58वजा हो सकती अभी मैं संजनी र
03:16दहा है कुछ अगर आप अपने निताओं से लगातार मिलेंगी नहीं तो वो तो आपकी पार्टी छोडएंगे ही ने देखिये
03:22ये बात कुछ हद तक सही भी है लेकिन क्या इसी फॉर्मूले से क्या आमाधी पार्टी तूटी है इसी फॉर्मूले
03:29से क्या त्रेन मुल कॉं�
03:34अगर आज की राजनीती में देखें तो विचार धारा की राजनीती कमोवेस भर्तिय जन्ता पार्टी ही करती है बांकि किसी
03:41खास करके जो एक शत्रिय दल है उसमें कोई ऐसी विचार धारा जैसी इस्तिती है नहीं कोई एक विचार धारा
03:46को लेकर चलते नहीं है और अगर वि
04:03लेकिन आमादी पार्टी के साथ क्या हुआ उनकी तो ऐसी को विचारधारा नहीं थी और उन्हों ने आप जो भी
04:08विचारधारी थे उससे वो डेविएट नहीं कर रहे थे यही इस्तिती तमिल माफ करें यह टीमसी की थी परसी मंगाल
04:14में वहाँ पर भी वो डेविएट नहीं
04:30था और देखिए इस बदलाव की पूरी पटकथा को उन्होंने किस तरह से बदला है पहले कहा जा रहा था
04:42कि
04:42के जो लोग सभासांसत थे वो चाह रहे थे कि जैसे शिवसेना का अलग गुट बन गया उसी तरह उनके
04:49साथ टीम सी का निसान और उनका नाम रहे लेकिन सायोनी घोष्ट चाहती थी कि टीम सी की कोई छाया
04:55भी ने गुट पर ना रहे बिल्कुने एंसी पी आई जैसी पार्ट
05:09जैसे जनता पार्टी में तासर नहीं क्यों होगा जब सायोनी घोष्ट आ सकती है संजे राउत का तो ऐसा हाड
05:14लाइन भी नहीं रहा है जिस तरह से यह आखों में मदीना और हिर्दय में कावा क्या कह रही थी
05:20और देखिए अब आसानी से भार्तिय जनता पार्टी के पाले
05:22कि अब सवाल है कि सायोनी घोष्ट क्यों आई है क्या उनका हिर्दे परिवर्टन हो गया ओर हिंदुतों का तिवर
05:36प्रवाह शुरू हो गया आप जाई ये दोहजार बाइस के पस्चिम महेंगाल शिक्छक भरती घोटाला कि फाइल देखिये
05:45उसमें सायोनी घोश्य भी पूछताच की गई थी
05:47क्या ये डर है? हो सकता है
05:52आखिर अजित पवार 24 गंटे के अंदर पाला बदल के वापस NCP में चले जाते हैं
05:58आते हैं भारते जनता पाटी के साथ सरकार बनाते हैं
06:01उपमुख मंतरी बनते हैं और इन पर केस क्लोज हो जाता है
06:05और अगले दिन वे वापस से ले जाते हैं NCP में
06:09बिल्कुल
06:09आखिर क्या वज़य होती है? विचारधारा से लोग क्यों समझोता कर रहे हैं?
06:14उसकी वज़य भी होनी चाहिए
06:16विचारधारा वाली इस्थिति नहीं है
06:19दूसरी बात भारती जन्ता पार्टी
06:21एक वो पार्टी थी संसद में इसके प्रधान मंतरी कहा करते थे
06:25कि ऐसे इस तरीके से अगर सत्ता मिलती है
06:31तो उस सत्ता को मैं चिमीटे से भी चुना पसंद नहीं करूँगा
06:34अब तो ये है कि सत्ता किसी तरह मिलती है के मूल सत्ता नहीं
06:39मिश्कंटक सत्ता ळेकिन जब BJP के नेता इस तरह के बयान देते थे
06:45अटल ब्यारीवाजपे कि आप बात करें थे कि चिम्टे से छोना पसंद नहीं करूंगा
06:49तब बीजेपी कभी दोसों के पार पहुझ भी नहीं पाई थी लोगसभा में 182 उनका सबसे हाइस नंबर था लोगसभा
06:55में लेकिन जब मोदी की वीजेपी आई तो पहली बार में है इनको लोगसभा में पहुमत मिल गया वो ठीक
07:02है लेकिन देखें किस तरह से विचारधारा
07:04में उहां भी गिरावट आई है अभी इनके लिए लक्ष इनका महतवपूर्ण है राष्टा कोई भी हो अभी इनके लक्ष
07:12के सामने जो चीजे हैं हम उसकी बात पहले कर चुके हैं कई नई चीजे उसमें और होंगी हमारे सहयोगी
07:18है शिवेंद्र जी वो कह रहे थे कि उतर
07:31अभर के हैं उनमें कई सारे मुलकों से बड़ा प्रदेश है उहां के चुनाव की अपनी महत्वा है महत्ता है
07:37उसकी और हो सकता है क्योंकि उत्तर प्रदेश का चुनाव राष्ट्री राजनीति को हमेसा प्रभावित करता है हर वक्त प्रभावित
07:45करता है ना केवल उससे र
08:02तो वो एक इस्थिती है लेकिन आप फिर से हम अगर सिवसेना की तरफ चलें तो मुझे नहीं लगता है
08:11कि यह सर्फ विचारधारा की वज़ा से अभी आए हैं अगर विचारधारा की वज़ा होती तो यह
08:24दो एकनात्स चिंदेजी के साथ आज रही है ये सारी ये जो चोसर का खेल है
08:47ये बिछाया जाता है भारतिय जंता पार्टी के द्वारा इसे संचालित भी किया जाता है भारतिय जंता पार्टी के द्वारा
08:52और अलग-अलग जग होपर अलग-अलग मोहरे होते हैं
08:55जैसे पश्ची मेंगावल के लिए भूपेंदर यादव मोहरे थे, सायोनी घोष मोहरा थी, निशीकांत दुगे मोहरा थे, और काकोली जो
09:04है वो मोहरा थी, रचना बनर जी मोहरा थी, सुधीब बंदोपादाय मोहरा थे, यहाँ पर भी अलग-अलग मोहरे बिछे
09:11होंगे, ल
09:25भारतिय जनता पार्टी के इसका दावर निता में भर-भर के दी है उपर वाले ने, और उसका वो बखुवी
09:32इस्तमाल भी करते हैं, अपनी पार्टी के हित के लिए, अपने सरकार को बचाने और उसे और मजबूत करने के
09:37लिए, हलाकि सरकार पर पिछले 12 सालों में कोई संक
09:52सरकार है केंदर में, हलाकि वो गठबंधन की सरकार है, लेकि सरकार की सेहत पर कभी कोई कमजोरी दिखी नहीं,
09:58कभी कोई प्रशन उठा नहीं, लेकिन फिर भी अगर इस आक्रा मक्ता के साथ, अपने खेमे को मजबूत करने के
10:05लिए भगवाब ब्रिगेड अगर काम कर रहा
10:09है तो मुझे लगता है कि आगे कोई बहुत बड़ी चुनोती है हो सकता है वो UCC भी हो बहुत
10:17सारी
10:17चीजे हैं जो इस सरकार के टुडू लिस्ट में थी बकेट लिस्ट में थी जो कर पाई जैसे धारा
10:25370 का है मामला जैसे राम मंदिर का मामला है हो गया लेकिन अनेक ऐसी चीजे भी है जो इनको
10:32करनी थी और इसलिए इन्हों ने
10:342024 में अब की बार 400 पार का नारा दिया था तब तो 400 पार नहीं हुआ लेकिन अगर 2024
10:43का भूला हुआ
10:442026 में घर आ जाता है तो उसे भूला हुआ नहीं कहेंगे
10:48शायद इनके टार्गेट पर वही 400 पार है अभी भी
10:52बिल्कुल मेरा एक सवाल अभी श्यूसेना यूविटी को लेकर ही है
10:56किशोजी श्यूवें जी आप दों से उसके बाद फिर हम इन सवालों पर भी आगे चलेंगे
10:59कि किंदलों में टूट हो सकती है और इन सारी टूट की पीछे की कहानी इसलिए क्या है
11:04ठाकरे परिवार के बारे में कहा ऐसा जाता था कि भारती रादनीती में थोड़ा अलग तरह करा रादनीतिक परिवार है
11:102019 में आदित ठाकरे वरली से विधानसवा चुनाव लड़ते हैं उससे पहले ठाकरे परिवार के किसी सदस ने
11:15कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा 1966 में शुर से ना बनी थी प्रवोधकन ठाकरे सही हम ले ले ले सीधे
11:21बाला साप ठाकरे फिरुन के बेटे दूसरे भाई के लड़के जो हराज ठाकरे तमाम ऐसे लोग
11:27कहा जाता था कि मातोश्री से ही सब कंट्रोल होता था अगर मातोश्री में बैठक बुलाई जा रही है तो
11:32हर विधायक सांसत का पहुचना जरूरी होता था कोई ना पहुचे ऐसा सवाल भी अकल्पनी है था उस वक्त लेकिन
11:39वही ठाकरे परिवार का दबदबा पिछले पा
11:54है वो जुड़े भी नहीं और जो जुड़े भी उनसे कसम खिलवाई गई अपने बच्चों की किसी देवी मा की
12:01भगवान की और उन्हेंने कसम भी खाली 14 जून की ये बात है आज हम बात करें 17 जून को
12:06और ये लोग सवाई स्पीकर से मिलके शूशेना सिंदेग उठ में ज
12:24कीजिए एक समय ऐसा भी हुआ करता था जब देश के बड़े दिगजनेता हुआ करते थे अटल विहारी वाजपे बड़े
12:33दिगजनेता हुआ करते थे लाद कृष्ण आरवानी तो ये भी बाला सहाब ठाक्रे से मिलने के लिए मुंबई जाया करते
12:39थे आपने कभी येसा स�
12:51सत्ता से उपर रखा था सत्ता की रैट रेस में सत्ता की भागदोर में वो शामिल नहीं थे लेकिन जैसे
12:57ही आपकी महत्वा कांच्छा आपको सत्ता की रेस में ले आती है वैसे ही आप प्रतिदुन्दी हो जाते हैं उससे
13:03पहले वो सनरक्षक थे इसलिए वो उस तरह का रि
13:16कि बावरी विध्वन्स की बात करें तो उसमें तमाम इकाई सामिल थी लेकिन आगे बार कर कौन कह रहा है
13:24कि मेरे शिवस्यानिकों का हाथ नहीं पाऊ है उसमें बिलकुल बाला सहाब ठाकरे कह रहे हैं तो लोग उनकी इस
13:31उसमें कोई इसकाश्रे लेना भी नहीं चाहता था �
13:37अध्वानी जी ने कहा और अध्वारी वाजबे जी का भी काल जाई भाषन है कि कल क्या होगा मुझे नहीं
13:45मालूम तो कोई श्रेन नहीं लेना चाहता था लेकिन इतनी साफ़गोई इसनी अस्पस्टपा के साथ ये कहना कि उसमें हमारे
13:53शिवस्यानिकों का हाथ नहीं पा�
14:02हैं तो कि अमगे उत्तर भाष्तियों से प्रॉब्लें ँपर था सक्ता से अपने आपको उपर भागी दारी सक्ता की लिपसा
14:25हुणने कभी नहीं दिखाए ये हर वक्ति के साथ हर परिवार में भी होता है जब आप
14:30अत्यधिक महत्वा कांग्शी हो जाते हैं जब चाहते हैं कि आपको सारा स्रे मिले सारे पावर आप तक सिमट में
14:36क्या है तब फिर से डिस्ट्रैक्शन होता है फिर वो पावर भागने लगता है उद्धर ठाकरे की राजनीती वहीं पर
14:43आकर के फिशली अगर ये भी अगर वो
14:45सूपर पावर बनना चाहते तो लोग इनको स्विकार कर रहे थे लेकिन जैसे ही ये खुद फुत्र मोह में फसे
14:53सत्ता के लालच में आए फिर ये एक आम शिवशैनिक या फिर एक आम नेता की तरह ही हो गए
14:58शिवशैनिक भी नहीं एक देश में जो आम नेता होता है जो सार
15:13oned the one in the app now
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